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चुकंदर से बनेगा पानी में घुलने वाला प्लास्टिक

>> 09 अक्टूबर, 2011

Beetroot
टली की एक कंपनी ऐसी प्लास्टिक बना रही है जो पानी में घुल सकती है. चुकंदर से निकलने वाले कचरे से प्लास्टिक का निर्माण हो रहा है. चुकंदर के उत्पादन से निकलने वाले बाई प्रोडक्ट वातावरण के लिए वरदान साबित हो सकते हैं. इसके अलावा दुनिया की निर्भरता तेल से बनने वाली प्लास्टिक पर भी कम हो सकती है. एक छोटी इतालवी कंपनी बायो ऑन जैव प्लास्टिक के क्षेत्र में नया प्रयोग करने जी-जान से प्रयत्नशील है  .

इटली के शहर मिनेर्बियो में सबसे बड़ी चीनी उत्पादक कंपनी को प्रो बी चीनी बना रही है. लेकिन बायो ऑन की दिलचस्पी चीनी में नहीं, चुकंदर से चीनी बन चुकने के बाद बची हुई चीजों में हैं जिसे कचरा मानकर फेंक दिया जाता है. चुकंदर के अशुद्धीकृत शीरे से बायो ऑन प्लास्टिक बनाती है. चीनी के कारखाने से शीरा कचरे के तौर पर निकलता है.

बायो ऑन के वैज्ञानिकों ने पांच साल की मेहनत के बाद शीरे को प्लास्टिक में तब्दील किया है. कंपनी चुकंदर के शीरे को ऐसे जीवाणु के साथ मिलाती है जो किण्वन के दौरान चीनी पर पलते हैं. इस प्रक्रिया के दौरान लैक्टिक एसिड, फिल्ट्रेट और पॉलीमर बनता है जिसका इस्तेमाल प्राकृतिक तरीके से सड़ने वाली प्लास्टिक बनाने में हो सकता है.

प्रदूषण से बचाव
बॉयो ऑन के मुख्य जीव विज्ञानी साइमन बिगोटी डॉयचे वेले को बताते हैं, "हम कई तरह की चीजें बना सकते हैं. क्योंकि कई तरह की प्लास्टिक समीकरण बना पाना मुमकिन है. हम पॉलीइथाइलिन, पॉलीस्टाइरीन, पॉलीप्रॉपाईलीन को बदल सकते हैं."

कंपनी ने बॉयो पॉलीमर्स का विकास किया है. इसका इस्तेमाल कठोर और लचीली प्लास्टिक के लिए जा सकता है. बिगोटी का मानना है कि बॉयो प्लास्टिक उनके दफ्तर में प्लास्टिक से बनी 80 चीजों की जगह ले सकती है.

बिगोटी कहते हैं, "हम ऐसी प्लास्टिक बना रहे हैं जो जीवन काल के खत्म होने के 10 दिन के भीतर पानी में घुल जाएगी." एक शोध के मुताबिक बॉयो प्लास्टिक का बाजार 2011 और 2015 के बीच दोगुना हो जाएगा. 2010 में सात लाख टन प्लास्टिक का उत्पादन हुआ जो इस साल 10 लाख टन को पार कर जाएगा.

बायो प्लास्टिक का बाजार

वृद्धि के बावजूद बायो प्लास्टिक का बाजार तेल आधारित प्लास्टिक की तुलना में छोटा है. प्लास्टिक उद्योग एसोसिएशन के मुताबिक 2010 में 27 करोड़ टन प्लास्टिक की खपत हुई. यूरोपीय बायो प्लास्टिक के अध्यक्ष हाराल्ड कैब को विश्वास है कि यूरोप के प्लास्टिक बाजार के कुल हिस्से का 5 से 10 फीसदी जगह बायो प्लास्टिक ले सकती है.

बायो प्लास्टिक बनाने के लिए सिर्फ बायो ऑन ही शोध नहीं कर रही है. रसायन कंपनी जैसे बीएएसएफ, ब्रास्केम एंड डॉ भी बायो प्लास्टिक उत्पाद बना रहे हैं. कंपनियां बायो प्लास्टिक उत्पादन क्षमता भी बढ़ा रही हैं.

आम तौर प्लास्टिक को प्रदूषण बढ़ाने के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जाता है. बायो ऑन के सह-संस्थापक मार्को अस्टोरी का कहना है कि उनकी कंपनी अनोखी है क्योंकि वह कचरे का इस्तेमाल कर प्लास्टिक बनाती है. अस्टोरी कहते हैं, "हम सिर्फ कचरे का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि खाद्य सामग्री का इस्तेमाल प्लास्टिक बनाने के लिए करना पागलपन है."
डायचे वेले 

3 टिप्पणियाँ:

ब्लॉ.ललित शर्मा 10 अक्टूबर 2011 को 12:24 am  

चुकंदर की खेती प्रचुर मात्रा में करनी होगी, जिससे ही संभव हो पाएगा। अच्छी जानकारी के लिए आभार

प्रवीण पाण्डेय 10 अक्टूबर 2011 को 8:53 am  

सच में, बड़ी कृपा होगी प्रकृति पर इस तरह।

Rahul Singh 10 अक्टूबर 2011 को 8:20 pm  

वेलकम बायोप्‍लास्टिक.

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