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माँ की गोद

>> 29 मार्च, 2012



जो मस्ती आँखों में है, मदिरालय में नहीं ;

अमीरी दिल की कोई, महालय में नहीं ;

शीतलता पाने के लिए, कहाँ भटकता है मानव ;

जो माँ की गोद में है, वह हिमालय में नहीं.


4 टिप्पणियाँ:

ब्लॉ.ललित शर्मा 31 मार्च 2012 को 9:13 am  

माँ के चरणो में जन्नत है,इसकी सेवा में ही भाल उन्नत है।

Ramakant Singh 2 अप्रैल 2012 को 5:17 pm  

माँ को समर्पित बहुत सुन्दर पंक्तियाँ .बधाई

देहात की नारी 5 अप्रैल 2012 को 6:05 pm  

शुभकामनाएं……देहात की नारी का आगाज ब्लॉग जगत में। कभी यहां भी आइए।

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