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दिवाली में राम वन गमन मार्ग एवं हाईटेक पटाखें

>> 23 अक्तूबर, 2011


 
दीपावली के अवसर पर पटाखों के प्रदुषण की चिंता बहुत लोगों को रहती है . पिछली दिवाली में भी मैनें पर्यावरण रक्षा की अपील की थी , जिसका काफी असर हुआ था .  इस बार भी हम आपके लिए प्रदुषण मुक्त पटाखे ढूंढ़ कर लाये है . आप इन पटाखों का इस्तेमाल करें और घर के बच्चों को भी प्रेरित करें . इन पटाखों से बच्चों को दिवाली का पूरा आनंद तो मिलेगा ही साथ ही साथ पर्यावरण की भी रक्षा होगी . तो अब शुरू हो जाइये और अपने मनपसंद पटाखे पर क्लिक कीजिये . कैसा लगा यह बताना ना भूलें .

(3)   अनार




इस बार दिवाली ग्रीटिंग कार्ड में हमने भगवान श्री रामचंद्र जी के वन गमन मार्ग को रेखांकित करने वाला नक्शा प्रकाशित किया है . यह नक्शा छत्तीसगढ़ में राम वन मार्ग शोध दल ने काफी मेहनत के बाद  जारी किया है .




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सुरक्षा परिषद् बनेगा अखाड़ा

>> 22 अक्तूबर, 2011

भारत संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य बन गया हैं.भारत  के अलावा  पाकिस्तान  मोरोक्को, ग्वातेमाला और टोगो को भी अस्थाई सदस्य चुन लिया गया है.


संयुक्त राष्ट्र में दो साल के लिए पांच सदस्य चुने जाने हेतु मतदान हुआ था. सुरक्षा परिषद में पांच स्थाई सदस्यों के अलावा दस अस्थाई सदस्य होते हैं. इन दस में से पांच के लिए हर वर्ष चुनाव होता है. हर अस्थाई सदस्य दो वर्ष के लिए सुरक्षा परिषद का हिस्सा बनता है.


पाकिस्तान  के सुरक्षा परिषद के  अस्थाई सदस्य बनने से यह संभावना बढ़ गई है कि पाकिस्तान  कश्मीर  संबंधी  विवाद  के लिए  सुरक्षा परिषद् को अखाड़ा बनाने का प्रयास करेगा .


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सैन्य बलों में ईंधन के बेतहाशा इस्तेमाल का दुष्प्रभाव

>> 20 अक्तूबर, 2011

लंदन में हुई विशेषज्ञों की एक कांफ़्रेंस के अनुसार जलवायु परिवर्तन विश्व भर में स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए “एक बड़ा और गहराता ख़तरा ” है. ब्रितानी सेना के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले संघर्षों के चलते ईंधन जैसी वस्तुओं की क़ीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. लंदन में हुई कांफ़्रेस के बाद जारी बयान में कहा गया है कि भविष्य में मानवीय त्रासदियां सैनिक संसाधनों पर और दबाव डालेंगी.

सम्मेलन ने सरकारों से ग्रीनहाउस गैसों में कटौती के लक्ष्यों को और महत्वकांक्षी बनाने का आहवान किया है. संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक जलवायु कांफ़्रेंस डेढ़ महीने बाद शुरू होगी. इस बैठक से पहले लंदन में ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन के मुख्यालय में कई विशेषज्ञों ने एक सम्मेलन में विकसित और विकासशील देशों से जलवायु परिवर्तन पर गंभीर होने की अपील की है.

 
सैन्य बलों में ईंधन के बेतहाशा इस्तेमाल करने का दुष्प्रभाव  :--

0   ईंधन की क़ीमत बढ़ने से ब्रिटेन जैसे देशों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.
0   सैन्य बल दुनिया भर में बड़ी मात्रा में ईंधन का उपभोग करते हैं.
0   जिस समुद्री जहाज़ को 12 ईंच आगे बढ़ाने के लिए एक गैलन तेल लगता हैं. 
0   जलवायु परिवर्तन की वजह से विकासशील देशों में कई दुष्प्रभाव पड़ने की चेतावनी दी
0   इससे कुपोषण बढ़ेगा और कुछ संक्रामक रोगों के और फैलने की भी आशंका है.
0   किस तरह अफ़गानिस्तान में सेना के इस्तेमाल के लिए पहुंचने वाला पेट्रोल दस गुना अधिक मंहगा हो जाता  है क्योंकि इसे पाकिस्तान से सड़क के रास्ते लाया जाता है.

