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गर्म पानी से नहाने से होता है दिल का दौरा

>> 29 अप्रैल, 2011

सर्दी के मौसम में गर्म पानी से नहाने से ठण्ड से राहत तो मिलती है लेकिन यह दिल के दौरे की वजह भी बन सकता है. जापान में हुए एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है.

 जब मौसम सर्द हो तब ठन्डे पानी में हाथ डालने का भी किसी का मन नहीं करता, ऐसे में ठन्डे पानी से नहाने के बारे में तो सोचना भी मुश्किल होता है. जापान में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अगर सर्दी में गर्म पानी से नहाया जाए तो उस से दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है. जापान की क्योटो प्रिफेकचुरल यूनिवर्सिटी में यह शोध किया गया. रिसर्च टीम का नेतृत्व करने वाले चिका निशियामा बताते हैं कि गर्मियों की तुलना में सर्दियों में दिल के दौरे के मामले दस गुना बढ़ जाते हैं.

एशियाई देशों में पश्चिमी देशों की तरह सेन्ट्रल हीटिंग की व्यवस्था नहीं होती. ऐसे में गर्म पाने से नहाना ठण्ड से राहत पाने का एकमात्र उपाय समझा जाता है. खासकर जापान में लोग सर्दियों में काफी समय गर्म पानी के टब में बिताना पसंद करते हैं. इसी कारण वहां ऐसे स्पा भी हैं जहां लोग खास तौर से हॉट वॉटर ट्रीटमेंट के लिए जाते हैं.

निशियामा की टीम ने 2005 से 2007 के बीच हुए दिल के दौरे के 11,000 मामलों की जांच की. जांच में सामने आया कि जिन लोगों को दौरा पड़ा था उन में से 22 प्रतिशत लोग सो रहे थे, 9 प्रतिशत नहा रहे थे, 3 प्रतिशत काम कर रहे थे और 0.5 प्रतिशत व्यायाम कर रहे थे. बाकी लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. लेकिन जब दौरे की असली वजह की जांच की गई तो पता चला कि सबसे अधिक दौरे नहाने और उसके बाद व्यायाम के कारण पड़े. बाहर के तापमान का भी इसमें बड़ा हाथ है. मतलब बाहर जितनी ज्यादा सर्दी हो गर्म पानी से नहाना उतना ही खतरनाक होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि शरीर बाहर के तापमान और पानी के तापमान के बीच ठीक से संतुलन नहीं बना पाता  और रक्त चाप गिर जाता है.DW HINDI






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सरगुजा में भण्डार गृह निगम के तीन गोदामों का लोकार्पण

>> 27 अप्रैल, 2011



रायपुर 26 अप्रैल 2011



छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज ने सरगुजा जिले के मुख्यालय अम्बिकापुर में एक करोड़ 62 लाख रुपए की लागत से बनने वाले 5400 मीटरिक टन क्षमता के गोदाम का भूमि पूजन किया। उन्होंने सरगुजा प्रवास के दौरान अम्बिकापुर लखनपुर और प्रतापपुर में एक-एक करोड़ रुपए की लागत से निर्मित गोदामों का लोकार्पण भी किया। इनमें से प्रत्येक गोदाम की क्षमता 3600 मीटरिक टन है। इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री कमलभान सिंह सहित सर्वश्री घनश्याम अग्रवाल, मुनेश्वर राजवाडे, संतोष दास, रविन्द्र भारती, परमानंद जैसवाल, देवी राम अग्रवाल, बृजकिशोर पांडेय, शशिकांत गर्ग और बड़ी संख्या में ग्रामीण् उपस्थित थे।



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बढ़ते तापमान से मछलियों को तनाव

>> 18 अप्रैल, 2011


 दुनिया के कुछ हिस्सों में तापमान वृद्धि के कारण मछलियों की कुछ प्रजातियों पर गंभीर असर हो रहा है. उनका प्रजनन कम तो हो ही रहा है लेकिन तनाव और उनके मरने की आशंका भी बढ़ती जा रही है.

नेचर क्लाइमेट चेंज नाम की पत्रिका में प्रकाशित ताजा शोध लंबे समय से जिंदा रह रही मछलियों को केंद्र में रखते हुए किया गया है. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच तस्मान सागर में पाई जाने वाली बैंडेड मोरवोंग मछलियों पर वैज्ञानिकों ने यह शोध किया.

ताजा और पुराने आंकड़ों की मदद से वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ हिस्सों में समुद्री स्तर और तापमान में 2 डिग्री की बढ़ोतरी से इन मछलियों की संख्या कम हो गई.

