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तिलचट्टा हो सकता है अस्थमा की वजह

>> 14 जून, 2011

सावधान ! अगर आपको दमा परेशान कर रहा है तो उसकी वजह आपके घर में घूमने वाला तिलचट्टा भी हो सकता है.  न्यूयॉर्क के बच्चों में अलग अलग तरह के अस्थमा के लिए तिलचट्टे को जिम्मेदार पाया गया है.

न्यूयॉर्क के कुछ मोहल्लों में पांच में से एक बच्चे को अस्थमा है जबकि दूसरे इलाकों में यह दर तीन प्रतिशत तक है. अतीत में इसके लिए शहर के व्यस्त ट्रैफिक, उद्योगों से निकलने वाले धुंए और बाहरी हवाई प्रदूषण को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है.  लेकिन कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया है कि जिन इलाकों में अस्थमा की दर ज्यादा है उनमें बच्चों के खून में तिलचट्टे प्रोटीन के खिलाफ एंटीबॉडी पाए जाने की दोहरी संभावना है.

यह इस बात का सबूत है कि बच्चे इस कीड़े के संपर्क में रहे हैं और उन्हें उनसे एलर्जी है. इसके अलावा इन इलाकों के घरों की धूल में तिलचट्टों द्वारा उत्पादित एलर्जेन की मात्रा अधिक होती है.

एलर्जी पैदा करने वाला तिलचट्टा यानी काकरोज 
इस अध्ययन के लेखक मैथ्यू पर्जानोव्स्की कहते हैं कि यह अध्ययन इस बात का एक और सबूत है कि तिलचट्टे से संपर्क इस कहानी का एक हिस्सा है.  उनके अनुसार "तिलचट्टे के एलर्जेन सचमुच अस्थमा की उपस्थिति में अंतर में योगदान दे रहे हैं,  न्यूयॉर्क जैसे शहरों के शहरी माहौल में भी." जर्नल ऑफ एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के लिए पर्जानोव्स्की और उनकी टीम 7 और 8 साल से बच्चों वाले 239 घरों में गए.

इनमें से आधे अधिक अस्थमा दर वाले इलाकों में थे.  पुराने शोध में गरीबी को बचपन में अस्थमा की बढ़ी हुई दर की वजह बताया गया था.  लेकिन अध्ययन को आय के प्रभाव से मुक्त करने के लिए लेखकों ने नए शोध में मिड्ल इनकम हेल्थ पॉलिसी वाले परिवारों को शामिल किया.  सभी परिवार एक जैसी आय और एक जैसी चिकित्सा बीमा वाले थे.

अध्ययन में पता चला कि आधे से अधिक बच्चे अस्थमा का शिकार थे.

अपने दौरे के दौरान शोधकर्ताओं ने बच्चों के बिस्तर से धूल इकट्ठा की और बच्चों के खून का सैंपल लिया ताकि अस्थमा से जुड़े विभिन्न एलर्जेन के खिलाफ एंडीबॉडी की जांच की जा सके.

उच्च अस्थमा दर वाले इलाकों के 25 फीसदी बच्चों को तिलचट्टों से एलर्जी थी.  कम अस्थमा वाले इलाकों में रहने वाले सिर्फ 10 फीसदी बच्चों को तिलचट्टों की एलर्जी थी. पर्जानोव्स्की का कहना है कि तिलचट्टे अपने पीछे प्रोटीन छोड़ जाते जिसे लोग सूंघते हैं और उससे एलर्जी हो जाती है. यह अस्थमा का शिकार होने के अवसर बढ़ा देता है.  अधिक अस्थमा दर वाले इलाकों के घरों में कॉकरोच एलर्जेन के अलावा चूहे और बिल्ली से जुड़े एलर्जेन की सघनता अधिक थी.

पर्जानोव्स्की का कहना है कि घर में बिल्ली का होना स्वाभाविक रूप से एलर्जी की वजह नहीं होता. पिछले कुछ सर्वे में पाया गया था कि बिल्ली वाले घरों में रहने वाले बच्चों के एलर्जिक होने की संभावना अधिक होती है लेकिन नए अध्ययन में पाया गया है कि घर में बिल्ली का होने का मतलब बच्चे को अस्थमा होना नहीं होता. पर्जानोव्स्की कहते हैं, "यह जटिल है. बिल्ली से बचना अस्थमा के जोखिम को कम करता नहीं दिखता."

DW HINDI

5 टिप्पणियाँ:

Er. Diwas Dinesh Gaur 14 जून 2011 को 10:05 am  

अच्छी जानकारी...काफी लाभदायक लगी...

PRAMOD KUMAR 14 जून 2011 को 1:35 pm  

एकदम नवीन एवं बच्चो की स्वास्थ सुरक्षा की दृष्टि से बहुत उपयोगी जानकारी----

udaya veer singh 15 जून 2011 को 7:56 am  

An information for everyone appreciable zeal to see " sarve bhawanti sukhinah ..... ] very good post .Thanks.

प्रवीण पाण्डेय 15 जून 2011 को 8:48 am  

देख कर ही विशेष चिढ़ जागृत हो जाती है।

prerna argal 15 जून 2011 को 2:13 pm  

tilchatton se aesthmaa hone ki jaankaari se bhara lekh. bahut achcha lekh likha aapne.badhaai,



please visit my blog.thanks.

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