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शहर छोड़ खेतों की ओर जा रही हैं महिलाएं

>> 05 सितंबर, 2011

भारत में लोग गांव में खेती बाड़ी छोड़ कर शहरों की ओर जा रहे हैं तो जर्मनी में इसके विपरीत महिलाएं शहरों में खेती बाड़ी की शिक्षा ले कर गांव में बस रही हैं. क्यों बह रही है यहां उल्टी गंगा ? जर्मनी में कॉलेज की डिग्री लेने के बाद खास ट्रेनिंग करनी होती है जो यह तय करती है कि आप का व्यवसाय क्या होगा. चाहे पत्रकार बनना हो, सेक्रेटरी या नर्स हर प्रोफेशन के लिए अलग ट्रेनिंग होती है. आज कल जर्मनी की महिलाओं में कृषि के क्षेत्र में ट्रेनिंग का चलन बढ़ गया है .  आगे पढ़े

7 टिप्पणियाँ:

Swarajya karun 5 सितंबर 2011 को 10:16 am  

अच्छी जानकारी मिली. धन्यवाद .काश ! हमारे देश में भी ऐसा होता !

PRAMOD KUMAR 5 सितंबर 2011 को 12:32 pm  

महोदय, प्रथमतः तो आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं ढेर सारी शुभकामनाएं !

भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए तो यह बहुत ही अच्छा संकेत है..........!

Khushdeep Sehgal 5 सितंबर 2011 को 2:03 pm  

काश भारत में भी ऐसा हो सके...

अशोक जी, आज तक टीचर्स डे को सिर्फ द्वितीय राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के तौर पर ही जानता था...लेकिन आज से आपका नाम भी इसके साथ जुड़ गया है...जान कर बड़ी खुशी हुई कि आपका जन्मदिन भी पांच सितंबर को है...जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई...

आपसे हुई सिर्फ एक बार की मुलाकात मेरे लिए कभी न भूलने वाला सुखद अनुभव है...जाना कि राजनेताओं में आप जैसे लोग भी होते हैं...

जय हिंद...

अशोक बजाज 5 सितंबर 2011 को 10:41 pm  

@ PRAMOD KUMAR,
जन्मदिन की बधाई के लिए धन्यवाद .

अशोक बजाज 5 सितंबर 2011 को 10:45 pm  

@ Khushdeep Sehgal,
जन्मदिन की बधाई के लिए आपको धन्यवाद .
दिल्ली ब्लागर मीट की यादगार अविस्मरनीय है , फिर मिलेंगें .

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