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मूंछ रखो, आधी कीमत में टिकट पाओ

>> 14 अक्तूबर, 2011


मार्क लिएव्रेमों 2007 से फ़्रांस रग्बी टीम के कोच
न्यूजीलैंड में इन दिनों रग्बी विश्व कप चल रहा है जहां फ्रांस ने सेमीफाइनल में जगह बनाई है। जाहिर है फ्रांस में इन दिनों रग्बी का जुनून है। वहाँ दो फ्रांसीसी टीमों- बाईऑन और मॉंगपुलिए के बीच होने वाले मैच में बाईऑन टीम ने प्रशंसकों को टिकटें आधी कीमत पर देने का फैसला किया है। हालांकि इसके लिए एक शर्त है।
शर्त ये है कि दर्शकों को फ्रांसीसी रग्बी टीम के प्रमुख कोच मार्क लिएव्रेमों की तर्ज पर मूंछ रखकर आना होगा। ये मूंछे नकली भी हो सकती हैं मतलब ये कि महिला और पुरुष दोनों इसका फायदा उठा सकते हैं।
दरअसल हुआ ये है कि फ्रांस के प्रमुख कोच मार्क लिएव्रेमों ने टीम के डिफ्रेंस कोच से शर्त लगाई थी जिससे वे हार गए। शर्त हारने के बाद से ही मार्क लिएव्रेमों ने दाढ़ी मूंछ नहीं बनवाई है। वैसे न्यूजीलैंड में जारी रग्बी विश्व कप के दौरान अपने बेबाक बयानों से फ्रांसीसी कोच पिछले कुछ दिनों से विवादों में रहे हैं।
उस पर से फ्रांस की टीम टोंगा से हार गई। लेकिन क्वार्टरफाइनल में इंग्लैंड को हराने के बाद कोच के आलोचक कुछ चुप्प हुए हैं। सेमीफाइनल मुकाबला 15 अक्टूबर को वेल्स से है।

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सूरज में आग है , चाँद में भी दाग है ,

>> 12 अक्तूबर, 2011

ज  शरद पूर्णिमा की रात है  , आसमान साफ होने के कारण पूर्णिमा की चन्द्रमा का सुहावना दर्शन हो रहा है . कहते है की आज की रात चन्द्रमा की  किरणों से अमृत की बूंदें टपकती है . कोई कैसे इस सुनहरे अवसर को चुकोना चाहेगा अतः सबने आसमान के नीचे छींकें में खीर का कटोरा टांग रखा है . 
  
हिन्दू मान्यता  के अनुसार इसी दिन चन्द्र अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है. कुछ क्षेत्रों में इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है. यह भी  मान्यता  है कि इस दिन भगवान श्री कृ्ष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था.इस दिन चन्द्रमा कि किरणों से अमृत वर्षा होने की मान्यता प्रसिद्ध है. इस दिन एरावत पर आरूढ़ हुए  इन्द्र व महालक्ष्मी का पूजन किया जाता है. इससे  लक्ष्मी और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.

  सूरज  में आग है  , चाँद में भी दाग है ,
फिर भी सागर को दोनों से अनुराग है .

शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं !
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चुकंदर से बनेगा पानी में घुलने वाला प्लास्टिक

>> 09 अक्तूबर, 2011

Beetroot
टली की एक कंपनी ऐसी प्लास्टिक बना रही है जो पानी में घुल सकती है. चुकंदर से निकलने वाले कचरे से प्लास्टिक का निर्माण हो रहा है. चुकंदर के उत्पादन से निकलने वाले बाई प्रोडक्ट वातावरण के लिए वरदान साबित हो सकते हैं. इसके अलावा दुनिया की निर्भरता तेल से बनने वाली प्लास्टिक पर भी कम हो सकती है. एक छोटी इतालवी कंपनी बायो ऑन जैव प्लास्टिक के क्षेत्र में नया प्रयोग करने जी-जान से प्रयत्नशील है  .

इटली के शहर मिनेर्बियो में सबसे बड़ी चीनी उत्पादक कंपनी को प्रो बी चीनी बना रही है. लेकिन बायो ऑन की दिलचस्पी चीनी में नहीं, चुकंदर से चीनी बन चुकने के बाद बची हुई चीजों में हैं जिसे कचरा मानकर फेंक दिया जाता है. चुकंदर के अशुद्धीकृत शीरे से बायो ऑन प्लास्टिक बनाती है. चीनी के कारखाने से शीरा कचरे के तौर पर निकलता है.

बायो ऑन के वैज्ञानिकों ने पांच साल की मेहनत के बाद शीरे को प्लास्टिक में तब्दील किया है. कंपनी चुकंदर के शीरे को ऐसे जीवाणु के साथ मिलाती है जो किण्वन के दौरान चीनी पर पलते हैं. इस प्रक्रिया के दौरान लैक्टिक एसिड, फिल्ट्रेट और पॉलीमर बनता है जिसका इस्तेमाल प्राकृतिक तरीके से सड़ने वाली प्लास्टिक बनाने में हो सकता है.

प्रदूषण से बचाव
बॉयो ऑन के मुख्य जीव विज्ञानी साइमन बिगोटी डॉयचे वेले को बताते हैं, "हम कई तरह की चीजें बना सकते हैं. क्योंकि कई तरह की प्लास्टिक समीकरण बना पाना मुमकिन है. हम पॉलीइथाइलिन, पॉलीस्टाइरीन, पॉलीप्रॉपाईलीन को बदल सकते हैं."

कंपनी ने बॉयो पॉलीमर्स का विकास किया है. इसका इस्तेमाल कठोर और लचीली प्लास्टिक के लिए जा सकता है. बिगोटी का मानना है कि बॉयो प्लास्टिक उनके दफ्तर में प्लास्टिक से बनी 80 चीजों की जगह ले सकती है.

बिगोटी कहते हैं, "हम ऐसी प्लास्टिक बना रहे हैं जो जीवन काल के खत्म होने के 10 दिन के भीतर पानी में घुल जाएगी." एक शोध के मुताबिक बॉयो प्लास्टिक का बाजार 2011 और 2015 के बीच दोगुना हो जाएगा. 2010 में सात लाख टन प्लास्टिक का उत्पादन हुआ जो इस साल 10 लाख टन को पार कर जाएगा.

बायो प्लास्टिक का बाजार

वृद्धि के बावजूद बायो प्लास्टिक का बाजार तेल आधारित प्लास्टिक की तुलना में छोटा है. प्लास्टिक उद्योग एसोसिएशन के मुताबिक 2010 में 27 करोड़ टन प्लास्टिक की खपत हुई. यूरोपीय बायो प्लास्टिक के अध्यक्ष हाराल्ड कैब को विश्वास है कि यूरोप के प्लास्टिक बाजार के कुल हिस्से का 5 से 10 फीसदी जगह बायो प्लास्टिक ले सकती है.

बायो प्लास्टिक बनाने के लिए सिर्फ बायो ऑन ही शोध नहीं कर रही है. रसायन कंपनी जैसे बीएएसएफ, ब्रास्केम एंड डॉ भी बायो प्लास्टिक उत्पाद बना रहे हैं. कंपनियां बायो प्लास्टिक उत्पादन क्षमता भी बढ़ा रही हैं.

