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रुद्रप्रयाग : अलकनंदा तथा मंदाकिनी नदियों का संगमस्थल

>> 29 नवंबर, 2011





रुद्रप्रयाग :  अलकनंदा तथा मंदाकिनी नदियों का संगमस्थल

 इन दिनों कुछ मित्रों के साथ उत्तराखंड की राजनैतिक यात्रा पर हूँ . यह भारत की देवभूमि है . कदम कदम पर यहाँ दर्शनीय स्थल है .गढ़वाल अंचल के रुद्रप्रयाग में हमारा केम्प है .यहाँ पर मन्दाकिनी नदी अलकनंदा नदी में मिलती है . दोनों नदियाँ पहाड़ को चीरती हुई यहाँ पर मिलती है . यह नदी  आगे भागीरथी नदी से मिलकर गंगा नदी कहलाती है .गंगा नदी पर आगे लिखने का अवसर ढूंढूंगा .आज तो रुद्रप्रयाग पर ध्यान आकर्षित कर कहा हूँ .रुद्रप्रयाग उत्तरांचल राज्य के रुद्रप्रयाग जिले का मुख्यालय है ,यह नगर पालिका है.रुद्रप्रयाग अलकनंदा तथा मंदाकिनी नदियों का संगमस्थल है . यहाँ से अलकनंदा देवप्रयाग में जाकर भागीरथी से मिलती है तथा गंगा नदी का रूप ले लेती है .प्रसिद्ध धर्मस्थल केदारनाथ धाम रुद्रप्रयाग से मात्र 86 की.मी. दूर है . भगवान शिव के नाम पर रूद्रप्रयाग का नामकरण हुआ है. रूद्रप्रयाग श्रीनगर (गढ़वाल) से 34 किलोमीटर ऊपर स्थित है .

मंदाकिनी और अलखनंदा नदियों के संगम का नजारा बहुत ही अदभूत है .यह बहुत ही रमणीय स्थल है . इसकी सुन्दरता का वर्णन शब्दों में कर पाना संभव भी नहीं है . दोनों नदियाँ बहुत उचाई से बहते हुए जब रुद्रप्रयाग में मिलती है तो दोनों के मिलने से मधुर ध्वनी का गुंजायमान होता है . ऐसा माना जाता है कि यहां नारद मुनि ने भगवान शिव की उपासना की थी तब नारद जी को आर्शीवाद देने के लिए ही भगवान शिव ने रौद्र रूप में अवतार लिया था . रौद्र शब्द कालांतर में रूद्र हो गया
इन दिनों यहाँ कड़ाके की ठण्ड  है ,दिन तो जैसे तैसे कट जाता है लेकिन रात का तापमान काफी गिर कर १२ से. हो जाता है. सुबह  की ठण्ड का सामना  छत्तीसगढ़ जैसे गर्म इलाके के लोग  कैसे कर पाते होंगे आप अनुमान लगा सकते है .  

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क्या बच पायेगा हिमालय का ग्लेशियर ?

>> 21 नवंबर, 2011

ग्लेशियर बचाने भारत ,भूटान, नेपाल और बांग्लादेश का संयुक्त मोर्चा 
 एवरेस्ट 
वैज्ञानिक रूप से यह बात अब प्रमाणित हो चुकी है कि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम चक्र में आश्चर्यजनक ढंग से आये परिवर्तन के कारण हिमालय का बर्फ तेजी से पिघल रहा है. इन क्षेत्रों में बरसात की प्रकृति बदल गई है और हिमालय के आस पास बढ़ता तापमान स्थानीय लोगों और वन्य जीवन पर असर डाल रहा है. हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले बुजुर्ग जलवायु परिवर्तन के साक्षात गवाह है . हिमालय के ग्लेशियर प्रकृति के धरोहर है ,यदि ये ग्लेशियर यूँ ही पिघलते रहे तो जन-जीवन पर व्यापक असर होगा .

भारत ,भूटान, नेपाल और बांग्लादेश ने संयुक्त रूप से इस गंभीर समस्या के निदान के लिए प्रयास शुरू किया है . चारों पड़ोसी देश ऊर्जा, पानी, खाद्य और जैव विविधता के मुद्दों पर सहयोग के लिए वचनबद्ध हो गए हैं. वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ.) के मुताबिक भूटान की राजधानी थिम्पू में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. समझौते के तहत ऐसी योजनाएं बनाने पर सहमति बनी है जो जलवायु परिवर्तन के अनुरूप हिमालय को बचाने में मददगार हों.  "क्लाइमेट सम्मिट फॉर लिविंग हिमालयाज" के नाम से दो दिन तक चले सम्मेलन के बाद भारत, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश के बीच  समझौता हुआ ;चारोँ देशों में हिमालयी क्षेत्र में वन्य जीव संरक्षण को बढ़ावा देने, वनों को बचाने , खाद्य और पानी की आपूर्ति को बचाए रखने पर सहमति बनी है.

