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विकीलीक्स : नोबेल पुरस्कार , साइबर वार और जेल

>> 10 दिसंबर, 2010


  
हैक हुई एक वेबसाइट का बिगड़ा हुआ हुलिया
अपनी वेबसाइट के जरिए अमेरिकी सरकार और उसके  विभागों की लाखों पन्नों की गोपनीय जानकारियां सार्वजनिक करके  विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है, उसकी वजह से दुनिया के अनेक देशों में  साइबर वार की शुरूआत हो गई है.

फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स से  जूलियन अंसाजे के लाखों समर्थकों ने दुनिया की नंबर दो क्रेडिट कार्ड कंपनी मास्टर कार्ड की बेवसाइट पर हल्ला बोल दिया है . फलस्वरूप  मास्टर कार्ड की वेबसाइट कई घंटों से ठप्प  है . विकीलीक्स विरोधी माने जाने वाले कई वेबसाइट का हुलिया  बिगाड़ कर  हैकरों ने चैट रूम में एक दूसरे को बधाई दी. मास्टर कार्ड की वेबसाइट हैक करने वालों ने अपने चैट रुम संदेशों में कहा, ''मास्टर कार्ड की वेबसाइट अब भी ठप पड़ी है ; भाड़ में जाएँ ''.  एक दूसरे संदेश में कहा गया, '' वाह...सबने शानदार काम किया.'' यूएस साइबर कॉन्सिक्वेंसेज यूनिट के चीफ टेक्नॉलाजी  अफसर जॉन बमगार्नर कहते हैं, ''ऐसे हमलों की शुरुआत करना बहुत आसान है.'' इंटरनेट पर ऐसे कई सॉफ्टवेयर मिल जाते हैं जो बेहद आधुनिक हैं और हैकर उन्हें आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. आशंका जताई जा रही है कि विकीलीक्स के समर्थक आने वाले दिनों में कई अन्य वेबसाइटों पर भी इसी तरह के हमले करेंगे. इन हैकरों ने विकीलीक्स के ख़िलाफ़ मुक़दमे में सरकारी वकील की वेबसाइट को भी हैक कर लिया है. 
     
ऑस्ट्रेलिया और रूस  की कई बड़ी हस्तियां विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज के समर्थन में उतर आई हैं.जूलियन असांज का समर्थन करते हुए  रूसी अधिकारियों ने उन्हें  नोबेल पुरस्कार देने की मांग  की है. तो दूसरी तरफ बलात्कार और असुरक्षित यौन संबंध बनाने के आरोप में ब्रिटेन में असांज को   गिरफ्तार कर जेल भेज दिया  गया है . उन्हें सात दिन की हिरासत में  रखा  गया है. 



फोटो-साभार गूगल

9 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय 10 दिसंबर 2010 को 7:15 am  

आगे आगे देखिये होता है क्या?

'उदय' 10 दिसंबर 2010 को 7:34 am  

... kuchh chamatkaar hone hi chaahiye ... !!!

अरविन्द जांगिड 10 दिसंबर 2010 को 7:58 am  

दूसरों के कुएं हड़पने वाले कुएं में गिर भी सकते हैं.

Rahul Singh 10 दिसंबर 2010 को 8:35 am  

ये क्‍या हो रहा है, अंदाज लगा पाना भी कठिन है.

Swarajya karun 10 दिसंबर 2010 को 9:55 am  

बहुत अच्छा विषय और अच्छा प्रस्तुतिकरण . वास्तव में एक बेहतर और सदभावपूर्ण दुनिया के निर्माण के लिए सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता बहुत ज़रूरी है. जहाँ भी कोई दुराव-छिपाव है, समझो कि वहाँ दाल में कुछ न कुछ काला है . ऐसे में अगर विकीलिक्स ने अमरीकी कारगुजारियों का भंडाफोड कर कोई रहस्य उजागर किया है , तो अमेरिका के लिए भले ही वह गलत हो, पर बाकी दुनिया के लिए तो वह फायदे की बात है ,कि हमें अमरीका से सावधान रहना चाहिए . जूलियस असान्ज़ पर कोई भी आरोप, वह भी ब्रिटेन में इस भंडाफोड के बाद ही क्यों लगा, पहले क्यों नहीं ? यह सोचने वाली बात है. कहीं यह 'खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे' वाली बात तो नहीं है ?

डॉ॰ मोनिका शर्मा 10 दिसंबर 2010 को 10:44 am  

इस खेल हकीकत भी शायद ही सामने आये.....

राहुल पंडित 10 दिसंबर 2010 को 8:15 pm  

आगे-आगे देखिये होता है क्या...विश्व्यापी मुद्दे को सामने लाने के लिए धन्यवाद

दर्शन लाल बवेजा 10 दिसंबर 2010 को 9:11 pm  

विश्व्यापी मुद्दे को सामने लाने के लिए धन्यवाद

राज भाटिय़ा 10 दिसंबर 2010 को 9:14 pm  

देखे आगे क्या होता हे?????

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