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सूरत के ओलपाड में पानी की दहशत

>> 30 जून, 2011

सूरत जिले के कुछ गांवों में जगह-जगह जमीन के भीतर से पानी का फव्वारा फूट रहा है। कुओं में पानी का स्तर अचानक बढ़ गया है। पानी का स्वाद भी खारा हो गया है। अचानक होने वाली इस घटना से लोगों में दहशत है। हालांकि कुछ लोग इसे चमत्कार के तौर पर देख रहे हैं तो कुछ इसे अनहोनी का संकेत मान रहे हैं। फिलहाल प्रशासन ने लोगों को पानी पीने से मना कर दिया है।

सूरत के कुछ इलाकों में जीवन देना वाला पानी दहशत का दूसरा नाम बन गया है। सूरत के ओलपाड तहसील में जमीन के भीतर से पानी का फव्वारा फूट रहा है। ये पानी जमीन के कई फुट नीचे से बाहर आ रहा है।

वहीं, इलाके के कुएं में पानी 20 फुट नीचे था लेकिन अचानक पानी का स्तर बढ़ गया और लोग हाथों से पानी छू सकते हैं। लोगों को हैरानी इस बात की है कि बिना बारिश के आखिर पानी का स्तर कैसे बढ़ गया। इलाके में रहनेवाले एक शख्स ने बताया कि आठ साल से यहां रह रहे हैं लेकिन ऐसा कभी नहीं देखा। हैरानी इस बात की है कि बगैर बारिश हुए ही कुएं में पानी का स्तर बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि ये कुदरत का कोई करिश्मा है।

इलाके के लोगों का कहना है कि कुएं में पानी का लेवल तो बढ़ा ही साथ ही पानी का स्वाद भी खारा हो गया है। जबकि कुछ दिनों पहले तक लोग इसी कुएं का पानी पीते थे। दूसरी ओर गांव के कुछ लोगों को लगता है कि गांव पर कोई बड़ी मुसीबत आने वाली है।

परा गांव के रहनेवाले हबीब मोहम्मद शेख ने बताया कि साठ साल की उम्र में पहली बार ऐसा देखा कि जो कुंवा मीठा पानी देता था वो खारा हो गया और जो खारा था वो मीठा हो गया। यह एक अजीब कुदरत की घटना है।

गौरतलब है कि कभी इस इलाके में मशीनों के जरिए पानी निकालने की कोशिश होती थी, लेकिन पानी खुद ब खुद जमीन का सीना फाड़कर बाहर निकल रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है, ये अभी तक एक रहस्य है।  VIDEO


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ब्लॉगरों सावधान

>> 29 जून, 2011

गूगल के ज़रिए सेंसरशिप ?

 


कहने के लिए तो भारत में मीडिया स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की पूरी आज़ादी है लेकिन क्या सरकारें और प्रशासन अपनी निंदा बर्दाश्त कर पाते हैं ?

अगर सर्च इंजिन गूगल की मानें तो उत्तर होगा, नहीं.

गूगल की 'ट्रांसपरेंसी रिपोर्ट' के मुताबिक़ छह महीनों में प्रशासन और यहाँ तक कि अदालतों की ओर से भी गूगल से कई बार कहा गया कि वे मुख्यमंत्रियों और अधिकारियों की आलोचना करने वाले रिपोर्ट्स, ब्लॉग और यू-ट्यूब वीडियो को हटा दें. पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए कृपया क्लिक करें  ...... 

   अशोक बजाज , अभनपुर , रायपुर . ashok bajaj abhanpur raipur chhattisgarh


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सावधान: यहाँ खेती करना ग़ैरक़ानूनी है

>> 28 जून, 2011


त्तर प्रदेश के अलीगढ़ ज़िले के ज़िक्रपुर गाँव के किसान अपनी फ़सलें उजाड़े जाने का ब्यौरा देते हैं. ग्रेटर नोएडा से आगरा तक जाने वाले यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे बसा ये वो गाँव है जहाँ पिछले साल 14 अगस्त को आंदोलनकारी किसानों और पुलिस के बीच भिड़ंत हुई थी. यहाँ काफ़ी किसानों ने अपनी ज़मीन के बदले मुआवज़ा ले लिया. लेकिन बहुत से किसान कहते हैं कि उन्होंने न सरकार को ज़मीन देने वाले क़रार पर दस्तख़त किए और न ही उन्हें कोई मुआवज़ा मिला है, मगर फिर भी राजस्व के दस्तावेज़ों में अब ज़मीन उनके नाम नहीं रही.

 

 किसान कहते हैं कि उन्होंने हर साल की तरह इस साल भी खेतों में फ़सलों की बुआई की लेकिन 27 मई को स्थानीय प्रशासन के अधिकारी हथियारबंद पुलिस वालों को साथ लेकर आए और पूरे गाँव को घेर लिया गया और कुछ ही देर में खेतों में उग रही फ़सलों पर ज़िला प्रशासन ने ट्रेक्टर और रोलर फेर दिया.

 

हाल ही में ग्रेटर नोएडा और आगरा के बीच पड़ने वाले गाँवों की यात्रा से लौटे बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी की रिपोर्ट.  आगे वीडियो यहाँ देंखें .................

 अशोक बजाज , अशोक बजाज ,अशोक बजाज ,अशोक बजाज,सावधान: यहाँ खेती करना ग़ैरक़ानूनी है , 

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आकाशवाणी में " नशा हे ख़राब : झन पीहू शराब "

>> 27 जून, 2011

विश्व नशा निवारण दिवस पर आकाशवाणी रायपुर द्वारा दिनांक 26 जून 2011 को संध्या 7.20 बजे हमर ग्रामसभा कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी स्लोगन "  नशा  हे  ख़राब : झन पीहू शराब  " का टाइटल सांग प्रसारित किया गया .सुनिए वीडियो ...........



video

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चंपारण के कर्मयोगी

>> 26 जून, 2011

कर्मयोगी श्री कृष्णदास ढ़ी जी
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र्मयोगी श्री कृष्णदास ढ़ी जी इन दिनों काफी अस्वस्थ है ,वे  बिस्तर से उठ नहीं पाते . पिछले दिनों जब मै उनसे मिलने चंपारण   गया तो वे अपने कक्ष में बिस्तर में लेटे हुए थे . उनकी उम्र 85 वर्ष की हो गई है ,वे महाप्रभु वल्लभाचार्य मंदिर ट्रस्ट चम्‍पारण के मुख्य ट्रस्टी है . महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के प्राकट्य स्थल स्थित मंदिर एवं मंदिर परिसर को सजाने - संवारने एवं भव्यता प्रदान करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है . बचपन में हम लोग अक्सर चंपारण (पुराना नाम चांपाझर )  जाया करते थे , यह मेरे गाँव से मात्र 10-12  कि.मी. की दूरी पर है . तब वहां खँडहरनुमा मंदिर हुआ करता था . श्री चंपेश्वर महादेव का मंदिर एवं श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य का  मंदिर पासपास  है . मंदिर के चारों और  सुन्दर अभ्यारण्य है जहाँ अनेकों प्रकार के पुराने  वृक्ष है .
आशीर्वाद देते हुए

 श्री ढ़ी जी मूलतः मुंबई के निवासी है वे यहाँ कब आये मुझे स्मरण नहीं लेकिन जब से वे आये है लगातार मंदिर के सौन्दर्यीकरण में लगे है . उनकी वर्षों की तपस्या और लगन का ही परिणाम है कि चम्‍पारण की ख्याति आज पूरे विश्व में हो गई है . यहाँ की भव्यता और सौन्दर्य के सभी कायल है . श्री ढ़ीया जी की कार्यशैली को मैंने काफी करीब से देखा है .बीमार होने के पहले तक  वे चार-चार बजे पहट तक जागते थे और  ट्रस्ट का हिसाब -किताब एवं लिखा-पढ़ी का काम स्वयं करते थे . वे प्रतिदिन 18 से 20 घंटे तक काम करते थे . अभी जब मै उनसे मिला तब भी उनके बिस्तर में ट्रस्ट के हिसाब से संबंधित दस्तावेज एवं कुछ धार्मिक किताबें रखीं थीं . बिस्तर से उठ पाना मुश्किल है लेकिन काम करने की ललक उनमें आज भी है .मेरे टोकने पर उन्होंने अपनी जिन्दादिली आवाज में ही मुझे जवाब दिया कि यह काम मै नहीं छोड़ सकता . इस उम्र में भी उनकी आवाज में कोई फर्क नहीं पड़ा है . उनके आवाज में आज भी वही ओज है जो 10 साल पहले थी . वे   प्रवचन  तो करते ही थे साथ ही साथ गीत व  भजन भी सुनाते थे , उन्हें हारमोनियम बजाते व गाते भी देखा गया है .

