Blogger द्वारा संचालित.
ग्राम चौपाल में आपका स्वागत है * * * * नशा हे ख़राब झन पीहू शराब * * * * जल है तो कल है * * * * स्वच्छता, समानता, सदभाव, स्वालंबन एवं समृद्धि की ओर बढ़ता समाज * * * * ग्राम चौपाल में आपका स्वागत है

सूरज में आग है , चाँद में भी दाग है ,

>> 12 अक्तूबर, 2011

ज  शरद पूर्णिमा की रात है  , आसमान साफ होने के कारण पूर्णिमा की चन्द्रमा का सुहावना दर्शन हो रहा है . कहते है की आज की रात चन्द्रमा की  किरणों से अमृत की बूंदें टपकती है . कोई कैसे इस सुनहरे अवसर को चुकोना चाहेगा अतः सबने आसमान के नीचे छींकें में खीर का कटोरा टांग रखा है . 
  
हिन्दू मान्यता  के अनुसार इसी दिन चन्द्र अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है. कुछ क्षेत्रों में इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है. यह भी  मान्यता  है कि इस दिन भगवान श्री कृ्ष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था.इस दिन चन्द्रमा कि किरणों से अमृत वर्षा होने की मान्यता प्रसिद्ध है. इस दिन एरावत पर आरूढ़ हुए  इन्द्र व महालक्ष्मी का पूजन किया जाता है. इससे  लक्ष्मी और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.

  सूरज  में आग है  , चाँद में भी दाग है ,
फिर भी सागर को दोनों से अनुराग है .

शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं !
Facebook

10 टिप्पणियाँ:

sangita puri 12 अक्तूबर 2011 को 12:50 am  

आपको भी शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं !!

Gyan Darpan 12 अक्तूबर 2011 को 7:16 am  

आपको भी शरद पूर्णिमा की बहुत बहुत शुभकामनाएं

BS Pabla 12 अक्तूबर 2011 को 7:31 am  

शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं आपको भी

खीर तो हमने भी खाई लेकिन आसमान से बरसते प्रदूषण से बचा कर :-)

प्रवीण पाण्डेय 12 अक्तूबर 2011 को 8:00 am  

शरदपूर्णिमा की खीर भुलाये नहीं भूलती है।

vandan gupta 12 अक्तूबर 2011 को 10:19 am  

आपको भी शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं !

रवीन्द्र प्रभात 12 अक्तूबर 2011 को 11:09 am  

शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं !!

PRAMOD KUMAR 12 अक्तूबर 2011 को 2:36 pm  

आपको भी शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं..........!

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 12 अक्तूबर 2011 को 3:03 pm  

क्या बात है! वाह! बहुत सुन्दर प्रस्तुति बधाई

Swarajya karun 12 अक्तूबर 2011 को 11:22 pm  

शरद पूर्णिमा की चाँदनी में
धुएँ से धूमिल शहरी आकाश के नीचे
खीर खाना आज टेढी खीर है ,
साफ़ -सुथरे पर्यावरण वाले
गाँवों की अच्छी तकदीर है !
शरद पूर्णिमा की आपने लगाई
सचमुच बहुत खूबसूरत तस्वीर है !
ऐसा नजारा तो केवल
गाँवों में दिखेगा ,
क्या शहर उससे कुछ सीखेगा ?
बधाई और शुभकामनाएं !

ashokbajajcg.com 13 अक्तूबर 2011 को 12:43 am  

@ Swarajya karun,

गजब की काव्यमय टिप्पणी , आभार !

एक टिप्पणी भेजें

About This Blog

  © Blogger template Webnolia by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP