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डा. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ महतारी को नौलखा पहनाया

>> 28 दिसंबर, 2011

 

छत्तीसगढ़
त्तीसगढ़ में 1 जनवरी 2012  से 9 नए जिलों के निर्माण की अधिसूचना जारी हो गई है . राज्य में अब जिलों की संख्या 18 से बढ़ कर 27 हो गई है . कभी यहाँ सिर्फ 7 जिले हुआ करते थे -- रायपुर,दुर्ग ,राजनांदगांव,बस्तर ,बिलासपुर, रायगढ एवं  सरगुजा . तब यह अविभाजित मध्यप्रदेश का हिस्सा था . 6 जुलाई 1998 को मध्यप्रदेश में 16 नए जिले बनाये गए जिसमें से 9 इस अंचल के थे . ये है  धमतरी,महासमुंद,कवर्धा, कांकेर,दंतेवाडा , कोरबा , जांजगीर-चांपा,जशपुर और कोरिया . छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय कुल 16 जिले थे .  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वर्ष 2007 में दो नये जिलों- बीजापुर और नारायणपुर का गठन किया था, जबकि इस वर्ष 2011 में उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नौ नये जिलों के निर्माण की घोषणा की है जिनमें बेमेतरा, बलौदाबाजार, बालोद, बलरामपुर, गरियाबंद, मुंगेली, सूरजपुर, कोण्डागांव और सुकमा शामिल हैं, जो उनकी घोषणा के अनुरूप ये जिले जनवरी 2012 से अस्तित्व में आ गए और प्रदेश में जिलों की संख्या 18 से बढ़कर 27 होगई है  .            

जहाँ तक रायपुर जिले का सवाल है लगभग 14 वर्षों बाद इस जिले का पुनः विभाजन हुआ है . 24 विकासखंडों एवं 20 विधानसभा क्षेत्रों में फैले इस जिले की गिनती कभी देश के वृहत जिलों में होती थी . 6 जुलाई 1998 को इस जिले को विभाजित कर  धमतरी एवं महासमुंद जिले का निर्माण किया गया . चार विकासखंडों--धमतरी,नगरी,कुरूद एवं मगरलोड को धमतरी जिले में  तथा पांच विकासखंडों- महासमुंद,बागबहरा,पिथौरा,बसना एवं सरायपाली को महासमुंद जिले में शामिल किया गया .जिले के तीन टुकड़े  होने के बावजूद भी पंद्रह विकासखंड अभनपुर,धरसीवां,तिल्दा,सिमगा,भाटापारा,बलौदाबाजार,पलारी,कसडोल,बिलाईगढ़,आरंग,फिंगेश्वर,छुरा,गरियाबंद,मैनपुर एवं देवभोग इस जिले में रह गए थे.

रायपुर जिले का नया आकार
 नए विभाजन में रायपुर जिले को पुनः तीन भागों में विभाजित किया गया है. जिले के पंद्रह विकास खण्डों में से  बलौदाबाजार ,  भाटापारा , सिमगा , पलारी , कसडोल एवं  बिलाईगढ़ को मिलाकर बलौदाबाजार तथा फिंगेश्वर,छुरा,गरियाबंद,मैनपुर एवं देवभोग को मिलाकर गरियाबंद जिले का निर्माण किया गया है .अब रायपुर जिले  में मात्र चार विकास खंड अभनपुर , आरंग ,धरसीवां एवं तिल्दा  ही शेष रह गए है . हालाँकि इसमें रायपुर शहर भी शामिल है जो धरसीवां विकासखंड का हिस्सा है . अब इस जिले का आकार काफी छोटा हो गया है . पहले कहाँ 24 विकासखंड और अब दूसरे विभाजन के बाद मात्र 4 विकासखंड रह गए है . जिलों के नए रेखांकन के बाद अब पुराना रायपुर जिला पांच भागों रायपुर,धमतरी,महासमुंद,बलौदाबाजार एवं गरियाबंद में विभाजित हो गया है . कभी ये पांच तहसील हुआ करते थे अब पांचों तहसील जिले का आकर ले चुके है  .

अभी देवभोग ब्लाक के तेल नदी के आगे के ग्रामीणों को लगभग 250 की.मी. की दूरी तय कर जिला मुख्यालय रायपुर आना पड़ता था अब उन्हें गरियाबंद आने के लिए मात्र  150 - 160 की.मी. की दूरी तय करनी पड़ेगी . इसी प्रकार बिलाईगढ़ ब्लाक के लोगों को बलौदाबाजार आने के लिए अधिकतम  125 की.मी. की दूरी तय करनी पड़ेगी .  इससे आम लोगों को काफी राहत मिलेगी ,वे आसानी से जिला मुख्यालय तक पहुँच सकेंगें .       
    
राज्य बनाने के बाद रायपुर जिले का विभाजन  प्रशासनिक दृष्टि से काफी लाजिमी हो गया था . राजधानी होने के कारण प्रशासनिक अमले का सारा ध्यान रायपुर में ही लगा रहता है , सुदूर के क्षेत्रों में प्रशासन की पकड़ मजबूत बनाने के लिए डा. रमन सरकार ने बेहतर निर्णय लिया है . नए जिलों के निर्माण से एक ओर जहाँ आम लोगों की अड़चने दूर होंगीं तो दूसरी ओर  सरकार को अपने विकास के दृष्टिकोण को अमलीजामा पहनाने में सुविधा होगी. सरकार की इस उपलब्धि को कई पीढ़ी तक याद किया जायेगा . मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने 9 नए जिलों का निर्माण कर  छत्तीसगढ़ महतारी को सबसे महंगे आभूषण नौलखा से विभूषित किया है .  
प्रखर समाचार में ग्राम चौपाल 





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एक अटल सितारा

>> 24 दिसंबर, 2011

छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता माननीय अटलबिहारी वाजपेयी का  राज्य निर्माण के बाद 28 जनवरी 2002 को पहली बार रायपुर आगमन हुआ तो उन्हें 36 लाख पुष्प  पंखुड़ियों की  माला से स्वागत किया गया . तस्वीर में स्वागत करते हुए दिखाई दे रहें है आज के मुख्यमंत्री डा.रमनसिंह ,तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री श्री रमेश बैस , श्री नंदकुमार साय  एवं अन्य पदाधिकारी . मैं उस समय  भाजपा के  जिलाध्यक्ष के दायित्व में था .

देश और दुनिया की राजनीतिक क्षितिज पर ध्रुव तारे की तरह अटल एक सितारा कोई है तो वह है हमारे अपने तथा देश के लाडले नेता माननीय अटलबिहारी वाजपेयी . वे देश के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं सर्वमान्य नेता है . एक ऐसे उदार नेता जिनकी कथनी और करनी  में कभी  अंतर नहीं रहा . वे देश के एक मात्र नेता है जो भाषण के जरिये लाखों लोंगों को घंटो तक बाँधें रखने की क्षमता रखते है . ह्रदय से अत्यंत ही भावुक लेकिन तेजस्वी  नेता माननीय अटलबिहारी वाजपेयी का आज 88 वां जन्म दिन है  . श्री वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर, 1924 को ग्वालियर (मध्यप्रदेश) में हुआ था. इनके पिता का नाम श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता का नाम श्रीमती कृष्णा देवी है.श्री वाजपेयी के पास 40 वर्षों से अधिक का एक लम्बा संसदीय अनुभव है. वे 1957 से सांसद रहे हैं. वे पांचवी, छठी और सातवीं लोकसभा तथा फिर दसवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं , तेरहवीं और चौदहवीं लोकसभा के लिए चुने गए और सन् 1962 तथा 1986 में राज्यसभा के सदस्य रहे.वे लखनऊ (उत्तरप्रदेश) से लगातार पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए. वे ऐसे अकेले सांसद हैं जो अलग-अलग समय पर चार विभिन्न राज्यों-उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश तथा दिल्ली से निर्वाचित हुए हैं.

 माननीय अटलबिहारी वाजपेयी को 88 वें जन्मदिन पर ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएं है .  

 

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भारत पाक युद्ध के चालीस साल

>> 20 दिसंबर, 2011



भारत-पाक युद्ध की तस्वीर ( गूगल से साभार ) 
भारत-पाक के बीच हुआ 1971 का युद्ध स्वतंत्र भारत के इतिहास में हमेशा अविस्मरनीय रहेगा . तब हम मात्र 14-15 साल के थे तथा हायर सेकेंडरी के छात्र थे . एक दिन स्कूल में सुबह प्रार्थना  ख़त्म होने के बाद प्राचार्य ने रुकने का संकेत दिया ; उनके हाथ में एक ट्रांजिस्टर था . उन्होंने ट्रांजिस्टर आँन किया और हम सबको भारत पाकिस्तान युद्ध की जानकारी दी . उन दिनों टेलीविजन नहीं पहुंचा था . युद्ध के समाचार रेडियो या अखबारों से ही मिलते थे . स्वाभाविक रूप से इस युद्ध की खबरों में हम सबकी दिलचस्पी रहती थी . भारतीय सैनिकों के शहीद होने , हताहत होने की खबर पाकर बड़ा क्रोध आता था . अखबारों में शहीदों के परिजनों व घायलों को आर्थिक मदद देने की खबरें भी प्रतिदिन भी छपती थी . हम सबने अपने स्कूल से भी सहायता राशि इकट्ठी कर प्रेषित किया था . सहायता राशि देने वालों के नाम अखबारों में भी छपते थे . एक दिन सारे विद्यार्थी चंदा इकट्ठा  करने  सड़क में चले गए तथा वाहनों को रोक रोक कर कुछ राशि एकत्रित की गई . यह खबर जब स्कूल तक पहुँचीं तब दूसरे दिन प्रार्थना के बाद  सबकी खूब खिचाई हुई थी , हमारी शहादत तो पहले से तय थी .    


खैर इस युद्ध को चार दशक पूरे हो चुके है .पाकिस्तान के खिलाफ इस जंग में  90 हजार से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था. उस समय भारतीय सेना की कमान फील्ड मार्शल जनरल मानेक शॉ जैसे अनुभवी व कुशल सेनानायक के हाथ में थी. वे राजनैतिक दबाव की परवाह किये बगैर  अपनी रणनीति पर डटे रहे  तथा  युद्ध में  90,000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को ढाका में युद्धबंदी बना कर, भारत को दुनिया के इतिहास में अभूतपूर्व  विजय दिलाई थी . फील्ड मार्शल जनरल मानेक शॉ का 27 जून 2008 को  निधन हो गया . वे बड़े ही साहसी कर्मवीर थे , वे जीवन से भले ही हार गए लेकिन जीवन में कभी हारना नहीं सीखा . वे इस  युद्ध के हीरो थे , उनका नेतृत्व काबिले तारीफ था.




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मानवता के पुजारी

>> 18 दिसंबर, 2011


बाबा गुरु घासीदास
        तनाम पंथ के संस्थापक बाबा गुरु घासीदास की आज 18 दिसंबर को जयन्ती है .पूरे छत्तीसगढ़ में उनके अनुयायी बड़े  धूमधाम से यह पर्व मनाते है. बाबा गुरु घासीदास एक अलौकिक एवं चमत्कारिक पुरुष थे . सत्य के प्रति उनकी अटूट आस्था की वजह से ही उन्होंने बचपन में ही कई चमत्कार दिखाए जिसका लोगों पर काफी प्रभाव पड़ा . इस प्रभाव के चलते भारी संख्या में लोग उनके अनुयायी हो गए .इस प्रकार छत्तीसगढ़ में सतनाम पंथ की स्थापना हुई .इस संप्रदाय के लोग बाबा गुरु घासीदास को अवतारी पुरुष के रूप में मानते है . बाबा का जन्म 18 दिसम्बर 1756 को रायपुर जिले के कसडोल ब्लाक के ग्राम गिरौदपुरी में हुआ था . उनकी माता का नाम अमरौतिन तथा पिता का नाम महंगुदास था . पिता महंगुदास भी अपने पुत्र की चमत्कारिक एवं अलौकिक घटनाओं से अचंभित थे . कालांतर में गुरु घासीदास का विवाह सिरपुर की सफुरा माता से हुआ.

          18 वीं सदी में छुआछूत तथा भेदभाव का काफी बोलबाला था, बाबा गुरु घासीदास इसके सख्त  विरोधी थे . वे मानवता के पुजारी तथा सामाजिक समरसता के प्रतीक थे . उनकी मान्यता थी - " मनखे मनखे एक हे ,मनखे के धर्म एक हे ". उन्होंने जीवन मूल्यों पर अधिक ध्यान दिया तथा लोगों को शराब व मांस के सेवन से मुक्ति दिलाई. बाबा गुरू घासीदास ने समाज को सत्य, अहिंसा, समानता, न्याय और भाईचारे के मार्ग पर चलने की सीख दी .बाबा ने असमानता को दूर करने के लिए गिरौदपुरी से कुछ ही दूर स्थित घनघोर जंगल के मध्य छाता पहाड़ पर औरा-धौरा पेड़ के नीचे बैठकर तपस्या की . उन्हें तपस्या अवधि में ही दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई. फलस्वरूप बाबाजी ने अपने दिव्य शक्ति से समाज में व्याप्त असमानताओं, रूढ़ियों तथा कुरीतियों को दूर कर समाज को एक नई दिशा दी. उन्होंने संपर्क में आने वाले हर जीव की आत्मा को शुद्ध किया. उनके उपदेश से लोग अंधकार से प्रकाश की ओर, दुष्कर्म से सद्कर्म की ओर तथा असत्य से सत्य की ओर जाने के लिए प्रेरित हुए .उन्होंने समाज के प्रचलित कर्मकांडों, आडंबरों तथा जाति प्रथा का विरोध किया. गुरू घासीदासजी ने मद्यपान,मांस-भक्षण,ध्रुम्रपान तथा पशुबलि का विरोध किया . उन्होंने अपने जीवन काल में स्त्रियों की दशा सुधारने और समाज के नैतिक मूल्यों में सुधार लाने का विशेष प्रयास किया. गुरू घासीदास जी के उपदेश से समाज में सत्य, अहिंसा, करूणा,दया,क्षमा,एकता,प्रेम,परोपकार और सम्मान की भावना  विकसित हुई . छत्तीसगढ़ के जनजीवन में आज भी बाबा गुरु घासीदास के विचारों की छाप स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है .

          बाबा गुरु घासीदास के विचारों से प्रेरणा लेकर मैंने 18 दिसंबर 2007 को उनकी जयन्ती के अवसर पर " नशा हे ख़राब : झंन पीहू शराब " का नारा देते हुए  नशामुक्ति आन्दोलन की शुरुवात की थी. इस आन्दोलन से सम्बंधित पोस्ट आप " ग्राम-चौपाल " में 24 जून 2010 के अंक में पढ़ सकते है .
 

बाबा गुरू घासीदास की  जयन्ती के अवसर  पर सतनामी  संप्रदाय के सभी बहनों और भाइयों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !



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प्रयोगशाला में सृष्टि की तलाश

>> 14 दिसंबर, 2011



सर्न की विशाल भौतिक  प्रयोगशाला
सृष्टि हम सबके लिए एक पहेली है . वैज्ञानिक बरसों से इस पहेली को बुझने का प्रयास कर रहे है . "सर्न " के वैज्ञानिकों ने सृष्टि की उत्पत्ति करने वाले बिंदु को ढूंढ़ निकालने का दावा किया है .  स्विट्जरलैंड स्थित दुनिया की सबसे बड़ी भौतिक  प्रयोगशाला " सर्न  " में  बरसों से  इस बिंदु जिसे हिग्स बोसोन या गॉड पार्टिकल कहा जाता है की खोज की जा रही है . मजे की बात तो यह है कि सृष्टि की तलाश में हजारों वैज्ञानिकों के साथ भारत की महिला वैज्ञानिक डा. अर्चना शर्मा भी जुटी हुई है .  उन्होंने  सृष्टि के नजदीक पहुँचने का दावा करते हुए कहा है कि  हम भूंसे के खलिहान में सुई की तलाश कर रहे है .डा. शर्मा के मुताबिक हम  गॉड पार्टिकल के नजदीक जरुर पहुँच गए है लेकिन उसे पूरी तरह खोजने में साल भर और लग सकता है . यदि वैज्ञानिक  इसे खोज निकालने में सफल हो जाते है तो यह शताब्दी की सबसे बड़ी वैज्ञानिक सफलता मानी जायेगी अन्यथा यह पहेली केवल पहेली बन कर रह जायेगी . 

 

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पांडव नृत्य और जीवन का चक्रव्यूह

>> 04 दिसंबर, 2011

द्रोणाचार्य का चक्रव्यूह 
त्तराखंड में इन दिनों कड़ाके की ठण्ड पर रही है ,यहाँ का  न्यूनतम तापमान 4  डिग्री सेंटीग्रेट हो गया है .यदि तापमान गिरने का सिलसिला यूँ ही चलता रहा तो 8-10  दिनों में शून्य डिग्री तक पहुँच जायेगा . यहाँ रात बहुत बड़ी तथा दिन बहुत छोटा है . सुबह 8 बजे के बाद सूर्योदय होता है तथा शाम 5 बजे सूर्यास्त होता है . सुबह 11 बजे तक लोग रजाई में जकड़े रहते है . कार्य की दृष्टि से सुबह 11 बजे से 3 बजे तक ही समय रहता है . यानी केवल 4 घंटे का दिन होता है .

पर्वतीय क्षेत्रों के सीढ़ीदार खेत 
वैसे भी इन दिनों उत्तराखंड के लोग कमोबेस खाली ही  रहते है . रुद्रप्रयाग जहाँ मै पिछले एक सप्ताह से रुका हूँ पूरा इलाका तीर्थाटन व पर्यटन क्षेत्र है .यहाँ से केदारनाथ लगभग 100  कि.मी. , बद्रीनाथ-180 कि.मी. , कर्णप्रयाग-35 कि.मी., जोशीमठ-125 कि.मी.एवं गुप्तकाशी-40 कि.मी. दूरी पर है .केदारनाथ और बद्रीनाथ के पट मई में खुलते है और नवंबर में बंद हो जाते है . पट खुलते ही श्रद्धालूओं व सैलानियों के आने जाने का सिलसिला शुरू हो जाता है .इस मौसम में  तो बिरले लोग ही इधर आते है . अधिकांश लोगों की आजीविका इसी से जुड़ी है . इसके अलावा यहाँ आजीविका का मुख्य साधन कृषि है . धान , दलहन व तिलहन के फसल की कटाई हो चुकी है . किसानों ने गेहूं की बुवाई कर ली है , किन्ही किन्हीं खेतों में गेहूं के पौधें २-3 इंच ऊग आये है . इधर के खेत पहाड़ों के ऊपर छोटे छोटे व सीढ़ीनुमा होते है . सिचाई के साधन नहीं के बराबर है ,बरसात के अलावा पहाड़ों की ऊपरी सतह से झरते हुए जल के भरोसे ही रहना पड़ता है .  यह विडम्बना ही है कि इस इलाके में जीवनदायिनी गंगा की अनेक सहायक नदियाँ बारहों महीनें बहती है फिर भी यहाँ की खेती प्यासी है , किसानों के खेत सूखे है . यदि नदियों के जल का उदवहन कर खेतों तक पहुँचाया जाय तो कृषि के क्षेत्र में काफी उन्नति हो सकती है . बताया जा रहा है कि प्रदेश की खंडूरी सरकार ने लिफ्ट इरीगेशन की कुछ परियोजनाएं स्वीकृत की है ,  कुछ के काम भी शुरू हो गए है . वैसे नदी के जल से अनेक जल-विद्युत् परियोजनाएं संचालित हो रही है . जिसका विरोध गंगा बचाओ अभियान वाले कर रहें है हालाँकि इस इलाके में नदी के जल-प्रदुषण की बड़ी समस्या नहीं है .

