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अमर हुए अमृत माटी के हिमायती

>> 16 सितंबर, 2012

मान.श्री मोहन भागवत जी के साथ चंपेश्वर महादेव 


की आराधना करते हुए माननीय सुदर्शन जी .
                   राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक श्रद्धेय के.सी..सुदर्शन का आज सुबह जागृति मंडल रायपुर में निधन हो गया. आज प्रातः जब यह दुखद समाचार मिला तो सहसा विश्वास नहीं हुआ। वे 81 वर्ष के थे . मृत्यु पूर्व उन्होंने प्रतिदिन की तरह आज भी मार्निंग वाक किया तथा वहां से लौटकर प्राणायाम कर रहे थे कि अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा .
                  यह विचित्र संयोग ही है कि उनका जन्म और अवसान रायपुर में ही हुआ है. उन्हें छत्तीसगढ़ से काफी लगाव रहा है, उन्होंने चंपारण के पिछले प्रवास में सरसंघचालक मान.मोहन भागवत जी एवं संघ की ओर से भाजपा के प्रभारी मान. सुरेश सोनी जी के साथ करीब 1 घंटे तक भगवान चंपेश्वर महादेव में पूजा अर्चना की तथा दुग्धाभिषेक किया.
            उनके इस प्रवास में उन्हें निकट से जानने का अवसर मिला . वे निहायत ही नेक और ज्ञानवान इन्सान थे . जैविक कृषि के वे परम हिमायती थे उन्होंने मुझे घंटों तक अमृत माटी के निर्माण और महत्व के बारे में समझाया था . जलवायु परिवर्तन से भी वे काफी चिंतित थे . उन्होंने जल संवर्धन के उपाय सुझाते हुए कम से कम पानी में अधिक से अधिक पैदावार लेने वाले मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ किसानों के नाम बताये तथा उनसे मिलाने का वादा किया था . उनकी व्यस्तता के चलते यह संभव नहीं हो पाया . मुझे अच्छी तरह याद है , जब वे दोपहर को चंपारण पहुंचें तब काफी थके हुए थे लेकिन आकर उन्होंने तुरंत आराम नहीं किया . उन्होंने आते ही अपने लिए आरक्षित कमरे का मुआयना किया . उनके बाथरूम की टोंटी ख़राब थी पानी रिस रहा था उन्होंने तुरंत प्लंबर बुलाने के लिए कहा . प्लंबर ने आकर जब तक टोंटी ठीक नहीं किया तब तक उन्होंने न कपड़े बदले और ना ही आराम किया . वे पानी के व्यर्थ बहाने से काफी चिंतित हो गए थे . ऐसे थे हमारे अपने सुदर्शन जी . निश्चित रूप से उनके निधन से देश को अपूरणीय क्षति हुई है . मैं ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति की अपील करता हूँ .  
सन 2010 में चंपारण में भगवान चंपेश्वर महादेव की आराधना करते हुए स्व. सुदर्शन जी . साथ में है मान.श्री मोहन भागवत जी, मान. श्री सुरेश सोनी जी,मान.श्री भैय्या जी आदि

2 टिप्पणियाँ:

Rahul Singh 16 सितंबर 2012 को 7:35 am  

सुदर्शन जी के अकलतरा प्रवास की लोग अक्‍सर याद करते हैं. विनम्र श्रद्धांजलि.

प्रवीण पाण्डेय 16 सितंबर 2012 को 8:31 am  

सुदर्शनजी को विनम्र श्रद्धांजलि..

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