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जापानी महिलाओं का क्रांतिकारी कदम ?

>> 15 फ़रवरी, 2011


सामान्यत: शादी के बाद महिलाओं का उपनाम (सरनेम ) बदल जाता है ,भारत में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है । जापान में भी यही परम्परा है ,ताजा जानकारी के अनुसार जापानी नागरिकों के एक समूह ने देश के उस कानून को अदालत में चुनौती दी है, जिसमें महिलाओं को शादी के बाद अपना उपनाम बदलना होता है।करीब 113 साल पुराने इस कानून के तहत शादीशुदा जोड़ों को शादी के बाद कोई एक उपनाम चुनना होता है,परंपरानुसार सामान्यत: पुरुष का ही होता है। मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि कानून देश में महिलाओं के संवैधानिक समानता के अधिकारों का हनन करता है।

चार महिलाओं तथा उनमें से एक के जोड़ीदार सहित पाँच लोगों ने सरकार से अपनी परेशानियों के लिए साठ लाख येन (70 हजार अमेरिकी डॉलर) की माँग की है और स्थानीय सरकारी कार्यालयों से उनके अलग-अलग उपनाम के सर्टिफिकेट देने को कहा है। उनका तथा उनके समर्थकों का कहना है कि यह मुकदमा उपनाम संबंधी कानून को चुनौती देने वाला पहला मामला है। साथ ही यह प्रधानमंत्री नाओतो कान के लिए भी चुनौती है,क्यों कि उन्होंने शादीशुदा जोड़ों को अलग-अलग उपनाम रखने की इजाजत देने के लिए कानून में बदलाव का वादा किया था।

5 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा 15 फ़रवरी 2011 को 11:50 pm  

जब आवाज उठी है तो उसका हल भी निकलेगा।

राज भाटिय़ा 16 फ़रवरी 2011 को 1:05 am  

शादी के बाद उपनाम तो युरोप मे भी बदला जाता हे , ओर ९९% पुरुष का नाम ही चलता हे, अब अगर दोनो नाम भी कोई चलाना चाहे तो वो भी रख सकता हे, लेकिन इन के बच्चो ने भी दो उपनाम होंगे, फ़िर जब बच्चो की शादी होगी तो उन के चार उपनाम हो जायेगे, उन के भी आगे बच्चो के आठ उपनाम हो जायेगे... तो जनाब हमारी पुरानी परंपरा जो सदियों से चली आ रही है वो ही अच्छी हे उस मे बदलाव कर के क्या मिलेगा? ओर बीबी का उपनाम रख लेने से भी क्या प्यार दो गुणा हो जायेगा?

प्रवीण पाण्डेय 16 फ़रवरी 2011 को 11:05 am  

कोई न कोई हल निकल आये, जीवन का तत्व अब नामों और उपनामों तक ही सिमट गया है।

S.M.HABIB 16 फ़रवरी 2011 को 2:10 pm  

राज साहब की टिप्पणी काबिले गौर है और मैं सादर उनसे इत्तफाक रखता हूँ...
दरअसल इंसान परिवर्तन पसंद प्राणी है... वह रोटी को भी उलट पलट कर खाता है... क्या पता दूसरी और से स्वाद अधिक आये..... :)))

बहरहाल अच्छी जानकारी है भैया... आभार.

Swarajya karun 16 फ़रवरी 2011 को 3:02 pm  

अच्छी जानकारी के लिए आभार. लेकिन उपनामों को लेकर इतना बवाल क्यों होना चाहिए ? जिंदगी ठीक-ठाक चलती रहे, यही बहुत है. उप-नामों का झगड़ा समय की बर्बादी के अलावा और क्या है ?

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