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दुनिया भोग से अब योग की ओर

>> 07 अक्तूबर, 2010


भारत में मन की शांति के लिए प्रचलित योग अब दुनिया की दूरी नाप रहा है. अमेरिका और यूरोप सहित दुनिया के तमाम हिस्सों में सेलिब्रिटीज से लेकर आम आदमी को भी योग लुभा रहा है. हो भी क्यों न, सुकून सबकी जरूरत है.

मौजूदा दौर की भागमभाग भरी जिंदगी में दिमागी तनाव दुनिया भर में बड़ी समस्या बन कर उभरा है. तनाव से घिरे दिमाग को सुकून देने के लिए भारत में सदियों पहले योग का इजाद किया गया. ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में योग भी भारत से बाहर निकल कर दुनिया भर के लोगों को खूब भा रहा है.

हर उम्र और हर तबके के लोग योग को दिमागी तनाव दूर भगाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. सेलिब्रिटीज से लेकर आम आदमी और बूढ़ों से लेकर नवजात बच्चे योग की शरण में हैं. हॉलीवुड मूवी ईट, प्रे, लव में योग करती जूलिया रॉबर्टस इसकी सबसे बड़ी बानगी हैं. अमेरिका और यूरोप सहित तमाम देशों में बूढे, जवान और बच्चों से लेकर मॉर्डन लाइफस्टाइल वाले ऐसे लोग भी योग करते दिख जाएंगे जिनके लिए रात के 12 बजे दिन निकलता है और सुबह के 6 बजे शाम होती है.


हालांकि योग को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने के पाछे बाजारवादी ताकतों की अहम भूमिका को नजरंदाज नहीं किया जा सकता. इसी का नतीजा है कि जन्म लेने के साथ ही बच्चे के लिए भी अब योग क्लास मौजूद है. अमेरिका के बाद अब जर्मनी में भी बेबी योग अपने पैर पसार रहा है.

बर्लिन में बेबी योग क्लास चलाने वाली कात्या कुनिपात्ज बताती हैं कि लोग अभी इस बारे में ज्यादा तो नहीं जानते लेकिन वे जानने को उत्सुक जरूर हैं. कात्या बताती हैं कि इसमें बच्चे को ओम कहना नहीं सिखाया जाता, बल्कि बच्चे और माता पिता के बीच रिश्ते को मजबूत किया जाता है. यह दोनों के लिए फायदेमंद होता है. एक तरफ मसाज और योग क्रियाओं से बच्चे के शरीर को फायदा होता है वहीं मां के शरीर को प्रसव के बाद आराम भी मिलता है.

इसी तरह युवाओं को तमाम तरह योगासनों के जरिए शरीर को तनाव और से दर्द से निजात दिला या जाता है. क्लास या ऑफिस में गलत तरीके से बैठने के कारण पीठ और गर्दन में दर्द से परेशान नौजवान योग का खूब सहारा ले रहे हैं.

मजे की बात यह है कि योग को अब हेल्थ इंश्योरेंस में भी जगह मिल गई है. हालांकि बेबी योगा को मेडिकल सांइस से मान्यता न मिलने के कारण अभी डॉक्टर मरीजों को इसकी शरण में जाने की सलाह नहीं दे पा रहे हैं. जर्मनी में बाल रोग चिकित्सक संगठन के प्रमुख स्टीफन एस्सर कहते है कि वैज्ञानिक तौर पर योग के नवजात बच्चों के लिए फायदेमंद होने की बात अभी तक साबित नहीं हुई है. इसलिए डॉक्टर इसके बारे में मरीजों को कोई सलाह नहीं देते हैं.

वहीं जर्मनी में योगा टीचर एसोसिएशन के प्रमुख डॉरिस हाफनर कहते है कि योग की दिनों दिन बढ़ती लोकप्रियता अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसका लाभ उठाने वालों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है. इसके एक जनांदोलन की शक्ल अख्तियार करने के पीछे सबसे बड़ा कारण योग के नित नए तरीकों का इजाद होना है. यही वजह है कि मेडोना, जेनिफर एनिस्टन और रुपहले पर्दे के जेम्स बॉंड डेनियल क्रेग भी योग को चाहने वालों की कतार में हैं.dw news 00652





9 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा 8 अक्तूबर 2010 को 7:15 am  

योगस्चित्तवृत्ति निरोध:-- योग करो स्वस्थ रहो।

लेकिन आलस योग के रास्ते में बहुत बड़ी बाधा है।

इसे त्यागना अत्यावश्यक है।

कोशिश करता हूँ।

आभार

Swarajya karun 8 अक्तूबर 2010 को 8:49 am  

उपयोगी और लाभदायक प्रस्तुति के लिए आभार .

'उदय' 8 अक्तूबर 2010 को 9:02 am  

... प्रसंशनीय पोस्ट!

Babli 8 अक्तूबर 2010 को 2:46 pm  

बहुत ही बढ़िया और महत्वपूर्ण पोस्ट! उम्दा प्रस्तुती!

hem pandey 8 अक्तूबर 2010 को 8:35 pm  

योग भारत की उपज है और अब जब दुनिया इसका लाभ उठा रही है, तो हमारे ही देश में ऐसे बहुत से लोग मिल जायेंगे जो योग के विरोधी हैं, क्योंकि उन्हें भारत की विरासत से चिढ है |

खबरों की दुनियाँ 8 अक्तूबर 2010 को 9:19 pm  

अच्छी पोस्ट । बधाई । शुभ नवरात्रि । माता सबके मंगल काज पूर्ण करें । "खबरों की दुनियाँ"

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari 8 अक्तूबर 2010 को 11:12 pm  

जगदगुरू भारत.

आलेख के लिए धन्‍यवाद भईया.

राम त्यागी 9 अक्तूबर 2010 को 8:15 am  

योग तो एक वरदान है !!

प्रवीण पाण्डेय 9 अक्तूबर 2010 को 12:44 pm  

अन्ततः योग अपना स्थान पा जायेगा।

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