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>> 14 जून, 2010

===  नवां अंजोर ===

गोकुल जईसे ह़र गाँव,
जिंहाँ ममता के छाँव !
सुन्दर निर्मल तरिया नरूवा,
सुग्घर राखबो गली खोर ,
तब्भे आही नवां अंजोर !

हर खेत खार में पानी ,
जिंहाँ मेहनत करे जवानी !
लहलहाए जब फसल धान के,
चले किसान तब सीना तान के !
घर घर में नाचे चितचोर ,
तब्भे आही नवां अन्जोर !!

(छत्तीसगढ़ी कविता)

- अशोक बजाज रायपुर

3 टिप्पणियाँ:

indli 14 जून 2010 को 11:50 pm  

नमस्ते,

आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

ललित शर्मा 19 जून 2010 को 8:09 pm  

बने लिखे हस गा

जोहार ले

girish pankaj 24 जून 2010 को 12:36 am  

achchhi koshish hai bhai. badhaai. aap aaye bahaar aayee. yanee ki bheetar kaa dabaa huaa patrakaar aakhir bahar aaa hi gayaa..? achchha hai.

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