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भूल हुई है अपार, फिर भी मिला है प्यार

>> 08 सितंबर, 2012

संचार के विभिन्न माध्यमों से जन्मदिन पर ढेर सारे बधाई सन्देश प्राप्त हुए है.विज्ञानं का युग है अतः संदेशों के आदान-प्रदान में ना असुविधा होती है और ना ही विलंब. संचार के अनेक माध्यम हो गए है .एक ज़माना था जब डाकिये का इंतजार करते करते आँखें थक जाती थी लेकिन अब तो पलक झपकते ही एस.एम.एस.मिल जाता है. मोबाईल की कनेक्टिविटी बढ़ जाने से एक दूसरे से बराबर संपर्क बना रहता है. जन्मदिन हो या कोई तीज-त्यौहार बधाई देने की परंपरा आम हो गई है. सामान्यतया अपने दिन को गुप्त रखता हूँ लेकिन पिछले दो वर्षों से इसकी जानकारी कई लोगों को हो जाने के कारण इस बार हजारों की तादाद में बधाई सन्देश प्राप्त हुए है. किसी ने एस.एम.एस.किया तो किसी ने मोबाईल से सन्देश से सीधे बात की. कुछ मित्रों ने रेडियो,अखबार और टेलीफोन का सहारा लिया. सोशल नेट्वर्किंग सिस्टम से हजारो बधाई सन्देश प्राप्त हुए है. फेसबुक में 3000 से अधिक मित्र है जिसमें अधिकांश सक्रीय है अतः सभी ने बधाइयाँ दी. कुछ ने अच्छे अच्छे चित्र भी बनाये.

जन्मदिन की व्यस्तताओं को भांप कर ही मैंने एक दिन पूर्व यानी 4 सितंबर को ही वृद्धाश्रम जाने का प्रोग्राम बना लिया था, सो अपनी माता जी और धर्मपत्नी के साथ माना कैम्प स्थित वृद्धाश्रम पहुंचे. वृद्धाश्रम के संचालक श्री राजेन्द्र निगम जी हमारे पूर्व परिचित है सो फोन करते ही वे भी आ गए. हम अपने साथ कुछ गरम कपड़े और खाद्य सामग्री भी ले गए थे . जैसे ही हम आश्रम पहुंचे तेज बारिस शुरू हो गई. अतः आश्रम में निवासरत सभी वृद्धों से सामूहिक मुलाकात नहीं हो सकी. सबसे अलग अलग शिविर में जाकर उनका कुशलक्षेम पूछा और कपड़े व्वा खाद्य सामग्री देकर हम वापस आ गए.
सुबह उठते ही बधाई देने वालों का ताँता लग गया. बधाई देने वालों में पार्टी के कार्यकर्ताओं के अलावा कुछ अधिकारी कर्मचारी भी थे परन्तु ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की संख्या ज्यादा थी. सबसे मिलने के पश्चात् अपने दफ्तर पहुंचा जहाँ के अधिकारी कर्मचारी पूरी तैयारी के साथ इंतजार कर रहे थे. यहं बाकायदा केक मंगाया गया था. मेरे कक्ष में गुब्बारे भी लटकाए गए थे जैसे किसी बच्चे का जन्मदिन हो. यह दृश्य देखकर मुझ पर बालपन सवार हो गया लेकिन कुछ ही देर में जब केक लाया गया तो उसमें 59 का लेबल देखकर बालपन का भूत उतर गया और चिंता की रेखाएं उभर आईं. आज हम 58 वर्ष के हो गए है यह अहसास केक काटते समय ही हो गया था.

बहरहाल आज अनेक कार्यक्रमों में शामिल हुआ . अभनपुर में भी केक काटकर वृक्षारोपण किया फिर अपने गृहग्राम खोला में शिक्षक दिवस समारोह में हिस्सा लिया जहाँ अनेक शिक्षकों के सम्मान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. तत्पश्चात फिंगेश्वर में आयोजित साध्वी प्रज्ञा भारती के प्रवचन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रवाना हुआ. रास्ते में नवापारा के भंडार गृह निगम के स्टाफ ने रोककर स्वागत किया तथा बधाइयाँ दी. थोड़ा आगे बढ़े तो भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने रोक लिया और खोलीपारा स्कुल में लेजाकर केक कटवाया तथा वृक्षारोपण कराया. यहाँ भी शिक्षकों का सम्मान करके फिंगेश्वर के लिए बढ़ा. फिंगेश्वर का कार्यक्रम समापन की ओर था, हमने तत्परता से मंच के सामने वाली सीट हासिल की . साध्वी प्रज्ञा भारती ने व्यासगादी से ना केवल हमारे आने की सूचना दी बल्कि उपस्थित जनसमुदाय से हाथ उठाकर जन्मदिन की बधाई देने का आग्रह किया. देखते ही देखते पंडाल में उपस्थित 10 हजार से भी अधिक लोगों ने हाथ उठाकर बधाई दी. मेरे लिए यह  भाव विभोर करने वाला क्षण था. प्रवचन के अंत में उन्होंने व्यासगादी में आमंत्रित किया तथा पुष्पाहार  पहनाकर आशीर्वाद प्रदान किया तथा एक राधाकृष्ण की तस्वीर भेंट की. कार्यक्रम के आयोजक श्री अशोक राजपूत ने बधाई देकर कार्यक्रम में आने के लिए आभार प्रकट किया. मंच के संचालक श्री अशोक गाँधी ने साध्वी को मेरे नशामुक्ति अभियान के बारे में जानकारी दी. फिंगेश्वर में एक-डेढ़ घंटा  बिताने तथा बधाइयाँ बटोरने के बाद मैं नवापारा राजिम के कार्यक्रम के लिए रवाना हुआ . रात हो चुकी थी फिर भी सैकड़ों लोग माँ कर्मा मंदिर में इंतजार कर रहे थे ,मंदिर में पूजा अर्चना के पश्चात्  मुझे चांवल से तौला गया. यहाँ बड़ा ही रोचक कार्यक्रम हुआ .मैं मन ही मन सोंच रहा था कि आज दिन भर इतने सरे प्रशंसक मिले सबने मुझे असीम स्नेह दिया. इस प्यार के बदले इन बेचारों को आखिर हम देतें भी क्या हैं ? कार्यक्रम के अंत में मुझे बोलने का आग्रह किया गया तो मुझसे रहा नहीं गया. मैंने कहा ----

गलतियाँ हुई है हजार,
भूल हुई है अपार,
फिर भी मिला है प्यार,
मै कैसे करूँ आभार !

कार्यक्रम से विदा लेकर रात लगभग 1030 बजे रायपुर पहुंचा , जहाँ रेडियो श्रोताओं के अलावा अन्य लोग काफी लंबे समय से इंतजार कर रहे थे . उन्होंने सामूहिक रूप से बधाई दी और विदा हो गए . इस प्रकार 58 वीं वर्ष गांठ यादगार लम्हों के साथ गुज़री. घर लौटकर जब फेसबुक खोला तो असंख्य बधाई सन्देश देखकर मन गदगद हो उठा. सरे सन्देश एक सिटिंग में देख माना संभव नहीं था ,दिन भर के दौरे की थकान भी थी अतः धन्यवाद और आभार लिखकर सो गया.               

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