हारमोनियम बजाते हुए श्री ढ़ीजी
श्री ढ़ीजी पिछले एक वर्ष से कुछ ज्यादा ही अस्वस्थ है , कुछ महीने तक वे मुंबई के एक  अस्पताल में भी भरती थे . थोडा सा आराम मिला तो वापस आ गए , मुझे बताया गया कि वे अब उपचार के लिए किसी अस्पताल में नहीं जाना चाहते . वे चंपारण्य में ही रहना चाहते है . माखन उनकी सेवा में सदा लगे रहता है , वह  गाँव का ही निवासी है तथा जब से ढ़ीया जी यहाँ आये है तब से साये की तरह उनके साथ रहता है . इस प्रवास  में मुझे  उनका  पुत्र श्री कमल भाई  नहीं मिला , मैंने पूछा तो उन्होंने बताया कि वह इन दिनों मुंबई गया हुआ है उसका वहां बहुत बड़ा व्यवसाय है . 

प्राकट्य स्थल
.................श्री अढ़ीआ जी ने मंदिर परिसर, धर्मशाला एवं उसके कमरों का नाम भगवान श्री कृष्ण से जुड़े तथ्यों के आधार पर किया है.मसलन सुदामापुरी,गोकूल, मथुरा,वृन्दावन,द्वारिका आदि  आदि  .वल्लभ कुल परिवार के मुख्य बैठक जी के गादीपति आचार्य बृजजीवनलाल महाराज एवं उनके ज्येष्ठ लाल युवा आचार्य द्वारिकेश लाल  जी के वे काफी विश्वासपात्र माने जाते है .       


अभनपुर विकासखंड के अंतर्गत " चंपारण " छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मात्र 50 कि.मी. दूर स्थित है , यह प्रदेश की जीवनदायिनी चित्रोत्पला गंगा यानी   महानदी  के किनारे है ." चंपारण  " से 15-20 कि.मी. की दुरी पर  अभनपुर, नवापारा-राजिम एवं आरंग  शहर  है  , जो अलग अलग दिशाओं में है .  यह बहुत ही पवित्र व रमणीय स्थल है . इसे सजाने-संवारने वाले कल्पनाशील कर्मयोगी श्री कृष्णदास ढ़ी जी को शत-शत नमन करते हुए ईश्वर से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ. 

ચંપારણ્ય ધામ છત્તીસગઢ રાજ્યમાં રાયપુર જિલ્લામાં આવેલું છે. રાયપુરથી તે ૪૫ કિ.મી.ના અંતરે છે. રાયપુર સ્ટેશનથી ચંપારણ્ય જવા માટે એસ.ટી. બસ શહેરના બસ સ્ટેન્ડથી મળે છે તેમજ પ્રાઇવેટ બસ, જીપ, ટેક્સી વગેરે વાહનો પણ મળે છે.

Champaran is located at a distance of about 50 km from Raipur. It was earlier known as Champajhar. The village of Champaran has religious significance as the birthplace of Saint Vallabhacharya, the founder and reformer of the Vallabh sect. There is also a temple in his honour. This temple is very popular with the Gujarati populace and there are also two dharamshalas in this temple for the devotees. This often serves as accommodation for many a visitor.
The temple of Champakeshwara Mahadeva is an added attraction at Champaran. It is worth a visit.
The greatest attraction however remains the annual fair, which is held between the months of January and February every year. The birth anniversary of Saint Vallabhacharya is also celebrated with great pomp and show. Many believers visit the temple during this time to pay their homage to the revered soul.

जय श्री कृष्ण !


सांध्य दैनिक छत्तीसगढ़  23 मई 2011


चंपारण से जुड़ी कुछ तस्वीरें

IMAGES OF CHAMPARAN RAIPUR

सुदामापुरी धर्मशाला चंपारण

सन 2007  में भाजपा के  चिंतन शिविर में पहुंचें मुख्यमंत्री डा. रमण सिह
विशाल सभा भवन से बहार निकलते मुख्यमंत्री डा. रमण सिह
श्री कृष्णदास ढ़ीआ से आशीर्वाद प्राप्त करते हुए मुख्यमंत्री डा. रमण सिह
लो.नि. मंत्री श्री बृजमोहन  अग्रवाल से चर्चा करते हुए श्री कृष्णदास ढ़ी
बाएं से दायें अशोक बजाज , श्री कृष्णदास ढ़ीआ,अशोक गाँधी एवं अशोक गंगवाल 



सन 2007  में भाजपा के  चिंतन शिविर में बाएं से दायें अशोक बजाज ,श्री धरम लाल कौशिक , मुख्यमंत्री डा. रमण सिह,श्री रमेश बैस, श्री चंदुलाल साहू ,श्री धर्मेन्द्र प्रधान एवं अन्य पदाधिकारी

MAP OF CHAMPARAN 


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बी.बी.सी.हिंदी के रेडियो श्रोताओं के लिए खुशखबरी

>> 23 जून, 2011




भारी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे बीबीसी विश्व सेवा को ब्रिटिश सरकार ने अगले तीन सालों में 22 लाख पाउंड प्रति वर्ष देने की घोषणा की है .आर्थिक संकट की वजह से बीबीसी ट्रस्ट ने 5 भाषाओँ की रेडियो सेवा बंद कर दी थी तथा हिन्दी सेवा भी बंद करने की तैयारी कर ली थी. इस खबर से चिंतित दुनिया भर के रेडियो श्रोताओं ने हिंदी सेवा बंद करने का विरोध किया था .बी.बी.सी. हिंदी एक विश्वसनीय रेडियो सर्विस है ,इस कार्यक्रम को जारी रखने की खबर से रेडियो श्रोताओं में अपार हर्ष है . पूरी खबर यहाँ  पढ़ें  ..........  बीबीसी हिंदी


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सरहद का माखौल

>> 22 जून, 2011

अमेरिकन मॉली आउल

आज ही  खबर  मिली  कि अमेरिकी उल्लू भारत पहुँच गया है . यह भारत कब, कैसे और क्यों आया यह शोध का विषय हो सकता है  . यह भी शोध का विषय हो सकता है कि उसकी भारत के प्रति  रूचि क्यों जागृत हुई .

बहरहाल अमेरिकन मॉली आउल नाम का एक विरल प्रजाति का उल्लू तमिलनाडु के नागपट्टनम जिले में पाया गया है. थेरक्कुपोयगायनाल्लुर गांव में किसान अइयप्पन को अपने धान की खेत में यह घायल पंछी मिला. हो सकता है कि यह पंछी गांव के नाम से आकर्षित हुआ था. बहरहाल, किसान अइयप्पन ने उसके लिए दाना पानी का बंदोबस्त किया, जाहिर है कि रात के दौरान. दिन भर यह पंछी सोता रहा होगा. फिर जब शाम ढली, तो उसे एक पशु चिकित्सक के पास ले जाया गया. इस बीच इस अजूबे पंछी को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है.

वैसे किसी को इस पक्षी के भारत आने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि पक्षियों के लिए सारा संसार एक घर है .अतः पक्षियों को सरहद पार करने के लिए बीजा या पासपोर्ट की जरुरत नहीं पड़ती . सरहद तो मनुष्य ने मनुष्य के लिए ही बनायें है . पक्षी सदा मनुष्य के बनाये हुए सरहद का माखौल उड़ाते है .



Rare breed of owl spotted at Nagai

 

NAGAPATTINAM: A rare breed of owl, mostly found in North America, was spotted in a paddy field here by a farmer on Friday.� The nocturnal bird, which has suffered injuries, was handed over to the forest department.� Wildlife experts said that it belonged to a species named ‘Molly’ which was said to have originated from California in the USA.� Out of the 189 types of owls found in the world, Molly was an important variety.� The bird might have taken shelter in a ship and reached Nagapattinam, he said and added that it was also possible that it could have migrated on its own. The brown coloured bird was noticed by Aiyappan, a farmer of Therkkupoigainallur village, at a paddy field. It was found with injuries and was not in a position to fly.� He had brought it home and gave water to it.� Dr Asokan examined the bird and provided first-aid. Later, it was handed over to the Forest department.� After first-aid, the owl gained strength. Now it is under the care of Nagapattinam wildlife department.  NEWS







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इंटरनेट डोमेन नामों की संख्या बढ़ेगी

>> 20 जून, 2011

 

इंटरनेट वेबसाइटों के पतों को मंज़ूरी देने वाली संस्था आईकैन ने कहा है कि इंटरनेट डोमेन नामों की संख्या बढ़ाई जाएगी. पिछले 25 सालों में इसे इंटरनेट दुनिया की एक बड़ी ख़बर माना जा रहा है. सिंगापुर में हुई एक कॉन्फ़्रेंस में आईकैन ने नए डोमेन नाम जारी करने के पक्ष में मतदान किया है. आईकैन के फ़ैसले के बाद ये संख्या 22 से बढ़कर कई गुना हो जाएगी. ये नाम कॉरपोरेट ब्रांड और उद्योगों पर आधारित होंगे या फिर पहले से प्रचलित डॉट-कॉम, डॉट-ऑर्ग की तर्ज पर भी हो सकते हैं.

नए डोमेन नेम आने के बाद डॉट-गूगल, डॉट-कोक या डॉट-बीबीसी जैसे नाम प्रचलन में आ सकते हैं. लेकिन इनका आवेदन देने के लिए ही आपको 200,000 डॉलर खर्च करने पड़ेंगे. इसके अलावा कंपनियों को ये दिखाना होगा कि जिस डोमेन नाम के लिए वे अर्ज़ी डाल रहे हैं उस कंपनी पर वैधानिक दावा है.

आईकैन के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रॉड बेकस्ट्रॉम ने कहा है, हमने इंटरनेट ऐड्रेस सिस्टम की अपार संभावनाएँ खोल दी हैं, आप जो चाहें कल्पना कर सकते हैं. प्रावधानों के तहत नए इंटरनेट पते किसी भी भाषा में हो सकते हैं. आईकैन अगले साल से अर्ज़ियाँ लेना शुरु करेगा.
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डी.एक्स.अंजलि पत्रिका का विमोचन



रायपुर / अहिंसा रेडियो श्रोता संघ  द्वारा  प्रकाशित डी.एक्स.अंजलि पत्रिका  का विमोचन राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज ने  किया . यह पत्रिका आकाशवाणी रायपुर की गतिविधियों पर आधारित है . इस अवसर पर मुख्य रुप से  श्री गिरीश राज  डायरेक्टर ऑफ इंडियन न्यूज सर्विस, श्री श्याम वर्मा उद्घोषक आकाशवाणी,रायपुर , श्री झावेन्द्र कुमार ध्रुव,संपादक डी. एक्स. अंजलि , श्री रमेश कुमार यादव सिमगा , श्री ललित साहू रनचिरई ,  श्री संजय साहू पोटियाकला दुर्ग,श्री मोहन लाल देंवागन कटोरा तालाब रायपुर , श्री परस राम साहू कुम्हारी दुर्ग,श्री रतन जैन मौदहा पारा , श्री विनोद वंडलकर रायपुर एवं भारी संख्या में  रेडियो श्रोता उपस्थित थे. श्री बजाज ने उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह पत्रिका रेडियो श्रोताओं के लिए बहुत उपयोगी है ,उन्होंने डी.एक्स.अंजलि पत्रिका के संपादक श्री झावेन्द्र कुमार ध्रुव एवं उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस पत्रिका का प्रकाशन इसी तरह निरंतर जरी रहना चाहिए .  आकाशवाणी रायपुर के वरिष्ठ  एनाउंसर  श्री श्याम वर्मा  ने  अहिंसा रेडियो श्रोता संघ को लगातार चौथे वर्ष आकाशवाणी रायपुर पर केन्द्रित इस पत्रिका के लिए धन्यवाद दिया .

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छत्तीसगढ़ में आंशिक नशाबंदी

>> 17 जून, 2011

त्तीसगढ़ में आंशिक नशाबंदी लागू होने पर छत्तीसगढ़ राज्य बेवरेजेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड एवं संकल्प सांस्कृतिक समिति रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में शुक्रवार १६ जून २०११ को शहीद स्मारक भवन रायपुर में आभार एवं अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया . इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने  नशामुक्ति जन-जागरण अभियान में सराहनीय भूमिका के लिए अनेक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया . उन्होंने शराब बंदी के अभियान में सक्रिय सहयोग दे रहे समस्त जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, समाज सेवी संगठनों और महिला संगठनों का भी आभार माना है . कार्यक्रम का संचालन संकल्प संस्था के प्रमुख श्री चुन्नीलाल शर्मा ने किया . आज के आयोजन में उनकी सराहनीय भूमिका थी. 

समारोह में मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित हुए लोगों में राज्य बेवरेजेस कार्पोरेशन के अध्यक्ष श्री देवजी भाई पटेल, राज्य भण्डार गृह निगम के  अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, पूर्व मंत्री डॉ. रामचन्द्र सिंहदेव, राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम अध्यक्ष श्री श्याम बैस, संकल्प सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष श्री अशोक चौधरी, प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सरिता बहन और सचिव आबकारी श्री गणेश शंकर मिश्र भी शामिल थे .मुख्यमंत्री ने इनके अलावा अन्य अनेक संस्थाओं को भी प्रशस्ति-पत्र भेंटकर सम्मानित किया .

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सभी शराब दुकानों को एक साथ बंद करने में आ रही व्यावहारिक  कठिनाइयों को देखते हुए सरकार ने इसे  चरणबध्द तरीके से  बंद करने का निर्णय लिया  है.  उन्होंने कहा कि शराबबंदी के साइड इफेक्ट के रूप में अक्सर अवैध और जहरीली शराब के प्रकरण भी देश के कई राज्यों में सामने आते रहे हैं. इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरी सावधानी और सतर्कता के साथ प्रदेश में शराबबंदी लागू करने की ओर कदम बढ़ाया है . शराब की तस्करी रोकने और सार्वजनिक स्थानों पर शराबखोरी पर अंकुश लगाने के लिए भी कठोर कदम उठाए गए हैं . इस कार्य में जनता और जन-प्रतिनिधियों, समाजसेवी संगठनों और महिला संगठनों का भी सहयोग लिया जा रहा है . मुख्यमंत्री ने डॉ. रामचन्द्र सिंहदेव के अध्यक्षीय उदबोधन पर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि वास्तव में तमिलनाडु में तो अकेले शराब से ही लगभग दस हजार करोड़ रूपए का आबकारी राजस्व वहां की सरकार को मिलता है . इसी तरह कई अन्य राज्यों में वहां के राजस्व का काफी बड़ा हिस्सा आबकारी से ही आता है . लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने शराब के राजस्व का नुकसान सहकर भी राज्य में नशाबंदी लागू करने की मानसिकता बनाकर इसका संकल्प भी लिया है .  मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा मुक्त समाज बनाकर ही हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं .उन्होंने कहा कि  शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर कम करने, कैंसर, एड्स आदि गंभीर बीमारियों से लोगों के जीवन की रक्षा करने और एक स्वस्थ सामाजिक वातावरण निर्माण में शराबबंदी की अहम भूमिका होगी.

हम आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 अप्रेल 2011 से 2000 की आबादी वाले गाँवों की शराब दूकानों को एक झटके में बंद कर दिया है . उस समय हमने कहा था  ......... 
छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा नशा मुक्त छत्तीसगढ़ निर्माण के लिए पहले कदम के रूप में दो हजार से कम जनसंख्या वाले गांवों में शराब की 250 दुकानों को बंद करने के निर्णय का स्वागत किया है .श्री बजाज ने इस महत्वपूर्ण फैसले के लिए मुख्यमंत्री को बधाई दी है और कहा है कि उनके इस निर्णय से राज्य को 'स्वस्थ और समृध्द छत्तीसगढ़' के रूप में विकसित करने का मार्ग आसान हो जाएगा .श्री बजाज ने यह भी कहा कि रमन सरकार का यह निर्णय राज्य और समाज को नशे की गिरफ्त से बचाने की दिशा में एक ठोस कदम है.  उन्होंने कहा कि नशे की सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाने की राज्य सरकार की मंशा को सफल बनाने के लिए प्रदेशवासियों को भी आगे आना होगा. श्री बजाज ने रायपुर जिले में ' नशा हे खराब-झन पीहू शराब ' के अपने लोकप्रिय नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि इस नारे के साथ जिले में शराब के खिलाफ जन-जागरण का उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा .







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कबीरदास की साखियाँ

>> 16 जून, 2011


संत कबीरदास जी कवि व क्रांतिकारी समाज सुधारक थे.उन्होंने अपने काव्य में  सामाजिक कुरीतियों और धार्मिक आडम्बरों के खिलाफ काफी  कटाक्ष किया है .कबीर का जन्म 1297 में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुआ ,वे निडर और खरा खरा बोलने वाले कवि थे. उनके जन्म दिन पर उनकी लिखी साखियाँ प्रस्तुत है ----- 

दुख में सुमरिन सब करे, सुख मे करे न कोय । जो सुख मे सुमरिन करे, दुख काहे को होय ॥ 1 ॥
तिनका कबहुँ न निंदिये, जो पाँयन तर होय  । कबहुँ उड़ आँखिन परे, पीर घनेरी होय ॥ 2 ॥
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर  । कर का मन का डार दें, मन का मनका फेर ॥ 3 ॥
गुरु  गोविन्द  दोनों  खड़े, काके लागूं पाँय     ।  बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय ॥ 4 ॥
बलिहारी  गुरु आपनो, घड़ी-घड़ी सौ सौ बार । मानुष से देवत किया करत न लागी बार ॥ 5 ॥
कबिरा   माला मनहि की, और संसारी भीख । माला फेरे हरि मिले, गले रहट के देख ॥ 6 ॥
सुख मे सुमिरन ना किया दु:ख में किया याद । कह कबीर ता दास की, कौन सुने फरियाद ॥ 7 ॥
साईं इतना  दीजिये, जा  मे कुटुम  समाय । मैं भी भूखा न रहूँ, साधु ना भूखा जाय ॥ 8 ॥
लूट सके  तो लूट  ले, राम  नाम   की  लूट । पाछे फिरे पछताओगे, प्राण जाहिं जब छूट ॥ 9 ॥
जाति न पूछो साधु की, पूछि लीजिए ज्ञान । मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान ॥ 10 ॥
जहाँ दया तहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप । जहाँ क्रोध तहाँ पाप है, जहाँ क्षमा तहाँ आप ॥ 11 ॥
धीरे - धीरे  रे  मना ,  धीरे सब कुछ होय । माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय ॥ 12 ॥
कबीरा ते नर अन्ध है, गुरु को कहते और । हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रुठै नहीं ठौर ॥ 13 ॥
पाँच पहर धन्धे गया, तीन पहर गया सोय । एक पहर हरि नाम बिन, मुक्ति कैसे होय ॥ 14 ॥
कबीरा सोया क्या करे, उठि न भजे भगवान । जम जब घर ले जायेंगे, पड़ी रहेगी म्यान ॥ 15 ॥
शीलवन्त सबसे बड़ा, सब रतनन की खान । तीन लोक की सम्पदा, रही शील में आन ॥ 16 ॥
माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर । आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर ॥ 17 ॥
माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय । एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोय ॥ 18 ॥
रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय । हीना जन्म अनमोल था, कोड़ी बदले जाय ॥ 19 ॥
नींद निशानी मौत की, उठ कबीरा जाग । और रसायन छांड़ि के, नाम रसायन लाग ॥ 20 ॥
जो तोकु कांटा बुवे, ताहि बोय तू फूल । तोकू फूल के फूल है, बाकू है त्रिशूल ॥ 21 ॥
दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार । तरुवर ज्यों पत्ती झड़े, बहुरि न लागे डार ॥ 22 ॥
आय हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर । एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बँधे जात जंजीर ॥ 23 ॥
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब । पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब ॥ 24 ॥
माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख । माँगन से तो मरना भला, यह सतगुरु की सीख ॥ 25 ॥
जहाँ आपा तहाँ आपदां, जहाँ संशय तहाँ रोग । कह कबीर यह क्यों मिटे, चारों धीरज रोग ॥ 26 ॥
माया छाया एक सी, बिरला जाने कोय । भगता के पीछे लगे, सम्मुख भागे सोय ॥ 27 ॥
आया था किस काम को, तु सोया चादर तान ।सुरत सम्भाल ए गाफिल, अपना आप पहचान ॥ 28 ॥
क्या भरोसा देह का, बिनस जात छिन मांह । साँस-सांस सुमिरन करो और यतन कुछ नांह ॥ 29 ॥
गारी ही सों ऊपजे, कलह कष्ट और मींच । हारि चले सो साधु है, लागि चले सो नींच ॥ 30 ॥
दुर्बल को न सताइए, जाकि मोटी हाय । बिना जीव की हाय से, लोहा भस्म हो जाय ॥ 31 ॥
दान दिए धन ना घते, नदी ने घटे नीर । अपनी आँखों देख लो, यों क्या कहे कबीर ॥ 32 ॥
दस द्वारे का पिंजरा, तामे पंछी का कौन । रहे को अचरज है, गए अचम्भा कौन ॥ 33 ॥
ऐसी वाणी बोलेए, मन का आपा खोय । औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय ॥ 34 ॥
हीरा वहाँ न खोलिये, जहाँ कुंजड़ों की हाट । बांधो चुप की पोटरी, लागहु अपनी बाट ॥ 35 ॥
कुटिल वचन सबसे बुरा, जारि कर तन हार । साधु वचन जल रूप, बरसे अमृत धार ॥ 36 ॥
जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होय । यह आपा तो ड़ाल दे, दया करे सब कोय ॥ 37 ॥
मैं रोऊँ जब जगत को, मोको रोवे न होय । मोको रोबे सोचना, जो शब्द बोय की होय ॥ 38 ॥
सोवा साधु जगाइए, करे नाम का जाप । यह तीनों सोते भले, साकित सिंह और साँप ॥ 39 ॥
अवगुन कहूँ शराब का, आपा अहमक साथ । मानुष से पशुआ करे दाय, गाँठ से खात ॥ 40 ॥
बाजीगर का बांदरा, ऐसा जीव मन के साथ । नाना नाच दिखाय कर, राखे अपने साथ ॥ 41 ॥
अटकी भाल शरीर में तीर रहा है टूट । चुम्बक बिना निकले नहीं कोटि पटन को फ़ूट ॥ 42 ॥
कबीरा जपना काठ की, क्या दिख्लावे मोय । ह्रदय नाम न जपेगा, यह जपनी क्या होय ॥ 43 ॥
पतिवृता मैली, काली कुचल कुरूप । पतिवृता के रूप पर, वारो कोटि सरूप ॥ 44 ॥
बैध मुआ रोगी मुआ, मुआ सकल संसार । एक कबीरा ना मुआ, जेहि के राम अधार ॥ 45 ॥
हर चाले तो मानव, बेहद चले सो साध । हद बेहद दोनों तजे, ताको भता अगाध ॥ 46 ॥
राम रहे बन भीतरे गुरु की पूजा ना आस । रहे कबीर पाखण्ड सब, झूठे सदा निराश ॥ 47 ॥
जाके जिव्या बन्धन नहीं, ह्र्दय में नहीं साँच । वाके संग न लागिये, खाले वटिया काँच ॥ 48 ॥
तीरथ गये ते एक फल, सन्त मिले फल चार । सत्गुरु मिले अनेक फल, कहें कबीर विचार ॥ 49 ॥