 वैवाहिक कार्यक्रमों का जोर

जयमाला 
आजकल लोगों के पास काम कम है . शायद इसीलिये इस मौसम में शादियों का रिवाज है ,अमूमन शादियाँ दिन में ही होती है . चारोँ तरफ शादियों की धूम मची है . हमें भी एक कार्यकर्ता की लड़की की शादी में यहाँ के पदाधिकारियों के साथ शामिल होने का सौभाग्य मिला . कार्यालय से लगभग 1 कि.मी. ऊपर पहाड़ पर पैदल चलकर जाना पड़ा . स्थानीय लोग तो पहाड़ पर आसानी से चढ़ गए लेकिन हमारी तो स्वांस ही फुल गई , दो बार मेरे कारण पूरे काफिले को रूकना पड़ा . विवाह स्थल पर पहुंचें तो बारात पहले ही आ चुकी थी . मंच पर वर-वधु जयमाला हाथ में लिए संकेत का इंतजार कर रहे थे . जैसे ही वीडियोंग्राफर और फोटोग्राफर अपनी पोजीशन में आये दोनों ने एक दूसरे के गले में जयमाला डाल दी . फिर शुरू हुआ बधाई देने का सिलसिला . उसी समय लड़की की माँ ने जो भाजपा की कार्यकर्ता है हम सबको एक एक लिफाफा दिया . उसमें 10 रुपये का एक नया नोट था .मैंने उस लिफाफे में एक सौ का नोट डाला और वापिस कर दिया . दोपहर का भोजन भी वहीं करके वापस आ गए.

 पांडव-नृत्य

चक्रव्यूह की ओर रथ बढ़ते अभिमन्यु
गाँव गाँव में इन दिनों पांडव नृत्य का जोर है . कड़कड़ाती ठण्ड के बावजूद यह कार्यक्रम लगातार 20 - 25 दिनों  तक रात-दिन चलता है . अंतिम दिनों में पांडवों के स्वर्गारोहण का मंचन किया जाता है . रुद्रप्रयाग से लगभग 20 कि.मी. दूरी पर ग्राम " नारी " के पांडव नृत्य कार्यक्रम में हमें भी जाने का अवसर मिला ,यह गाँव केदार नाथ विधान सभा क्षेत्र में है . मेरे साथ जिलाध्यक्ष श्री वाचस्पति सेमवाल ,क्षेत्रीय विधायक श्रीमती आशा नौटियाल एवं अन्य  पदाधिकारी भी थे. रुद्रप्रयाग से सड़क के रास्ते हम लोग दोपहर 12  बजे सतेराखाल पहुंचें जहाँ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने ढोल मंजिरें के साथ स्वागत किया . वहां से लगभग 1 कि.मी.  पैदल खेतों के मेड़ों और पगडंडियों से होकर नीचे गए जहाँ एक खेत को समतल करके चक्रव्यूह बनाया गया था .  चारों तरफ लोगों का हुजूम लगा था . लोग दूर दूर से पैदल चलकर आये थे . एक किनारे में कुछ छोटी छोटी दुकाने लगी थी .पूरे मेले का दृश्य दृष्टिगोचर हो रहा था . स्वागत की रस्म अदायगी के बाद हम लोग एक स्थान पर बैठ गए . सबसे पहले सावधान सावधान की हुंकार भरते हुए कौरवों दल का आगमन हुआ . कौरव दल का नेतृत्व गुरु द्रोणाचार्य कर रहे थे . द्रोणाचार्य ने एक एक करके सभी महारथियों को चक्रव्यूह के एक एक द्वार का जिम्मा दिया . कुछ ही देर में अभिमन्यु अपने साथियों के साथ पहुचे , अभिमन्यु को एक खाट में बैठा कर लाया गया . लगभग 10 - 12 नवजवान खाट को चारों तरफ से उठाये हुए थे . जैसे ही वे मंच के पास आये अभिमन्यु ने चार फीट उचाई से छलांग लगा कर चक्रव्यूह के प्रथम द्वार पर पहरा दे रहे जयद्रथ को ललकारा . जयद्रथ भी कहाँ चुकने वाला था उसने भी अपने अन्य साथियों को सावधान होने का संकेत दिया और अभिमन्यु से जा भिड़ा . दोनों तरफ से डायलाग हुए . अभिमन्यु जब कोई डायलाग बोलता था तब वहां उपस्थित 5 हजार लोग ताली बजाकर स्वागत करते थे .दोनों में पहले वाक-युद्ध फिर तीर-युद्ध उसके बाद गदा-युद्ध हुआ. अंत में मल-युद्ध में जयद्रथ मूर्छित हो गया .अभिमन्यु ने पहली फतह हासिल करने के बाद दूसरे द्वार की ओर रूखसत किया और हम लोग पास ही में स्थित एक प्राचीन मंदिर में माँ चंडी का दर्शन करके बिदा हो गए .


पांडव नृत्य की ओर बढ़ता कारवां

जयद्रथ और अभिमन्यु के युद्ध को मंच से निहारते अतिथि
गाँव के गणमान्य नागरिक अतिथियों का स्वागत करते हुए

www.ashokbajajcg.com

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रुद्रप्रयाग : अलकनंदा तथा मंदाकिनी नदियों का संगमस्थल

>> 29 नवंबर, 2011





रुद्रप्रयाग :  अलकनंदा तथा मंदाकिनी नदियों का संगमस्थल

 इन दिनों कुछ मित्रों के साथ उत्तराखंड की राजनैतिक यात्रा पर हूँ . यह भारत की देवभूमि है . कदम कदम पर यहाँ दर्शनीय स्थल है .गढ़वाल अंचल के रुद्रप्रयाग में हमारा केम्प है .यहाँ पर मन्दाकिनी नदी अलकनंदा नदी में मिलती है . दोनों नदियाँ पहाड़ को चीरती हुई यहाँ पर मिलती है . यह नदी  आगे भागीरथी नदी से मिलकर गंगा नदी कहलाती है .गंगा नदी पर आगे लिखने का अवसर ढूंढूंगा .आज तो रुद्रप्रयाग पर ध्यान आकर्षित कर कहा हूँ .रुद्रप्रयाग उत्तरांचल राज्य के रुद्रप्रयाग जिले का मुख्यालय है ,यह नगर पालिका है.रुद्रप्रयाग अलकनंदा तथा मंदाकिनी नदियों का संगमस्थल है . यहाँ से अलकनंदा देवप्रयाग में जाकर भागीरथी से मिलती है तथा गंगा नदी का रूप ले लेती है .प्रसिद्ध धर्मस्थल केदारनाथ धाम रुद्रप्रयाग से मात्र 86 की.मी. दूर है . भगवान शिव के नाम पर रूद्रप्रयाग का नामकरण हुआ है. रूद्रप्रयाग श्रीनगर (गढ़वाल) से 34 किलोमीटर ऊपर स्थित है .

मंदाकिनी और अलखनंदा नदियों के संगम का नजारा बहुत ही अदभूत है .यह बहुत ही रमणीय स्थल है . इसकी सुन्दरता का वर्णन शब्दों में कर पाना संभव भी नहीं है . दोनों नदियाँ बहुत उचाई से बहते हुए जब रुद्रप्रयाग में मिलती है तो दोनों के मिलने से मधुर ध्वनी का गुंजायमान होता है . ऐसा माना जाता है कि यहां नारद मुनि ने भगवान शिव की उपासना की थी तब नारद जी को आर्शीवाद देने के लिए ही भगवान शिव ने रौद्र रूप में अवतार लिया था . रौद्र शब्द कालांतर में रूद्र हो गया
इन दिनों यहाँ कड़ाके की ठण्ड  है ,दिन तो जैसे तैसे कट जाता है लेकिन रात का तापमान काफी गिर कर १२ से. हो जाता है. सुबह  की ठण्ड का सामना  छत्तीसगढ़ जैसे गर्म इलाके के लोग  कैसे कर पाते होंगे आप अनुमान लगा सकते है .  

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क्या बच पायेगा हिमालय का ग्लेशियर ?

