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ग्राम-चौपाल - कम्प्यूटर में हाईटेक पटाखे

>> 12 नवंबर, 2010

                          हमने पिछले माह एक पोस्ट लगाई थी जिसमें हमने लिखा था कि ब्लाग के दीवानों के लिए यह खुशखबरी से कम नहीं कि आने वाले दिनों में ब्लाक जगत की गतिविधियों की खबरों को अखबारों में स्थान मिलने लगेगा . देखें -- " ब्लागरों के लिए खुशखबरी "

                          तब से लगातार आप अनुभव कर रहें होंगें कि ब्लाक जगत की गतिविधियों की खबरों को अखबारों में स्थान मिल रहा है  . आज सुबह जब हमने अखबार खोला तो देखा कि दिनांक 5-11-2010 यानी दीवाली के दिन लगी पोस्ट " दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं " के आधार पर दैनिक हरिभूमि रायपुर ने एक धमाकेदार समाचार प्रकाशित किया है .आप सबकी जानकारी के लिए हम ' हरिभूमि ' की कतरन यहाँ लगा रहें है . यह है वेब दुनिया का वह 'अनारदाना ' जो पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है . शायद आपको भी पसंद आयें .

                 
                           लोकप्रिय हिंदी दैनिक " हरिभूमि " 11-11-2010





13 टिप्पणियाँ:

बेनामी,  12 नवंबर 2010 को 1:14 am  

आपका प्रयास सराहनीय है, यदि सभी की विचारधारा इसी प्रकार से हो जाए तो यह जीवन सुखदायी हो जाएगा. इस कदम पर मेरी ओर से आपको बहुत बहुत बधाई हो.

ब्लॉ.ललित शर्मा 12 नवंबर 2010 को 9:30 am  

वाह भाई साहब कमाल हो गया।
सारे रिकार्ड धराशाई हो गए।

आभार

निर्मला कपिला 12 नवंबर 2010 को 11:19 am  

बहुत बढिया प्रयास। धन्यवाद।

anshumala 12 नवंबर 2010 को 11:30 am  

मेरी तरफ से भी बधाई स्वीकार करे |

palash 12 नवंबर 2010 को 6:38 pm  

आपका प्रयास सराहनीय है । हम भी किसी काम के योग्य हो तो जरूर याद कीजियेगा । इस समाज के लिये हम भी कुछ कर सके

Bhaskar 12 नवंबर 2010 को 7:20 pm  

आपकी छोड़ी टिपण्णी द्वारा आपके ब्लॉग पर आना हुआ, आपका प्रयास सराहनीय है । आपको भी साधुवाद

Unknown 12 नवंबर 2010 को 7:52 pm  

वाह......क्या बात है....

शिक्षामित्र 13 नवंबर 2010 को 8:50 am  

पटाखों पर रोक लगनी चाहिए। मगर फुलझड़ियों,अनारों आदि की इजाजत होनी चाहिए। सब कुछ अगर कंप्यूटर पर ही सिमट कर रह गया तो यह हमारी उत्सवधर्मिता के लिए प्रतिकूल होगा।

कुमार राधारमण 13 नवंबर 2010 को 12:34 pm  

लोगबाग ऐसे ही परेशान हैं बच्चों की कम्प्यूटर और टीवी की लत से। ऐसे में,यह ई-पटाखा! थोड़ा उत्साह तो वास्तविक जीवन के लिए भी बचा रहना चाहिए!

robin 14 नवंबर 2010 को 12:34 am  

behtareen appeal....
kintu mere khyaal se tyohaar ke mauke pe kuchh liberty honi chahiye bajaj saahab !!
btw ur effort is welcomed..

ashokbajajcg.com 14 नवंबर 2010 को 1:14 am  

@ पं. अनिल जी शर्मा सहारनपुर,
@ पं. ललित शर्मा,
@ निर्मला कपिला,
@anshumala,
@पलाश
@Bhaskar,
@राहुल पंडित,
@robin,
आप सबको यह प्रयास पसंद आया , आपने हौसला अफजाई की इसके लिए साधुवाद .

ashokbajajcg.com 14 नवंबर 2010 को 1:27 am  

@शिक्षामित्र,
@कुमार राधारमण,
आप लोंगों का सुझाव ठीक लगा .त्योहारों की मौलिकता को बरकरार रखते हुए इस प्रयोग को आजमाना चाहिए . त्योहारों के अतिरिक्त शादी ब्याह में भी बड़ी स्क्रीन पर इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए . प्रदूषण के जहर से बचना और बचाना आवश्यक है .कृपया मेरे पिछले पोस्ट " प्रदूषण के डर से , ना निकला घर से ...." का भी अवलोकन करें .धन्यवाद .

राम त्यागी 14 नवंबर 2010 को 4:57 am  

बधाई स्वीकार करें

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