सुमरण से मन लाइए, जैसे पानी बिन मीन । प्राण तजे बिन बिछड़े, सन्त कबीर कह दीन ॥ 50 ॥
समझाये समझे नहीं, पर के साथ बिकाय । मैं खींचत हूँ आपके, तू चला जमपुर जाए ॥ 51 ॥ 
हंसा मोती विण्न्या, कुञ्च्न थार भराय । जो जन मार्ग न जाने, सो तिस कहा कराय ॥ 52 ॥
कहना सो कह दिया, अब कुछ कहा न जाय । एक रहा दूजा गया, दरिया लहर समाय ॥ 53 ॥
वस्तु है ग्राहक नहीं, वस्तु सागर अनमोल । बिना करम का मानव, फिरैं डांवाडोल ॥ 54 ॥
कली खोटा जग आंधरा, शब्द न माने कोय । चाहे कहँ सत आइना, जो जग बैरी होय ॥ 55 ॥
कामी, क्रोधी, लालची, इनसे भक्ति न होय । भक्ति करे कोइ सूरमा, जाति वरन कुल खोय ॥ 56 ॥
जागन में सोवन करे, साधन में लौ लाय । सूरत डोर लागी रहे, तार टूट नाहिं जाय ॥ 57 ॥
साधु ऐसा चहिए ,जैसा सूप सुभाय । सार-सार को गहि रहे, थोथ देइ उड़ाय ॥ 58 ॥
लगी लग्न छूटे नाहिं, जीभ चोंच जरि जाय । मीठा कहा अंगार में, जाहि चकोर चबाय ॥ 59 ॥
भक्ति गेंद चौगान की, भावे कोई ले जाय । कह कबीर कुछ भेद नाहिं, कहां रंक कहां राय ॥ 60 ॥
घट का परदा खोलकर, सन्मुख दे दीदार । बाल सनेही सांइयाँ, आवा अन्त का यार ॥ 61 ॥
अन्तर्यामी एक तुम, आत्मा के आधार । जो तुम छोड़ो हाथ तो, कौन उतारे पार ॥ 62 ॥
मैं अपराधी जन्म का, नख-सिख भरा विकार । तुम दाता दु:ख भंजना, मेरी करो सम्हार ॥ 63 ॥
प्रेम न बड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय । राजा-प्रजा जोहि रुचें, शीश देई ले जाय ॥ 64 ॥
प्रेम प्याला जो पिये, शीश दक्षिणा देय । लोभी शीश न दे सके, नाम प्रेम का लेय ॥ 65 ॥
सुमिरन में मन लाइए, जैसे नाद कुरंग । कहैं कबीर बिसरे नहीं, प्रान तजे तेहि संग ॥ 66 ॥
सुमरित सुरत जगाय कर, मुख के कछु न बोल । बाहर का पट बन्द कर, अन्दर का पट खोल ॥ 67 ॥
छीर रूप सतनाम है, नीर रूप व्यवहार । हंस रूप कोई साधु है, सत का छाननहार ॥ 68 ॥
ज्यों तिल मांही तेल है, ज्यों चकमक में आग । तेरा सांई तुझमें, बस जाग सके तो जाग ॥ 69 ॥
जा करण जग ढ़ूँढ़िया, सो तो घट ही मांहि । परदा दिया भरम का, ताते सूझे नाहिं ॥ 70
जबही नाम हिरदे घरा, भया पाप का नाश । मानो चिंगरी आग की, परी पुरानी घास ॥ 71 ॥
नहीं शीतल है चन्द्रमा, हिंम नहीं शीतल होय । कबीरा शीतल सन्त जन, नाम सनेही सोय ॥ 72 ॥
आहार करे मन भावता, इंदी किए स्वाद । नाक तलक पूरन भरे, तो का कहिए प्रसाद ॥ 73 ॥
जब लग नाता जगत का, तब लग भक्ति न होय । नाता तोड़े हरि भजे, भगत कहावें सोय ॥ 74 ॥
जल ज्यों प्यारा माहरी, लोभी प्यारा दाम । माता प्यारा बारका, भगति प्यारा नाम ॥ 75 ॥
दिल का मरहम ना मिला, जो मिला सो गर्जी । कह कबीर आसमान फटा, क्योंकर सीवे दर्जी ॥ 76 ॥
बानी से पह्चानिये, साम चोर की घात । अन्दर की करनी से सब, निकले मुँह कई बात ॥ 77 ॥
जब लगि भगति सकाम है, तब लग निष्फल सेव । कह कबीर वह क्यों मिले, निष्कामी तज देव ॥ 78 ॥
फूटी आँख विवेक की, लखे ना सन्त असन्त । जाके संग दस-बीस हैं, ताको नाम महन्त ॥ 79 ॥
दाया भाव ह्र्दय नहीं, ज्ञान थके बेहद । ते नर नरक ही जायेंगे, सुनि-सुनि साखी शब्द ॥ 80 ॥
दाया कौन पर कीजिये, का पर निर्दय होय । सांई के सब जीव है, कीरी कुंजर दोय ॥ 81 ॥
जब मैं था तब गुरु नहीं, अब गुरु हैं मैं नाय । प्रेम गली अति साँकरी, ता मे दो न समाय ॥ 82 ॥
छिन ही चढ़े छिन ही उतरे, सो तो प्रेम न होय । अघट प्रेम पिंजरे बसे, प्रेम कहावे सोय ॥ 83 ॥
जहाँ काम तहाँ नाम नहिं, जहाँ नाम नहिं वहाँ काम । दोनों कबहूँ नहिं मिले, रवि रजनी इक धाम ॥ 84 ॥
कबीरा धीरज के धरे, हाथी मन भर खाय । टूट एक के कारने, स्वान घरै घर जाय ॥ 85 ॥
ऊँचे पानी न टिके, नीचे ही ठहराय । नीचा हो सो भरिए पिए, ऊँचा प्यासा जाय ॥ 86 ॥
सबते लघुताई भली, लघुता ते सब होय । जौसे दूज का चन्द्रमा, शीश नवे सब कोय ॥ 87 ॥
संत ही में सत बांटई, रोटी में ते टूक । कहे कबीर ता दास को, कबहूँ न आवे चूक ॥ 88 ॥
मार्ग चलते जो गिरा, ताकों नाहि दोष । यह कबिरा बैठा रहे, तो सिर करड़े दोष ॥ 89 ॥
जब ही नाम ह्रदय धरयो, भयो पाप का नाश । मानो चिनगी अग्नि की, परि पुरानी घास ॥ 90 ॥
काया काठी काल घुन, जतन-जतन सो खाय । काया वैध ईश बस, मर्म न काहू पाय ॥ 91 ॥
सुख सागर का शील है, कोई न पावे थाह । शब्द बिना साधु नही, द्रव्य बिना नहीं शाह ॥ 92 ॥
बाहर क्या दिखलाए, अनन्तर जपिए राम । कहा काज संसार से, तुझे धनी से काम ॥ 93 ॥
फल कारण सेवा करे, करे न मन से काम । कहे कबीर सेवक नहीं, चहै चौगुना दाम ॥ 94
तेरा साँई तुझमें, ज्यों पहुपन में बास । कस्तूरी का हिरन ज्यों, फिर-फिर ढ़ूँढ़त घास ॥ 95 ॥
कथा-कीर्तन कुल विशे, भवसागर की नाव । कहत कबीरा या जगत में नाहि और उपाव ॥ 96 ॥
कबिरा यह तन जात है, सके तो ठौर लगा । कै सेवा कर साधु की, कै गोविंद गुन गा ॥ 97 ॥
तन बोहत मन काग है, लक्ष योजन उड़ जाय । कबहु के धर्म अगम दयी, कबहुं गगन समाय ॥ 98 ॥
जहँ गाहक ता हूँ नहीं, जहाँ मैं गाहक नाँय । मूरख यह भरमत फिरे, पकड़ शब्द की छाँय ॥ 99 ॥
कहता तो बहुत मिला, गहता मिला न कोय । सो कहता वह जान दे, जो नहिं गहता होय ॥ 100 ॥ 


       
                        


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125 साल बाद मिली न्यूजीलैंड की सिलिका की परतें

>> 15 जून, 2011



न्यूजीलैंड की एक शोध संस्था ने बताया है कि सवा सौ साल पहले ज्वालामुखी की राख में दफन हुई सिलिका की सिलसिलेवार सतहें फिर से मिल गई हैं.न्यूजीलैंड के उत्तरी द्वीप की एक झील में मिलीं इस सिलिका के बारे में अभी तक यह समझा जा रहा था कि ये खो गई हैं.  सन 1886  में न्यूजीलैंड में हुए अब तक के सबसे बड़े ज्वालामुखी विस्फोट में करीब 100  लोग मारे गए थे तथा वहां का बहुत बड़ा हिस्सा राख व लावे में दब गया था.

सफेद छत के नाम से मशहूर सिलिका की सिलसिलेवार परतें न्यूजीलैंड के उत्तरी द्वीप की रोतोमाहना झील के तल पर मिली हैं. जनवरी में यह व्हाइट टेरेसेस मिलीं. एक जमाने में न्यूजीलैंड में व्हाइट और पिंक टेरेस पर्यावरण का मुख्य आकर्षण होती थीं.  समझा जा रहा था कि जून 1886  में माउंट तारावेरा में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद यह नष्ट हो गईं.  लेकिन वैज्ञानिकों ने झील की सतह पर सोनार सर्वे के विश्लेषण के दौरान इन सिलिका की परतों के बारे में पता लगाया.

रोतोमाहना झील में सबसे गहरा हिस्सा 122 मीटर नीचे है. यह सिलिका की सतहें 60 मीटर नीचे हैं और एक दूसरे से 100 मीटर की दूरी पर हैं.

प्रोजेक्ट प्रमुख कोर्नेल डी रोंडे ने कहा कि झील की सतह नर्म तलछट और कीचड़ वाली है. जिस सोनर इमेज से व्हाइट टेरेसेस के बारे में पता चला वह प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद मिलीं.  यह 100 मीटर लंबे आड़े हिस्से में है. लेकिन हम नहीं जानते कि यह सतह का कौन सा भाग है.



साभार गूगल, डी.डब्लू .हिंदी , Volcano लाइव



इसके लिए वीडिओ   .......
  
                                

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तिलचट्टा हो सकता है अस्थमा की वजह

>> 14 जून, 2011

सावधान ! अगर आपको दमा परेशान कर रहा है तो उसकी वजह आपके घर में घूमने वाला तिलचट्टा भी हो सकता है.  न्यूयॉर्क के बच्चों में अलग अलग तरह के अस्थमा के लिए तिलचट्टे को जिम्मेदार पाया गया है.

न्यूयॉर्क के कुछ मोहल्लों में पांच में से एक बच्चे को अस्थमा है जबकि दूसरे इलाकों में यह दर तीन प्रतिशत तक है. अतीत में इसके लिए शहर के व्यस्त ट्रैफिक, उद्योगों से निकलने वाले धुंए और बाहरी हवाई प्रदूषण को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है.  लेकिन कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया है कि जिन इलाकों में अस्थमा की दर ज्यादा है उनमें बच्चों के खून में तिलचट्टे प्रोटीन के खिलाफ एंटीबॉडी पाए जाने की दोहरी संभावना है.

यह इस बात का सबूत है कि बच्चे इस कीड़े के संपर्क में रहे हैं और उन्हें उनसे एलर्जी है. इसके अलावा इन इलाकों के घरों की धूल में तिलचट्टों द्वारा उत्पादित एलर्जेन की मात्रा अधिक होती है.

एलर्जी पैदा करने वाला तिलचट्टा यानी काकरोज 
इस अध्ययन के लेखक मैथ्यू पर्जानोव्स्की कहते हैं कि यह अध्ययन इस बात का एक और सबूत है कि तिलचट्टे से संपर्क इस कहानी का एक हिस्सा है.  उनके अनुसार "तिलचट्टे के एलर्जेन सचमुच अस्थमा की उपस्थिति में अंतर में योगदान दे रहे हैं,  न्यूयॉर्क जैसे शहरों के शहरी माहौल में भी." जर्नल ऑफ एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के लिए पर्जानोव्स्की और उनकी टीम 7 और 8 साल से बच्चों वाले 239 घरों में गए.

इनमें से आधे अधिक अस्थमा दर वाले इलाकों में थे.  पुराने शोध में गरीबी को बचपन में अस्थमा की बढ़ी हुई दर की वजह बताया गया था.  लेकिन अध्ययन को आय के प्रभाव से मुक्त करने के लिए लेखकों ने नए शोध में मिड्ल इनकम हेल्थ पॉलिसी वाले परिवारों को शामिल किया.  सभी परिवार एक जैसी आय और एक जैसी चिकित्सा बीमा वाले थे.

अध्ययन में पता चला कि आधे से अधिक बच्चे अस्थमा का शिकार थे.

अपने दौरे के दौरान शोधकर्ताओं ने बच्चों के बिस्तर से धूल इकट्ठा की और बच्चों के खून का सैंपल लिया ताकि अस्थमा से जुड़े विभिन्न एलर्जेन के खिलाफ एंडीबॉडी की जांच की जा सके.

उच्च अस्थमा दर वाले इलाकों के 25 फीसदी बच्चों को तिलचट्टों से एलर्जी थी.  कम अस्थमा वाले इलाकों में रहने वाले सिर्फ 10 फीसदी बच्चों को तिलचट्टों की एलर्जी थी. पर्जानोव्स्की का कहना है कि तिलचट्टे अपने पीछे प्रोटीन छोड़ जाते जिसे लोग सूंघते हैं और उससे एलर्जी हो जाती है. यह अस्थमा का शिकार होने के अवसर बढ़ा देता है.  अधिक अस्थमा दर वाले इलाकों के घरों में कॉकरोच एलर्जेन के अलावा चूहे और बिल्ली से जुड़े एलर्जेन की सघनता अधिक थी.

पर्जानोव्स्की का कहना है कि घर में बिल्ली का होना स्वाभाविक रूप से एलर्जी की वजह नहीं होता. पिछले कुछ सर्वे में पाया गया था कि बिल्ली वाले घरों में रहने वाले बच्चों के एलर्जिक होने की संभावना अधिक होती है लेकिन नए अध्ययन में पाया गया है कि घर में बिल्ली का होने का मतलब बच्चे को अस्थमा होना नहीं होता. पर्जानोव्स्की कहते हैं, "यह जटिल है. बिल्ली से बचना अस्थमा के जोखिम को कम करता नहीं दिखता."

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25 साल की जलसमाधि से बाहर निकला एक शहर - 3

>> 12 जून, 2011

कल के अंक में हमने  आपको अर्जेंटीना के एपेकुएन शहर के बारे में बताया था कि कैसे समुद्र में डूबा हुआ  एक शहर  25  साल बाद जलसमाधि से बाहर आया .आज हम आपको उस शहर के कुछ वीडियो दिखा रहें है . इस वीडियो में आप देखेंगे कि 25 साल की जलसमाधि के बाद उस शहर की आज क्या हालत हो गई है ................
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25 साल की जलसमाधि से बाहर निकला एक शहर - 2

आजतक ब्‍यूरो


दुनिया में एक शहर ऐसा है,  जो पूरे 25  साल तक समुद्र के खारे पानी में सड़ता रहा.  अब वो शहर समुद्र की लहरों से उबरकर बाहर आया है तो उसका पूरा नक्शा बदल चुका है.  ये शहर है अर्जेंटीना में लेकिन 25 साल बाद ही इस शहर के मिल जाने से लोगों की दिलचस्पी इस बात में भी बढ़ रही है कि क्या हजारों साल पहले समुद्र में डूबी द्वारका नगरी भी किसी दिन मिल सकती है.


यह जलवायु परिवर्तन का ही प्रभाव है कि समुद्र का जल-स्तर तेजी से बढ़ रहा है ,  इसी का नतीजा है कि 25  साल पहले यानी सन  1985  में अर्जेंटीना का यह  शहर पूरी तरह पानी में डूब गया था लेकिन समुद्र की लहरों ने ऐसा गोता खाया कि यह शहर अब दृष्टिगोचर होने लगा है . आज तक ने बड़ी अच्छी खबर दी है .  खबर में यह भी बताया गया है कि लगातार 25 साल तक पानी में डूबे रहने के कारण सारे मकान ध्वस्त हो गए है तथा पेड़ पौधे भी मृतप्राय हो गए है . ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि कोई शहर समुद्र में समा गया हो बल्कि   ऐसी बहुत सारी घटनाएँ   हो चुकी है . यदि ग्लोबल वार्मिग का क्रम यूँ ही जारी रहा तो भविष्य में ऐसे बहुत से शहर है जिनका नोमों निशान तक मिट जायेगा .

*  *  *
 Man returns to desolate Argentine town after flood


AFP, VILLA EPECUEN, ARGENTINA


In a town all but destroyed when its salt lake overflowed over three decades ago, the desolation is surreal: from silvery-white empty houses and hotels to trees, stark and dead; and one lonely man who calls this home. 

Once a lake country spa town south of Buenos Aires, Epecuen is a lagoon with a salinity level only topped by the Dead Sea. For decades, tourists visited to take its waters believing they were good for one’s health.

