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माँ

>> 26 जून, 2010

माँ

जो मस्ती आँखों में है,

मदिरालय में नहीं ;

अमीरी दिल की कोई,

                                                   महालय में नहीं ;

शीतलता पाने के लिए

कहाँ भटकता है मानव ;

जो माँ की गोद में है
वह हिमालय में नहीं ;

-(अज्ञात)

6 टिप्पणियाँ:

निर्मला कपिला 27 जून 2010 को 8:10 am  

जो माँ की गोद में है

वह हिमालय में नहीं ;
बहुत अच्छी लगी रचना बधाई।

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari 27 जून 2010 को 8:32 am  

माँ को याद दिलाने के लिए धन्‍यवाद भाई साहब.

खबरों की दुनियाँ 27 जून 2010 को 9:57 am  

माँ को याद रखना ,उसकी ममता को याद रखना ,
उसकी महत्ता को याद रखना । यह सौभाग्यशाली होने का प्रतीक है । यह कलयुग है मेरे भाई , फ़िर भी माँ याद आई ? नसीब अच्छे हैं ,बधाई ।
-आशुतोष मिश्र ,रायपुर

ललित शर्मा 30 जून 2010 को 1:24 pm  

भाई साहब,
24तारीख को स्थानीय कन्या हायर सेकेन्डरी स्कूल में गया था, वहां पर साईंस सब्जेक्ट (फ़िजिक्स, केमेस्ट्री,मैथमैटिक,बायो) इत्यादि का एक भी लेक्चरर नहीं है। ऐसे में वहां किस तरह पढाई शुरु होगी यह चिंतनीय है।

अगर आपसे व्यवस्था हो सकती है तो बालकों एवं पालकों के हित में करने का कष्ट करें। गत वर्ष भी यही स्थिति थी।

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