>> 21 नवंबर, 2011

ग्लेशियर बचाने भारत ,भूटान, नेपाल और बांग्लादेश का संयुक्त मोर्चा 
 एवरेस्ट 
वैज्ञानिक रूप से यह बात अब प्रमाणित हो चुकी है कि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम चक्र में आश्चर्यजनक ढंग से आये परिवर्तन के कारण हिमालय का बर्फ तेजी से पिघल रहा है. इन क्षेत्रों में बरसात की प्रकृति बदल गई है और हिमालय के आस पास बढ़ता तापमान स्थानीय लोगों और वन्य जीवन पर असर डाल रहा है. हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले बुजुर्ग जलवायु परिवर्तन के साक्षात गवाह है . हिमालय के ग्लेशियर प्रकृति के धरोहर है ,यदि ये ग्लेशियर यूँ ही पिघलते रहे तो जन-जीवन पर व्यापक असर होगा .

भारत ,भूटान, नेपाल और बांग्लादेश ने संयुक्त रूप से इस गंभीर समस्या के निदान के लिए प्रयास शुरू किया है . चारों पड़ोसी देश ऊर्जा, पानी, खाद्य और जैव विविधता के मुद्दों पर सहयोग के लिए वचनबद्ध हो गए हैं. वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ.) के मुताबिक भूटान की राजधानी थिम्पू में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. समझौते के तहत ऐसी योजनाएं बनाने पर सहमति बनी है जो जलवायु परिवर्तन के अनुरूप हिमालय को बचाने में मददगार हों.  "क्लाइमेट सम्मिट फॉर लिविंग हिमालयाज" के नाम से दो दिन तक चले सम्मेलन के बाद भारत, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश के बीच  समझौता हुआ ;चारोँ देशों में हिमालयी क्षेत्र में वन्य जीव संरक्षण को बढ़ावा देने, वनों को बचाने , खाद्य और पानी की आपूर्ति को बचाए रखने पर सहमति बनी है.

इस समझौते के तहत कार्य योजना बनाने और उसके क्रियान्वयन  में यदि चारोँ देश गंभीरता से जुट गए तो हिमालय के ग्लेशियर को बचाने  कुछ हद तक कामयाबी मिल सकती है . यह प्रयास दुनिया के अन्य देशों के लिए भी मिशाल बनेगा .

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हिंद महासागर में मिला गोंडवाना-लैंड

>> 18 नवंबर, 2011

वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर में जलमग्न दो द्वीपों का पता लगाने का दावा किया है। बताया गया है कि ये किसी जमाने में भारत और ऑस्ट्रेलिया के भूखंडों का हिस्सा थे। ये डूबे द्वीप दुनिया के मौजूदा नक्शे का रहस्य खोल सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया से पश्चिम में करीब 1,600 किलोमीटर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा में दो द्वीपों का पता चला। पिछले महीने मिले इन द्वीपों की चट्टानों में उथले जल में पाए जाने वाले जीवों के जीवाश्म मिले हैं। सिडनी यूनिवर्सिटी की जो विटटेकर के मुताबिक इससे पता चलता है कि ये द्वीप समुद्र के भीतर की ज्वालामुखीय क्रियाओं ने नहीं बनाए बल्कि ये महाद्वीप का हिस्सा रहे होंगे।

महत्वपूर्ण खोज : 
विटटेकर इस खोज को उत्साहजनक बताती हैं क्योंकि इससे पता चल सकता है कि कैसे आठ से 13 करोड़ साल पहले गोंडवाना के टूटने से ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका और भारत का निर्माण हुआ। इस रिसर्च के मुख्य वैज्ञानिकों में शामिल विटटेकर बताती हैं कि उनकी दिलचस्पी खासतौर पर भारत के पहले उत्तर पश्चिम और फिर एकदम उत्तर की ओर खिसक जाने में है, जहां भारत का उत्तर पूर्वी तट कभी ऑस्ट्रेलिया से जुड़ा हुआ था। लेकिन बाद में भारत अलग हुआ और यूरेशिया से इतनी जोर से टकराया कि हिमालय का निर्माण हुआ।

विटटेकर कहती हैं, 'हमें इस का काफी सही अंदाजा है कि वे महाद्वीप कहां थे लेकिन हमें सटीक जानकारी नहीं है। टेक्टोनिक्स के मामले में पूर्वी हिंद महासागर सबसे कम खंगाले गए इलाकों में से है। नई रिसर्च से हमें प्लेटों की गतिशीलता का पता चलेगा जिसकी वजह से भारत ऑस्ट्रेलिया से दूर होता है और यूरेशिया में टकराने की ओर बढ़ता है।'

कैसे बने होंगे ये द्वीप :
ये द्वीप समुद्र तल से करीब दो हजार मीटर नीचे हैं। उनकी चोटी से रेतीले पत्थरों और ग्रेनाइट की चट्टानों के नमूने लिए गए हैं। उनकी उम्र का पता लगाया जाना अभी बाकी है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि उनकी उम्र एक अरब साल तक हो सकती है। इन चट्टानों की तुलना ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट से की जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि द्वीप कहां से टूटे। भारत के साथ इस तरह की तुलना संभव नहीं है क्योंकि जहां से टूट हुई होगी, वह तट अब कहीं हिमालय में खो चुका है। भारत का पूर्वी तट कभी वहां हुआ करता था जहां आज अंटार्कटिका है।

विटटेकर कहती हैं कि महाद्वीपों का अलग होना कुछ ऐसा रहा होगा जैसे किसी चिपचिपी चीज को खींचा जाए। ऐसे में कुछ टुकड़े बच गए। इन टुकड़ों की मोटाई सामान्य से काफी कम है। उन्होंने बताया, 'लगभग स्कॉटलैंड के आकार के ये टुकड़े शायद उतने मोटे नहीं रहे होंगे जितने महाद्वीप थे। इसलिए वे पानी में नीचे बैठ गए।'

विटटेकर उम्मीद कर रही हैं कि उन्हें कुछ बहुत अच्छे नमूने और स्पष्ट महाद्वीपीय चट्टानें मिल जाएंगी जिनसे पता चलेगा कि ये द्वीप असल में गोंडवाना के हिस्से हैं।

प्लेट टेक्टोनिक सिद्धांत ज्यादा पुराना नहीं है। यह 1950 में संपादित हुआ। विटटेकर बताती हैं कि अभी भी विशेषज्ञ यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि किस वजह से द्वीप एक दूसरे से अलग होकर अलग-अलग दिशाओं में बहने लगे। ऑस्ट्रेलिया लगभग सात सेंटीमीटर सालाना की रफ्तार से उत्तर की ओर बढ़ रहा था। दूसरी तरफ अंटार्कटिका स्थिर था और बिल्कुल नहीं हिल रहा था।


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तिहाड़ में खुली लाटरी

>> 16 नवंबर, 2011

तिहाड़ जेल से अगले छह माह के अन्दर रिहा होने वाले कैदियों की लाटरी खुल गई है . देश की कई नामी गिरामी कंपनियों ने शानदार पैकेज  के साथ 80 कैदियों को नौकरी का लेटर थमाया है जिनमे 10 महिला कैदी भी शामिल है .कंपनियों ने बेहतर कार्यक्षमता वाले कैदियों को  वेतन देने में काफी उदारता दिखाई है और तीन कैदियों को छह-छह लाख रुपए के वार्षिक पैकेज पर रखा है. तिहाड़ में प्लेसमेंट के लिए पहुंचे विभिन्न  कंपनियों के प्रतिनिधियों के समक्ष 90 कैदियों ने आवेदन किया  जिसमें से 80 को नौकरी दी गई.आवेदन करने वाली सभी 10 महिला कैदियों  को रोजगार दिया गया. महिला कैदियों का पैकेज भी दो लाख से पांच लाख रुपए सालाना का रखा गया है.

कैदियों को छह लाख रुपए तक का पैकेज देकर रिकॉर्ड बनाने वाली कंपनी का नाम मिलेनियम बिल्डर्स है .जिस कैदी को 6 लाख रुपये साल का पैकेज मिला है ,  उसे  अपहरण के एक मामले में सेशन कोर्ट से उम्र-कैद की सजा मिली हुई है अभी हाई कोर्ट में उसकी अपील विचाराधीन है. यूपी के उस युवक ने  कानपुर युनिवर्सिटी से बीए की थी . जेल में रहते हुए वह टूरिज़म मैनेजमेंट में मास्टर्स और सोशल वर्क में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा कोर्स कर रहा है. वह दोनों कोर्स जेल में ही बने इग्नू के सेंटर से कर रहा है.उसने कंप्यूटर में भी कई पीजी और डिप्लोमा कोर्स कर रखे हैं.

जेल में रहते हुए अच्छी नौकरी मिल जाने से निश्चित रूप से वह  प्रसन्न होगा .यदि वह जेल से छूट कर अच्छे काम में लग जाता है तो यह अच्छी बात है . अपने पूर्व के अपराधों के पश्चाताप स्वरूप उसे नई पीढ़ी को अपराध की दुनिया से दूर रहने के लिए प्रेरित करना चाहिए .
 
 
 


 

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सहकारिता यानी " सब के लिए एक और एक के लिए सब "

>> 13 नवंबर, 2011


सहकारिता का सप्तरंगी ध्वज
आज देश के प्रथम प्रधान मंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिन है .हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज के दिन को बाल दिवस के रूप में मनाया गया . सहकारी आन्दोलन के प्रति पं. नेहरू के योगदान के मद्देनजर प्रति वर्ष 14 नवंबर से 20 नवंबर तक सहकारी  सप्ताह मनाया जाता है . सहकारी संस्थाओं द्वारा गोष्ठी, प्रदर्शनी व सभा -सम्मलेन के माध्यम से सहकारी आन्दोलन का प्रचार प्रसार किया जाता है .

