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माँ की गोद

>> 29 मार्च, 2012



जो मस्ती आँखों में है, मदिरालय में नहीं ;

अमीरी दिल की कोई, महालय में नहीं ;

शीतलता पाने के लिए, कहाँ भटकता है मानव ;

जो माँ की गोद में है, वह हिमालय में नहीं.


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शहीद चौंक भी शहीद ना हो जाय

>> 25 मार्च, 2012



भारत माता के वीर सपूत भगत सिंह,राजगुरू और सुखदेव को 23 मार्च 1931 को लाहौर के  शादमान चौक पर फांसी दी गई थी. बटवारे के बाद लाहौर अब पाकिस्तान में है . शादमान चौक का नाम बदल कर अमर शहीद भगत सिंह के नाम पर रखे जाने की मांग वर्षों से उठ रही है . पाकिस्तान कई सामाजिक संगठन इस चौंक का नाम बदल कर वीर शहीद भगत सिंह के नाम करने हेतु  लगातार मांग कर रहें है . भगत सिंह फाउंडेशन ऑफ़ पाकिस्तान प्रतिवर्ष 23 मार्च को शादमान चौक पर शहीदी दिवस मनाता है और वह लंबे समय से इस चौक को भगत सिंह का नाम देने की मांग कर रहा है. वर्षों तक टालमटोल करने के बाद पाकिस्तानी संसद में इस आशय का विधेयक लाया गया है. भारतवासियों को भी पाकिस्तानी संसद के फैसले के प्रति उत्सुकता है और यह भी डर है कि कहीं भगत सिंह,राजगुरू और सुखदेव की तरह यह विधेयक भी शहीद न हो जाये .

 "शहीदों की चिताओं पर, लगेंगे हर बरस मेले,
 वतन पर मरने वालों का, यही नामों-निशां होगा"


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नव-वर्ष की हार्दिक बधाई

>> 23 मार्च, 2012


आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी नए साल का पहला दिन है. हिन्दू धर्म में आज के दिन का काफी महत्त्व है ,ब्रम्ह पुराण के अनुसार ब्रम्हा ने आज ही के दिन सृष्टि रचना का कार्य प्रारंभ किया था.यह भी माना जाता है की  इसी दिन सतयुग की शुरुआत हुई थी.भगवान विष्णु ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही मत्स्य अवतार लिया था. इसी दिन से बासंतिक नवरात्रि  की शुरुआत होती है. भगवान राम का राज्याभिषेक भी आज के ही दिन हुआ था. इसी दिन से रात्रि की अपेक्षा दिन बड़ा होने लगता है. महाराजा विक्रमादित्य ने विक्रम संवत की शुरुवात की थी .


आप सबको विक्रम संवत २०६९ प्रारंभ होने पर नव-वर्ष, बासंतिक नवरात्रि ,चेटीचंड, गुड़ी पड़वा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ! 


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छत्तीसगढ़ के राशन दूकानों में "अन्नपूर्णा ए.टी.एम."

>> 20 मार्च, 2012

सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और भी अधिक पारदर्शी तथा सुगम बनाने कोर पी.डी.एस.