नतीजों से पता चला है कि मछली की दूसरी प्रजातियों पर भी बढ़ते तापमान का असर हो रहा है. इस कारण पानी अम्लीय हो रहा है और और कोरल रीफ पर बुरा असर है. समुद्री पारिस्थितिकी के जानकार रॉन थ्रेशर कहते हैं कि सामान्य तौर पर ठंडे खून वाले प्राणी गर्म तापमान पर प्रतिक्रिया देते हैं और जैसे जैसे तापमान बढ़ता है उनकी संख्या भी बढ़ती है. लेकिन इसकी भी एक सीमा है. थ्रेशर बताते हैं, "कई प्रजातियों की जांच करने के बाद हमने पाया कि इनके बढ़ने की गति कम हुई है और बढ़ते तापमान के कारण शारीरिक तनाव बढ़ा है. व्यवसाय में उपयोग की जाने वाली मछलियां ज्यादा इधर उधर नहीं जातीं. वे पुरानी जगहों या उन्ही कोरल रीफ में लौट आती हैं जहां से चली थीं. इन पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ने वाला है."

बैंडेड मोरवोंग ऐसी मछलियां थीं जो किनारे के पास उथले पानी में रहती हैं और करीब सौ साल तक जिंदा रह सकती हैं. वहीं ट्यूना मछली जैसी प्रजातियां जो घूम सकती हैं वे लगातार दक्षिण के ठंडे पानी में जा रही हैं.

थ्रेशर और उनके साथियों ने 1910 से लेकर अब तक मोरवोंग के आंकड़ों पर शोध किया. इन मछलियों में ओटोलिथ्स नाम की संरचना का अध्ययन किया. यहां सालाना रिंग्स बनती हैं जो पेड़ के तनों में मिलने वाली रिंग्स जैसी होती हैं. इससे पता चला कि ऑस्ट्रेलिया के पानी में तो इस मछली की संख्या में बढ़ोतरी हुई है लेकिन बढ़ते हुए तापमान के साथ न्यूजीलैंड के आस पास बढ़ोतरी कम हो गई.


डायचे वेले के सौजन्य से






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|जय हनुमान ज्ञान गुन सागर

>> 17 अप्रैल, 2011


 ।।दोहा।। श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार

                    बरनौ रघुवर बिमल जसु , जो दायक फल चारि

 बुद्धिहीन तनु जानि के , सुमिरौ पवन कुमार
 बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर
रामदूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवन सुत नामा

महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कान्हन कुण्डल कुंचित केसा

हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे कान्धे मूंज जनेऊ साजे
शंकर सुवन केसरी नन्दन तेज प्रताप महा जग बन्दन

विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया रामलखन सीता मन बसिया

सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर संहारे रामचन्द्र के काज सवारे

लाये सजीवन लखन जियाये श्री रघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई

सहस बदन तुम्हरो जस गावें अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा

जम कुबेर दिगपाल कहाँ ते कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा

तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना लंकेश्वर भये सब जग जाना
जुग सहस्र जोजन पर भानु लील्यो ताहि मधुर फल जानु

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि जलधि लाँघ गये अचरज नाहिं
दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते

राम दुवारे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहे तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहें को डरना

आपन तेज सम्हारो आपे तीनों लोक हाँक ते काँपे
भूत पिशाच निकट नहीं आवें महाबीर जब नाम सुनावें

नासे रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा
संकट ते हनुमान छुड़ावें मन क्रम बचन ध्यान जो लावें

सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावे सोई अमित जीवन फल पावे

चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा
राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा

तुम्हरे भजन राम को पावें जनम जनम के दुख बिसरावें
अन्त काल रघुबर पुर जाई जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई

और देवता चित्त न धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई
संकट कटे मिटे सब पीरा जपत निरन्तर हनुमत बलबीरा

जय जय जय हनुमान गोसाईं कृपा करो गुरुदेव की नाईं
जो सत बार पाठ कर कोई छूटई बन्दि महासुख होई

जो यह पाठ पढे हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मँह डेरा

।।दोहा।। पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप
             राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप

हनुमान जयंती पर आपको हार्दिक बधाई !!!
photo by google

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रामनवमी के पावन पर्व पर हार्दिक बधाई

>> 11 अप्रैल, 2011

आज भगवान श्री रामचन्द्र जी का जन्म दिन है ,भगवान के जन्म काल की तिथि ,समय और महिने का चित्रण गोस्वामी तुलसी दास  यूं किया है -

