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मेरी नेपाल यात्रा ( चौथी किस्त )

>> 24 जुलाई, 2011


गूगल से प्राप्त पशुपतिनाथ की तस्वीर
हिमालय पर्वतमाला की वादियों में बसे प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण पावन धरा नेपाल  में 9 जुलाई से 12 जुलाई 2011 को आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय  सहकारी सेमीनार में भाग लेने का अवसर मिला.इस सेमीनार का आयोजन राष्ट्रीय सहकारी बैंक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान बैंगलोर ने किया था . इन चार दिनों में नेपाल की प्रकृति, संस्कृति, रहन सहन, वेशभूषा, कृषि, पर्यटन एवं धर्म सम्बंधी अनेक जानकारी हमें मिली. नेपाल सांवैधानिक दृष्टि से एक अलग राष्ट्र है ; यहाँ का प्रधान, निशान व विधान भारत से अलग है, लेकिन रहन-सहन, बोली-भाषा और वेशभूषा लगभग एक जैसी है .नेपाल हमें स्वदेश जैसा ही प्रतीत हुआ .यह मेरी विदेश-यात्रा थी . नेपाल यात्रा की  चौथी  किश्त......


पशुपतिनाथ का  दर्शन और   बौद्धस्तूप की परिक्रमा


श्रीगणेशजी
दूसरे दिन यानी  10 जुलाई को सुबह से ही काठमांडू शहर घूमने का प्रोग्राम बना . सो सुबह 8.00 बजे दो बसों में भरकर हम लोग  सबसे पहले पशुपतिनाथ मंदिर का दर्शन करने निकले .  दोनों बसों में अलग-अलग गाईड की व्यवस्था की गई थी . गाईड ने हमें बताया कि काठमांडू का पशुपतिनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल तो नही है, लेकिन जिस प्रकार अमरनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल नही होने के बावजूद उसका दर्शन महत्वपूर्ण है उसी प्रकार पशुपतिनाथ का दर्शन महत्वपूर्ण है . पशुपतिनाथ मंदिर पहुँचने के पूर्व एक श्रीगणेशजी का मंदिर है , हम सबने गणेशजी के दर्शन किये . पशुपतिनाथ मंदिर के प्रांगण में प्रवेश करते ही जानकारी मिली कि मंदिर के अन्दर केवल हिन्दू ही प्रवेश कर सकते है अन्य नहीं ; मंदिर के अन्दर कैमरा ले जाना भी  मना है . हमें दर्शन करने में एक घंटे लग गए . मंदिर परिसर के बाहर प्रसाद एवं अन्य सामानों की दूकानें  सजी थी . जहाँ रुद्राक्ष एवं उसकी मालाएं मिल रही थी. सबने कुछ ना कुछ ख़रीदा और आगे बढ़ गए . 

 पशुपतिनाथ का  दर्शन कर हम लोग बौद्धस्तूप गयें तथा स्तूप की पूरी परिक्रमा की . यहाँ पर बौद्ध भिक्षुओं की काफी भीड़ देखने को मिली . दोपहर का समय था , धूप काफी तेज थी . सुबह जल्दी-जल्दी हल्का पुल्का नाश्ता करके निकले थे अतः सबको भूख सता रही थी . स्तूप के बाहर मुख्य मार्ग में पहुंचे तो फूटपाथ में कुछ देर खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ा.  फूटपाथ में एक दुबला-पतला वयोवृद्ध बैठा था.उसके हाथ में सिगरेट व माचिस देख कर मजाक सूझी . उसने आग्रह करने पर सिगरेट सुलगाई और चुस्कियां भरते हुए पोज देने लगा. फोटो खिचाते  समय वह बड़ा खुश हो रहा था .  मेरे पूछने पर उसने अपना नाम भी बताया लेकिन मैं उसका नाम भूल रहा हॅूं. क्रमशः

पशुपतिनाथ का मुख्य द्वार
पशुपतिनाथ का मुख्य द्वार 
बौद्धस्तूप  का मुख्य द्वार
बौद्धस्तूप 
बौद्धस्तूप परिसर के अन्दर का प्रवेश द्वार
बौद्धस्तूप परिसर
बौद्धस्तूप परिसर का बाज़ार
बौद्धस्तूप परिसरके बाहर बेहतरीन काष्ठकला का एक नमूना 
फुटपाथ पर सिगरेट सुलगाता  हुआ वयोवृद्ध
 
सिगरेट का कश लेता वयोवृद्ध 

8 टिप्पणियाँ:

ब्लॉ.ललित शर्मा 24 जुलाई 2011 को 1:16 am  

मस्त, कमाल के चित्र हैं।
बुढा भी मौज ले रहा है।

आभार

Rahul Singh 24 जुलाई 2011 को 4:26 am  

तस्‍वीरें सुंदर और मजेदार.

मनोज कुमार 24 जुलाई 2011 को 9:32 am  

आपके रोचक संस्मरण के विवरण के माध्यम से पशुपतिनाथ के दर्शन का सौभाग्य मिला, पता नहीं कभी जाना हो पाएगा भी ..?

संगीता स्वरुप ( गीत ) 24 जुलाई 2011 को 10:54 am  

बहुत रोचक यात्रा वर्णन ... आभार

PRAMOD KUMAR 24 जुलाई 2011 को 7:31 pm  

विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल देवाधिदेव महादेव भगवान पशुपतिनाथ एवं बौद्धस्तूप के सचित्र दर्शन से मन आनंदित हुआ. आपके आलेख से नेपाल की हिन्दू और बौद्ध संस्कृति का दर्शनलाभ मिला......!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) 24 जुलाई 2011 को 8:03 pm  

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग इस ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो हमारा भी प्रयास सफल होगा!

जाट देवता (संदीप पवाँर) 28 जुलाई 2011 को 7:44 pm  

आपकी नेपाल की सारी पोस्ट, वहाँ पर घूम कर आने वालों के लिए बडॆ काम आयेगी।

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