 राशन दूकान संचालित करने वाली महिलाओं को मिला अन्नपूर्णा  ए.टी. एम.
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बेहतर से बेहतर बनाने की कोशिश राज्य शासन द्वारा की जा रही है। इस प्रणाली में सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से शत-प्रतिशत पारदर्शिता आयी है। मुख्यमंत्री ने आज शाम राजधानी रायपुर के राजातालाब में प्रायोगिक तौर पर पांच राशन दुकानों के लिए कोर पी.डी.एस. तथा केरोसीन कम्प्यूटरीकरण व्यवस्था का शुभारंभ करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। उन्होंने कोर पी.डी.एस. के अन्तर्गत हितग्राही परिवारों को स्मार्ट कार्ड प्रदान कर कोर पी.डी.एस. की शुरूआत की। मुख्यमंत्री ने इस अभिनव प्रणाली की प्रशंसा करते हुए स्मार्ट कार्ड को बैंकों के एटीएम कार्ड जैसा बताया। उन्होंने इसका नामकरण 'राशन का अन्नपूर्णा एटीएम कार्ड' करने का भी ऐलान किया। डॉ. सिंह ने एक हितग्राही को उसके कार्ड के आधार पर राशन भी वितरित किया।
   उल्लेखनीय है कि कोर पी.डी.एस. में परिवारों को राशनकार्ड के स्थान पर स्मार्ट कार्ड दिए जा रहे हैं। संबंधित राशन दुकान में जाकर हितग्राही अपने स्मार्ट कार्ड को मशीन में डालकर अपने कोटे के राशन में से जरूरत के हिसाब से राशन प्राप्त कर सकता है। अगले दो माह में राजधानी रायपुर की सभी 175 राशन दुकानों को इस नवीन प्रणाली से जोड़कर वहां के वर्तमान राशन कार्ड धारकों को स्मार्ट कार्ड जारी करने का लक्ष्य है। इस प्रणाली में ऐसी कम्प्यूटरीकृत तकनीकी व्यवस्था की है कि कोई भी स्मार्ट कार्ड धारक किसी भी राशन दुकान में जाकर अपने स्मार्ट कार्ड के आधार पर जरूरत का राशन प्राप्त कर सकता है।
    खाद्य मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल,  छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज,विधायक श्री कुलदीप जुनेजा , नगर निगम रायपुर की महापौर श्रीमती किरणमयी नायक, सभापति श्री संजय श्रीवास्तव, रायपुर संभाग के कमिश्नर श्री बी.एल. तिवारी और खाद्य सचिव श्री विकासशील विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे।
 "अन्नपूर्णा ए.टी.एम." का अवलोकन
    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली ने पूरे देश में लिए एक आदर्श व्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बनायी है। राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत प्रदेश के 34 लाख गरीब परिवारों को एक रूपए और दो रूपए किलो की दर से प्रति माह 35 किलो चावल उपलब्ध कराने के लिए लगभग एक हजार करोड़ रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। गरीबों के लिए दी जा रही यह सहायता अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इस प्रयास में हम काफी हद तक सफल भी रहे हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को इस तरह बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे अंतिम व्यक्ति संतुष्ट हो। उन्होंने कहा कि कोर पी.डी.एस. सिस्टम में हितग्राही अपनी पसंद की किसी भी राशन दुकान से अपने हिस्से का राशन ले सकेगा। उन्होंने कहा कि रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और भिलाई से प्रारंभ की जा रही इस व्यवस्था का विस्तार पूरे प्रदेश में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रायपुर शहर में पचास शासकीय उचित मूल्य की दुकानों सह गोदामों का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने राशन कार्ड धारक हितग्राहियों सर्वश्री गणेश, दिलावर खान, अमरिक सिंह, हैनुराव, भुवनेश्वर धीवर, महतरु, श्रीमती मिथला बंछोर और पनकनी बाई को स्मार्ट कार्ड तथा केरोसीन कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था के तहत विभिन्न केरोसीन ऐजेंसियों के प्रतिनिधियों को पाईंट ऑफ सेल डिवाइस मशीन वितरित की। इस मशीन के जरिए किस राशन दुकान में कितना केरोसिन है और कितना वितरित किया गया इसकी जानकारी इलेक्ट्रानिक रुप से एन.