इस समझौते के तहत कार्य योजना बनाने और उसके क्रियान्वयन  में यदि चारोँ देश गंभीरता से जुट गए तो हिमालय के ग्लेशियर को बचाने  कुछ हद तक कामयाबी मिल सकती है . यह प्रयास दुनिया के अन्य देशों के लिए भी मिशाल बनेगा .

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हिंद महासागर में मिला गोंडवाना-लैंड

>> 18 नवंबर, 2011

वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर में जलमग्न दो द्वीपों का पता लगाने का दावा किया है। बताया गया है कि ये किसी जमाने में भारत और ऑस्ट्रेलिया के भूखंडों का हिस्सा थे। ये डूबे द्वीप दुनिया के मौजूदा नक्शे का रहस्य खोल सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया से पश्चिम में करीब 1,600 किलोमीटर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा में दो द्वीपों का पता चला। पिछले महीने मिले इन द्वीपों की चट्टानों में उथले जल में पाए जाने वाले जीवों के जीवाश्म मिले हैं। सिडनी यूनिवर्सिटी की जो विटटेकर के मुताबिक इससे पता चलता है कि ये द्वीप समुद्र के भीतर की ज्वालामुखीय क्रियाओं ने नहीं बनाए बल्कि ये महाद्वीप का हिस्सा रहे होंगे।

महत्वपूर्ण खोज : 
विटटेकर इस खोज को उत्साहजनक बताती हैं क्योंकि इससे पता चल सकता है कि कैसे आठ से 13 करोड़ साल पहले गोंडवाना के टूटने से ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका और भारत का निर्माण हुआ। इस रिसर्च के मुख्य वैज्ञानिकों में शामिल विटटेकर बताती हैं कि उनकी दिलचस्पी खासतौर पर भारत के पहले उत्तर पश्चिम और फिर एकदम उत्तर की ओर खिसक जाने में है, जहां भारत का उत्तर पूर्वी तट कभी ऑस्ट्रेलिया से जुड़ा हुआ था। लेकिन बाद में भारत अलग हुआ और यूरेशिया से इतनी जोर से टकराया कि हिमालय का निर्माण हुआ।

विटटेकर कहती हैं, 'हमें इस का काफी सही अंदाजा है कि वे महाद्वीप कहां थे लेकिन हमें सटीक जानकारी नहीं है। टेक्टोनिक्स के मामले में पूर्वी हिंद महासागर सबसे कम खंगाले गए इलाकों में से है। नई रिसर्च से हमें प्लेटों की गतिशीलता का पता चलेगा जिसकी वजह से भारत ऑस्ट्रेलिया से दूर होता है और यूरेशिया में टकराने की ओर बढ़ता है।'

कैसे बने होंगे ये द्वीप :
ये द्वीप समुद्र तल से करीब दो हजार मीटर नीचे हैं। उनकी चोटी से रेतीले पत्थरों और ग्रेनाइट की चट्टानों के नमूने लिए गए हैं। उनकी उम्र का पता लगाया जाना अभी बाकी है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि उनकी उम्र एक अरब साल तक हो सकती है। इन चट्टानों की तुलना ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट से की जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि द्वीप कहां से टूटे। भारत के साथ इस तरह की तुलना संभव नहीं है क्योंकि जहां से टूट हुई होगी, वह तट अब कहीं हिमालय में खो चुका है। भारत का पूर्वी तट कभी वहां हुआ करता था जहां आज अंटार्कटिका है।

विटटेकर कहती हैं कि महाद्वीपों का अलग होना कुछ ऐसा रहा होगा जैसे किसी चिपचिपी चीज को खींचा जाए। ऐसे में कुछ टुकड़े बच गए। इन टुकड़ों की मोटाई सामान्य से काफी कम है। उन्होंने बताया, 'लगभग स्कॉटलैंड के आकार के ये टुकड़े शायद उतने मोटे नहीं रहे होंगे जितने महाद्वीप थे। इसलिए वे पानी में नीचे बैठ गए।'

विटटेकर उम्मीद कर रही हैं कि उन्हें कुछ बहुत अच्छे नमूने और स्पष्ट महाद्वीपीय चट्टानें मिल जाएंगी जिनसे पता चलेगा कि ये द्वीप असल में गोंडवाना के हिस्से हैं।

प्लेट टेक्टोनिक सिद्धांत ज्यादा पुराना नहीं है। यह 1950 में संपादित हुआ। विटटेकर बताती हैं कि अभी भी विशेषज्ञ यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि किस वजह से द्वीप एक दूसरे से अलग होकर अलग-अलग दिशाओं में बहने लगे। ऑस्ट्रेलिया लगभग सात सेंटीमीटर सालाना की रफ्तार से उत्तर की ओर बढ़ रहा था। दूसरी तरफ अंटार्कटिका स्थिर था और बिल्कुल नहीं हिल रहा था।


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तिहाड़ में खुली लाटरी

>> 16 नवंबर, 2011

तिहाड़ जेल से अगले छह माह के अन्दर रिहा होने वाले कैदियों की लाटरी खुल गई है . देश की कई नामी गिरामी कंपनियों ने शानदार पैकेज  के साथ 80 कैदियों को नौकरी का लेटर थमाया है जिनमे 10 महिला कैदी भी शामिल है .कंपनियों ने बेहतर कार्यक्षमता वाले कैदियों को  वेतन देने में काफी उदारता दिखाई है और तीन कैदियों को छह-छह लाख रुपए के वार्षिक पैकेज पर रखा है. तिहाड़ में प्लेसमेंट के लिए पहुंचे विभिन्न  कंपनियों के प्रतिनिधियों के समक्ष 90 कैदियों ने आवेदन किया  जिसमें से 80 को नौकरी दी गई.आवेदन करने वाली सभी 10 महिला कैदियों  को रोजगार दिया गया. महिला कैदियों का पैकेज भी दो लाख से पांच लाख रुपए सालाना का रखा गया है.

कैदियों को छह लाख रुपए तक का पैकेज देकर रिकॉर्ड बनाने वाली कंपनी का नाम मिलेनियम बिल्डर्स है .जिस कैदी को 6 लाख रुपये साल का पैकेज मिला है ,  उसे  अपहरण के एक मामले में सेशन कोर्ट से उम्र-कैद की सजा मिली हुई है अभी हाई कोर्ट में उसकी अपील विचाराधीन है. यूपी के उस युवक ने  कानपुर युनिवर्सिटी से बीए की थी . जेल में रहते हुए वह टूरिज़म मैनेजमेंट में मास्टर्स और सोशल वर्क में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा कोर्स कर रहा है. वह दोनों कोर्स जेल में ही बने इग्नू के सेंटर से कर रहा है.उसने कंप्यूटर में भी कई पीजी और डिप्लोमा कोर्स कर रखे हैं.

जेल में रहते हुए अच्छी नौकरी मिल जाने से निश्चित रूप से वह  प्रसन्न होगा .यदि वह जेल से छूट कर अच्छे काम में लग जाता है तो यह अच्छी बात है . अपने पूर्व के अपराधों के पश्चाताप स्वरूप उसे नई पीढ़ी को अपराध की दुनिया से दूर रहने के लिए प्रेरित करना चाहिए .
 
 
 


 

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सहकारिता यानी " सब के लिए एक और एक के लिए सब "

>> 13 नवंबर, 2011


सहकारिता का सप्तरंगी ध्वज
आज देश के प्रथम प्रधान मंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिन है .हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज के दिन को बाल दिवस के रूप में मनाया गया . सहकारी आन्दोलन के प्रति पं. नेहरू के योगदान के मद्देनजर प्रति वर्ष 14 नवंबर से 20 नवंबर तक सहकारी  सप्ताह मनाया जाता है . सहकारी संस्थाओं द्वारा गोष्ठी, प्रदर्शनी व सभा -सम्मलेन के माध्यम से सहकारी आन्दोलन का प्रचार प्रसार किया जाता है .

वास्तव में सहकारिता मनुष्य के सर्वांगीण विकास का सर्वोत्तम माध्यम है , यह आम आदमी को आर्थिक रूप से सक्षम बनाता है . जिस देश में सहकारी आन्दोलन मजबूत होगा उस देश की आर्थिक हालत भी मजबूत होगी . अतः देश के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए सहकारी आन्दोलन को सुदृढ़ बनाना अति आवश्यक है .  सहकारिता के प्रति जन विश्वास को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सहकारिता से जुड़ी संस्थाओं और इससे जुड़े लोगों कोकाफी मेहनत की जरुरत है .


