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सावधान : गूगल ने डाटा और पासवर्ड्स चुराया

>> 02 नवंबर, 2010

 अपनी छत पर एंटीना लगाए कोई ऐसी कार आपके घर के आसपास से गुजरे जिस पर गूगल लिखा हो तो आपको सावधान हो जाना चाहिए. यह कार आपके कंप्यूटर में रखा डाटा, आपके ईमेल के पते और यहां तक कि आपके पासवर्ड्स भी छू मंतर कर सकती है.

गूगल की कार
     ऐसा जर्मनी और ब्रिटेन में हो चुका है. गूगल ने खुद माना है कि उसकी कार ने लोगों के पासवर्ड्स और डाटा चुराया. जर्मनी के बाद गूगल ने ब्रिटेन में भी लोगों की जासूसी की बात मान ली है.  कैलिफॉर्निया स्थित इस इंटरनेट सर्च इंजन ने हालांकि अपनी इस हरकत के लिए माफी मांगी है लेकिन ब्रिटेन ने इस बात को काफी गंभीरता से लिया है.लोगों की निजता के पहरेदार इन्फॉर्मेशन कमिशनर के दफ्तर ने कहा है कि वह गूगल के माफीनामे पर विचार करेगा.

अखबार द संडे टेलीग्राफ ने खबर छापी है कि गूगल ने अपनी नई सर्विस स्ट्रीट व्यू के लिए डाटा जुटाने के वास्ते जो कार भेजी उसने लोगों के ईमेल्स और डाटा चुराए.  अखबार ने कंपनी के इंजीनियरिंग और रिसर्च शाखा के उपाध्यक्ष एलन यूस्टेस के हवाले से लिखा है, "जो डाटा हमें मिला है, उसके अवलोकन से साफ जाहिर है कि कुछ मामलों में ईमेल के पूरे पते और यूआरएल के साथ साथ पासवर्ड्स भी आ गए हैं.  हालांकि ज्यादातर डाटा खंडित है. लेकिन हम इसे जल्द से जल्द डिलीट करना चाहते हैं. मैं इस बात के लिए माफी चाहता हूं कि हमने ऐसा किया."

गूगल की इस हरकत का असर इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लाखों लोगों पर हुआ है. गूगल ने डाटा जुटाने का यह काम 2008 में शुरू किया. इस साल मई में गूगल ने माना कि उसकी कार सूचनाएं जुटाने के लिए वायरलेस तकनीक से काम कर रही है.  इस तकनीक के जरिए रेडियो तरंगें कंप्यूटर को टेलीकम्यूनिकेशन नेटवर्क्स से जोड़ देती हैं. स्ट्रीट व्यू के लिए गूगल ने अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी समेत कई देशों में तस्वीरें ली हैं.

इस सूचना में लोगों के निजी ईमेल भी उसके पास जमा हो गए हैं. लोगों ने जो इंटरनेट वेबसाइटें देखीं वे सारी इस डेटा में आ गईं और पासवर्ड्स भी उसे मिल गए.

प्राइवेसी इंटरनेशनल के सिमोन डेविस कहते हैं कि ये स्कैंडल जैसे हालात हैं. उन्होंने कहा,  "कंपनी को पूरी जांच करनी चाहिए और उसके बाद एक सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करनी चाहिए कि असल में क्या हुआ.  ऐसे बहुत से सवाल हैं जिनका जवाब लोगों को मिलना ही चाहिए."

प्राइवेसी इंटरनेशनल ने इस मामले में स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस को एक शिकायत भी की है. DW   00242
 

13 टिप्पणियाँ:

राज भाटिय़ा 3 नवंबर 2010 को 12:19 am  

बहुत सुंदर जानकारी दी आप ने, वेसे पासवर्ड तो साल मे एक दो बार बदल लेना चाहिये, लेकिन ईमेल तो बहुत लोगो को वेसे ही पता चल जाता हे, बाकी डाटा भी सुर्क्षित रहना चाहिये, उस के लिये आप कभी भी अपने लेपटाप पर या पीसी की हार्ड डिस्क पर ज्यादा जानकरियां ना रखे एक अलग से हार्ड डिस्क पर सब डाटा रखे, ओर जब चाहिये तभी उसे चलाये, वर्ना हार्ड डिस्क को अलग रखे

भारतीय नागरिक - Indian Citizen 3 नवंबर 2010 को 1:02 am  

बहुत बेजा हरकत है गूगल की...यह दिक्कत तो आयेगी. गूगल सर्च इंजन का प्रयोग करने पर... बाकी फिशिंग, बोट्स, बग्स, ट्रोजन हैं न. ऊपर से वायरलेस डिवाइसेज और खतरनाक...

