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गीत-संगीत से मिटाए बुढ़ापे का दर्द

>> 08 अगस्त, 2011

 
 संगीत बन सकता है साथी
बुढ़ापे में अकेलेपन और अपने दर्द को भुलाने के लिए गाना अच्छा तरीका है. गाने से सुनने की क्षमता भी बढ़ती है और लोगों से मेल जोल भी बढ़ता है.

ऐसी कम ही संभावना है कि इंगे एकल गीतनाट्य में भाग्य ले पाएं. लेकिन फिर भी वह हर सप्ताह मंडली में रिहर्सल करने जाती हैं. 10 से भी ज्यादा देशों के नागरिक इस मंडली के सदस्य हैं. और आधे से अधिक 40 और 60 के बीच आयु वर्ग के हैं. इंगे कहती है, "मैं जब से स्कूल में थी तब से गाना गाती आई हूं. यह मेरे लिए आराम देने वाला काम है. इसे करके मैं अपने रूटीन काम से छुटकारा पाती हूं."

चाहे आप 50 के हों या 70 के गायिकी ही एक ऐसी चीज हैं जिसे आप कर सकते हैं. जानकार मानते हैं कि इससे स्मरणशक्ति और श्रवणशक्ति   में सुधार  होता है. एलिजाबेथ बेंगस्टन कहती हैं, "यदि आप अपने गीत पर ध्यान देते हैं तो आप अपने दिमाग को भी फिट रखते हैं. क्योंकि वह दिमाग को सक्रिय रखता है." 65 साल की बेंगस्टन तीन साल की उम्र से गाना गा रही हैं.

बढ़ती उम्र में गाएं गाना

बेंगस्टन हैमबर्ग के संगीत और थिएटर विश्वविद्यालय में कई वर्षों से संगीत सिखा रही हैं. 1990 से वह बुजुर्गों के लिए संगीत पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. गाने में स्वर पर ध्यान देना एक जटिल कार्य है. शरीर के अन्य हिस्सों की ही तरह वोकल कॉर्ड भी बूढी होती है. बेंगस्टन कहती हैं, "25 साल के नौजवान के मुकाबले 55 साल वालों के पास सांस लेने की क्षमता कम होगी."

बुजुर्ग गायक ज्यादा देर तक स्वर नहीं खींच सकते और ऊंचे स्वर में उन्हें परेशानी होती हैं. उम्र के साथ महिलाओं की आवाज भी तीखी हो सकती है. लेकिन खर्ज आवाज या ऊंचे स्वर में गाना एक बुजुर्ग को पाना मुश्किल नहीं हैं. मांसपेशियों को खराब होने से बचाने के लिए सबसे अच्छा है व्यायाम करना. खराब स्वर को ग्रुप के साथ ट्रेनिंग के जरिए ठीक किया जा सकता है.

प्रैक्टिस जरूरी है

नॉर्थराइन वेस्टफालिया एसोसिएशन ऑफ कोर की प्रमुख क्लाउडिया रुएबेन लॉक्स कहती हैं, "दिनचर्या बनाना बहुत ही महत्वपूर्ण है. प्रैक्टिस के दौरान अंतर छोटे होने चाहिए और आपको नए नए टुकड़ों की बार-बार प्रैक्टिस करनी चाहिए."  हालांकि ज्यादातर यह निर्भर करता है कि बुजुर्गों को कितने नए गाने दिए जाते हैं. लॉक्स कहती हैं, "संगीत बुजुर्गों के लिए गाना गाने के अलावा संपर्क का भी काम करता है. यह आपके दिमाग को साफ रखता है और आप अकेलेपन और दर्द से बाहर आते हैं.".

लॉक्स जोर देती हैं कि गाना गाने से इंसान खुश रहता है. लेकिन बहुत से बुजुर्ग संगीत के इस फायदे के बावजूद शुरुआत नहीं करना चाहते. बेंगस्टन कहती हैं, "बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो सोचते हैं कि वे गाना नहीं गा सकते. लेकिन यह एक भ्रांति है." अगर कोर का उद्देश्य दर्शकों के सामने गाना गाने का है तो ऐसा करके वह लोगों के लिए प्रेरणा का भी काम कर सकते हैं. लॉक्स कहती हैं, "उनके पास एक मौका है यह दिखाने का कि वह भी कुछ कर सकते हैं. खासकर के अपने पोते-पोतियों को."  आमिर अंसारी डायचे वेले

3 टिप्पणियाँ:

Rahul Singh 9 अगस्त 2011 को 5:37 am  

म्‍यूजिक थेरेपी.

प्रवीण पाण्डेय 9 अगस्त 2011 को 8:28 am  

हमको तो अभी ही बड़ा सुकून देता है गाना।

PRAMOD KUMAR 9 अगस्त 2011 को 1:16 pm  

गीत-संगीत को अपने बुढ़ापे और अकेलेपन का साथी बनायें......!

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