आम तौर प्लास्टिक को प्रदूषण बढ़ाने के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जाता है. बायो ऑन के सह-संस्थापक मार्को अस्टोरी का कहना है कि उनकी कंपनी अनोखी है क्योंकि वह कचरे का इस्तेमाल कर प्लास्टिक बनाती है. अस्टोरी कहते हैं, "हम सिर्फ कचरे का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि खाद्य सामग्री का इस्तेमाल प्लास्टिक बनाने के लिए करना पागलपन है."
डायचे वेले 

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दशहरा पर्व पर नीलकंठ के दर्शन

>> 08 अक्तूबर, 2011



नीलकंठ

शहरा पर्व पर नीलकंठ के दर्शन को शुभ और भाग्य को जगाने वाला माना जाता है. जिसके चलते दशहरे के दिन हर व्यक्ति इसी आस में छत पर जाकर आकाश को निहारता है ताकि साल भर उनके यहाँ शुभ कार्य का सिलसिला चलता रहे. ऐसा माना जाता है कि इस दिन नीलकंठ के दर्शन होने से घर के धन-धान्य में वृद्धि होती है, तथा  फलदायी एवं शुभ कार्य घर में अनवरत्‌ होते रहते हैं.  सुबह से लेकर शाम तक किसी वक्त नीलकंठ दिख जाए तो वह देखने वाले के लिए शुभ होता है.

हम भी दशहरा मनाने निकले तो रास्ते भर सड़क के किनारे की झाड़ियों , खेतों व बिजली के तारों को निहारते रहे . 12 कि.मी. दूर जाने पर बिजली के तार एक नीलकंठ बैठा दिखाई दिया . हमारे साथी श्री श्याम वर्मा ने फोटो खींचने की बहुत कोशिश की  लेकिन साफ फोटो नहीं खिंच पाए , क्योंकि पक्षी सूर्य की दिशा में था . हम लोग उसके उड़ने का इंतजार करने लगे लेकिन काफी देर रूकने के बावजूद भी वह नहीं उड़ा. अलबत्ता वहां काफी भीड़ जमा हो गई . भीड़ से बचाते हुए हम आगे बढ़ गए . रायपुर से अभनपुर पंहुचते तक 27 कि.मी. के सफ़र में 10 - 12 नीलकंठ विभिन्न विभिन्न मुद्राओं में दिखाई दिए .

 नीलकंठ पक्षी को भगवान राम का संदेशवाहक माना जाता है इसीलिये कहा भी गया है -----


    नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध-भात का भोजन करियो, हमरी बात राम से कहियो'

भगवान शिव को भी  नीलकंठ कहा गया है  क्योकिं  उन्होंने सर्वकल्याण के लिए विषपान किया था. इसीलिए शिव कल्याण के प्रतीक है. ठीक इसी तरह ईश्वर के बनाए नीलकंठ पक्षी भी है . इस रंग बिरंगी खूबसूरत पक्षी का गला भी शिव की तरह नीला होता है.

 नीलकंठ दुर्लभ प्रजाति का संरक्षित पक्षी है. चिता का विषय यह है  पर्यावरणीय असंतुलन के कारण  अब यह शुभ दायक खूबसूरत पक्षी विलुप्त होते जा  रहा है . लोग  नीलकंठ दर्शन के लिए तरस रहे है.    इसके पीछे पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ फसलों में प्रयोग किया जाने वाला कीटनाशक भी  है.

अब देखिये रावण दहन के दृश्य ........

अभनपुर का दशहरा
खोला ग्राम का दशहरा
नवापारा का दशहरा
दैनिक अग्रदूत रायपुर  7.10.2011      

 

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संचार क्रांति के पुरोधा स्टीव जॉब्स

>> 07 अक्तूबर, 2011


दुनियाभर में कंप्यूटर से लेकर आई पॉड और आई फोन के जरिए संचार प्रौद्योगिकी में क्रांति लाने वाले एप्पल के सह-संस्थापक 56 वर्षीय  स्टीव जॉब्स का आज दुखद  निधन हो गया. वे  पैंक्रियास कैन्सर से पीड़ित थे.

Steve Jobs
 इस वर्ष जनवरी के बाद से वे  कंपनी के कामकाज से छुट्टी पर थे, यदा कदा ही काम पर   दिखाई देते थे. मार्च में उन्होंने आई पैड का दूसरा संस्करण बाजार में उतारा और फिर सिलिकान वैली में राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा टैक्नॉलॉजी के दिग्गजों के लिए आयोजित रात्रि भोज में शामिल हुए. जून में वे  सान फ्रांसिस्को में एप्पल के आई क्लाउड के बारे में बताने के लिए एक बार फिर सामने आए.