सहकारिता की मूल भावना है " सब के लिए एक और एक के लिए सब " . इसी मूल भावना को जमीनी स्तर पर ले जाना होगा .सहकारिता हमें पारस्परिक सहयोग के आधार पर स्वावलंबन  एवं आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर प्रदान करता है .

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कार्तिक पूर्णिमा, प्रकाश उत्सव एवं 11/11/11 का महासंयोग

>> 10 नवंबर, 2011


   
11/11/11  का महासंयोग
                      
ज कार्तिक पूर्णिमा  एवं प्रकाश पर्व  है और कल  यानी 11 नवंबर 2011 को एक के अंक की छः  आवृत्तियां 11.11.11 एक साथ है . है ना यह  दुर्लभ संयोग ? ऐसा दुर्लभ संयोग सौ साल में एक बार आता है . इस वर्ष 2011 में यह दुर्लभ संयोग चौथी बार आया है . पहली बार  1 जनवरी 2011 को एक की चार आवृत्तियां 1.1.11 एक साथ थी . दूसरी बार 11 जनवरी को जब पांच आवृत्तियां 11.1.11 एक साथ थी .  तीसरी बार यह दुर्लभ संयोग आया 1.11.11  को और चौथी बार कल यानी  11.11.11 को अंकीय संयोग आया है . इस दिन  11.11.11 को घड़ी का कांटा 11 बज कर 11 मिनट और 11 सेकण्ड पर आएगा तब यह अंकीय महा संयोग होगा . अवश्य आप इस वक्त को अविस्मरनीय बनाने की जुगत में होंगें .

कार्तिक पूर्णिमा
भारतीय संस्कृति में कार्तिक मास की पूर्णिमा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक माहात्म्य है. दीपावली, यम द्वितीया और गोवर्धनपूजा के अलावा इस मास के सांस्कृतिक पर्वो में यह पर्व असीम आस्था का संचार करता है. वर्ष के बारह महीनों में पंद्रह पूर्णिमाएं होती हैं. जब अधिक मास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 16 हो जाती है परन्तु कार्तिक मास की पूर्णिमा का  धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व है. इसे त्रिपुरी पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है. 

इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे.ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है. इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान तथा दीपदान की प्राचीन परम्परा है. इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फल   मिलता है.

प्रकाश उत्सव 
कार्तिक पूर्णिमा के दिन  सिखों के प्रथम  गुरू गुरूनानक देवजी का  जन्मोत्सव  प्रकाश उत्सव के रूप में मनाया जाता है . गुरु नानक देवजी का प्रकाश (जन्म) 15 अप्रैल 1469 ई. (वैशाख सुदी 3, संवत्‌ 1526 विक्रमी) में तलवंडी रायभोय नामक स्थान पर हुआ था . सुविधा की दृष्टि से गुरु नानक का प्रकाश उत्सव कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है. तलवंडी अब ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है. तलवंडी पाकिस्तान के लाहौर से 30 मील दक्षिण-पश्चिम में स्थित है.
 

जीती नौखंड मेदनी सतिनाम दा चक्र चलाया
भया आनंद जगत बिच कल तारण गुरू नानक आया

कार्तिक पूर्णिमा एवं प्रकाश उत्सव  की आपको हार्दिक  बधाई एवं शुभकामनाएं !

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पारम्परिक दिवाली ग्रीटिंग कार्ड की भीड़ में नवाचार

>> 07 नवंबर, 2011


प्रयोगधर्मी शुभकामनाएं

स वर्ष की दिवाली ग्रीटिंग में हमने छत्तीसगढ़ में राम वन गमन मार्ग को प्रदर्शित नक़्शे को प्रकाशित किया था ; जिसे ईष्ट मित्रों से काफी प्रशंसा तो मिली ही पर हमारा मिशन तब और सार्थक हो गया जब छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय हिंदी दैनिक नवभारत ने 6 नवंबर 2011 के CG 04 में प्रकाशित करते हुए लिखा है कि ..........

" दीपावली में सुन्दर बधाई संदेशों की भरमार रहती है .इनमें ऐसे सन्देश लेकिन कम ही दिखाई पड़ते है जिनमें कोई नवाचार हो. छत्तीसगढ़ स्टेट हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष अशोक बजाज इस मोर्चे में कुछ आगे निकल गए है.  उनका कार्ड पारम्परिक कार्ड्स की भीड़ में अलग है. छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम कहाँ से कहाँ होते गुजरे इसे उन्होंने दिखाया है. शोध की दृष्टि से एवं सामान्य जिज्ञासा, दोनों के नजरिये से प्रभावकारी है. संग्रहण के नजरिये से भी इस कार्ड की अहमियत है . "


नवभारत रायपुर 6/11/2011
मूल दिवाली ग्रीटिंग कार्ड


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देवउठनी यानी छोटी दिवाली

>> 05 नवंबर, 2011

ज  कार्तिक शुक्ल एकादशी है यानी  देवउठनी एकादशी  है. ऎसी मान्यता है कि आषाढ शुक्ल एकादशी   से सोये हुये देवताओं के जागने का यह दिन है .  देवताओं के जागते ही  समस्त प्रकार के शुभ कार्य करने का सिलसिला शुरू हो जाता है .

इसी दिन तुलसी और शालिग्राम के विवाह की भी प्रथा है। यह दिन मुहूर्त में विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह पूरे वर्ष में प़डने वाले अबूझ मुहूर्तो में से एक है. किसी भी शुभ कार्य को आज के दिन आँख मुंद कर प्रारंभ किया जा सकता है . यानी  मुहूर्त देखने की जरुरत नहीं रहती .  भगवान विष्णु को चार मास की योग-निद्रा से जगाने के लिए घण्टा ,शंख,मृदंग आदि वाद्य यंत्रों  की मांगलिक ध्वनि के साथ इस  श्लोक का वाचन किया जाता है ---

     उत्तिष्ठोत्तिष्ठगोविन्द त्यजनिद्रांजगत्पते।       
त्वयिसुप्तेजगन्नाथ जगत् सुप्तमिदंभवेत्॥
    उत्तिष्ठोत्तिष्ठवाराह दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।
  हिरण्याक्षप्राणघातिन्त्रैलोक्येमङ्गलम्कुरु॥
 
 
 
किसानों की गन्ने की फसल भी तैयार है ,आज के दिन गन्ने की पूजा करके उसका उपभोग किया जाता है ; नए ज़माने के लोग इस परिपाटी को तोड़ चुकें है . देश में आज के दिन को छोटी दिवाली के रूप में भी मनातें है , कहने का तात्पर्य है कि आज भी पटाखों ,फुलझड़ियों एवं मिठाइयों का दौर चलेगा .

आप सबको देवउठनी के पावन पर्व पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !   

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एक और एक ग्यारह ; छत्तीसगढ़ इलेवन

>> 01 नवंबर, 2011

         आज 1 नवंबर 2011 है और आज एक के अंक की पांच आवृत्तियां एक साथ है . इस वर्ष 2011 में यह दुर्लभ संयोग तीसरी बार आया है . पहली बार  1 जनवरी 2011 को एक की चार आवृत्तियां 1.1.11 एक साथ थी . दूसरी बार 11 जनवरी को जब पांच आवृत्तियां 11.1.11 एक साथ थी . अब 1 नवंबर को तीसरी बार एक के अंक का यह दुर्लभ संयोग आया है . दस दिन बाद पुनः एक दुर्लभ संयोग आने वाला है . 11.11.11 को अंकीय संयोग इस साल चौंका और एक का अंक छक्का मारेगा . ऐसा दुर्लभ संयोग सौ साल में देखने को मिलता  है .

                छत्तीसगढ़ भी आज अपने निर्माण के 11 साल पूरे कर रहा है . तत्कालीन प्रधानमंत्री माननीय अटलबिहारी वाजपेयी ने पूरे मनोयोग से 1.11.2000 को छत्तीसगढ़ ,उत्तराखंड और झारखण्ड का निर्माण किया था . तीनों नवोदित राज्य आज विकास की दिशा में तेजी से दौड़ रहे है लेकिन छत्तीसगढ़ सबसे तेज है . मध्यप्रदेश का छत्तीसगढ़ अंचल अब छत्तीसगढ़ इलेवन हो गया है . एक और एक ग्यारह होते है इस कहावत को छत्तीसगढ़ सरकार  ने चरितार्थ करते हुए मिलजुल कर शांति और विकास की दिशा में जनता के साथ कदमताल मिलाया है .
आप सबको छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की  11 वीं वर्षगांठ की हार्दिक बधाई  .

जय जोहार  : जय छत्तीसगढ़   

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