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786 का नोट और पनवाड़ी के शौंक की चर्चा इन दिनों बी.बी.सी. हिंदी में...

>> 14 नवंबर, 2010

जागेश्वर अपने ग्राहकों के बीच
 काफ़ी लोकप्रिय हो गए हैं
       छत्तीसगढ़ के एक गाँव में रहने वाले पनवाड़ी (  पान दूकानदार )  के शौंक की चर्चा इन दिनों बी.बी.सी.  हिंदी के माध्यम से पूरी दुनिया में हो रही है .दरअसल राजनांदगांव के जागेश्वर राम यादव को 786 नंबर वाले नोट संकलित करने का शौंक चढ़ा हुआ .उसके इस शौंक का पता जब बी.बी.सी.हिंदी के स्थानीय संवाददाता श्री सलमान रावी को चला तो उन्होंने पूरी रपट ही छाप दी .पढ़िए रपट ................


   बटुए में 786 का नोट और बुलंद हौसला


जागेश्वर इन नोटों की
प्रदर्शनी लगाएँगे


                 शौक़ कई तरह के होते हैं. किसी को सिक्के इकठ्ठा करने का शौक़ तो किसी को माचिस के डिब्बे इकठ्ठा करने का शौक़.  देश विदेश के डाक टिकट इकठ्ठा करना तो बहुत पुराने शौक़ में शुमार है.
          भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में 786 का नंबर बड़ा शुभ माना जाता है. ट्रकों और बसों में यह प्रमुखता के साथ सामने लिखा हुआ होता है या फिर दुकानों के सामने बोर्ड पर.

            बॉलीवुड की कई फिल्मों में भी 786 वाले अंक से जुड़े कई यादगार सीन अब भी लोगों के ज़हन में हैं. ख़ास तौर पर बड़े परदे के सुपर स्टार अमिताभ बच्चन की फिल्म ज़ंजीर और कुली में उन्होंने 786 नंबर के बिल्ले वाले कुली की भूमिका निभाई. दोनों ही फिल्मों में बड़े नाटकीय ढंग से उस 786 नंबर के बिल्ले नें हीरो की कई बार जान बचाई.

        हालांकि इस अंक से जुडी कोई ठोस धार्मिक मान्यता नहीं है, लेकिन लोग इसे शुभ मानते हैं. इसे शुभ मानने वालों में सभी समुदाय के लोग हैं.

           छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के जागेश्वर राम यादव को 786 अंक के नोट संजोने का शौक है. पिछले तीन सालों में जागेश्वर ने आठ से दस हज़ार रूपए ऐसे नोटों के इकट्ठे किये हैं जिनका आखिरी अंक 786 हो. इन नोटों में पांच रूपए से लेकर एक हज़ार रूपए तक के नोट हैं.

            जागेश्वर फिलहाल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित विधायक आवास में कैंटीन चलाते हैं.  जागेश्वर कहते हैं,  "मेरे ही गाँव के शेख ज़ीज़ हमेशा कहते थे कि जागेश्वर तुम कैंटीन चलाते हो. सुबह से शाम तक बहुत लोग आते होंगे. अगर 786 अंक वाले नोट मिलें तो मेरे लिए रख देना. मैं तुमसे ले लूँगा."

भाग्यशाली नोट -
                बस शेख अज़ीज़ के कहने पर उन्होंने 786 अंक वाले नोटों को इकठ्ठा करना शुरू कर दिया.कुछ ही दिनों में शेख अज़ीज़ की मृत्यु हो गई."लेकिन इसी दौरान मुझे इन नोटों को जमा करने में मेरी रूचि जाग गई."
              अब अपनी कैंटीन में और बाज़ार में जागेश्वर के दिमाग में सिर्फ एक ही बात रहती है. उनकी आँखें एक ही चीज़ ढूढती हैं. और वह है 786 अंक वाले नोट.
                वह कहते हैं: "मुझे पता नहीं कि इसके पीछे क्या मान्यता है लेकिन यह मेरे लिए भाग्यशाली है. उसी तरह से जिस तरह अमिताभ बच्चन के लिए ज़ंजीर और कुली फिल्म में साबित हुआ था".
सलमान रावी
बीबीसी संवाददाता, रायपुर

