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सावन की झड़ी

>> 27 जुलाई, 2010

                                     सावन की झड़ी


सावन की झड़ी आज भी दिन भर लगी रही ;अभी रात १२.२६ बजे जब मै यह पोस्ट लिख रहा हूँ ,बारिस का क्रम जारी है .नदी नाले उफान पर है .शाम को महासमुंद से लौटते वक्त छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी नदी महानदी में जलस्तर को बढ़ते देखा .झुग्गियों एवं निचली बस्तियों में बुरा हाल है .अब बरसात को कुछ दिनों के लिए थम जाना चाहिए अन्यथा जान-मॉल की हानि हो सकती है .साधना न्यूज चैनल के द्वितीय वर्ष गांठ पर आयोजित कविसम्मेलन से अभी अभी लौटा हूँ .बड़े नामी कविवर उपस्थित थे लेकिन श्रोताओ का अकाल पड़ा हुआ था.श्रोताओ की छ्निं उपस्थिति का मलाल आयोजको को तो था ही कवियों की वेदना से भी समझ आ रहा था लेकिन अतिविष्टि से प्रभावित लोगों की वेदना को कौन समझेगा?


       दिनांक - 26-07-2010          फोटो - हरिभूमि रायपुर   

2 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा 27 जुलाई 2010 को 1:41 am  

अति वृष्टि में कवियों को मलाल हो गया।
आयोजन में श्रोताओं का अकाल हो गया॥

उपर वाला जब देता है।
तो छ्प्पर फ़ोड़ देता है।

जानकारी के लिए
शुभकामनाएं

Udan Tashtari 27 जुलाई 2010 को 5:36 am  

अब कवि सम्मेलन पर तो मौसम का असर पड़ना ही है..कोई एक ही बरसे तो ठीक...कवि या आसमान...वैसे दोनों में भीगना श्रोताओं को ही है. :)

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