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सावन तूने निराश किया , धरती को उदास किया .

>> 11 अगस्त, 2011

सावन तूने निराश किया , धरती को उदास किया .

खेतों की हरियाली को ,
किसानों की खुशहाली को ;
तूने बहुत हताश किया .
सावन तूने निराश किया , धरती को उदास किया .


रूठे बादलों को मनाने का ,
हवाओं को  फुसलाने का  ;
क्यों नहीं प्रयास किया ,
सावन तूने निराश किया , धरती को उदास किया .


अब तू जाने वाला है ,
पड़ गया सूखे से पाला है ;
क्यों हमने तुम पर आस किया ?
सावन तूने निराश किया , धरती को उदास किया .

8 टिप्पणियाँ:

झुनमुन गुप्ता 12 अगस्त 2011 को 12:30 am  

वाह वाह । आप कविता भी करते हैं नहीं मालूम था।

S.M.HABIB 12 अगस्त 2011 को 7:10 am  

वाह अशोक भईया...
सुन्दर कविता की आपने...
सादर...

ब्लॉ.ललित शर्मा 12 अगस्त 2011 को 7:20 am  

आज तो झमाझम बरसात हो रही है।
वरुणदेव ने अर्जी मंजुर कर दी लगता है।
मस्त कविता
आभार

अशोक बजाज 12 अगस्त 2011 को 8:00 am  

@ ब्लॉ.ललित शर्मा,
कविता लिखते लिखते ही तेज बारिस शुरू हो गई थी . जो अब तक जारी है . लगता है सावन ने जाते जाते कसर पूरा कर दिया ." सुनय सबके गुहार , हमर इंद्र सरकार ." अच्छी वर्षा के लिए बधाई .

अशोक बजाज 12 अगस्त 2011 को 8:03 am  

@ झुनमुन गुप्ता,
@S.M.HABIB,
कविता पसंद आई इसके लिए धन्यवाद .

PRAMOD KUMAR 12 अगस्त 2011 को 5:03 pm  

प्यासा सावन..........!

प्रवीण पाण्डेय 13 अगस्त 2011 को 5:50 pm  

हम सबकी यही चिन्तायें हैं।

सतीश सक्सेना 16 अगस्त 2011 को 7:47 am  

बहुत प्यारी रचना !
आप बहुत संवेदनशील हैं भाई जी ! शुभकामनायें !

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