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-: जल जो न होता तो ये जग जाता जल :-

>> 22 मई, 2010

"जल जो न होता तो ये जग जाता जल"


चांदी सा चमकता ये नदिया का पानी , पानी की हर बूंद देती जिंदगानी !
अम्बर से बरसे जमीन पर मिले , नीर के बिना तो भैय्या काम ना चले !
ओ मेघा रे..........
जल जो न होता तो ये जग जाता जल, गीत गाता चल ओ साथी गुनगुनाता चल !


फिल्म "गीत गाता चल" के इस गीत के गायक श्री जशपाल सिंह को वर्ष 1975 में यह एहसास हो गया था कि 2010 आते आते हम कितने जल संकट से घिर जायेंगे। आज चारों तरफ जल संकट को लेकर चर्चाओं का दौर चल रहा है तब इस गीत के भावार्थ को समझना प्रासंगिक हो गया है। आम आदमी से लेकर सत्ता के शिखर पर बैठे सभी लोग जल संकट की चिंता में डूबे हैं। आज समूचा विश्व जल संकट से जूझ रहा है यहां तक कि भारत जैसे वनाच्छादित देश भी इससे अछूते नहीं हैं। हिम नदियां पिघल रही हैं, गंगोत्री पिघलकर प्रतिवर्ष 20 मीटर पीछे खिसक रही है। भारत-बांग्लादेश के मध्य स्थित विवादित द्वीप 'न्यू-मूर' जो 9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला था, पूरी तरह समुद्र में समा गया है। 1954 के आंकड़ों के अनुसार यह समु्रद तल से 2-3 मीटर ऊंचाई पर था। सुंदरवन के अनेक द्वीपों का अस्तित्व खतरे में पड ग़या है। भारत की सीमा से लगे बंग्लादेश में कई क्षेत्रों के डूबने से प्रभावित लोग भारत में शरण ले सकते हैं। हमें याद है कि अक्टूबर 2009 में मालद्वीप को डूबने से बचाने के लिए वहां के राष्ट्रपति ने समुद्र के अंदर मंत्रिमंडल की बैठक करनी पड़ी थी। सदियों तक बाढ़, सूखा एवं अकाल के कारण जनता को जलसंकट एवं अन्न संकट से जूझना पड़ेगा। देश में गरीबी, बेकारी एवं भुखमरी की स्थिति निर्मित हो जाएगी। चारों तरफ डायरिया, मलेरिया एवं डेंगू जैसी घातक बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाएगा। लगातार सूखे के कारण मैदानी इलाकों से महापलायन होगा। दिल्ली, बंगलोर, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे, रायपुर, भोपाल एवं इंदौर जैसे शहरों में जनसंख्या का दबाव बढ़ने से इन शहरों की आधारभूत सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था चरमरा जाएगी। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2050 तक 20 से 30 प्रतिशत के तक पौधे तथा जानवरों की प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी। वर्तमान में प्रति व्यक्ति पानी की खपत 1820 क्यूबिक मीटर है जो 2050 में घटकर 1140 क्यूबिक मीटर हो जायेगी। दरअसल यह दुष्परिणाम कोयला एवं तेल आधारित संयंत्रों के बेतहाशा इस्तेमाल के कारण हो रहा है। ए.डी.बी. की एक रिर्पोट के अनुसार आगामी 25 वर्षों में एशिया में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन तीन गुणा बढ़ जाएगा। सूर्य की हानिकारक पराबैगनी किरणों से मानव जगत को होने वाली क्षति का हम सहज ही अनुमान लगा सकते हैं। यदि इस तथ्य पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वर्ष 2050 तक दुनिया का तापमान 2 सेल्सियस बढ़ जाएगा तथा जलवायु परिवर्तन की गति बढ़ जाएगी। इस बदलाव के साथ प्राणी एवं वनस्पति जगत को सामंजस्य बैठा पाना मुश्किल होगा। यदि समय रहते उपाय सोचे जाएं तो इस भयावह संकट से उबरा जा सकता है। केवल चर्चा एवं चिंता से कुछ नहीं होगा, बल्कि इसके लिए हमें व्यावहारिक रुख अपनाना होगा। क्योंकि पृथ्वी के बढ़ते तापमान के लिए मनुष्य और केवल मनुष्य ही जिम्मेदार है। अत: मनुष्य को ही इसका उपाय ढूढ़ना होगा। आने वाले समय में वैकल्पिक उर्जा स्रोतों का प्रचलन बढ़ाना होगा। उर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के रूप में पवन उर्जा, सौर उर्जा एवं जैविक उर्जा का उपयोग कर के वातावरण में कार्बन डाइऑक्साईड की मात्रा को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही कृषि व वन क्षेत्र में नई तकनीक का उपयोग कर हम इस संकट से उबर सकते हैं। आने वाले समय में कम बिजली खपत करने वाले लाईटिंग उपकरण तथा कम ईंधन से चलने वाली गाड़ियों का इस्तेमाल करना लाजिमी हो गया है। शासन स्तर पर भी तेजी से प्रयास करना होगा। विश्व की कुल आय का मात्र तीन प्रतिशत भी यदि जलवायु परिवर्तन की रोकथाम के लिए खर्च किया जाय तो वर्ष 2030 तक तापमान वृध्दि को 2 सेल्सियस तक रोका जा सकता है। छत्तीसगढ़ में इस गंभीर समस्या से निबटने के लिए शासन जल संरक्षण महा अभियान चला रही है। इस महाभियान के माध्यम से पेयजल, निस्तारी जल एवं सिंचाई जल के स्रोतों में वृध्दि का उपाय ढूंढा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह इस महाअभियान में स्वयं रुचि ले रहे हैं। उन्होंने वर्षा के जल को संग्रहित करने का प्लान बनाया है। छत्तीसगढ़ शासन का महाभियान अनुकरणीय है।

7 टिप्पणियाँ:

Rajat Yadav 23 मई 2010 को 11:09 pm  

हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

शुभकामनाएं !


"टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

Rajat Yadav 23 मई 2010 को 11:09 pm  

आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

पंकज कुमार झा. 24 मई 2010 को 1:56 pm  

बहुत बधाई आपको....नेट की इस नयी दुनिया में शामिल होने के लिए...उम्मीद है इस पर रोजाना कुछ नए विचार पढ़ने का मौका मिलेगा. राजनीति की रपटीली राहों पर चलते हुए भी मद्य निषेध, पानी एवं अन्य सामजिक सरोकारों से भी आपका इस तरह रोजाना जुड़े रहना सराहना योग्य है. मेरी शुभकामना एवं बधाई.
पंकज झा.

Jayram Viplav 31 मई 2010 को 5:04 pm  

" बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये
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ब्लॉ.ललित शर्मा 31 मई 2010 को 8:48 pm  

ब्लाग जगत में स्वागत है,
आशा है कि आप अपने लेखन से ब्लाग जगत को समृध्द करेंगे।

शुभकामनाएं

अजय कुमार 13 जून 2010 को 1:46 pm  

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

खबरों की दुनियाँ 19 जून 2010 को 9:06 pm  

भाई जी
ब्लॉग अच्छा लगा । बधाई
आशुतोष मिश्र
http://khabaronkiduniyaraipur.blogspot.com/

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