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सचिन का डंका

>> 11 अक्तूबर, 2010

छठी डबल सेंचुरी से केवल 9 रन दूर

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट में सचिन तेंदुलकर  का बल्ला खूब बरस रहा है। तीसरे दिन का खेल खत्म होने पर सचिन 191  रन और धोनी 11 रन बना कर डटे हुए हैं। तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने 5 विकेट पर 435 रन बनाए।
सचिन अपने छठी डबल सेंचुरी से केवल 9 रन दूर हैं। मास्टर ब्लास्टर सचिन  तेंदुलकर  ने अपनी 49वीं सेंचुरी बनाई। सचिन ने छक्के के साथ अपनी सेंचुरी पूरी की। मुरली विजय 139  रन बनाकर आउट हुए। उनके बाद बल्लेबाजी करने आए चेतेश्वर पुजारा भी 4  रन ही बना सके। पुजारा के बाद आए रैना भी 32  रन बना कर क्लार्क की गेंद पर हिलफेनहॉस द्वारा लपके गए।
इससे पहले दूसरे दिन के स्कोर दो विकेट पर 128  रन से आगे खेलते हुए सचिन और विजय ने तीसरे दिन पूरी सूझबूझ से पारी को आगे बढ़ाया। इस बीच सचिन ने अपने टेस्ट करियर की 58  वीं हाफ सेंचुरी लगाई। इसके बाद विजय ने अपने करियर की तीसरी हाफ सेंचुरी जड़ी ।
 वैसे दूसरे दिन भारतीय टीम ने वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ का विकेट जल्द ही खो दिया था। सहवाग 28 गेंदों पर 30  रन बनाकर आउट हुए जबकि द्रविड़ एक रन बनाकर जानसन का शिकार बन गए। इसके बाद सचिन ने विजय के साथ मिलकर पारी को संकट से उबारा। इस बीच मास्टर ब्लास्टर ने टेस्ट मैचों में अपने 14,000  रन भी पूरे किए। यह मुकाम हासिल करने वाले वह दुनिया इकलौते बल्लेबाज हैं। 00419


8 टिप्पणियाँ:

महेन्द्र मिश्र 11 अक्तूबर 2010 को 9:53 pm  

आप तो बड़े क्रिकेट प्रेमी दिखते हैं .. बढ़िया खबर दी है आपने .. कल तो छटवी डबल सेचुरी का जोरदार डंका बजेगा.... आभार

कुमार राधारमण 12 अक्तूबर 2010 को 12:05 am  

अक्सर देखा गया है कि बड़ी नाबाद पारी खेलने के अगले दिन खिलाड़ी पहले घंटे में ही आउट हो जाता है। आइए,कामना करें कि सचिन अपना दुहरा शतक हर हाल में पूरा कर लें।

शिक्षामित्र 12 अक्तूबर 2010 को 12:08 am  

सचिन को अग्रिम शुभकामनाएँ।

अशोक बजाज 12 अक्तूबर 2010 को 12:12 am  

मेरी भी शुभकामनाएं है कि सचिन आपना 6 वां दुहरा शतक बनाने में कामयाब हो जाय .

'उदय' 12 अक्तूबर 2010 को 7:05 am  

.. bahut sundar ... shubhakaamanaayen !

राज भाटिय़ा 12 अक्तूबर 2010 को 1:15 pm  

बहुत सुंदर लेख, वेसे तो मुझे इस क्रिकेट मे कोई रुचि नही,लेकिन के लेख को पढ कर एक सवाल मन मे जागा कि यह शेर सिर्फ़ घर मे ही हे, बाहर से तो हमेशा बुरी तरह हार कर ही आते हे, कभी तो जीते....हर बार पिट कर आने वाला शेर :)

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