नौमी तिथि मधुमास पुनीता । सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।
मध्य दिवस अति सीत न धामा ।   पावन काल लोक विश्रामा ।।

अर्थात जब भगवान श्रीराम का प्रादुर्भाव हुआ तब नवमी तिथि, चैत्र का पवित्र महीना, शुक्ल पक्ष और अभिजीत मुहूर्त था। ऎसा समय सब लोकों को शांति देने वाला होता था।


भये प्रगट कृपाला  दीनदयाला  कौसल्या  हितकारी ।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ।।

लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी ।
भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभा सिन्धु खरारी ।।

कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता ।
माया   गुन   ग्यानातीत     अमाना वेद पुरान भनंता ।।

करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता ।
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयौ प्रकट श्रीकंता ।।

ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै ।
मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै ।।

उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।
कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ।।

माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा ।
कीजे सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा ।।

सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा ।
यह चरित जे गावहि हरिपद पावहि ते न परहिं भवकूपा ।।

बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार ।
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ।।


श्री रामनवमी के पावन पर्व पर आप सब को हार्दिक बधाई  एवं शुभकामनाएं ! - अशोक बजाज 

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शराबियों को चुटकुलों पर हँसी नहीं आती

>> 10 अप्रैल, 2011

नशेबाजों का मजाक को समझने का हिस्सा कुंद

जर्मनी में लगभग 25 लाख लोग शराब के नशे के शिकार है। शराब का घातक असर गुर्दे, आँत, व साथ ही हृदय की माँसपेशियों पर भी पड़ता है। इसके अलावा मस्तिष्क में चयापचय की प्रक्रिया पर भी उसका नकारात्मक असर देखा जा सकता है।

मिसाल के तौर पर देखा गया है कि शराब के नशेड़ी चुटकुले नहीं समझ पाते हैं। जर्मन न्यूरोसाइकोलॉजिस्ट जेनिफर उएकरमान्न व ब्रिटिश वैज्ञानिकों के एक शोध से पता चला है कि चुटकुलों पर मस्तिष्क के जिस हिस्से में प्रतिक्रिया होती है, शराब के नशेड़ियों में वह हिस्सा कुंद हो जाता है। जेनिफर उएकरमान्न बताती हैं कि इस अध्ययन में उनका काम था इंटरनेट से चुटकुलों को छाँटना।
इसकी खातिर उन्होंने लगभग 20 हजार चुटकुले पढ़े। उनको चुनने के मामले में कुछ एक बातों पर ध्यान देना पड़ा। मिसाल के तौर पर यह कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ कोई चुटकुला न हो।

अंततः 24 चुटकुले छाँटे गए, जिनके जरिये पता लगाना था कि चुटकुलों में छिपे सामाजिक मुद्दों पर नशेड़ियों की क्या प्रतिक्रिया होती है।

जेनिफर उएकरमान्न कहती हैं कि वे देखना चाहते थे कि क्या उनके चेहरे पर प्रतिक्रिया होती है या वे कुछ कहते हैं। इन परीक्षणों में उन्होंने भी हिस्सा लिया। उनकी इस बात में खास दिलचस्पी थी कि जब कोई कहानी या चुटकुला पेश किया जाता है तो दिमाग के अंदर क्या होता है।

चुटकुलों में सामाजिक अंतरसंबंधों की झलक मिलती है। वैज्ञानिक परिभाषा के अनुसार दो स्तरों में उन्हें ग्रहण किया जाता है। पहली बात कि उसमें छिपे विरोधाभास को पहचानना पड़ता है, उससे निपटना पड़ता है, और इसके अलावा उसे मजेदार समझना पड़ता है।

यह तभी संभव है अगर इंसान अपने आपको दूसरे की जगह पर सांच सके. न्यूरोसाइकोलॉजी की भाषा में इस क्षमता को थियोरी ऑफ माइंड कहा जाता है. इस अध्ययन के तहत 29 स्वस्थ लोगों और 29 शराब के नशेड़ियों के अधुरे चुटकुले सुनाए गए, और चार विकल्पों में से कोई एक चुनकर उन्हें हर चुटकुले को पूरा करना था

सही जवाब के मामले में दोनों वर्गों के बीच काफी अंतर पाए गए, जैसा कि जेनिफर उएकरमान्न कहती हैं कि शराब के नशेड़ियों के बीच लगभग 68 फीसदी जवाब सही थे। और जिन स्वस्थ लोगों के साथ उनकी तुलना की गई थी, उनमें यह नतीजा 90 फीसदी के बराबर था।