आई.सी. के सर्वर पर आनलाइन दर्ज हो जाएगी। उन्होंने राशन दुकान से एक हितग्राही श्री तुकेश्वर यादव को स्मार्ट कार्ड के जरिए राशन वितरित कर कोर पी.डी.एस. का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए खाद्य मंत्री श्री पुन्नू लाल मोहिले ने कहा कि अगले दो माह में रायपुर की सभी 175 दुकानों में इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा। राशन लेने वाले को रसीद भी मिलेगी अब उसे राशन के लिए दुकान के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कविताओं के माध्यम से योजना की जानकारी रोचक ढंग से आम जनता को दी।
    संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि पूरे देश में यदि कहीं सार्वजनिक वितरण प्रणाली की बेहतर व्यवस्था है तो वह छत्तीसगढ़ में है। खाद्य सचिव श्री विकासशील ने योजना के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि हितग्राही किसी भी दुकान से राशन ले सकते हैं, उन्हें लिए गये राशन की प्रिंटेड रसीद भी दी जाएगी। यदि हितग्राही किसी दुकान की सेवाओं से संतुष्ट नहीं है, तो वह अपनी पसंद की किसी भी दुकान से राशन ले सकेगा। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा चलित राशन दुकानें भी प्रारंभ की जाएंगी, जो निर्धारित दिनों में, तय स्थान पर नियत समय पर उपलब्ध होंगी, हितग्राही इन दुकानों से भी राशन ले सकेंगे। योजना के प्रथम चरण में रायपुर शहर की पांच उचित मूल्य दुकानों में कोर पी.डी.एस. व्यवस्था प्रारंभ की जा रही है। कोर पी.डी.एस. में मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के अतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को स्मार्ट कार्ड के माध्यम से तथा ए.पी.एल. कार्डधारियों को कम्प्यूटरीकृत राशनकार्ड के जरिए खाद्यान्न प्राप्त होगा। इससे चार हजार से अधिक उपभोक्ता लाभान्वित होंगे।
    कोर पी.डी.एस. व्यवस्था से उचित मूल्य दुकानदारों को मेनुअल प्रविष्टि से भी मुक्ति मिलेगी और उपभोक्ताओं को खाद्यान्न प्राप्त करने में  कम समय लगेगा। उपभोक्ताओं के द्वारा खाद्यान्न का उठाव करने पर इसकी जानकारी पाइंट ऑफ सेल उपकरण के माध्यम से एन.आई.सी. के सर्वर के जरिए आनलाइन हो जाएगी। इससे खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी। इंटरनेट में खाद्यान्न उठाव की जानकारी दर्ज होने के साथ ही शासकीय उचित मूल्य के दुकानों में आवश्यकतानुसार पुन: भंडारण किया जा सकेगा तथा उचित मूल्य दुकानों में शेष आबंटन की मात्रा भी देखी जा सकेगी जिससे आबंटन प्रदाय करने में सुविधा होगी।
    रायपुर शहर में जिन पांच उचित मूल्य दुकानों में कोर पी.डी.एस. व्यवस्था आज से लागू की जा रही है, उनमें रानी लक्ष्मीबाई वार्ड क्रमांक 23 फोकटपारा देवेन्द्र नगर में जयविजय प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भंडार, पंडित रविशंकर शुक्ल वार्ड क्रमांक 24 राजातालाब में प्रीणा सामुदायिक विकास समिति तथा चलो चलें सामुदायिक विकास समिति द्वारा संचालित दो उचित मूल्य दुकान एवं कालीमाता वार्ड क्रमांक 33 में पंडरी शिव मंदिर के पास स्थित कंचन सामुदायिक विकास समिति द्वारा संचालित उचित मूल्य दुकान शामिल हैं। कोर पी.डी.एस. के लिए चयनित दुकानों में पाइंट आफ सेल उपकरण तथा स्मार्टकार्ड दिया गया है। पाइंट आफ सेल मशीन से स्मार्ट कार्ड और कम्प्यूराईज्ड कोर्ड स्वेप करने पर उपभोक्ताओं को खाद्यान्न चावल, गेहूं, नमक, एवं केरोसीन की पात्रता मात्रा कीमत सहित प्रदर्शित होने के साथ ही बिल भी प्राप्त होगा।

