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एक ब्लोगर ने धुम्रपान त्यागा : समाज के नव-निर्माण के लिए ब्लोगिंग को माध्यम बनायें

>> 29 नवंबर, 2010

 एक सार्थक पोस्ट

अरविन्द जांगिड

पैसिव स्मोकिंग " के बारे में ग्राम-चौपाल में प्रकाशित पोस्ट  " सावधान : सवा अरब तंबाकू पीने वाले पौने पांच अरब लोगों को "  पैसिव स्मोकिंग " के लिए कर रहे मजबूर " का असर यह हुआ कि एक ब्लोगर ने धुम्रपान  त्याग दिया .ये  ब्लोगर है  सीकर राजस्थान के रहने वाले श्री  अरविन्द जांगिड, . पढ़िए वे क्या लिखतें है --- 

 टिप्पणी (1) : ---
अरविन्द जांगिड,27 नवम्बर 2010 8:30 पूर्वाह्न
उपयोगी एंव ज्ञानवर्धक जानकारी, वैसे  मुझे सच कहने कि बिमारी है "मैं भी सिगरेट पीता हूँ"

जवाब(1) : --- 
अशोक बजाज, 27 नवम्बर 2010 9:12 पूर्वाह्न
@अरविन्द जांगिड जी ,
आपको बहुत-बहुत धन्यवाद ,आपके मन में धुम्रपान त्यागने का विचार आना इस लेखन की सार्थकता को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है .निवेदन है कि जितनी जल्दी हो सके इस जहर को त्याग दें . आपको नए जीवन का एहसास होगा .आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मैंने 5000 से अधिक लोगों को नशापान से मुक्त कराया है . आप भी दृढ इच्छाशक्ति का परिचय दें . शुभकामनाएं !
 टिप्पणी(2)  : ---
अरविन्द जांगिड, 27 नवम्बर 2010 2:49 अपराह्न
@अशोक जी, सादर धन्यवाद, मैं सुबह से ही सोच रहा था, इस विषय पर........."मैंने अंतिम सिगरेट समय - 2.38, 27-11-2010 को ली थी"
तारीख गवाव रहे! सत्य को प्रमाण कि आवश्यकता नहीं. बाकी बची सिगरेट के पकेट्स (13) को जला दिया है, मेड इन दुबई थी, सो दुःख तो हुआ, ये भी सच है, लेकिन जब छोड़ना ही है तो क्या देशी, क्या विदेशी.
आप अपनी मुहीम में कामयाब यों, ईश्वर से यही कामना है.
एक बार पुनः धन्यवाद. 

जवाब(2) : ---
अशोक बजाज,  27 नवम्बर 2010 3:43 अपराह्न 
@अरविन्द जांगिड जी ,
आपने अनुकरणीय कार्य किया है ,पुरानी आदत को छोड़ना बड़े साहस का काम है .मै आपके साहस की दाद देता हूँ .तथा आपके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ . मै समझता हूँ की आपके इस सराहनीय कदम पर हमारे अनेक ब्लोगर मित्र नया पोस्ट लिखेंगे .

एक अन्य ब्लोगर श्री सुमित दास ने भी धुम्रपान त्यागने की मंशा जाहिर की है ;पढ़िए वे क्या फरमाते है ------

 टिप्पणी(3):---
sumit das,  28 नवम्बर 2010 12:02 अपराह्न
ऊपर वाले की कृपा से हमारे परिवार का प्रत्येक व्यक्ति इस नामुराद चीज से बचा हुआ हैं....par mujhe chhod kar par aap ke diye gaye jankari ke bad dhere dhere finish karuga . aap ka prerak prayas badiya.

जवाब(3) : --- 
 अशोक बजाज, 28 नवम्बर 2010 11:07अपराह्न
@ सुमित दास जी ,
छोड़ने के लिए वक्त का इंतजार न करें ,बस यह समझिये कि वक्त आ चुका है . आप अपनी दृढ इच्छा शक्ति का परिचय दीजिये और दिल पर पत्थर रख कर सिगरेट का पैकेट फेंक दीजिये , जैसा कि ऊपर आपने पढ़ा होगा अरविन्द जांगिड ने एक ही झटके में इस जहर को जला दिया , आप भी कुछ यैसा ही करिए .सचमुच आपको नए जन्म का एहसास होगा .मुझे तो केवल आपके परिवार व् मित्रों की दुआ चाहिए .धन्यवाद !

श्री खुशदीप सहगल ने गुटके की बुरी लत की ओर ध्यान आकर्षित किया है ; आप स्वयं पढ़िए वे क्या कहते है --------

टिप्पणी(4):--- 
 खुशदीप सहगल, 27 नवम्बर 201010:26 अपराह्न
अशोक जी,
धूम्रपान तो देश में पहले की तुलना में कम हो गया है...लेकिन उससे भी खतरनाक बीमारी निकल आई है गुटका...इसकी लत जिसे लग जाए, उसका काम तमाम होना तय है...किशोर तक गुटके की आदत के चलते खुद को बर्बाद कर रहे हैं...और सरकार आंखों पर पट्टी और कानों में तेल डाल कर बैठी हुई है...
जय हिंद...

जवाब(4) : --- 
 अशोक बजाज,27नवम्बर 2010 11:07 अपराह्न
@ खुशदीप सहगल जी ,
आपने गुटकें का जिक्र कर इस प्रसंग को सही दिशा में मोड़ दिया है .यह ज्वलंत मुद्दा है , शायद ब्लोगरों की पहल से इसके उपयोग को नियंत्रित किया जा सकता है . उपयोगी सुझाव के लिए आभार !