वास्तव में सहकारिता मनुष्य के सर्वांगीण विकास का सर्वोत्तम माध्यम है , यह आम आदमी को आर्थिक रूप से सक्षम बनाता है . जिस देश में सहकारी आन्दोलन मजबूत होगा उस देश की आर्थिक हालत भी मजबूत होगी . अतः देश के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए सहकारी आन्दोलन को सुदृढ़ बनाना अति आवश्यक है .  सहकारिता के प्रति जन विश्वास को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सहकारिता से जुड़ी संस्थाओं और इससे जुड़े लोगों कोकाफी मेहनत की जरुरत है .


सहकारिता की मूल भावना है " सब के लिए एक और एक के लिए सब " . इसी मूल भावना को जमीनी स्तर पर ले जाना होगा .सहकारिता हमें पारस्परिक सहयोग के आधार पर स्वावलंबन  एवं आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर प्रदान करता है .

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कार्तिक पूर्णिमा, प्रकाश उत्सव एवं 11/11/11 का महासंयोग

>> 10 नवंबर, 2011


   
11/11/11  का महासंयोग
                      
ज कार्तिक पूर्णिमा  एवं प्रकाश पर्व  है और कल  यानी 11 नवंबर 2011 को एक के अंक की छः  आवृत्तियां 11.11.11 एक साथ है . है ना यह  दुर्लभ संयोग ? ऐसा दुर्लभ संयोग सौ साल में एक बार आता है . इस वर्ष 2011 में यह दुर्लभ संयोग चौथी बार आया है . पहली बार  1 जनवरी 2011 को एक की चार आवृत्तियां 1.1.11 एक साथ थी . दूसरी बार 11 जनवरी को जब पांच आवृत्तियां 11.1.11 एक साथ थी .  तीसरी बार यह दुर्लभ संयोग आया 1.11.11  को और चौथी बार कल यानी  11.11.11 को अंकीय संयोग आया है . इस दिन  11.11.11 को घड़ी का कांटा 11 बज कर 11 मिनट और 11 सेकण्ड पर आएगा तब यह अंकीय महा संयोग होगा . अवश्य आप इस वक्त को अविस्मरनीय बनाने की जुगत में होंगें .

कार्तिक पूर्णिमा
भारतीय संस्कृति में कार्तिक मास की पूर्णिमा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक माहात्म्य है. दीपावली, यम द्वितीया और गोवर्धनपूजा के अलावा इस मास के सांस्कृतिक पर्वो में यह पर्व असीम आस्था का संचार करता है. वर्ष के बारह महीनों में पंद्रह पूर्णिमाएं होती हैं. जब अधिक मास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 16 हो जाती है परन्तु कार्तिक मास की पूर्णिमा का  धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व है. इसे त्रिपुरी पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है. 

इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे.ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है. इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान तथा दीपदान की प्राचीन परम्परा है. इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फल   मिलता है.

प्रकाश उत्सव 
कार्तिक पूर्णिमा के दिन  सिखों के प्रथम  गुरू गुरूनानक देवजी का  जन्मोत्सव  प्रकाश उत्सव के रूप में मनाया जाता है . गुरु नानक देवजी का प्रकाश (जन्म) 15 अप्रैल 1469 ई. (वैशाख सुदी 3, संवत्‌ 1526 विक्रमी) में तलवंडी रायभोय नामक स्थान पर हुआ था . सुविधा की दृष्टि से गुरु नानक का प्रकाश उत्सव कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है. तलवंडी अब ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है. तलवंडी पाकिस्तान के लाहौर से 30 मील दक्षिण-पश्चिम में स्थित है.
 

जीती नौखंड मेदनी सतिनाम दा चक्र चलाया
भया आनंद जगत बिच कल तारण गुरू नानक आया

कार्तिक पूर्णिमा एवं प्रकाश उत्सव  की आपको हार्दिक  बधाई एवं शुभकामनाएं !

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पारम्परिक दिवाली ग्रीटिंग कार्ड की भीड़ में नवाचार

>> 07 नवंबर, 2011


प्रयोगधर्मी शुभकामनाएं

स वर्ष की दिवाली ग्रीटिंग में हमने छत्तीसगढ़ में राम वन गमन मार्ग को प्रदर्शित नक़्शे को प्रकाशित किया था ; जिसे ईष्ट मित्रों से काफी प्रशंसा तो मिली ही पर हमारा मिशन तब और सार्थक हो गया जब छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय हिंदी दैनिक नवभारत ने 6 नवंबर 2011 के CG 04 में प्रकाशित करते हुए लिखा है कि ..........

" दीपावली में सुन्दर बधाई संदेशों की भरमार रहती है .इनमें ऐसे सन्देश लेकिन कम ही दिखाई पड़ते है जिनमें कोई नवाचार हो. छत्तीसगढ़ स्टेट हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष अशोक बजाज इस मोर्चे में कुछ आगे निकल गए है.  उनका कार्ड पारम्परिक कार्ड्स की भीड़ में अलग है. छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम कहाँ से कहाँ होते गुजरे इसे उन्होंने दिखाया है. शोध की दृष्टि से एवं सामान्य जिज्ञासा, दोनों के नजरिये से प्रभावकारी है. संग्रहण के नजरिये से भी इस कार्ड की अहमियत है . "


नवभारत रायपुर 6/11/2011
मूल दिवाली ग्रीटिंग कार्ड


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देवउठनी यानी छोटी दिवाली

>> 05 नवंबर, 2011

ज  कार्तिक शुक्ल एकादशी है यानी  देवउठनी एकादशी  है. ऎसी मान्यता है कि आषाढ शुक्ल एकादशी   से सोये हुये देवताओं के जागने का यह दिन है .  देवताओं के जागते ही  समस्त प्रकार के शुभ कार्य करने का सिलसिला शुरू हो जाता है .

इसी दिन तुलसी और शालिग्राम के विवाह की भी प्रथा है। यह दिन मुहूर्त में विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह पूरे वर्ष में प़डने वाले अबूझ मुहूर्तो में से एक है. किसी भी शुभ कार्य को आज के दिन आँख मुंद कर प्रारंभ किया जा सकता है . यानी  मुहूर्त देखने की जरुरत नहीं रहती .  भगवान विष्णु को चार मास की योग-निद्रा से जगाने के लिए घण्टा ,शंख,मृदंग आदि वाद्य यंत्रों  की मांगलिक ध्वनि के साथ इस  श्लोक का वाचन किया जाता है ---

     उत्तिष्ठोत्तिष्ठगोविन्द त्यजनिद्रांजगत्पते।       
त्वयिसुप्तेजगन्नाथ जगत् सुप्तमिदंभवेत्॥
    उत्तिष्ठोत्तिष्ठवाराह दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।
  हिरण्याक्षप्राणघातिन्त्रैलोक्येमङ्गलम्कुरु॥
 
 
 
किसानों की गन्ने की फसल भी तैयार है ,आज के दिन गन्ने की पूजा करके उसका उपभोग किया जाता है ; नए ज़माने के लोग इस परिपाटी को तोड़ चुकें है . देश में आज के दिन को छोटी दिवाली के रूप में भी मनातें है , कहने का तात्पर्य है कि आज भी पटाखों ,फुलझड़ियों एवं मिठाइयों का दौर चलेगा .

आप सबको देवउठनी के पावन पर्व पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !   

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एक और एक ग्यारह ; छत्तीसगढ़ इलेवन

>> 01 नवंबर, 2011

         आज 1 नवंबर 2011 है और आज एक के अंक की पांच आवृत्तियां एक साथ है . इस वर्ष 2011 में यह दुर्लभ संयोग तीसरी बार आया है . पहली बार  1 जनवरी 2011 को एक की चार आवृत्तियां 1.1.11 एक साथ थी . दूसरी बार 11 जनवरी को जब पांच आवृत्तियां 11.1.11 एक साथ थी . अब 1 नवंबर को तीसरी बार एक के अंक का यह दुर्लभ संयोग आया है . दस दिन बाद पुनः एक दुर्लभ संयोग आने वाला है . 11.11.11 को अंकीय संयोग इस साल चौंका और एक का अंक छक्का मारेगा . ऐसा दुर्लभ संयोग सौ साल में देखने को मिलता  है .

                छत्तीसगढ़ भी आज अपने निर्माण के 11 साल पूरे कर रहा है . तत्कालीन प्रधानमंत्री माननीय अटलबिहारी वाजपेयी ने पूरे मनोयोग से 1.11.2000 को छत्तीसगढ़ ,उत्तराखंड और झारखण्ड का निर्माण किया था . तीनों नवोदित राज्य आज विकास की दिशा में तेजी से दौड़ रहे है लेकिन छत्तीसगढ़ सबसे तेज है . मध्यप्रदेश का छत्तीसगढ़ अंचल अब छत्तीसगढ़ इलेवन हो गया है . एक और एक ग्यारह होते है इस कहावत को छत्तीसगढ़ सरकार  ने चरितार्थ करते हुए मिलजुल कर शांति और विकास की दिशा में जनता के साथ कदमताल मिलाया है .
आप सबको छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की  11 वीं वर्षगांठ की हार्दिक बधाई  .