एप्पल के सबसे ज्यादा प्रचलित और प्रतिष्ठित उत्पाद जैसे आईपॉड, आई फोन और आईपैड जॉब्स की दूरदर्शिता और कौशल के  परिणाम थे. उनके नेतृत्व में एप्पल ने आई पॉड के जरिए संगीत जगत की नयी परिभाषा गढ़ी. आई फोन ने मोबाइल की दुनिया का अंदाज बदला और आई पैड  ने मनोरंजन और मीडिया जगत को नये मायने दिए.
 
जॉब्स ने 1976 में अपने घर के गैरेज में स्टीव वोज्नियाक के साथ एप्पल की शुरुआत की और एप्पल दो तथा मैकिनटोश कंप्यूटर्स का विकास किया.उन्होंने कंपनी के निदेशक मंडल के साथ विवाद के चलते 1985 में कंपनी छोड़ दी थी.अगले वर्ष उन्होंने नैक्स्ट कंप्यूटर की स्थापना की. 1986 में उन्होंने लुकासफिल्म के कंप्यूटर ग्राफिक्स डिवीजन को खरीद लिया और इसे एक स्वतंत्र एनीमेशन स्टूडियो पिक्सर के तौर पर फिर से स्थापित किया.
करीब एक दशक बाद 1996 में एप्पल ने नैक्स्ट को खरीद लिया और जॉब्स को एप्पल में वापिस लाया गया. 1997 से जॉब्सने कंपनी के सीईओ के तौर पर काम शुरू किया और जीवन के अंतिम दिनों तक इसी पद पर बने रहे.
 
संचार क्रांति के पुरोधा स्टीव जॉब्स  ने अपने आविष्कारों के जरिये दुनिया भर में अपना गहरा छाप  छोड़ा है , निश्चित रूप से आने वाली कई पीढ़ियों तक उनका प्रभाव महसूस किया जाता रहेगा . ग्राम चौपाल की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि . 

Jobs, who touched the daily lives of countless millions of people through the Macintosh computer, iPod, iPhone and iPad, died on Wednesday at age 56 after a long battle with pancreatic cancer. He stepped down as Apple chief executive in August. (reuters)

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रावण को खुद मारे माउस से

>> 06 अक्तूबर, 2011

जय श्री राम 

आश्विन माके शुक्ल पक्ष की दशमी को दशहरा पर्व मनायजातहै. हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है. भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध कर अहंकार का नाश  किया था. इसे असत्य पर सत्य ,अधर्म पर धर्म तथा अन्याय पर न्याय  की विजय के रूप में मनाया जाता है. इसीलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है.

विजयादशमी पर्व  की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ रावण दहन की ऑनलाइन सुविधा वेबदुनिया की मदद से ग्राम चौपाल में  उपलब्ध है .

आप माउस की सहायता से नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर रावण दहन कर सकते हैं।

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फल से लदी डालियों से नित सीखो शीश झुकाना

>> 04 अक्तूबर, 2011






धान का कटोरा गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी लहलहा रहा है , पिछले वर्ष धान के रिकार्ड उत्पादन के लिए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को पुरष्कार दिया था . ईश्वर ने चाहा तो इस साल भी रिकार्ड बनेगा .  खरीफ  सीजन की  धान की फसल पकने को  तैयार है  . कुछ ही दिनों में काटने लायक हो जायेगी . सितंबर के महीने में ही  धान की बालियों में दूध भर आया था जो धीरे धीरे  चांवल के रूप में तब्दील हो जाता है . दूध भर आने के बाद धान की बालियाँ झुक जाती है . प्राथमिक शाला में पढाया भी जाता है ---

फूलों से नित हंसना सीखो, भौरों से नित गाना ;
फल से लदी डालियों से, नित सीखो शीश झुकाना ;

