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शांति और खुशहाली के लिए होंगे और भी बेहतर प्रयास : डॉ. रमन सिंह

>> 23 फ़रवरी, 2011



मुख्यमंत्री शामिल हुए संत समागम में

रायपुर 23 फरवरी 2011


छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि नया छत्तीसगढ़ राज्य अब एक नई करवट ले रहा है। प्रदेश की दो करोड़ से अधिक जनता विकास के एक दशक को पार कर अब ग्यारहवे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इस दौरान राज्य शासन द्वारा विगत सात वर्षो में आम जनता के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं से पूरे देश में छत्तीसगढ़ की पहचान बनी है। गरीबों के लिए शुरू की गई अत्यंत किफायती चावल की योजना को अब केन्द्र सरकार पूरे देश में लागू करने जा रही है। डॉ. सिंह ने कहा कि भगवान राजीव लोचन और संत महात्माओं के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ में सुख-शांति, समृध्दि और खुशहाली लाने के लिए आने वाले वर्षो में और भी अधिक बेहतर प्रयास राज्य सरकार द्वारा किये जाएंगे। राजिम कुंभ ने छत्तीसगढ़ को देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलायी है।

मुख्यमंत्री आज रात महानदी, सोंढुर और पैरी नदियों के पवित्र संगम पर आयोजित राजिम कुंभ के छठवें दिन विशाल संत समागम को संबोधित कर रहे थे। उन्होनें कहा कि भगवान राजीव लोचन की कृपा, संत महात्माओं के आशीर्वाद और जनता के सहयोग से राजिम कुंभ का यह छठवां आयोजन यहॉ किया गया है मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राजिम कुंभ का ही एक अच्छा और सुखद प्रभाव है कि इन छह वर्षो में छत्तीसगढ़ पर अकाल का कोई प्रभाव नहीं पड़ा, बल्कि देश का यह नया राज्य और भी अधिक तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ता चला जा रहा है। पलायन की पीड़ा से छत्तीसगढ़ मुक्त हुआ है। सकल घरेलू उत्पाद की दृष्टि से राज्य की विकास दर 11.49 प्रतिशत रही जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें छत्तीसगढ़ ने गुजरात जैसे पुराने और विकसित राज्य को भी पीछे छोड़ दिया। डॉ. सिंह ने संत समागम मे पधारे गोवर्धन मठ, पुरी के जगत्गुरू शंकराचार्य स्वामी निष्चलानंद सरस्वती सहित देश भर से आए संत महात्माओं का स्वागत करते हुए कहा कि इनके आगमन से छत्तीसगढ़ की धरती धन्य हुई है। मुख्यमंत्री ने राजिम कुंभ में श्रध्दालुओं की सुविधा के लिए छह करोड़ रूपए की लागत से बनवाए गए एनीकट का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें आगामी वर्षो में छह फीट से भी ज्यादा पानी रहेगा। आने वाले वर्षो में राजिम कुंभ को इसकी गरिमा के अनुरूप बेहतर से बेहतर सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। संत समागम में प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास और धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, खाद्य मंत्री श्री पुन्नू लाल मोहले, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार राय, छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, राजिम विधायक श्री अमितेष शुक्ल, संत कवि और पूर्व सांसद श्री पवन दीवान, पूर्व मंत्री श्री अजय चंद्राकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में भक्तजन उपस्थित थे। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि छत्तीसगढ़ के इस पावन तीर्थ राजिम में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा कानून बनाकर राजिम कुंभ की परम्परा की शुरू की गई । जहां धर्मात्माओ का राज होता है वहां परमात्मा का वास होता है। श्री अग्रवाल ने कहा कि कोई भी कुंभ साधु-संतों के बिना सार्थक नहीं होता। राजिम कुंभ साधु-संतों वाणी से ही चरितार्थ हो रहा है। उन्होने कहा कि साधु-संतो के आशीर्वाद से हम छत्तीसगढ़ को एक ऐसा आदर्श राज्य बनाएंगे जहां धर्म की रक्षा हो,  सुख शांति हो और कोई भूखा न रहे। छत्तीसगढ़ धर्म धरा है। राजिम कुंभ के माध्यम से धर्मध्वजा पूरे विश्व में लहराएगी। कृषि मंत्री श्री चंद्रषेखर साहू ,खाद्य मंत्री श्री पुन्नू लाल मोहले और विधायक श्री अमितेष शुक्ल ने भी संत समागम में अपने विचार व्यक्त किए। गोवर्धन मठ, पुरी के पीठाधीश्वर जगत गुरू शंकराचार्य स्वामी निष्चलानंद महाराज ने इस अवसर पर आशीष वचन में लोगों को मांस-मंदिरा जैसी सामाजिक बुराईयों से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्र निर्माण के लिए वैदिक संस्कृति और संस्कारों के अनुरूप समाज के विकास और जनकल्याण के लिए शासन तंत्र को तत्पर रहना चाहिए। स्वामी निश्चलानंद महाराज ने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर विकास करना पूरे विश्व के लिए लाभदायक होगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने संत समागम के अवसर पर भगवान राजीव लोचन के मंदिर में पूजा अर्चना की और छत्तीसगढ़ सहित सम्पूर्ण राष्ट्र की सुख-समृध्दि और खुशहाली के लिए उनसे आशीर्वाद मांगा। डॉ.  सिंह ने इस मौके पर पुरी पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी सहित सभी आमंत्रित साधु-संतों से भी आशीर्वाद प्राप्त किया।

राजिम कुंभ की झलकियाँ









6 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा 24 फ़रवरी 2011 को 12:06 am  

धन्यवाद जी
बढिया कार्यक्रम रहा
इसके साक्षी होने का सौभाग्य हमें भी प्राप्त हुआ।
शंकराचार्य जी के प्रवचन को शीघ्र ही सुनेगें ललित डॉट कॉम पर

अशोक बजाज 24 फ़रवरी 2011 को 12:14 am  

@ श्री ललित शर्मा जी
जरुर सुनाइयें धन्यवाद !
राजिम कुंभ की बधाई .

Rahul Singh 24 फ़रवरी 2011 को 6:03 am  

धन्‍यवाद, अच्‍छी खबर, बढि़या चित्र.

कमल शर्मा 24 फ़रवरी 2011 को 12:28 pm  

प्रिय अशोक जी
आध्यात्म की त्रिवेणी में आपके माध्यम से हम भी सहभागी बने इसके लिए हार्दिक धन्यवाद
कमल शर्मा

jainanime 25 फ़रवरी 2011 को 6:58 am  

आदरणीय बजाज जी
राजिम कुम्भ आस्था का महाकुम्भ है धर्म का मूल अधर आस्था है यदि आस्था नहीं तो धर्म का अस्तित्व बिखर जायेगा . विगत dino कुछ लोगो से मुलाकात हुई और राजिम कुम्भ के सम्बन्ध में चर्चा होने पर उनकी भावनाए मालूम हुई उससे महसूस हुआ की राजिम कुम्भ का स्वरुप विकृत होते जा रहा है इसमे द्वेष का विष घोला जा रहा है वो भी संतो के द्वारा . संत किसी प्रदेश या किसी रास्त्र का नहीं होता संत तो सम्पूर्ण मानव जाती का होता है लेकिन राजिम कुम्भ में बहार का संत व स्थानीय संत के नाम पर जो कुछ किया जा रहा है उससे संतो के आचरण पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है इस पैर ध्यान देने की जरुरत है.

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