             "सिर्फ घर ही नहीं मेरे बटुए में भी एक नोट तो 786 अंक वाला हमेशा रहता है.  लेकिन जबसे मेरे पास यह नोट हैं मेरी स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर हुई है. अब इन नोटों के सहारे मैं दूसरे व्यवसाय में भी अपनी किस्मत आज़माना चाहता हूँ."
             जागेश्वर के इस शौक नें उन्हें अपने ग्राहकों में काफी लोकप्रिय बना दिया है.  अब तो उनके जाननेवालों के पास अगर कोई 786 अंक वाला नोट आता है तो वह उसे जागेश्वर को लाकर दे देते हैं.
            जागेश्वर का कहना है कि कुछ सालों के बाद वह इन नोटों कि प्रदर्शनी लगाएँगे. BBC

10 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा 14 नवंबर 2010 को 12:56 am  

खूब खबर, अच्छी खबर

अशोक बजाज 14 नवंबर 2010 को 12:59 am  

@ श्री ललित शर्मा जी ,
कुछ 786 वाले नोंटों का जुगाड़ है ना ?

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari 14 नवंबर 2010 को 8:44 am  

अहा, चाय दुकान चलाने वालों का हौसला बुलंद ही होता है इसीलिये हमारे शरद कोकाश जी भी इस धंधे को आजमाने में लगे हैं।
:)

जागेश्‍वर भाई के संबंध में जानकारी देने के लिए धन्‍यवाद भईया.

'उदय' 14 नवंबर 2010 को 8:44 am  

... bahut sundar ... jay jay chhattisgarh !!!

Rahul Singh 14 नवंबर 2010 को 9:02 am  

यहां तक आ गए हैं, आगे भी जाएंगे, लेकिन जनाब दिक्‍कत तो चंचला लक्ष्‍मी के टिकने की होती है, ज्‍यादा बड़ा कमाल जमा नोटों को बचाए रखना है, नंबर 786 हो 876 या 678, इससे बड़े-बड़े काम सध जाते हैं.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" 14 नवंबर 2010 को 12:15 pm  

बस मन के किसी तरफ भी लग जाने की बात है...
बढिया! रोचक..

दर्शन लाल बवेजा 14 नवंबर 2010 को 8:46 pm  

ये शौंक मुझे भी है पर उद्देश्य कोई भाग्य उदय का नहीं है
भाग्य उदय तो कठीण मेहनत से ही होता है
मै अपने मुस्लिम विद्यार्थीयों को ईदी के रूप में देता था
एक बार मुझे पता चला मेरे इस नोट (१०/-) को मेरे विद्यार्थी ने कोल्डड्रिंक पीने में खर्च कर दिया
मैंने तब से संग्रह करना शुरू कर दिया :)
पर मै जो नोट मेरे पास आ जाए वो ही रखता हूँ किसी से कहता नहीं
चंडीगढ़ के एक बंदे के पास १३७०००/-के लगभग ७८६ के नोट है :)

आपकी हथेली में छेद
पक्षी बिजली की तारों पर बिना विधुत झटका लगे कैसे बैठ जाते है?

ललित शर्मा 14 नवंबर 2010 को 8:52 pm  

@दर्शन लाल बवेजा

भाई साहब मेरे धोरे भी 1008 के भतेरे नोट सैं।
एकाध मंहती की गद्दी मिल जाए तो मौज हो जाए।:)

अशोक बजाज 14 नवंबर 2010 को 10:57 pm  

@ ललित जी ,
हम तो अब तक 786 में अटके थे आप तो 1008 ( 4 डिजिट ) तक पहुँच गएँ है .

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