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रायपुर से विविध भारती की तीसरी सभा का प्रसारण

 
आकाशवाणी रायपुर से विविध भारती की तीसरी सभा का प्रसारण आज 19 मार्च 2012 से प्रारंभ हो गया है . इसका रेंज भी बढ़ गया है.यह दस किलोवाट के नए ट्रांसमीटर के स्थापित होने से संभव हुआ है , इससे आप रायपुर से 100 की.मी. की दूरी तक एफ.एम. से इस प्रसारण सेवा का लाभ ले सकते है . अभी तक रायपुर के श्रोता विविध भारती के सुबह और दोपहर के कार्यक्रम का ही आनंद ले पाते थे लेकिन अब सायंकालीन सभा का भी लाभ ले सकेंगें . आज रात 11 बजे तक रेडियो श्रोताओं ने विविध भारती के कार्यक्रम का आनंद लिया , और एक दूसरे को बधाईयां दी .

       मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राजधानी रायपुर स्थित आकाशवाणी केन्द्र की एफ.एम. सेवा की प्रसारण क्षमता 20 किलोमीटर से बढ़कर एक सौ किलोमीटर होने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसके लिए केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्रीमती अम्बिका सोनी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रसारण क्षमता पांच गुना बढ़ने पर अब और भी ज्यादा संख्या में लोग आकाशवाणी के सूचना, शिक्षा और मनोरंजन आधारित कार्यक्रमों का लाभ ले सकेंगे। इससे राज्य में आकाशवाणी की लोकप्रियता और ज्यादा बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को श्री अशोक बजाज के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ ने कुछ माह पहले ज्ञापन सौंपकर आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र में दस किलोवाट का ट्रांसमीटर लगवाने के लिए केन्द्र के स्तर पर पहल करने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने उनकी इस मांग का समर्थन करते हुए उनके आग्रह पर केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण्ा मंत्री को पत्र लिखा था। डॉ. रमन सिंह के पत्र पर सकारात्मक निर्णय लेकर श्रीमती अम्बिका सोनी ने यहां दस किलोवाट के ट्रांसमीटर की स्थापना की मंजूरी तत्काल प्रदान कर दी। उनके निर्देश पर आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र में इस उच्च शक्ति के ट्रांसमीटर की स्थापना होने के बाद एफ.एम. सेवा का प्रसारण क्षेत्र बीस किलोमीटर से बड़कर एक सौ किलोमीटर तक पहुंच गया है। उच्च शक्ति के इस नये ट्रांसमीटर की स्थापना के बाद अब आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से विविध भारती के एफ.एम. कार्यक्रमाें का प्रसारण दो के स्थान पर तीन सभाओं में होने लगा है। विविध भारती की तीसरी सभा जो प्रतिदिन शाम छह बजे से रात्रि ग्यारह बजे तक प्रसारित होती है, अब आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से भी सुनी जा सकेगी। नये ट्रांसमीटर से रायपुर केन्द्र की एफ.एम. सेवा के प्रसारण अब राजनांदगांव, खैरागढ़, कवर्धा, राजिम, गरियाबंद तक भी सुने जा रहे हैं। इस सिलसिले में छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ की यहां आयोजित बैठक में इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्रीमती अम्बिका सोनी के प्रति आभार प्रकट किया गया। श्री अशोक बजाज की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सर्वश्री परसराम साहू, मोहन लाल देवांगन, सुरेश सरवैया, विनोद वंडलकर, रतन जैन, कांतिलाल बरलोटा, आशीष भट्टाचार्य, राजेन्द्र सुराना, बलराज बहल, रमेश यादव, नरोत्तम कश्यप और श्याम वर्मा सहित बड़ी संख्या में रेडियो श्रोता उपस्थित थे। DPR     


           

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मन की आँखों से रंगों का एहसास