Everything came crashing down in 1985 when a long period of heavy rains sent the lagoon bursting over its banks, and it swept over a busy small town.

“I had a bunch of cats and dogs, and they ran away a couple days before the flood and I never saw them again,” Norma Berg, 48, said, recalling her childhood spent here, until the flood.

“I think my pets could feel that the water was coming,” Berg said, as she glanced at the rubble of the childhood home she fled.

A town of about 40 square blocks, Epecuen was submerged beneath 10m of water.

Even when the waters eventually receded, the country town, 550km south of the capital, was never rebuilt. Its welcoming little hotels seem frozen in time, rot and rust, glistening with the salt in which they were steeped.

Berg recalls that fateful date — Nov. 10, 1985 — when the flood barely left her family and the town’s 1,500 other residents enough time to grab some belongings and run.

“A lot of the locals never, ever came back; other people just died of the shock and stress of losing everything,” Berg said sadly.

However, someone did come back. One man.

“Until about four or five years after the flood, when the waters were still high, nobody came around here at all,” said Pablo Novak, 81.

“I was totally alone. All day, every day,” said Novak, now the town’s only inhabitant.

Every day, he climbs on his bicycle and rides around surveying the eerie shells of 185 hotels, restaurants and other businesses that existed before 1985.

“I am OK here. I am just alone. I read the newspaper. And I always think of the town’s golden days,” of the 1960s and 1970s, Novak says.

Back then, as many as 20,000 people would visit every year to take the waters here.

Visitors pick up on Epecuen’s spooky vibe eying abandoned beds from a former old folks home, dozens of stranded, toppled night tables from local hotels, and upended materials visitors and businessmen tried to pry out of the rubble to reuse as construction materials.

The town’s surreal silvery cast has inspired filmmakers including Roland Joffe, who in 2009 filmed the Spanish civil war-drama There Be Dragons here; and Argentina’s Pino Solana, who filmed scenes of his El viaje (The Journey) locally.


However, someone did come back. One man.

“Until about four or five years after the flood, when the waters were still high, nobody came around here at all,” said Pablo Novak, 81.

“I was totally alone. All day, every day,” said Novak, now the town’s only inhabitant.

Every day, he climbs on his bicycle and rides around surveying the eerie shells of 185 hotels, restaurants and other businesses that existed before 1985.
“I am OK here. I am just alone. I read the newspaper. And I always think of the town’s golden days,” of the 1960s and 1970s, Novak says.

Back then, as many as 20,000 people would visit every year to take the waters here.

Visitors pick up on Epecuen’s spooky vibe eying abandoned beds from a former old folks home, dozens of stranded, toppled night tables from local hotels, and upended materials visitors and businessmen tried to pry out of the rubble to reuse as construction materials.

The town’s surreal silvery cast has inspired filmmakers including Roland Joffe, who in 2009 filmed the Spanish civil war-drama There Be Dragons here; and Argentina’s Pino Solana, who filmed scenes of his El viaje (The Journey) locally.

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25 साल की जलसमाधि से बाहर निकला एक शहर -1



 जी  हाँ  अर्जेंटीना का एक शहर एपेकुएन जो 1985 में समुद्र में डूब गया था वह अब बाहर आ गया है , जरा गौर से देखिये इस वीडियो को ............






 साभार यू ट्यूब  

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भारत उभरती हुई महाशक्ति है

>> 11 जून, 2011


अंतत:  अमेरिका ने मान ही लिया कि भारत आने वाले दिनों में दुनिया में लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अहम साबित होगा.  अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लेक का कहना है कि भारत और अमेरिका मिलकर नए अवसर पैदा करेंगे.  उन्होंने कहा कि "भारत उभरती हुई महाशक्ति है.  सिर्फ भारतीय महासागर में ही नहीं,बल्कि उसका प्रभाव अमेरिका, अफ्रीका, मध्य पूर्व और मध्य एशिया में महसूस किया जाता है. भारत के विकास के पीछे वहां की युवा शक्ति, आशावादिता , गतिशीलता और शिक्षित जनसंख्या है.  हमारे समय की महान कहानियों में से एक भारत की सफलता की कहानी होगी."

वाशिंगटन के थिंक टैंक सामरिक और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र में उन्होंने कहा कि "हमारे सामरिक संबंध दुनिया को और अधिक सुरक्षित तथा लोकतांत्रिक बना सकते हैं.  हमारी व्यावसायिक साझेदारी अनोखे उत्पाद पैदा कर सकते हैं. जो कि 21वीं सदी के उपभोक्ताओं की जरूरत को पूरा कर सकते हैं. जिससे दोनों देशों में रोजगार के नए अवसर होंगें ."

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बेचारी पुलिस

>> 09 जून, 2011

पुलिस को ‘‘बेचारी पुलिस’’कहने से उन लोगों को आपत्ति हो सकती है जो पुलिस की लाचारी को नही समझते। यह विडंबना ही है कि जिस व्यक्ति को कभी वे मार मार कर भुरता बनाने का काम करते है उसी व्यक्ति को समय आने पर सलाम ठोकना पड़ता है। दिल्ली पुलिस ने विगत दिनों बाबा रामदेव के अनशन स्थल रामलीला मैदान में जो कुछ किया वह दुनिया ने देख लिया । बिना वारंट ,बिना सूचना और बिना चेतावनी के आधी रात को रामलीला मैदान में हमला बोल दिया और देखते ही देखते बाबा रामदेव एवं समर्थकों की ऐसी हालत बना दी कि जिन्दगी भर वे नहीं भूलेंगें । जहाँ गीत और भजन हो रहे थे वहां चीख और चीत्कार होने लगा । पुलिस ने महिलाओं ,  बच्चों एवं बूढों को भी नहीं बख्शा । यहाँ तक कि बाबा रामदेव को वे पकड़ कर ले गए ,  जब पुलिस के चंगुल से छूटे तब वे औरत के लिबास में मिले ।

 1974 में भी ऐसा ही कुछ हुआ था , जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने समग्र क्रांति का नारा देकर देश की तरूणाई को आंदोलित कर दिया था। तब भी आंदोलन कारियों के साथ पुलिस ने ऐसा ही सलूक किया था।25  जून 1975 की आधीरात को देश भर के विपक्षी नेताओं को पकड़ पकड़ कर मीसा में बंद कर दिया था। 19 महीने बाद अधिकांश मीसाबंदी सत्ता के अंग बन गये।अब बेचारी पुलिस उन्हें सैलूट ना मारे तो क्या करे ? सैलूट मारना उनकी मजबूरी हो गई थी सो जिन लोगों पर वे पहले लाठियां बरसा रहे थे उन्ही लोगों को सैलूट मारने लगे। कोई कुरेद देता तो कहते थे क्या करें जनाब हमें तो नौकरी करनी है अतः बाँस का आर्डर बजाना पड़ता है ।

1977 के  लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत दिलाने वाले समग्र क्रांति के नायक बाबू जयप्रकाश नारायण ने अपने आपको कुर्सी से दूर रखा तथा किंग मेकर के रूप अपनी पहचान बनाई । मुझे याद है जनता शासन काल में जयप्रकाश बाबू जब-जब दिल्ली आते थे तब तब वहां की पुलिस पलक पावड़े बिछाए उनका घंटों इंतजार करती थी । बाबू जयप्रकाश पर कुछ महीनें पहले डंडा बरसाने  वाली पुलिस के हाथों में फूलों का गुलदस्ता देख कर उनकी दशा पर तरस आता था ।

ये भारत है , यहां की जनता का ट्रेंड पल पल बदलता है। दिल्ली की पुलिस जिसने बाबा रामदेव को आधी रात को दिल्ली से तड़ीपार किया तथा उन्हें 15 दिन तक दिल्ली आने से प्रतिबंधित किया,कहीं वही बाबा भविष्य में यदि " किंग मेकर " बन गए तो बेचारी दिल्ली की पुलिस की लाचारी आप समझ सकते है क्या होगी ?

इस लेख को यहाँ भी पढ़ें .... 

