Blogger द्वारा संचालित.
ग्राम चौपाल में आपका स्वागत है * * * * नशा हे ख़राब झन पीहू शराब * * * * जल है तो कल है * * * * स्वच्छता, समानता, सदभाव, स्वालंबन एवं समृद्धि की ओर बढ़ता समाज * * * * ग्राम चौपाल में आपका स्वागत है

विकीपीडिया का दफ़्तर भारत में

>> 01 नवंबर, 2010

ऑनलाइन वेबसाइट विकीपीडिया चलाने वाली ग़ैर मुनाफ़े वाली संस्था विकीमीडिया फ़ाउंडेशन अमरीका के बाहर अपना पहला दफ़्तर भारत में खोलेगी, हालांकि अभी ये साफ़ नहीं है कि ये दफ़्तर किस शहर में खुलेगा.जगह की रेस में दिल्ली,  मुंबई और बंगलौर शामिल हैं.

   विकीपीडिया के सहसंस्थापक  और प्रोमोटर जिमी वेल्स ने बीबीसी को बताया कि दफ़्तर खुलने का काम अगले छह महीने में होगा.वे  विकीपीडिया का इस्तेमाल करने वालों से मिलने के लिए मुंबई आए हुए थे.हालांकि उन्होंने ये कहा कि उन्हें पता नहीं कि इस दफ़्तर को तैयार होने में छह महीने का वक्त क्यों लग रहा है क्योंकि इस योजना से और लोग जुड़े हैं.
जिमी वेल्स ने कहा कि चीन जैसे देश में दफ़्तर खोलना काफ़ी मुश्किल है क्योंकि वहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता काफ़ी सीमित है.उन्होंने कहा, ''अगर हमें चीन में रहना है तो हमें सेंसरशिप को मानना पड़ेगा जिससे हमने इनकार कर दिया.''

जिमी ने कहा, ''मैं विकीपीडिया के भारत में आने को लेकर बहुत उत्साहित हूँ. इसके कई कारण हैं. बड़ी संख्या में लोग इंटरनेट से जुड़ रहे हैं. हमारा स्थानीय चैप्टर बंगलौर में है. वो कई समस्याओं को सुलझाने में लगे हैं, चाहे वो तकनीकी हो या फिर कोई और.''

भारत की समस्या

भारत में एक मूलभूत सुविधाओं की बड़ी समस्या है, चाहे वो इंटरनेट में तेज़ी की बात हो या फिर बात हो लोगों की इंटरनेट से जुड़ने की.भारत में मात्र आठ करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं जो दुनिया का 4.7 प्रतिशत है.इस पर जिमी वेल्स ने कहा कि समस्याएं तो हैं लेकिन वो घट रही हैं और आगे भी घटेंगी.भारत में खुलने वाले इस दफ़्तर में तीन से चार लोग होंगे.जिमी वेल्स ने कहा है कि इस दफ़्तर का ध्यान भारतीय भाषाओं के फ़ैलाव पर होगा.उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि भारतीय भाषाओं के ज़्यादा लोग विकिपीडिया से जुड़ें ताकि उन भाषाओं में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी विकीपीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुँच सके.उन्होंने कहा कि वो स्थानीय संस्थाओं से संपर्क में रहेंगे ताकि विकीपीडिया ज़्यादा फ़ैले.

भारतीय भाषाओं में उपलब्धता


विकीपीडिया 20 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और भारत में 200 से ज्यादा प्रबंधक इससे जुड़े हैं. भारतीय भाषाओं में सबसे ज़्यादा पन्ने हिंदी में हैं – 57800 से ज़्यादा.इसके बाद तेलुगू (45000 पन्नों से ज़्यादा), मराठी (31400 पन्नों से ज़्यादा), मलयालम (25,600 से ज़्यादा), गुजराती (17,140 से ज़्यादा) और मलयालम (14800 से ज़्यादा) का नंबर आता है.लेकिन समस्या है लोगों को इंटरनेट पर भारतीय भाषाओं के लेखों से जोड़ने की क्योंकि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोगों की एक बड़ी संख्या अंग्रेज़ी लेखों को पढ़ती है. उन्हें न ही हिंदी टाइपिंग आती है, न ही भारतीय भाषाओं के लेखों के इंटरनेट पर उपलब्ध होने के बारे में पता है.जिमी वेल्स ने कहा कि विकीपीडिया की कोशिश है कि सबसे ज़्यादा बोलने वाली 10 भारतीय भाषाओं के एक लाख से ज़्यादा पन्ने हों.

उन्होंने विकीपीडिया को स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय संगठनों से जोड़ने की बात की ताकि भारतीय भाषाओं के ज़्यादा से ज़्यादा लोग विकीपीडिया से जुड़ें.उन्होंने कहा कि भविष्य में विकीपीडिया का ध्यान अरबी भाषा पर होगा.विकीपीडिया में अंग्रेज़ी के डेढ़ करोड़ से ज़्यादा लेख हैं. 270 से ज़्यादा भाषाओं में और 40 करोड़ से ज़्यादा लोग विकीपीडिया के लेख पढ़ते हैं. इसको पढ़ने वालों में 87 प्रतिशत पुरुष हैं.बीबीसी हिन्दी 00257

8 टिप्पणियाँ:

राज भाटिय़ा 2 नवंबर 2010 को 12:24 am  

विकीपीडिया का दफ़्तर भारत में इस लिये खोला जायेगा कि इन्हे कर्मचारी सस्ते मिलेगे ओर कम पैसो मे ज्यादा काम मिलेगा, दुसरा कोई कारण नही, हम पर कोई एहसान नही कर रहे, इन्हे हमारा एहसान मानाना चाहिये

अशोक बजाज 2 नवंबर 2010 को 12:32 am  

@श्री राज भाटिय़ा जी ,
ठीक कहा आपने , हो सकता है जमीन भी सस्ती मिल जाय . अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी यहाँ चरम पर है . प्रथम कमेन्ट के लिए आभार .

ललित शर्मा 2 नवंबर 2010 को 1:10 am  

सभी का खुले दिल से स्वागत है।
कम से कम स्थानीय लोगों को रोजगार तो मिलेगा।

Ratan Singh Shekhawat 2 नवंबर 2010 को 7:28 am  

हिंदी के ५७८०० में से कुछ पन्नों का योगदान हमने भी किया है

डॉ॰ मोनिका शर्मा 2 नवंबर 2010 को 11:19 am  

उनका स्वागत है.... अच्छी जानकारी दी आपने

GirishMukul 25 मार्च 2011 को 4:09 am  

वाह
स्वागत है उनका भी

एक टिप्पणी भेजें

About This Blog

  © Blogger template Webnolia by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP