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धार्मिक नेता के फतवे से महिला की मौत

>> 21 दिसंबर, 2010


 धार्मिक नेताओं को सजा देने या सुनाने का अधिकार कितना खतरनाक हो सकता है इसका ताजा उदहारण बंगला देश की इस घटना से मिल सकता है . बांग्लादेश के  मुस्लिम धार्मिक नेता  ने एक महिला को बेंत मारने की सजा दी जिसमें उसकी मौत हो गई. महिला पर शादी के बाहर संबंध बनाने का आरोप था. पुलिस के मुताबिक 50 साल की सूफिया बेगम पर अपने सौतेले बेटे के साथ संबंध बनाने का आरोप लगा. राजशाही जिले के एक गांव में धार्मिक नेता ने इस मामले की सुनवाई की और महिला को बेंत मारने की सजा सुनाई. इलाके के पुलिस प्रमुख अजीजुल हक सरकर ने बताया, "गांव के बुजुर्गों ने 10 बेंतों को एक साथ बांध दिया और महिला की टांगों पर मारा." स्थानीय मीडिया के मुताबिक 12 नवंबर को हुई इस घटना में सूफिया बेगम को 40 बेंत मारे गए. गांव के उन बुजुर्ग लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है जो घटना में शामिल रहे. सरकर ने बताया कि पिटाई के बाद सूफिया बेगम की तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां पिछले हफ्ते उनकी मौत हो गई. इस मामले में उनके भाई ने शिकायत दर्ज कराई है जिसके आधार पर जांच की जा रही है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बांग्लादेश के मुस्लिम बहुल ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर बेंत से मारने की सजा मिलना आम बात है. हालांकि देश के एक हाई कोर्ट ने धार्मिक सजाओं पर रोक लगा रखी है. कुछ मामलों में तो बलात्कार की शिकार हुईं महिलाओं को भी यह कहकर सजा दी गई कि वे शारीरिक संबंध का हिस्सा बनीं. जुलाई में बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने फतवे या धार्मिक आदेशों के जरिए सजा देने पर रोक लगा दी थी. बांग्लादेश की करीब 15 करोड़ आबादी में से 90 फीसदी मुस्लिम हैं और ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में रहते हैं.

 

8 टिप्पणियाँ:

Rahul Singh 21 दिसंबर 2010 को 5:48 am  

दुखद और चिंताजनक है यह आदिम पाशविक रवैया.

Swarajya karun 21 दिसंबर 2010 को 7:45 am  

ह्रदय विदारक ,अमानवीय और निंदनीय घटना .जानकारी देने के लिए आभार.

प्रवीण पाण्डेय 21 दिसंबर 2010 को 8:35 am  

दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण

बेनामी,  21 दिसंबर 2010 को 9:42 am  

किसी भी मनुष्य को अपने ही सामान मनुष्य को सजा देना का अधिकार नहीं है और इस तरह की अमानवीय और पाशविक सजा ! समाचार पढ़कर बहुत दुःख हुआ , जानकारी देने के लिए धन्यवाद
-अनिमेष जैन

कुमार राधारमण 21 दिसंबर 2010 को 12:26 pm  

इन नेताओं के साथ धार्मिक शब्द नहीं लगाया जाना चाहिए।

समयचक्र 21 दिसंबर 2010 को 7:19 pm  

बेहद दुखद वाकया है ... ..

Unknown 22 दिसंबर 2010 को 4:06 pm  

हृदयविदारक...क्या यह कोई धर्म सिखा सकता है?यह परमपिता परमेश्वर द्वारा बनाया गया पथ नहीं हो सकता.

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