ललित शर्मा 3 नवंबर 2010 को 6:40 am  

एंटिना वाली कार अभनपुर तो नहीं आने वाली।
इसलिए हमको कोई चिंता नहीं है,हा हा हा
लेकिन गुगल की यह हरकत गलत है,
किसी के व्यक्तिगत सुचनाएं चुराना ठीक नहीं है।

धनतेरस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

डॉ॰ मोनिका शर्मा 3 नवंबर 2010 को 7:03 am  

बङी अफसोसजनक बात है............ अच्छी जानकारी दी आपने

Ratan Singh Shekhawat 3 नवंबर 2010 को 7:41 am  

ये हमारे यहाँ तो मुश्किल से ही पहुंचे इसलिए नो टेंशन

अशोक बजाज 3 नवंबर 2010 को 8:57 am  

@ श्री राज भाटिया जी ,

आपका सुझाव सबके लिए महत्वपूर्ण है , धन्यवाद !

धन तेरस की असीम शुभकामनाएं !

अशोक बजाज 3 नवंबर 2010 को 9:03 am  

@ श्री ललित जी ,
@ डा. मोनिका जी ,
@ श्री शेखावत जी ,
@ श्री भारतीय नागरिक जी ,

धन्यवाद !

धन तेरस की असीम शुभकामनाएं !

S.M.HABIB 3 नवंबर 2010 को 11:16 am  

सावधान करती पोस्ट. हमारे यहाँ भी गूगल के बहुत सारे चचेरे, मौसेरे भाई मौजूद हैं जो निजता भंग करने में लिप्त रहते हैं. किसी का प्रोफाइल हैक करना, ब्लॉग पोस्ट की चोरी, यही जिनका शाश्वत धर्म है. इसलिए सावधानी जरुरी है. पास्वोर्ड बदलते रहना चाहिए... शायद?
बढ़िया जानकारी के लिए आभार और आपको मय परिवार तथा समस्त ब्लोगर भईयों तथा उनके परिवार को धनतेरस की हार्दिक बधाई.

राजभाषा हिंदी 3 नवंबर 2010 को 5:18 pm  

ये तो ग़लत है। बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है!
राजभाषा हिन्दी पर – कविता में बिम्ब!

प्रवीण पाण्डेय 3 नवंबर 2010 को 7:36 pm  

यह तो बड़ा गड़बड़ किया। पासवर्ड नहीं चुराने थे।

honesty project democracy 3 नवंबर 2010 को 7:37 pm  

इन्टरनेट प्रयोग के ये खतरे तो हमेशा रहेंगे.....इसलिए सावधान तो रहना ही चाहिए......आज भी गूगल के अलावे कई खुपिया एजेंसियां इ.मेल और चेटिंग को बड़ी आसानी से पढ़ती और सुनती है....ये अलग बात है की इसे स्वीकार कोई नहीं करती ठीक उसी तरह जैसे इस देश में किसी का भी फोन टेप किया जा सकता है लेकिन ऐसा करना गैरकानूनी है.....

Vivek Rastogi 3 नवंबर 2010 को 9:00 pm  

अपने भारत में इनको क्या मिलने वाला है, अपने यहाँ की सड़कें ही इतनी सुभानअल्लाह हैं कि उनको अपनी कार भेजने के पहले हजार बार सोचना पड़ेगा, वैसे ये गूगल ने बहुत ही गलत किया।

शिवम् मिश्रा 4 नवंबर 2010 को 4:42 am  


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपको और आपके परिवार में सभी को दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं ! !

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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