 नेत्र दान शिविर में भाग लेने दो दिन पूर्व चंपारण गया था तो उस गाँव  के प्रगतिशील युवा कृषक श्री शोभाराम साहू के आग्रह पर फसल का अवलोकन करने उसके  खेतों में पहुँच गया . वे  लगभग 16 एकड़ भूमि में नई तकनीक से खेती करते है . उनके खेतों में धान के अलावा गन्ने की फसल भी लहलहा रही है . कुछ हिस्से में साग-सब्जी भी है . उनके प्लाट में विद्युत् पंप भी है . बड़ी मुश्किल से पानी मिला है . पानी के अभाव में उन्होंने कुछ वर्षों से खेती से किनारा कर लिया था . बोरवेल फेल हो जाते थे ,  किसी की सलाह पर उन्होनें नया बोर कराया तो भरपूर पानी  मिल गया . फिर क्या था , खेती की तरफ उनका रुझान फिर बढ़ गया . अब तो खेती की बदौलत लाखों कमा रहें है . धान के अलावा गन्ने की चिल्हर बिक्री से प्राप्त आय से वे काफी संतुष्ट है , साग सब्जी और फलों से भी उन्हें काफी पैसा मिल जाता है . इस कार्य के लिए उन्हें 8 - 10 मजदूर स्थाई रूप से मिल गए है जो बारहों महीने काम पर आते है .  

धान की लहलहाती  फसल
गन्ने की फसल को दिखाते हुए युवा कृषक श्री शोभाराम साहू
गन्ने की नई फसल को निहारते हुए 
   

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छत्तीसगढ़ में प्रथम रेडियो प्रसारण के पूरे हुए 48 साल

>> 02 अक्तूबर, 2011

आकाशवाणी के कार्यक्रमों की गुणवत्ता आज भी कायम --- बजाज 
श्रोता संघों ने मनाया आकाशवाणी रायपुर का स्थापना दिवस

प्रथम छत्तीसगढ़ी फिल्म 'कहि देबे संदेश' के निर्माता-निर्देशक श्री मनु नायक हुआ अभिनंदन

रेडियो प्रसारण सेवा के 48 वर्ष छत्तीसगढ़ में पूरे हो चुके हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर दो अक्टूबर 1963 को यहां आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र के प्रसारण की शुरूआत हुई थी। आकाशवाणी रायपुर का अड़तालिसवां स्थापना दिवस समारोह आज यहां चौबे कॉलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल के सभा भवन में मनाया गया। इस अवसर पर आज से लगभग 46 वर्ष पहले 1965 में छत्तीसगढ़ी भाषा में निर्मित पहली कथा फिल्म 'कहि देबे संदेश' के निर्माता और निदेशक श्री मनु नायक का नागरिक अभिनंदन भी किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज समारोह के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने श्री मनु नायक को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

मुख्य अतिथि की आसंदी से समारोह को सम्बोधित करते हुए श्री अशोक बजाज ने कहा कि देश के जन-जीवन पर रेडियो कार्यक्रमों का भी व्यापक असर होता है। श्री बजाज ने कहा कि आकाशवाणी के कार्यक्रमों की गुणवत्ता आज भी कायम है। विभिन्न केन्द्रों से गीत-संगीत के मनोरंजक कार्यक्रमों के साथ-साथ किसानों और समाज के विभिन्न वर्गों की जरूरतों से जुड़े ज्ञानवर्धक कार्यक्रम भी प्रसारित होते हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों के जरिए आकाशवाणी द्वारा राज्य सरकार और केन्द्र की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी आम जनता को दी जाती है, जिसका लाभ जरूरतमंद लोगों को मिलता है। श्री बजाज ने बालिका शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और समाज में बेटियों के संरक्षण की जरूरत पर भी बल दिया। शारदीय नवरात्रि का उल्लेख करते हुए श्री बजाज ने कहा कि हमारे भारतीय समाज में महिलाओं को हमेशा देवी के रूप में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त होता रहा है। हमारे यहां नदियों को भी माता के रूप में सम्बोधित किया जाता है।


 


