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" जलवायु परिवर्तन सम्मलेन " कानकुन बनाम कोपेनहेगन

>> 01 दिसंबर, 2010


क्रिस्टीना फिगरेस






        मेक्सिको के  कानकुन शहर में संयुक्त राष्ट्र "जलवायु सम्मेलन  " प्रभावी कदमों और समझौतों की अपीलों के साथ आज  शुरू हुआ . पिछले साल इसी प्रकार का सम्मेलन कोपेनहेगन में हुआ था . नतीजा आपके सामने है . कानकुन  में 194 सदस्यों वाली संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन संधि संरचना यू एन एफ सी सी के तहत  12  दिन तक चलने वाले इस  सम्मेलन में 15,000 से अधिक आधिकारिक प्रतिनिधि, पर्यावरण कार्यकर्ता और पत्रकार भाग ले रहे हैं. यह सम्मेलन क्योटो पर्यावरण संधि के बाद के समय के लिए कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाने के प्रयासों के तहत हो रहा है. क्योटो संधि 2011 में समाप्त हो रही है.

सम्मेलन में हिस्सा ले रहे विभिन्न देशों के  विशेषज्ञों को पिछले साल कोपेनहेगन सम्मेलन के हश्र को देखते हुए इस सम्मेलन से किसी बड़ी उपलब्धि की उम्मीद नहीं है .कोपेनहेगन में हुए सम्मेलन में कार्बन उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार विभिन्न देशों में मतभेद उभरने की वजह से किसी बाध्यकारी संधि पर हस्ताक्षर नहीं हो सका था.कोपनहेगन में जलवायु परिवर्तन को लेकर जिन बिन्दुओं पर मतभेद उभरे थे वो अब भी बरकरार हैं.
 
 उत्पादन गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर  वैश्विक मंदी के दौर से उबर रही अर्थव्यवस्थाओं की पृष्ठभूमि में हो रहे इस सम्मेलन में कार्बन का उत्सर्जन बढ़ने और औसत वैश्विक तापमान में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी को रोकने के उपायों पर चर्चा हो रही है . संयुक्त राष्ट्र जलवायु प्रमुख क्रिस्टीना फिगरेस ने विश्व के बढ़ते तापमान पर गहरी चिंता प्रगट करते हुए कहा कि  जलवायु परिवर्तन की समस्या के समाधान की दिशा में काम करने के लिए एक दूसरे की जरुरतों को समझना होगा.

ऐसी संभावना जताई जा रही है कि वनों की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने में गरीब देशों की मदद की दिशा में कुछ प्रगति हो सकती है. मुख्य रूप से सम्मेलन का लक्ष्य गरीब देशों की मदद के लिए ग्रीन फंड बनाना, वनों का विनाश रोक कर कार्बन उत्सर्जन को कम करना और विकसित देशों से टेक्नॉलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देना है. सम्मेलन में गरीब देशों को  2012 तक जलवायु परिवर्तन के लिए तैयार करने के लिए अमेरिका द्वारा दिए 30 बिलियन डॉलर के ‘फास्ट ट्रैक फण्ड’ पर भी विमर्श किया जाएगा .इस सबके बावजूद कानकुन सम्मलेन से कुछ नतीजा निकलेगा इसकी उम्मीद कम ही है .


5 टिप्पणियाँ:

Rahul Singh 1 दिसंबर 2010 को 7:55 am  

अप्रत्‍यक्ष लाभ तो होगा ही और किसी सार्थक निर्णय की जमीन तैयार हो जाय तो वह भी कम हासिल नहीं.

Swarajya karun 1 दिसंबर 2010 को 10:32 am  

सुंदर आलेख के ज़रिए दी गयी उपयोगी जानकारी के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद .

'उदय' 1 दिसंबर 2010 को 1:37 pm  

... kuchh na kuchh sakaaraatmak parinaam milnaa hi chaahiye !!!

प्रवीण पाण्डेय 1 दिसंबर 2010 को 3:06 pm  

चर्चाओ के रास्ते चल सार्थक निष्कर्षों पर सम्पन्न हो यह बैठक।

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