जय जोहार  : जय छत्तीसगढ़   

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दिवाली में राम वन गमन मार्ग एवं हाईटेक पटाखें

>> 23 अक्तूबर, 2011


 
दीपावली के अवसर पर पटाखों के प्रदुषण की चिंता बहुत लोगों को रहती है . पिछली दिवाली में भी मैनें पर्यावरण रक्षा की अपील की थी , जिसका काफी असर हुआ था .  इस बार भी हम आपके लिए प्रदुषण मुक्त पटाखे ढूंढ़ कर लाये है . आप इन पटाखों का इस्तेमाल करें और घर के बच्चों को भी प्रेरित करें . इन पटाखों से बच्चों को दिवाली का पूरा आनंद तो मिलेगा ही साथ ही साथ पर्यावरण की भी रक्षा होगी . तो अब शुरू हो जाइये और अपने मनपसंद पटाखे पर क्लिक कीजिये . कैसा लगा यह बताना ना भूलें .

(3)   अनार




इस बार दिवाली ग्रीटिंग कार्ड में हमने भगवान श्री रामचंद्र जी के वन गमन मार्ग को रेखांकित करने वाला नक्शा प्रकाशित किया है . यह नक्शा छत्तीसगढ़ में राम वन मार्ग शोध दल ने काफी मेहनत के बाद  जारी किया है .




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सुरक्षा परिषद् बनेगा अखाड़ा

>> 22 अक्तूबर, 2011

भारत संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य बन गया हैं.भारत  के अलावा  पाकिस्तान  मोरोक्को, ग्वातेमाला और टोगो को भी अस्थाई सदस्य चुन लिया गया है.


संयुक्त राष्ट्र में दो साल के लिए पांच सदस्य चुने जाने हेतु मतदान हुआ था. सुरक्षा परिषद में पांच स्थाई सदस्यों के अलावा दस अस्थाई सदस्य होते हैं. इन दस में से पांच के लिए हर वर्ष चुनाव होता है. हर अस्थाई सदस्य दो वर्ष के लिए सुरक्षा परिषद का हिस्सा बनता है.


पाकिस्तान  के सुरक्षा परिषद के  अस्थाई सदस्य बनने से यह संभावना बढ़ गई है कि पाकिस्तान  कश्मीर  संबंधी  विवाद  के लिए  सुरक्षा परिषद् को अखाड़ा बनाने का प्रयास करेगा .


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सैन्य बलों में ईंधन के बेतहाशा इस्तेमाल का दुष्प्रभाव

>> 20 अक्तूबर, 2011

लंदन में हुई विशेषज्ञों की एक कांफ़्रेंस के अनुसार जलवायु परिवर्तन विश्व भर में स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए “एक बड़ा और गहराता ख़तरा ” है. ब्रितानी सेना के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले संघर्षों के चलते ईंधन जैसी वस्तुओं की क़ीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. लंदन में हुई कांफ़्रेस के बाद जारी बयान में कहा गया है कि भविष्य में मानवीय त्रासदियां सैनिक संसाधनों पर और दबाव डालेंगी.

सम्मेलन ने सरकारों से ग्रीनहाउस गैसों में कटौती के लक्ष्यों को और महत्वकांक्षी बनाने का आहवान किया है. संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक जलवायु कांफ़्रेंस डेढ़ महीने बाद शुरू होगी. इस बैठक से पहले लंदन में ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन के मुख्यालय में कई विशेषज्ञों ने एक सम्मेलन में विकसित और विकासशील देशों से जलवायु परिवर्तन पर गंभीर होने की अपील की है.

 
सैन्य बलों में ईंधन के बेतहाशा इस्तेमाल करने का दुष्प्रभाव  :--

0   ईंधन की क़ीमत बढ़ने से ब्रिटेन जैसे देशों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.
0   सैन्य बल दुनिया भर में बड़ी मात्रा में ईंधन का उपभोग करते हैं.
0   जिस समुद्री जहाज़ को 12 ईंच आगे बढ़ाने के लिए एक गैलन तेल लगता हैं. 
0   जलवायु परिवर्तन की वजह से विकासशील देशों में कई दुष्प्रभाव पड़ने की चेतावनी दी
0   इससे कुपोषण बढ़ेगा और कुछ संक्रामक रोगों के और फैलने की भी आशंका है.
0   किस तरह अफ़गानिस्तान में सेना के इस्तेमाल के लिए पहुंचने वाला पेट्रोल दस गुना अधिक मंहगा हो जाता  है क्योंकि इसे पाकिस्तान से सड़क के रास्ते लाया जाता है.

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मूंछ रखो, आधी कीमत में टिकट पाओ

>> 14 अक्तूबर, 2011


मार्क लिएव्रेमों 2007 से फ़्रांस रग्बी टीम के कोच
न्यूजीलैंड में इन दिनों रग्बी विश्व कप चल रहा है जहां फ्रांस ने सेमीफाइनल में जगह बनाई है। जाहिर है फ्रांस में इन दिनों रग्बी का जुनून है। वहाँ दो फ्रांसीसी टीमों- बाईऑन और मॉंगपुलिए के बीच होने वाले मैच में बाईऑन टीम ने प्रशंसकों को टिकटें आधी कीमत पर देने का फैसला किया है। हालांकि इसके लिए एक शर्त है।
शर्त ये है कि दर्शकों को फ्रांसीसी रग्बी टीम के प्रमुख कोच मार्क लिएव्रेमों की तर्ज पर मूंछ रखकर आना होगा। ये मूंछे नकली भी हो सकती हैं मतलब ये कि महिला और पुरुष दोनों इसका फायदा उठा सकते हैं।
दरअसल हुआ ये है कि फ्रांस के प्रमुख कोच मार्क लिएव्रेमों ने टीम के डिफ्रेंस कोच से शर्त लगाई थी जिससे वे हार गए। शर्त हारने के बाद से ही मार्क लिएव्रेमों ने दाढ़ी मूंछ नहीं बनवाई है। वैसे न्यूजीलैंड में जारी रग्बी विश्व कप के दौरान अपने बेबाक बयानों से फ्रांसीसी कोच पिछले कुछ दिनों से विवादों में रहे हैं।
उस पर से फ्रांस की टीम टोंगा से हार गई। लेकिन क्वार्टरफाइनल में इंग्लैंड को हराने के बाद कोच के आलोचक कुछ चुप्प हुए हैं। सेमीफाइनल मुकाबला 15 अक्टूबर को वेल्स से है।

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सूरज में आग है , चाँद में भी दाग है ,

>> 12 अक्तूबर, 2011

ज  शरद पूर्णिमा की रात है  , आसमान साफ होने के कारण पूर्णिमा की चन्द्रमा का सुहावना दर्शन हो रहा है . कहते है की आज की रात चन्द्रमा की  किरणों से अमृत की बूंदें टपकती है . कोई कैसे इस सुनहरे अवसर को चुकोना चाहेगा अतः सबने आसमान के नीचे छींकें में खीर का कटोरा टांग रखा है . 
  
हिन्दू मान्यता  के अनुसार इसी दिन चन्द्र अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है. कुछ क्षेत्रों में इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है. यह भी  मान्यता  है कि इस दिन भगवान श्री कृ्ष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था.इस दिन चन्द्रमा कि किरणों से अमृत वर्षा होने की मान्यता प्रसिद्ध है. इस दिन एरावत पर आरूढ़ हुए  इन्द्र व महालक्ष्मी का पूजन किया जाता है. इससे  लक्ष्मी और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.

  सूरज  में आग है  , चाँद में भी दाग है ,
फिर भी सागर को दोनों से अनुराग है .

शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं !
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चुकंदर से बनेगा पानी में घुलने वाला प्लास्टिक

>> 09 अक्तूबर, 2011

Beetroot
टली की एक कंपनी ऐसी प्लास्टिक बना रही है जो पानी में घुल सकती है. चुकंदर से निकलने वाले कचरे से प्लास्टिक का निर्माण हो रहा है. चुकंदर के उत्पादन से निकलने वाले बाई प्रोडक्ट वातावरण के लिए वरदान साबित हो सकते हैं. इसके अलावा दुनिया की निर्भरता तेल से बनने वाली प्लास्टिक पर भी कम हो सकती है. एक छोटी इतालवी कंपनी बायो ऑन जैव प्लास्टिक के क्षेत्र में नया प्रयोग करने जी-जान से प्रयत्नशील है  .

इटली के शहर मिनेर्बियो में सबसे बड़ी चीनी उत्पादक कंपनी को प्रो बी चीनी बना रही है. लेकिन बायो ऑन की दिलचस्पी चीनी में नहीं, चुकंदर से चीनी बन चुकने के बाद बची हुई चीजों में हैं जिसे कचरा मानकर फेंक दिया जाता है. चुकंदर के अशुद्धीकृत शीरे से बायो ऑन प्लास्टिक बनाती है. चीनी के कारखाने से शीरा कचरे के तौर पर निकलता है.

बायो ऑन के वैज्ञानिकों ने पांच साल की मेहनत के बाद शीरे को प्लास्टिक में तब्दील किया है. कंपनी चुकंदर के शीरे को ऐसे जीवाणु के साथ मिलाती है जो किण्वन के दौरान चीनी पर पलते हैं. इस प्रक्रिया के दौरान लैक्टिक एसिड, फिल्ट्रेट और पॉलीमर बनता है जिसका इस्तेमाल प्राकृतिक तरीके से सड़ने वाली प्लास्टिक बनाने में हो सकता है.

प्रदूषण से बचाव
बॉयो ऑन के मुख्य जीव विज्ञानी साइमन बिगोटी डॉयचे वेले को बताते हैं, "हम कई तरह की चीजें बना सकते हैं. क्योंकि कई तरह की प्लास्टिक समीकरण बना पाना मुमकिन है. हम पॉलीइथाइलिन, पॉलीस्टाइरीन, पॉलीप्रॉपाईलीन को बदल सकते हैं."

कंपनी ने बॉयो पॉलीमर्स का विकास किया है. इसका इस्तेमाल कठोर और लचीली प्लास्टिक के लिए जा सकता है. बिगोटी का मानना है कि बॉयो प्लास्टिक उनके दफ्तर में प्लास्टिक से बनी 80 चीजों की जगह ले सकती है.

बिगोटी कहते हैं, "हम ऐसी प्लास्टिक बना रहे हैं जो जीवन काल के खत्म होने के 10 दिन के भीतर पानी में घुल जाएगी." एक शोध के मुताबिक बॉयो प्लास्टिक का बाजार 2011 और 2015 के बीच दोगुना हो जाएगा. 2010 में सात लाख टन प्लास्टिक का उत्पादन हुआ जो इस साल 10 लाख टन को पार कर जाएगा.

बायो प्लास्टिक का बाजार

वृद्धि के बावजूद बायो प्लास्टिक का बाजार तेल आधारित प्लास्टिक की तुलना में छोटा है. प्लास्टिक उद्योग एसोसिएशन के मुताबिक 2010 में 27 करोड़ टन प्लास्टिक की खपत हुई. यूरोपीय बायो प्लास्टिक के अध्यक्ष हाराल्ड कैब को विश्वास है कि यूरोप के प्लास्टिक बाजार के कुल हिस्से का 5 से 10 फीसदी जगह बायो प्लास्टिक ले सकती है.

बायो प्लास्टिक बनाने के लिए सिर्फ बायो ऑन ही शोध नहीं कर रही है. रसायन कंपनी जैसे बीएएसएफ, ब्रास्केम एंड डॉ भी बायो प्लास्टिक उत्पाद बना रहे हैं. कंपनियां बायो प्लास्टिक उत्पादन क्षमता भी बढ़ा रही हैं.

आम तौर प्लास्टिक को प्रदूषण बढ़ाने के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जाता है. बायो ऑन के सह-संस्थापक मार्को अस्टोरी का कहना है कि उनकी कंपनी अनोखी है क्योंकि वह कचरे का इस्तेमाल कर प्लास्टिक बनाती है. अस्टोरी कहते हैं, "हम सिर्फ कचरे का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि खाद्य सामग्री का इस्तेमाल प्लास्टिक बनाने के लिए करना पागलपन है."
डायचे वेले 

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दशहरा पर्व पर नीलकंठ के दर्शन

>> 08 अक्तूबर, 2011



नीलकंठ

शहरा पर्व पर नीलकंठ के दर्शन को शुभ और भाग्य को जगाने वाला माना जाता है. जिसके चलते दशहरे के दिन हर व्यक्ति इसी आस में छत पर जाकर आकाश को निहारता है ताकि साल भर उनके यहाँ शुभ कार्य का सिलसिला चलता रहे. ऐसा माना जाता है कि इस दिन नीलकंठ के दर्शन होने से घर के धन-धान्य में वृद्धि होती है, तथा  फलदायी एवं शुभ कार्य घर में अनवरत्‌ होते रहते हैं.  सुबह से लेकर शाम तक किसी वक्त नीलकंठ दिख जाए तो वह देखने वाले के लिए शुभ होता है.

हम भी दशहरा मनाने निकले तो रास्ते भर सड़क के किनारे की झाड़ियों , खेतों व बिजली के तारों को निहारते रहे . 12 कि.मी. दूर जाने पर बिजली के तार एक नीलकंठ बैठा दिखाई दिया . हमारे साथी श्री श्याम वर्मा ने फोटो खींचने की बहुत कोशिश की  लेकिन साफ फोटो नहीं खिंच पाए , क्योंकि पक्षी सूर्य की दिशा में था . हम लोग उसके उड़ने का इंतजार करने लगे लेकिन काफी देर रूकने के बावजूद भी वह नहीं उड़ा. अलबत्ता वहां काफी भीड़ जमा हो गई . भीड़ से बचाते हुए हम आगे बढ़ गए . रायपुर से अभनपुर पंहुचते तक 27 कि.मी. के सफ़र में 10 - 12 नीलकंठ विभिन्न विभिन्न मुद्राओं में दिखाई दिए .

 नीलकंठ पक्षी को भगवान राम का संदेशवाहक माना जाता है इसीलिये कहा भी गया है -----


    नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध-भात का भोजन करियो, हमरी बात राम से कहियो'

भगवान शिव को भी  नीलकंठ कहा गया है  क्योकिं  उन्होंने सर्वकल्याण के लिए विषपान किया था. इसीलिए शिव कल्याण के प्रतीक है. ठीक इसी तरह ईश्वर के बनाए नीलकंठ पक्षी भी है . इस रंग बिरंगी खूबसूरत पक्षी का गला भी शिव की तरह नीला होता है.

 नीलकंठ दुर्लभ प्रजाति का संरक्षित पक्षी है. चिता का विषय यह है  पर्यावरणीय असंतुलन के कारण  अब यह शुभ दायक खूबसूरत पक्षी विलुप्त होते जा  रहा है . लोग  नीलकंठ दर्शन के लिए तरस रहे है.    इसके पीछे पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ फसलों में प्रयोग किया जाने वाला कीटनाशक भी  है.

अब देखिये रावण दहन के दृश्य ........

अभनपुर का दशहरा
खोला ग्राम का दशहरा
नवापारा का दशहरा
दैनिक अग्रदूत रायपुर  7.10.2011      

 

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संचार क्रांति के पुरोधा स्टीव जॉब्स

>> 07 अक्तूबर, 2011


दुनियाभर में कंप्यूटर से लेकर आई पॉड और आई फोन के जरिए संचार प्रौद्योगिकी में क्रांति लाने वाले एप्पल के सह-संस्थापक 56 वर्षीय  स्टीव जॉब्स का आज दुखद  निधन हो गया. वे  पैंक्रियास कैन्सर से पीड़ित थे.

Steve Jobs
 इस वर्ष जनवरी के बाद से वे  कंपनी के कामकाज से छुट्टी पर थे, यदा कदा ही काम पर   दिखाई देते थे. मार्च में उन्होंने आई पैड का दूसरा संस्करण बाजार में उतारा और फिर सिलिकान वैली में राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा टैक्नॉलॉजी के दिग्गजों के लिए आयोजित रात्रि भोज में शामिल हुए. जून में वे  सान फ्रांसिस्को में एप्पल के आई क्लाउड के बारे में बताने के लिए एक बार फिर सामने आए.

एप्पल के सबसे ज्यादा प्रचलित और प्रतिष्ठित उत्पाद जैसे आईपॉड, आई फोन और आईपैड जॉब्स की दूरदर्शिता और कौशल के  परिणाम थे. उनके नेतृत्व में एप्पल ने आई पॉड के जरिए संगीत जगत की नयी परिभाषा गढ़ी. आई फोन ने मोबाइल की दुनिया का अंदाज बदला और आई पैड  ने मनोरंजन और मीडिया जगत को नये मायने दिए.
 
जॉब्स ने 1976 में अपने घर के गैरेज में स्टीव वोज्नियाक के साथ एप्पल की शुरुआत की और एप्पल दो तथा मैकिनटोश कंप्यूटर्स का विकास किया.उन्होंने कंपनी के निदेशक मंडल के साथ विवाद के चलते 1985 में कंपनी छोड़ दी थी.अगले वर्ष उन्होंने नैक्स्ट कंप्यूटर की स्थापना की. 1986 में उन्होंने लुकासफिल्म के कंप्यूटर ग्राफिक्स डिवीजन को खरीद लिया और इसे एक स्वतंत्र एनीमेशन स्टूडियो पिक्सर के तौर पर फिर से स्थापित किया.
करीब एक दशक बाद 1996 में एप्पल ने नैक्स्ट को खरीद लिया और जॉब्स को एप्पल में वापिस लाया गया. 1997 से जॉब्सने कंपनी के सीईओ के तौर पर काम शुरू किया और जीवन के अंतिम दिनों तक इसी पद पर बने रहे.
 
संचार क्रांति के पुरोधा स्टीव जॉब्स  ने अपने आविष्कारों के जरिये दुनिया भर में अपना गहरा छाप  छोड़ा है , निश्चित रूप से आने वाली कई पीढ़ियों तक उनका प्रभाव महसूस किया जाता रहेगा . ग्राम चौपाल की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि . 

Jobs, who touched the daily lives of countless millions of people through the Macintosh computer, iPod, iPhone and iPad, died on Wednesday at age 56 after a long battle with pancreatic cancer. He stepped down as Apple chief executive in August. (reuters)

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रावण को खुद मारे माउस से

>> 06 अक्तूबर, 2011

जय श्री राम 


आश्विन माके शुक्ल पक्ष की दशमी को दशहरा पर्व मनायजातहै. हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है. भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध कर अहंकार का नाश  किया था. इसे असत्य पर सत्य ,अधर्म पर धर्म तथा अन्याय पर न्याय  की विजय के रूप में मनाया जाता है. इसीलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है.

विजयादशमी पर्व  की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ रावण दहन की ऑनलाइन सुविधा वेबदुनिया की मदद से ग्राम चौपाल में  उपलब्ध है .