कहाँ पहुँचते हैं चुटकुले

चुटकुले, शराब और ठहाके ? को समझने की यह समस्या मस्तिष्क के एक खास हिस्से से जुड़ी हुई है। जेनिफर उएकरमान्न कहती हैं कि दूसरे परीक्षणों के आधार पर पता चला है कि चुटकुलों को समझने के मामले में मस्तिष्क के कुछ खास हिस्से सक्रिय होते हैं। खासकर प्रीफ्रॉन्टल कोर्टेक्स, यानी सिर के अगले हिस्से से कुछ अंदर का हिस्सा। यह हिस्सा इंसानों के बीच संबंधों के सिलसिले में एक प्रमुख भूमिका अदा करता है, मसलन नियोजन और समस्याओं के समाधान की खातिर सामाजिक तनावों और याददाश्त के मामलों में। अगर यहाँ किसी चुटकुले पर ठीक से प्रतिक्रिया नहीं होती है, तो इसका मतलब है कि सामाजिक संबंधों के सिलसिले में भी समस्याएँ पैदा हो रही हैं। इस अध्ययन के नतीजों के आधार पर नशेड़ियों के सामाजिक व्यवहार में सुधार के लिए नुस्खे तैयार किए जा सकते हैं।

वैसे अगर चुटकुला सुनने पर अगर हँसी न आए, तो घबराने की भी कोई जरूरत नहीं है, जेनिफर उएकरमान्न का मानना है कि किस चुटकुले पर हँसी आए, ये हर किसी का अपना मसला है।

हँसी और चुटकुले पर अध्ययन करते हुए कहीं उनकी अपनी हँसी तो गायब नहीं हो गई है? इस सवाल के जवाब में जेनिफर उएकरमान्न हँसते हुए कहती हैं कि उनकी हँसने की काबिलियत बनी हुई है। खासकर वह खुद पर हँसने के काबिल हैं, लेकिन चालू चुटकुलों पर हँस पाना अब थोड़ा मुश्किल हो जाता है। सही भी है, आखिर उन्हें 20 हजार चुटकुलों का अध्ययन करना पड़ा है।

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छत्तीसगढ़ के 13 जिलों में एक भी गधा नहीं...?

>> 07 अप्रैल, 2011

डंकी और मंकी की कहानी अब केवल कहानी
 रायपुर । मध्यप्रदेश का अंग रहे छत्तीसगढ़ राज्य से एक बुरी खबर आ रही हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के विभाजन के समय इस बात का ध्यान दे दिया होता तो आज इस राज्य को इन तकलीफो का सामना नहीं करना पड़ता। अब कितनी शर्म की बात हैं कि पूरे मध्यप्रदेश में हर क्षेत्र में गधो की भरमार हैं और छत्तीसगढ़ राज्य के एक नहीं बल्कि पूरे तेरह जिलो में एक भी गधा नहीं हैं....?

इसका मतलब यह कदापि नही हैं कि पूरे प्रदेश में सभी होशियार ही हैं...? छत्तीसगढ़ राज्य के पशुधन विकास विभाग द्वारा जारी सनसनीखेज खबर के अनुसार राज्य के मात्र तीन जिलो में गधे हैं बाकी तेरह जिलो में एक भी गधा आपको कहीं देखने को भी नहीं मिलेगा। डंकी और मंकी कहानी की तरह इन तेरह जिले के बच्चों को अब गधे के दर्शन करवाना मुश्कील हो जाएगा।लोगो के लिए जीविका पार्जन का साधन बना गधा अब छत्तीसगढ़  के तेरह जिलो में लोगो का बोझ ढोने से तो बच जाएगा लेकिन यदि यही हाल रहा तो पर्यावरणविदो ने सरकार से कहा हैं कि  कहीं से गधा लाओं  क्योकि हम आने वाली पीढ़ी को विलुप्त होती चली जा रही इस प्रजाति को कैसे बता या दिखा पाएगें। छत्तीसगढ़  राज्य के पशुधन विकास विभाग द्वारा उपलब्ध करवाई गई जानकारी के अनुसार राज्य में 1 करोड़ 44 लाख 18 हजार पशु हैं।