स्थापना दिवस समारोह के साथ-साथ आकाशवाणी रायपुर के वरिष्ठ सेवानिवृत्त उदघोषक श्री लाल रामकुमार सिंह की अध्यक्षता में इस अवसर पर आकांक्षा रेडियो लिस्नर्स संस्था, धरसींवा द्वारा रेडियो श्रोताओं के विभिन्न संगठनों के सहयोग से अखिल भारतीय रेडियो श्रोता सम्मेलन भी आयोजित किया गया। समारोह में मुम्बई से आए वरिष्ठ छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्माता और निदेशक श्री मनु नायक ने रेडियो श्रोताओं के इस सम्मेलन को अपने लिए एक नया तथा दिलचस्प अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि रेडियो कार्यक्रमों के प्रस्तुतकर्ताओं और प्रसारकों को वास्तविक ऊर्जा अपने श्रोताओं से ही मिलती है। श्री मनु नायक ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलनों से रेडियो श्रोताओं और उदघोषकों के बीच भाईचारा बढ़ता है। श्रोताओं से रेडियो वालों को कई अच्छे सुझाव भी प्राप्त होते हैं। छत्तीसगढ़ में 46 वर्ष पहले फिल्म उद्योग की बुनियाद रखने वाले श्री मनु नायक ने इस मौके पर अपनी प्रथम छत्तीसगढ़ी फिल्म 'कहि देबे संदेश' के फिल्मांकन से जुड़े संस्मरण भी सुनाए। उन्होंने रेडियो श्रोताओं को बताया कि इस फिल्म में मोहम्मद रफी, महेंद्र कपूर, मन्नाडे, मीनू पुरूषोत्तम जैसे हिन्दी सिनेमा के अनेक जाने-माने गायकों ने छत्तीसगढ़ी गीत गाकर हमारी माटी का मान बढ़ाया था। फिल्म का पहला गीत छत्तीसगढ़ में प्रचलित पारम्परिक लोक शैली का ददरिया था, जिसे श्री महेन्द्र कपूर और सुश्री मीनू पुरूषोत्तम ने गाया था, जिसके बोल थे ....
कोयली रे कूकै, आमा के डार म,
चले आबे पतरेंगी, नवा तरिया पार म'

इस फिल्म के गीतकार थे स्वर्गीय डॉ. हनुमंत नायडू 'राजदीप' और संगीतकार थे श्री मलय चक्रवर्ती। पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म के अनेक गीत उस जमाने में काफी लोकप्रिय हुए, जिनमें प्रसिध्द पार्श्व गायक श्री मोहम्मद रफी का गाया 'झमकत नदिया बहिनी लागय, परबत मोर मितान' भी शामिल है। रेडियो श्रोताओं के सम्मेलन में आज इस पुराने सदाबहार गीत के प्रस्तुतिकरण से एक बार फिर पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म 'कहि देबे संदेश' की यादें ताजा हो गयी।  अध्यक्षीय आसंदी से श्री लाल रामकुमार सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सम्मेलन को दुर्गा महाविद्यालय रायपुर के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर अनिल कालेले, आकाशवाणी रायपुर के उदघोषक श्री श्याम वर्मा, श्री यादराम पटेल और श्री दीपक हटवार, सहित अन्य अनेक वक्ताओं ने भी सम्बोधित किया। सम्मेलन में आकाशवाणी के श्रोताओं की पसंद पर आधारित फरमाइशी फिल्मी गीतों का जीवंत प्रस्तुतिकरण आकर्षण का केन्द्र रहा, जिसमें श्रीमती वीणा ठाकुर, सुश्री मनीषा जंघेल, श्री राजकुमार गंभीर और श्री दिनेश साहू सहित अनेक श्रोता कलाकारों द्वारा नये-पुराने सदाबहार फिल्मी गीत पेश किए गए। सम्मेलन में अभनपुर निवासी प्रसिध्द हिन्दी ब्लाग लेखक श्री ललित शर्मा सहित आकाशवाणी रायपुर और विभिन्न आकाशवाणी केन्द्रों के उदघोषक तथा अनेक प्रबुध्दजन उपस्थित थे। इस मौके पर अहिंसा रेडियो श्रोता संघ बलौदाबाजार की विशेष बुलेटिन का विमोचन भी किया गया। सम्मेलन के आयोजन में अमलेश्वर रेडियो श्रोता संघ, भाटापारा रेडियो श्रोता संघ और जय छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ पिपरिया सहित अनेक श्रोता संघों के सदस्य और पदाधिकारी भी काफी संख्या में मौजूद थे।

 

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