इस  पोस्ट  पर  निम्नलिखित ब्लोगर मित्रों ने भी हौसला अफजाई किया ,आभार ! आप सभी से आग्रह   है कि समाज  के नव-निर्माण के लिए ब्लोगिंग को माध्यम बनायें ,धन्यवाद !

लोकप्रिय हिंदी दैनिक " तरुण  छत्तीसगढ़ "  27-11-2010

लोकप्रिय हिंदी दैनिक " छत्तीसगढ़ समाचार " 28-11-2010







18 टिप्पणियाँ:

डॉ. मोनिका शर्मा 29 नवंबर 2010 को 10:11 am  

आप सभी से आग्रह है कि समाज के नव-निर्माण के लिए ब्लोगिंग को माध्यम बनायें....
सार्थक आव्हान ....

प्रवीण पाण्डेय 29 नवंबर 2010 को 11:19 am  

आपको साधुवाद, ब्लॉगिंग के लाभ पर आपका कार्य अनवरत चलता रहे।

Arvind Jangid 29 नवंबर 2010 को 2:05 pm  

ईश्वर आपको आपकी मुहीम में कामयाबी दे, मेरी कोशिश है कि मेरे कार्यालय मैं कार्यरत अन्य सहकर्मियों को भी इस हेतु प्रोत्साहित करूँ.
आपका पुनः साधुवाद.

कडुवासच 29 नवंबर 2010 को 5:07 pm  

... gambheer samasyaa ... samaadhaan ki dishaa men saarthak post !!!

Rahul Singh 29 नवंबर 2010 को 5:23 pm  

वाह, क्‍या बात है. क्‍या ही अच्‍छा हो कि यह सिलसिला बन जाए.

Unknown 29 नवंबर 2010 को 8:38 pm  

सार्थक आव्हान.....साधुवाद

ashokbajajcg.com 30 नवंबर 2010 को 7:20 am  

@ डॉ॰ मोनिका शर्मा,
आपके सहयोग की जरुरत पड़ेगीं .धन्यवाद !

ashokbajajcg.com 30 नवंबर 2010 को 7:23 am  

@ प्रवीण पाण्डेय,
आपका भी सहयोग हो ,धन्यवाद !

ashokbajajcg.com 30 नवंबर 2010 को 7:25 am  

@ अरविन्द जांगिड,
अपने कार्यालय में आदर्श स्थापित कीजिये ,धन्यवाद !

ashokbajajcg.com 30 नवंबर 2010 को 7:27 am  

@'उदय',
गंभीर समस्या को जड़ से मिटने का संकल्प लें ,धन्यवाद !

ashokbajajcg.com 30 नवंबर 2010 को 7:30 am  

@ Rahul Singh,
ध्यान रखें यह सिलसिला न टूटें ,धन्यवाद !

ashokbajajcg.com 30 नवंबर 2010 को 7:32 am  

@ राहुल पंडित,
इस पर आप एक अच्छी कविता लिख सकतें है ,धन्यवाद !

S.M.Masoom 30 नवंबर 2010 को 7:38 am  

जिसने भी त्याग दिया नया जीवन पा लिया. त्यागना आसान है, अपने फैसले पे काएम रहना मुश्किल हुआ करता है...ध्यान रहे फिर से शुरू ना हो जाए..

अविनाश वाचस्पति 30 नवंबर 2010 को 7:42 am  

पहले तो शुरू करें
फिर उसके बाद छोड़ें
वैसे मैंने तो कईबरस पहले
दी थी छोड़
पी थी कुछबरस
अब तो पिए हुए
हुए हैं कई बरस

यह धुंआ किसी पर न बरसे
गुटके को न किसी का बावरा मन तरसे
मन हमारा हर्षित हो, सदा भीतर से हरषे
कंपनियों सिगरेट गुटके की दीवालिया हो जाएं
धुंआ भी न रहे, कंपनियां सभी फैलाने वाली धुंआ हो जाएं

छिपकलियां छिनाल नहीं होतीं, छिपती नहीं हैं, छिड़ती नहीं हैं छिपकलियां

ashokbajajcg.com 30 नवंबर 2010 को 8:00 am  

@ एस.एम.मासूम,
आपकी आशंका गलत नहीं , बुराई मनुष्य को जल्दी आकर्षित करती है .

ashokbajajcg.com 30 नवंबर 2010 को 8:04 am  

@ अविनाश वाचस्पति,
कंपनियां , सिगरेट गुटके की दीवालिया हो जाएं ;
धुंआ भी न रहे, कंपनियां सभी फैलाने वाली धुंआ हो जाएं .

बहुत सुन्दर काव्यमय टिप्पणी के लिए आभार !

honesty project democracy 30 नवंबर 2010 को 9:00 am  

आज सामाजिक सरोकार तथा समाज निर्माण से ब्लोगिंग को जोड़ने की सख्त जरूरत है........शानदार प्रयास करती पोस्ट....

ashokbajajcg.com 30 नवंबर 2010 को 9:21 am  

@ honesty project democracy,
आज सामाजिक सरोकार तथा समाज निर्माण से ब्लोगिंग को जोड़ने की सख्त जरूरत है.आपका कथन सत्य है , बढ़े चलों !

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