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कांग्रेस के सिर पर आलोचनाओं के डंडे

>> 05 जून, 2011

 

 

बाबा रामदेव के अनशन अभियान पर हुए लाठीचार्ज के बाद कांग्रेस के सिर मुसीबतों का पहाड़ टूटा. अब अन्ना हजारे ने फिर आठ जून को अनशन करने का एलान किया है. अन्ना ने कहा, इस बर्बरता के खिलाफ पूरे देश को आवाज उठानी चाहिए. आगे पढ़ें .......

 

नाटकीय ढ़ंग से रामदेव, समर्थकों को जबरन हटाया गया


दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे योग गुरु स्वामी रामदेव और उनके हज़ारों समर्थकों को पुलिस ने शनिवार देर रात अफ़रा-तफ़री और आंसू गैस के गोले चलाने के बीच नाटकीय ढंग से हटा दिया. आगे पढ़े ......


फिलहाल हरिद्वार में ही अनशन करेंगे बाबा रामदेव
 नई दिल्ली।। रामलीला ग्राउंड में करप्शन और ब्लैक मनी के मुद्दे पर अनशन पर बैठे बाबा रामदेव के आंदोलन को दिल्ली पुलिस ने शनिवार देर रात डंडे के जोर पर खत्म करवा दिया। करीब 2 घंटे तक पुलिस और रामदेव बाबा के समर्थकों में जबर्दस्त झड़प हुई। आखिर में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर समर्थकों को तितर-बितर किया और बाबा रामदेव को अपने साथ ले गई। करीब 10 बजे उन्हें चार्टर्ड प्लेन से देहरादून भेज गया और वहां से रोड के रास्ते वह हरिद्वार में अपने आश्रम पहुंचे। अब बाबा रामदेव हरिद्वार में ही अनशन पर बैठे गए हैं। पेश है दिन भर की पूरी रिपोर्ट :-


'रौंगटे खड़े करने वाली थी काली रात, कांप उठी मेरी आत्मा'

नई दिल्ली बाबा रामदेव ने हरिद्वार में आज यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी पर सीधा निशाना साधा और कहा कि पूरी कार्रवाई उन्हीं के निर्देश पर हुई है। उन्होंने कहा कि आज का दिन वे काला दिवस के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान पर शुरु हुआ, उनका अनशन जारी रहेगा।  उन्होंने कहा कि यह मेरे एनकाउंटर की साजिश थी। वे आज दिल्ली से विशेष विमान से देहरादून पहुंचे और वहां से वे हरिद्वार स्थित अपने पतंजलि आश्रम पहुंचे। वे पूरी तरह सफेद कपड़ों में हैं।  आगे और भी है .......

India cracks down on hunger strike led by yoga guru

 NEW DELHI — In a swift midnight action, Indian police cracked down with canes and tear-gas shells to drive away tens of thousands of people who were on a hunger strike against corruption in New Delhi and detained the yoga guru who led the massive nationwide protest.  Next....

 

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कांग्रेस और बाबा रामदेव में ठनी

>> 04 जून, 2011

 बी.बी.सी. हिंदी

 04.06.2011, रात 11.45 बजे




        कांग्रेस ने कहा है कि योगगुरु बाबा रामदेव कांग्रेस मंत्रिमंडल से किए गए अनशन
 वापस लेने के अपने वादे से मुकर गए हैं, वहीं बाबा रामदेव ने कहा है कि वो
अपना अनशन जारी रखेंगे.


कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि बाबा रामदेव और उनके सहयोगी बालकृष्ण सरकार की ओर से की गई पेशकश के जवाब में लिखित में सरकार से कह चुके हैं कि वो अपना अनशन वापस ले लेगें.

इधर बाबा रामदेव ने कहा है कि सरकार जब तक उनकी मांगों को नहीं मानती वो अपना अनशन जारी रखेंगे.

इससे पहले कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनुसिंघवी ने एक पत्रकार वार्ता बुलाकर रामदेव के अनशन में साध्वी ऋतम्बरा के पहुंचने और उनके साथ स्टेज पर बैठने को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के कई कार्यकर्ता रामलीला मैदान में मौजूद थे. साध्वी ऋतंभरा पर 1992  में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में केस चल रहा है.  मनुसिंघवी ने कहा, ''जो लोग काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की बात कर रहे हैं, वो बताएं कि यहां मौजूद सभी संस्थाएं क्या पारदर्शिता से काम करती हैं.'' साथ ही उन्होंने रामलीला मैदान में हुए इंतज़ाम को फाइवस्टार क़रार देते हुए उसके लिए आए खर्चे के स्त्रोत पर भी सवाल उठाए.

मांगो में ढिलाई

इसके जवाब में योग गुरु बाबा रामदेव ने तीखे तेवर अपनाए लेकिन साथ ही वो अपनी मांगो में ढिलाई देते भी नज़र आए. उन्होंने कहा,''हमारा कोई सांप्रदायिक एजेंडा नहीं है और कई मुसलमान भाई भी हमारे साथ हैं.''

काला धन छिपाने वालों के लिए मृत्युदंड को आजीवन कारावस में बदलते हुए उन्होंने कहा, "दुनिया में मृत्यु दंड को लेकर बहस है, तो क्या उन लोगों को आजीवन कारावास नहीं दिया जा सकता है जो काला धन ले जाकर विदेशों में छुपाते है."

उन्होंने कहा कि अगर विदेशों में जमा काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर दिया जाए तो वो अपना उपवास ख़त्म कर देंगे. कल तक वो मांग कर रहे थे कि जो लोग काला धन विदेशों में छुपाते हैं उन्हें देशद्रोही क़रार दिया जाना चाहिए. उन्होंने ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ मौत की सज़ा की मांग की थी.

रामदेव ने बड़े नोटों 500 और 1000 रूपये के नोटों को वापस लिए जाने की मांग भी 'स्थगित' करने की बात कही.

अपने समर्थकों के समक्ष बोलते हुए उन्होंने कहा कि वो इस मांग को कुछ दिनों के लिए स्थगित कर रहे हैं.

अत्याधुनिक इंतज़ाम

इस बीच रामदेव के अनशन के लिए शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान का नक्शा ही बदला हुआ था. वहां भीड़ होगी,  इसका अंदाज़ा तो हमें था लेकिन उसके स्वागत के लिए तैयारी इतनी सुव्यवस्थित होगी, ये नहीं सोचा था. विशाल तम्बू और उसमें हर राज्य के लोगों के लिए अलग जगह.
तेज़ गर्मी थी लेकिन पंखे भी थे,  वो भी तम्बू की छत पर लटके.आराम इतना था कि कई लोग सो रहे थे.
लोगों की सहूलियत के लिए मंच की गतिविधियों का सीधा प्रसारण करती दो विशाल स्क्रीन थी.इस स्क्रीन पर सभी दिशाओं से ताज़ा तस्वीरें दिखाई जा सकें उसके लिए क्रेन की सुविधा वाले 'जिब' कैमरे भी लगाए गए थे.

बाबा रामदेव के समर्थकों में भी जोशोखरोश की कमी नहीं थी.

भारी भीड़


अमरीका से आए सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रिंस रतन ने बीबीसी को बताया कि वो पांच साल से बाबा रामदेव की योग शिक्षा का लाभ उठा रहे हैं.  रतन ने कहा, “मैं यहां आया हूं क्योंकि देश से बाहर रहकर भी मैं भारत में फैले भ्रष्टाचार से प्रभावित हूं, मुझे यकीन है कि इससे बदलाव आएगा.”

बाबा रामदेव एक विशाल ऊंचे स्टेज पर बैठे थे. समर्थकों से एक सुरक्षित दूरी पर, रह-रहकर स्टेज से भारत माता की जय की ललकार आ रही थी जिसे लोग दोहराकर या तालियों से प्रोत्साहित कर रहे थे.

भगवा रंग रह-रहकर नज़र आ रहा था, हालांकि सुबह-सुबह साध्वी ऋतंबरा के भाषण के बाद वहां कोई और नेता नहीं पहुंचा.

रामदेव ने अपने समर्थकों को कई बार संबोधित किया और दोहराया कि उनकी मुहिम किसी एक व्यक्ति विशेष के ख़िलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था के विरुद्ध है.

बाबा रामदेव प्रमुख तौर पर सरकार से देश से बाहर मौजूद काले धन को वापस लाने और उसे देश की संपत्ति करार देने की मांग कर रहे हैं.

सरकार के प्रतिनिधि पिछले कई दिनों से रामदेव से उनकी मांगों पर बातचीत करते रहे हैं.







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