राज्य में पक्षियो की संख्या 1 करोड़ 42 लाख 46 हजार हैं। राज्य में कुल 640 घोड़े तथा 148 गधे हैं। सबसे आश्चर्य की बात तो यह भी हैं कि राज्य के तीन जिलो में धमतरी , जशपुर , दंतेवाड़ा में एक भी घोड़ा नहीं हैं। राज्य के तीन जिलो में गधो की संख्या कुछ इस प्रकार हैं कोरबा में 68 , दुर्ग में 48 , तथा राजनांदगांव में 32 गधे हैं। अब इसे क्या कहे कि पूरे राज्य की राजधानी रायपुर में एक भी गधे नहीं हैं। राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह प्रदेश में गधो की कमी से चिंतित तो हैं लेकिन वे गधो की पैदावार बढ़ाने के लिए कोई ठोस कारगार नीति बनाने का फैसला भी अपनी केबिनेट पर छोड़ चुके हैं।

इधर इस खबर के बाद अपने उज्जवल भविष्य का सपना साकार होता देख मध्यप्रदेश के गधो ने भी छत्तीसगढ़ सरकार से यदि पासपोर्ट या वीजा के लिए आवेदन करने शुरू कर दिये तो किसी को आश्चर्य चकित नहीं होना चाहिए। रोजगार की तलाश में जब आदिवासियों का मध्यप्रदेश के कई जिलो से पलायन प्रदेश की सरकार नहीं रोक सकी है तब ऐसे में यदि गधे पलायन करने लगे तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।

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नव-रात्रि हिन्दुओं का पावन पर्व

>> 05 अप्रैल, 2011




व-रात्रि पर्व की धूम मची है ,डगर- डगर और गांव-गांव में मंगल व उत्साह का वातावरण दृष्टिगोचर हो रहा है । समुचा देश 4 अप्रेल से माँ की भक्ति में डूबा है , यह सिलसिला 12 अप्रेल 2011 तक यानी रामनवमी तक चलेगा ।

नव-रात्रि  हिन्दुओं का  पावन  पर्व है। नवरात्रि संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है नौ रातें । यह पर्व साल में दो बार आता है। एक शारदीय नवरात्रि, दूसरा है चैत्रीय नवरात्रि। नवरात्रि के नौ रातों में तीन  देवियों - पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हें  नवदुर्गा कहते हैं ।


 नौ देवियाँ है :-

 श्री शैलपुत्री

श्री ब्रह्मचारिणी

श्री चंद्रघंटा

श्री कुष्मांडा

श्री स्कंदमाता

श्री कात्यायनी

श्री कालरात्रि

श्री महागौरी

श्री सिद्धिदात्री

शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की । तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली हैं। इनका वाहन सिंह है और कमल पुष्प पर ही आसीन होती हैं । नवरात्रि के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है।

नवदुर्गा और दस महाविधाओं में काली ही प्रथम प्रमुख हैं। भगवान शिव की शक्तियों में उग्र और सौम्य, दो रूपों में अनेक रूप धारण करने वाली दस महाविधाएँ अनंत सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं। दसवें स्थान पर कमला वैष्णवी शक्ति हैं, जो प्राकृतिक संपत्तियों की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी हैं। देवता, मानव, दानव सभी इनकी कृपा के बिना पंगु हैं, इसलिए आगम-निगम दोनों में इनकी उपासना समान रूप से वर्णित है। सभी देवता, राक्षस, मनुष्य, गंधर्व इनकी कृपा-प्रसाद के लिए लालायित रहते हैं।
आप सबको हिन्दु नव-वर्ष एवं नव-रात्रि पर्व की ढेर सारी बधाईयाँ     
 
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वर्ल्ड कप सचिन के लिए तोहफा : टीम इंडिया

>> 03 अप्रैल, 2011

 
 
 
 
 

क्रिकेट जगत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने वर्ल्ड कप में मिली जीत को अपने जीवन का सबसे यादगार लम्हा बताया है. शनिवार को भारतीय टीम जैसे ही वर्ल्ड कप जीती सचिन पैवेलियन से दौड़ते हुए मैदान पर आ गए. साथी खिलाड़ियों ने उन्हें कंधे पर बैठा कर मैदान का चक्कर लगाया. यह पहला मौका है जब 21 साल से क्रिकेट खेल रहे तेंदुलकर वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा बने हैं. तेंदुलकर 1992 से वर्ल्ड कप खेलते आ रहे हैं. हालांकि फाइनल में वह 18 रन ही बना सके. साथी खिलाड़ियों इस वर्ल्ड कप को तेंदुलकर के लिए तोहफा बताया है.

 

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