Blogger द्वारा संचालित.
ग्राम चौपाल में आपका स्वागत है * * * * नशा हे ख़राब झन पीहू शराब * * * * जल है तो कल है * * * * स्वच्छता, समानता, सदभाव, स्वालंबन एवं समृद्धि की ओर बढ़ता समाज * * * * ग्राम चौपाल में आपका स्वागत है

जापान में सुनामी: हर तरफ़ तबाही का मंज़र

>> 12 मार्च, 2011





        जापान के इतिहास में सबसे भयंकर भूकंप और इसके बाद आए सूनामी ने देश के एक बड़े हिस्सा का नक्शा बदल कर रख दिया. 10 मीटर विशाल लहरों ने सैकड़ों लोगों का जीवन लील लिया और रास्ते में जो कुछ भी आया, उसे नष्ट कर दिया .
        हजारों कारें, जहाजें, ट्रेनें, बसें और इमारतें पानी के आगे रेत साबित हुईं और सूनामी की लहरों में बह गईं. स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में स्थित रेड क्रॉस का कहना है कि सूनामी की लहरें इतनी ऊंची थीं, जितनी पहले कभी नहीं दिखीं. इसके बाद पूरे एशिया प्रशांत क्षेत्र में सूनामी की चेतावनी जारी कर दी गई.

वेबसाइटों पर मदद की गुहार ....

जापान में आए भूकंप और सुनामी में सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट काफ़ी कारगर साबित हो रहे हैं.

शुक्रवार को गूगल वेबसाइट ने दिनभर एक चेतावनी संदेश अपने मुखपृष्ठ पर रखा और अब राहत और बचाव में भी इन वेबसाइटों से मदद मिल रही है.बीबीसी के मार्क लोबेल ने इस संकट की घड़ी में एक ऐसी ही वेबसाइट पर नज़र डाली तो पाया कि लोग इन पर मदद की गुहार लगा रहे हैं क्योंकि आमतौर पर चुस्त टेलीफ़ोन सेवाएं ठप्प पड़ गई हैं.जापान के मुख्य व्यावसायिक टीवी चैनलों में से एक की लाइव स्ट्रीमिंग वेबसाइट पर एक चैटबोर्ड खुला हुआ है जिसपर हर दूसरे सेकंड में कोई न कोई संदेश आ रहा है.जापान में शनिवार की सुबह के तीन बजे हैं जब एक संदेश आता है: “कृपया मेरी मदद करो. कृपया आपात सेवाओं को ख़बर करो. मेरा भाई फंसा हुआ है. 421-2 कोयोबाई इज़ूमिकू, सेनदाइशा.”

मदद की ये करूण गुहार स्क्रीन पर लगभग एक मिनट तक रहती है. नए संदेश जल्द ही उसे पीछे ढकेल देते हैं.लेकिन ठीक सात मिनट बात एक और संदेश आता है: “421-2 में रहने वाले व्यक्ति को सुरक्षित निकाल लिया गया है.”तभी एक और संदेश आता है जिसमें कोई लोगों से बिजली की तारों को नहीं छूने की सलाह देता है और फिर कोई दूसरा सुनामी से प्रभावित लोगों के लिए दुआ करता है.

और फिर एक और संदेश: “मेरे दोस्त की पत्नी और बच्चा वाकाबायाशिकू में हैं और हम उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे. कृपया मुझे उस इलाके के बारे में कोई ख़बर दें.”

और पांच मिनट बाद एक और संदेश आता है: “मेरी मां और मेरा कुत्ता चार बजे तक घर में थे. पता है नंबर 2 मिनातोमाची, इशीमाकिशी, किबा. तब ग्राउंड फ़्लोर में पानी भर चुका था और अब मैं उनसे बिल्कुल ही संपर्क नहीं कर पा रहा हूं. कृप्या उन्हें बचाओ.”

इसके पहले जब पानी का स्तर बढ़ रहा था तब आ रहे संदेशों में भी लोगों की आशंकाएं थीं, डर था और सोशल मीडिया एकमात्र साधन था अपना संदेश बाहर पहुंचाने का.

लेकिन इस संकट के विकराल होते रूप के साथ अब संदेश बाहर पहुंचाना जितनी बड़ी चुनौती है उतनी बड़ी ही चुनौती इस बात की है कि कोई उसे पढ़ सके क्योंकि हर पल संदेश बढ़ते जा रहे हैं. हर दूसरे सेकंड कोई न कोई संदेश आ ही रहा है.
गूगल से प्राप्त तस्वीरें .....

देखिये   अखबार .........


हिंदी दैनिक "  नवभारत " रायपुर का मुखपृष्ठ दिनांक 12/03/2011
हिंदी दैनिक "  हरिभूमि " रायपुर का मुखपृष्ठ दिनांक 12/03/2011



इस भीषण त्रासदी के शिकार सभी जापानी भाइयों-बहनों  के प्रति गहरी संवेदना प्रगट करते हुए प्रार्थना  करता हूँ कि  ईश्वर उनके परिजनों को इस प्रलय-बेला  से उबरने की शक्ति दे . 

6 टिप्पणियाँ:

Swarajya karun 12 मार्च 2011 को 11:37 am  

गंभीर और दुखद मानवीय त्रासदी.कहीं यह भयानक प्राकृतिक आपदा भी ग्लोबल-वार्मिंग का नतीजा तो नहीं ? कृपया इसे भी देखें-
(गीत) 'जाने कितने बेघर हो गए '

प्रवीण पाण्डेय 12 मार्च 2011 को 8:23 pm  

दुखद अध्याय प्रकृति के कोप का।

मनोज कुमार 12 मार्च 2011 को 10:41 pm  

प्रकृति के इस प्रकोप को मनव को सहने की क्षमता दें ईश्वर।

Udan Tashtari 13 मार्च 2011 को 8:15 am  

दुखद...भीषण त्रासदी..

Dr (Miss) Sharad Singh 13 मार्च 2011 को 9:09 pm  

त्रासदायक भयानक प्राकृतिक आपदा....
इस भीषण त्रासदी के शिकार सभी जापानी भाइयों-बहनों के प्रति गहरी संवेदना प्रगट करते हुए प्रार्थना करता हूँ कि ईश्वर उनके परिजनों को इस प्रलय-बेला से उबरने की शक्ति दे ....आमीन !

manish 15 मार्च 2011 को 9:55 am  

ईश्वर उनके परिजनों को इस प्रलय-बेला से उबरने की शक्ति दे .

एक टिप्पणी भेजें

About This Blog

  © Blogger template Webnolia by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP