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चंपारण के कर्मयोगी

>> 26 जून, 2011

कर्मयोगी श्री कृष्णदास ढ़ी जी
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कर्मयोगी श्री कृष्णदास ढ़ी जी इन दिनों काफी अस्वस्थ है ,वे  बिस्तर से उठ नहीं पाते . पिछले दिनों जब मै उनसे मिलने चंपारण   गया तो वे अपने कक्ष में बिस्तर में लेटे हुए थे . उनकी उम्र 85 वर्ष की हो गई है ,वे महाप्रभु वल्लभाचार्य मंदिर ट्रस्ट चम्‍पारण के मुख्य ट्रस्टी है . महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के प्राकट्य स्थल स्थित मंदिर एवं मंदिर परिसर को सजाने - संवारने एवं भव्यता प्रदान करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है . बचपन में हम लोग अक्सर चंपारण (पुराना नाम चांपाझर )  जाया करते थे , यह मेरे गाँव से मात्र 10-12  कि.मी. की दूरी पर है . तब वहां खँडहरनुमा मंदिर हुआ करता था . श्री चंपेश्वर महादेव का मंदिर एवं श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य का  मंदिर पासपास  है . मंदिर के चारों और  सुन्दर अभ्यारण्य है जहाँ अनेकों प्रकार के पुराने  वृक्ष है .
आशीर्वाद देते हुए

 श्री ढ़ी जी मूलतः मुंबई के निवासी है वे यहाँ कब आये मुझे स्मरण नहीं लेकिन जब से वे आये है लगातार मंदिर के सौन्दर्यीकरण में लगे है . उनकी वर्षों की तपस्या और लगन का ही परिणाम है कि चम्‍पारण की ख्याति आज पूरे विश्व में हो गई है . यहाँ की भव्यता और सौन्दर्य के सभी कायल है . श्री ढ़ीया जी की कार्यशैली को मैंने काफी करीब से देखा है .बीमार होने के पहले तक  वे चार-चार बजे पहट तक जागते थे और  ट्रस्ट का हिसाब -किताब एवं लिखा-पढ़ी का काम स्वयं करते थे . वे प्रतिदिन 18 से 20 घंटे तक काम करते थे . अभी जब मै उनसे मिला तब भी उनके बिस्तर में ट्रस्ट के हिसाब से संबंधित दस्तावेज एवं कुछ धार्मिक किताबें रखीं थीं . बिस्तर से उठ पाना मुश्किल है लेकिन काम करने की ललक उनमें आज भी है .मेरे टोकने पर उन्होंने अपनी जिन्दादिली आवाज में ही मुझे जवाब दिया कि यह काम मै नहीं छोड़ सकता . इस उम्र में भी उनकी आवाज में कोई फर्क नहीं पड़ा है . उनके आवाज में आज भी वही ओज है जो 10 साल पहले थी . वे   प्रवचन  तो करते ही थे साथ ही साथ गीत व  भजन भी सुनाते थे , उन्हें हारमोनियम बजाते व गाते भी देखा गया है .

हारमोनियम बजाते हुए श्री ढ़ीजी
श्री ढ़ीजी पिछले एक वर्ष से कुछ ज्यादा ही अस्वस्थ है , कुछ महीने तक वे मुंबई के एक  अस्पताल में भी भरती थे . थोडा सा आराम मिला तो वापस आ गए , मुझे बताया गया कि वे अब उपचार के लिए किसी अस्पताल में नहीं जाना चाहते . वे चंपारण्य में ही रहना चाहते है . माखन उनकी सेवा में सदा लगे रहता है , वह  गाँव का ही निवासी है तथा जब से ढ़ीया जी यहाँ आये है तब से साये की तरह उनके साथ रहता है . इस प्रवास  में मुझे  उनका  पुत्र श्री कमल भाई  नहीं मिला , मैंने पूछा तो उन्होंने बताया कि वह इन दिनों मुंबई गया हुआ है उसका वहां बहुत बड़ा व्यवसाय है . 

प्राकट्य स्थल
.................श्री अढ़ीआ जी ने मंदिर परिसर, धर्मशाला एवं उसके कमरों का नाम भगवान श्री कृष्ण से जुड़े तथ्यों के आधार पर किया है.मसलन सुदामापुरी,गोकूल, मथुरा,वृन्दावन,द्वारिका आदि  आदि  .वल्लभ कुल परिवार के मुख्य बैठक जी के गादीपति आचार्य बृजजीवनलाल महाराज एवं उनके ज्येष्ठ लाल युवा आचार्य द्वारिकेश लाल  जी के वे काफी विश्वासपात्र माने जाते है .       


अभनपुर विकासखंड के अंतर्गत " चंपारण " छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मात्र 50 कि.मी. दूर स्थित है , यह प्रदेश की जीवनदायिनी चित्रोत्पला गंगा यानी   महानदी  के किनारे है ." चंपारण  " से 15-20 कि.मी. की दुरी पर  अभनपुर, नवापारा-राजिम एवं आरंग  शहर  है  , जो अलग अलग दिशाओं में है .  यह बहुत ही पवित्र व रमणीय स्थल है . इसे सजाने-संवारने वाले कल्पनाशील कर्मयोगी श्री कृष्णदास ढ़ी जी को शत-शत नमन करते हुए ईश्वर से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ. 

ચંપારણ્ય ધામ છત્તીસગઢ રાજ્યમાં રાયપુર જિલ્લામાં આવેલું છે. રાયપુરથી તે ૪૫ કિ.મી.ના અંતરે છે. રાયપુર સ્ટેશનથી ચંપારણ્ય જવા માટે એસ.ટી. બસ શહેરના બસ સ્ટેન્ડથી મળે છે તેમજ પ્રાઇવેટ બસ, જીપ, ટેક્સી વગેરે વાહનો પણ મળે છે.

Champaran is located at a distance of about 50 km from Raipur. It was earlier known as Champajhar. The village of Champaran has religious significance as the birthplace of Saint Vallabhacharya, the founder and reformer of the Vallabh sect. There is also a temple in his honour. This temple is very popular with the Gujarati populace and there are also two dharamshalas in this temple for the devotees. This often serves as accommodation for many a visitor.
The temple of Champakeshwara Mahadeva is an added attraction at Champaran. It is worth a visit.
The greatest attraction however remains the annual fair, which is held between the months of January and February every year. The birth anniversary of Saint Vallabhacharya is also celebrated with great pomp and show. Many believers visit the temple during this time to pay their homage to the revered soul.

जय श्री कृष्ण !


सांध्य दैनिक छत्तीसगढ़  23 मई 2011

चंपारण से जुड़ी कुछ तस्वीरें

IMAGES OF CHAMPARAN RAIPUR

सुदामापुरी धर्मशाला चंपारण

सन 2007  में भाजपा के  चिंतन शिविर में पहुंचें मुख्यमंत्री डा. रमण सिह
विशाल सभा भवन से बहार निकलते मुख्यमंत्री डा. रमण सिह
श्री कृष्णदास ढ़ीआ से आशीर्वाद प्राप्त करते हुए मुख्यमंत्री डा. रमण सिह
लो.नि. मंत्री श्री बृजमोहन  अग्रवाल से चर्चा करते हुए श्री कृष्णदास ढ़ी
बाएं से दायें अशोक बजाज , श्री कृष्णदास ढ़ीआ,अशोक गाँधी एवं अशोक गंगवाल 


सन 2007  में भाजपा के  चिंतन शिविर में बाएं से दायें अशोक बजाज ,श्री धरम लाल कौशिक , मुख्यमंत्री डा. रमण सिह,श्री रमेश बैस, श्री चंदुलाल साहू ,श्री धर्मेन्द्र प्रधान एवं अन्य पदाधिकारी

MAP OF CHAMPARAN 


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8 टिप्पणियाँ:

Rahul Singh 24 जून 2011 को 12:44 pm  

श्री अढ़ीआ जी स्‍वस्‍थ और सक्रिय बने रहें, साथ ही नई पीढ़ी को भी ऐसा संस्‍कार दें, यही कामना है.

jay 24 जून 2011 को 2:01 pm  

स्वास्थ्य लाभ की कामना.
सादर/पंकज झा.

Swarajya karun 24 जून 2011 को 3:23 pm  

आदरणीय श्री कृष्णदास जी अढिया के स्वस्थ और सुदीर्घ जीवन की कामना करते हुए ईश्वर से और महाप्रभु वल्लभाचार्य जी से यही प्रार्थना है कि उनके जैसे निष्काम कर्म योगी का आशीर्वाद छत्तीसगढ़ पर हमेशा बना रहे . महाप्रभु की जन्म स्थली चम्पारण्य के विकास में अढिया जी की सराहनीय भूमिका और उनकी सेहत के प्रति ध्यान आकर्षित करने के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद .

S.M.HABIB 24 जून 2011 को 6:58 pm  

चंपारण को देश पटल पर स्थापित करने में अढिया जी की भूमिका महत्वपूर्ण है.... महाप्रभु वल्लभाचार्य अढिया जी को शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करें...
सादर...

प्रवीण पाण्डेय 24 जून 2011 को 8:33 pm  

हमारी भी यही प्रार्थना है।

दर्शन लाल बवेजा 24 जून 2011 को 10:31 pm  

हमारी भी यही प्रार्थना है।

PRAMOD KUMAR 26 जून 2011 को 1:25 pm  

महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के प्राकट्य स्थल चंपारण " के शिल्पी श्री कृष्णदास अढ़ीआ जी के शीघ्र स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ .

पंकज कुमार झा. 16 जनवरी 2013 को 12:29 am  

आदरणीय श्री कृष्णदास जी अढिया अब नहीं रहे....उनकी स्मृति को प्रणाम...विनम्र श्रद्धांजलि.

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