आप माउस की सहायता से नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर रावण दहन कर सकते हैं।

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फल से लदी डालियों से नित सीखो शीश झुकाना

>> 04 अक्तूबर, 2011






धान का कटोरा गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी लहलहा रहा है , पिछले वर्ष धान के रिकार्ड उत्पादन के लिए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को पुरष्कार दिया था . ईश्वर ने चाहा तो इस साल भी रिकार्ड बनेगा .  खरीफ  सीजन की  धान की फसल पकने को  तैयार है  . कुछ ही दिनों में काटने लायक हो जायेगी . सितंबर के महीने में ही  धान की बालियों में दूध भर आया था जो धीरे धीरे  चांवल के रूप में तब्दील हो जाता है . दूध भर आने के बाद धान की बालियाँ झुक जाती है . प्राथमिक शाला में पढाया भी जाता है ---

फूलों से नित हंसना सीखो, भौरों से नित गाना ;
फल से लदी डालियों से, नित सीखो शीश झुकाना ;

 नेत्र दान शिविर में भाग लेने दो दिन पूर्व चंपारण गया था तो उस गाँव  के प्रगतिशील युवा कृषक श्री शोभाराम साहू के आग्रह पर फसल का अवलोकन करने उसके  खेतों में पहुँच गया . वे  लगभग 16 एकड़ भूमि में नई तकनीक से खेती करते है . उनके खेतों में धान के अलावा गन्ने की फसल भी लहलहा रही है . कुछ हिस्से में साग-सब्जी भी है . उनके प्लाट में विद्युत् पंप भी है . बड़ी मुश्किल से पानी मिला है . पानी के अभाव में उन्होंने कुछ वर्षों से खेती से किनारा कर लिया था . बोरवेल फेल हो जाते थे ,  किसी की सलाह पर उन्होनें नया बोर कराया तो भरपूर पानी  मिल गया . फिर क्या था , खेती की तरफ उनका रुझान फिर बढ़ गया . अब तो खेती की बदौलत लाखों कमा रहें है . धान के अलावा गन्ने की चिल्हर बिक्री से प्राप्त आय से वे काफी संतुष्ट है , साग सब्जी और फलों से भी उन्हें काफी पैसा मिल जाता है . इस कार्य के लिए उन्हें 8 - 10 मजदूर स्थाई रूप से मिल गए है जो बारहों महीने काम पर आते है .  

धान की लहलहाती  फसल
गन्ने की फसल को दिखाते हुए युवा कृषक श्री शोभाराम साहू
गन्ने की नई फसल को निहारते हुए 
   

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छत्तीसगढ़ में प्रथम रेडियो प्रसारण के पूरे हुए 48 साल

>> 02 अक्तूबर, 2011

आकाशवाणी के कार्यक्रमों की गुणवत्ता आज भी कायम --- बजाज 
श्रोता संघों ने मनाया आकाशवाणी रायपुर का स्थापना दिवस

प्रथम छत्तीसगढ़ी फिल्म 'कहि देबे संदेश' के निर्माता-निर्देशक श्री मनु नायक हुआ अभिनंदन

रेडियो प्रसारण सेवा के 48 वर्ष छत्तीसगढ़ में पूरे हो चुके हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर दो अक्टूबर 1963 को यहां आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र के प्रसारण की शुरूआत हुई थी। आकाशवाणी रायपुर का अड़तालिसवां स्थापना दिवस समारोह आज यहां चौबे कॉलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल के सभा भवन में मनाया गया। इस अवसर पर आज से लगभग 46 वर्ष पहले 1965 में छत्तीसगढ़ी भाषा में निर्मित पहली कथा फिल्म 'कहि देबे संदेश' के निर्माता और निदेशक श्री मनु नायक का नागरिक अभिनंदन भी किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज समारोह के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने श्री मनु नायक को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

मुख्य अतिथि की आसंदी से समारोह को सम्बोधित करते हुए श्री अशोक बजाज ने कहा कि देश के जन-जीवन पर रेडियो कार्यक्रमों का भी व्यापक असर होता है। श्री बजाज ने कहा कि आकाशवाणी के कार्यक्रमों की गुणवत्ता आज भी कायम है। विभिन्न केन्द्रों से गीत-संगीत के मनोरंजक कार्यक्रमों के साथ-साथ किसानों और समाज के विभिन्न वर्गों की जरूरतों से जुड़े ज्ञानवर्धक कार्यक्रम भी प्रसारित होते हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों के जरिए आकाशवाणी द्वारा राज्य सरकार और केन्द्र की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी आम जनता को दी जाती है, जिसका लाभ जरूरतमंद लोगों को मिलता है। श्री बजाज ने बालिका शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और समाज में बेटियों के संरक्षण की जरूरत पर भी बल दिया। शारदीय नवरात्रि का उल्लेख करते हुए श्री बजाज ने कहा कि हमारे भारतीय समाज में महिलाओं को हमेशा देवी के रूप में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त होता रहा है। हमारे यहां नदियों को भी माता के रूप में सम्बोधित किया जाता है।


 


स्थापना दिवस समारोह के साथ-साथ आकाशवाणी रायपुर के वरिष्ठ सेवानिवृत्त उदघोषक श्री लाल रामकुमार सिंह की अध्यक्षता में इस अवसर पर आकांक्षा रेडियो लिस्नर्स संस्था, धरसींवा द्वारा रेडियो श्रोताओं के विभिन्न संगठनों के सहयोग से अखिल भारतीय रेडियो श्रोता सम्मेलन भी आयोजित किया गया। समारोह में मुम्बई से आए वरिष्ठ छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्माता और निदेशक श्री मनु नायक ने रेडियो श्रोताओं के इस सम्मेलन को अपने लिए एक नया तथा दिलचस्प अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि रेडियो कार्यक्रमों के प्रस्तुतकर्ताओं और प्रसारकों को वास्तविक ऊर्जा अपने श्रोताओं से ही मिलती है। श्री मनु नायक ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलनों से रेडियो श्रोताओं और उदघोषकों के बीच भाईचारा बढ़ता है। श्रोताओं से रेडियो वालों को कई अच्छे सुझाव भी प्राप्त होते हैं। छत्तीसगढ़ में 46 वर्ष पहले फिल्म उद्योग की बुनियाद रखने वाले श्री मनु नायक ने इस मौके पर अपनी प्रथम छत्तीसगढ़ी फिल्म 'कहि देबे संदेश' के फिल्मांकन से जुड़े संस्मरण भी सुनाए। उन्होंने रेडियो श्रोताओं को बताया कि इस फिल्म में मोहम्मद रफी, महेंद्र कपूर, मन्नाडे, मीनू पुरूषोत्तम जैसे हिन्दी सिनेमा के अनेक जाने-माने गायकों ने छत्तीसगढ़ी गीत गाकर हमारी माटी का मान बढ़ाया था। फिल्म का पहला गीत छत्तीसगढ़ में प्रचलित पारम्परिक लोक शैली का ददरिया था, जिसे श्री महेन्द्र कपूर और सुश्री मीनू पुरूषोत्तम ने गाया था, जिसके बोल थे ....
कोयली रे कूकै, आमा के डार म,
चले आबे पतरेंगी, नवा तरिया पार म'

इस फिल्म के गीतकार थे स्वर्गीय डॉ. हनुमंत नायडू 'राजदीप' और संगीतकार थे श्री मलय चक्रवर्ती। पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म के अनेक गीत उस जमाने में काफी लोकप्रिय हुए, जिनमें प्रसिध्द पार्श्व गायक श्री मोहम्मद रफी का गाया 'झमकत नदिया बहिनी लागय, परबत मोर मितान' भी शामिल है। रेडियो श्रोताओं के सम्मेलन में आज इस पुराने सदाबहार गीत के प्रस्तुतिकरण से एक बार फिर पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म 'कहि देबे संदेश' की यादें ताजा हो गयी।  अध्यक्षीय आसंदी से श्री लाल रामकुमार सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सम्मेलन को दुर्गा महाविद्यालय रायपुर के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर अनिल कालेले, आकाशवाणी रायपुर के उदघोषक श्री श्याम वर्मा, श्री यादराम पटेल और श्री दीपक हटवार, सहित अन्य अनेक वक्ताओं ने भी सम्बोधित किया। सम्मेलन में आकाशवाणी के श्रोताओं की पसंद पर आधारित फरमाइशी फिल्मी गीतों का जीवंत प्रस्तुतिकरण आकर्षण का केन्द्र रहा, जिसमें श्रीमती वीणा ठाकुर, सुश्री मनीषा जंघेल, श्री राजकुमार गंभीर और श्री दिनेश साहू सहित अनेक श्रोता कलाकारों द्वारा नये-पुराने सदाबहार फिल्मी गीत पेश किए गए। सम्मेलन में अभनपुर निवासी प्रसिध्द हिन्दी ब्लाग लेखक श्री ललित शर्मा सहित आकाशवाणी रायपुर और विभिन्न आकाशवाणी केन्द्रों के उदघोषक तथा अनेक प्रबुध्दजन उपस्थित थे। इस मौके पर अहिंसा रेडियो श्रोता संघ बलौदाबाजार की विशेष बुलेटिन का विमोचन भी किया गया। सम्मेलन के आयोजन में अमलेश्वर रेडियो श्रोता संघ, भाटापारा रेडियो श्रोता संघ और जय छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ पिपरिया सहित अनेक श्रोता संघों के सदस्य और पदाधिकारी भी काफी संख्या में मौजूद थे।

 

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