>> 16 मार्च, 2012


रंग लगते ही  खिल उठे चहरे
होली उमंग और जोश का पर्व है . हम अपने उमंग और जोश का ईजहार रंग व गुलाल से करते है. यह जानते हुए भी कि  बाजार में मिलने वाले अधिकांश रंगों में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर के लिए नुकसानदेह है हम रंग खेलने से नहीं चूकते. डाक्टर या प्रबुद्ध-जन चाहे कितना भी मना करे रंग से एक दूसरे को सराबोर करने का सिलसिला बरसों से चला आ रहा है . होली खेलने के लिए धूल, कीचड़,वार्निस और आईल पेंट का भी इस्तेमाल किया जाता है. बहरहाल होली खेलने के सबके अपने अपने ढंग है लेकिन क्या किसी ने सोचा है कि हमारे समाज में ऐसे अनगिनत लोग भी है जिन्होंने कभी रंग को देखा भी नहीं क्योंकिं रंगों को देखने के लिए उनकी आँखें नहीं है . जब सब लोग होली खेलते है तो इनकी भी होली खेलने की इच्छा होती है . खेलना चाहते है पर खेल नहीं सकते , कोई इन्हें रंग से भरी पिचकारी थमा दे तो ये निशाना नहीं साध पाते . कोई इन्हें गुलाल थमा दे तो सामने वाले के शरीर तक पहुँच नहीं पाते .  दूसरों को होली खेलते ,हंसी ठिठोली करते सुनते होंगें तो इन्हें बड़ी ग्लानी होती होगी. सोचते होंगें काश हमारी भी ऑंखें होती तो हम भी देख पाते कि रंग कैसा होता है . लाल रंग कैसा होता है ,पीला रंग कितना प्यारा लगता है ,  हरे रंग में कितना तरंग होता है और केसरिया कितना सुहावना होता है आदि आदि . आँखें नहीं होने से मन मसोज कर अपने भाग्य को कोसते होंगें .
मन की आँखों से ढूंढ लिया ललाट


 इस बार की होली में ऐसे ही नेत्रहीन बच्चों से सामूहिक मुलाकात हो गई . रायपुर की " परिमल प्रयास " नामक संस्था ने इस वर्ष  नेत्रहीन बच्चों को इकठ्ठा कर होली मिलन का कार्यक्रम बनाया जिसमें लगभग 200 नेत्रहीन बच्चे शामिल हुए ,इसमे कुछ बड़े बुढ़ें भी थे . नेत्रहीनों ने मन की आँखों से रंगों को देखने का प्रयास किया और आपस में खूब होली खेली . सामूहिक रूप से होली के ना केवल गाने गए बल्कि गाकर खूब झूम भी. बड़ा भावविभोर करने वाला दृश्य था. नेत्रहीन बच्चे मन की आँखों से रंगों का एहसास कर रहे थे. मनुष्य का तीसरा नेत्र भी होता है यह सुना तो था लेकिन पहली बार तीसरे नेत्र का इस्तेमाल करते हुए देख रहा था . 

" परिमल प्रयास " ने होली के पावन पर्व पर प्रकृति की मार झेल रहे इन अभागों के दिल में  उमंग और जोश के भरने का सराहनीय कार्य किया है . इससे समाज के अन्य लोंगों का ऑंखें अवश्य खुलेगीं .परिमल संस्था के संयोजक सक्रीय सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रसिद्ध रेडियो एनाउंसर श्री संदीप अखिल, उदघोषिका श्रीमती शुभ्रा ठाकुर , मानवाधिकार कार्यकर्त्ता श्री सौरभ निर्वाणी एवं श्री अजनी आर. तिवारी की भूमिका सराहनीय रही.

 

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फल फूल एवं सब्जी के लिए बनेगा कोल्ड स्टोरेज

>> 12 मार्च, 2012




भण्डार गृह निगम को 21.90 करोड़ रूपए का मुनाफा


प्रदेश सरकार के सार्वजनिक उपक्रम छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम को चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 21 करोड़ 90 लाख रूपए का विशुध्द मुनाफा हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में तीन प्रतिशत ज्यादा है। निगम की भण्डारण क्षमता आज की स्थिति में बढ़कर करीब सात लाख मीटरिक टन हो गयी है, जबकि वर्ष 2002 में इसकी भण्डारण क्षमता केवल चार लाख 24 हजार मीटरिक टन थी। यह जानकारी आज यहां आयोजित निगम की 9वीं वार्षिक साधारण सभा में दी गयी। निगम मुख्यालय में आयोजित साधारण सभा की बैठक की अध्यक्षता निगम अध्यक्ष श्री अशोक बजाज ने की। श्री बजाज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की मंशा के अनुरूप निगम द्वारा राज्य में अनाज भण्डारण के अलावा फल-फूलों और सब्जियों के सुरक्षित भण्डारण के लिए कोल्ड स्टोरेज निर्माण की योजना भी तैयार की जा रही है। इस अवसर पर केन्द्रीय भण्डार गृह निगम के प्रतिनिधि श्री अविनाश गायमुखे, राज्य शासन के प्रतिनिधि, खाद्य विभाग के अवर सचिव श्री एम.के. गुप्ता और निगम महाप्रबंधक श्री जन्मेजय महोबे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। DPR

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होली व रंग पर्व की आप सब को हार्दिक बधाई

>> 08 मार्च, 2012



होली व रंग पर्व की आप सब को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ !

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तोर पैरी के झनर झनर....

>> 06 मार्च, 2012



सम्मान समारोह
त्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अंचल की दो महान हस्तियों के सम्मान का सुअवसर मिला. एक है प्रथम छत्तीसगढ़ी फिल्म के निर्माता/निर्देशक श्री मनु नायक तथा दूसरे है आज के छत्तीसगढ़ी फिल्म स्टार सही अनुज शर्मा . फ़िल्मी दुनिया से जुड़े इन महान हस्तियों का सम्मान समारोह आयोजित किया था मोहनलाल देवांगन ने जो रेडियो के नियमित श्रोता  है. सम्मान समारोह में ज्यादातर रेडियो श्रोता ही थे . ब्लॉगर ललित शर्मा भी आ गए थे . रेडियो श्रोताओं की जब भी जमघट होती है आकाशवाणी के वरिष्ठ एनाउंसर श्री श्याम वर्मा पहुँच ही जाते है .
 
श्री मनु नायक एक जाना पहचाना नाम है ,इन्होने दशकों पहले १९६५ में  छत्तीसगढ़ी फिल्म बनाने का साहस किया . फिल्म का नाम था- " कहि देबे सन्देश "  उस समय यह फिल्म खूब चर्चित हुई थी . श्री नायक ने इस फिल्म के कुछ गाने मोहम्मद रफ़ी साहब से गवाए थे . कुछ गाने आज भी जेहन पर है जैसे--" झमकत नदिया बहिनी लागे, पर्वत मोर मितान ..." 

                   

 

 

 इस फिल्म का एक और चर्चित गाना था --" तोर पैरी के झनर झनर ,तोर चुरी के खनर खनर ....  "

 

                   



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एक ब्लॉगर का यू टर्न

>> 01 मार्च, 2012



ब्लाग पंडित श्री ललित शर्मा ने फेसबुक से मोह त्याग कर पुनः ब्लागिंग का रास्ता पकड़ लिया है .कुछ माह पूर्व तक इस शख्स को अपने चर्चित ब्लाग ललित डाट काम में  नई पोस्ट लगाये बिना नींद नहीं आती थी. विषय कोई  ढंग का हो या ना हो लेकिन अपनी लेखनी से उसे रोचक बना देने की कला में माहिर इस शख्स ने  हाथी,घोडा,गधा,घड़ी,रेडियो,साइकल,खेत,खलिहान,नदी,पहाड़,बैल,भैस,कुत्ता,धर्म,संस्कृति,भाषा,बोली,रीति-रिवाज   और ना जाने कितने विषयों पर पोस्ट लिखा है.यहाँ तक कि झाड़ू जैसे निकृष्ट विषय पर भी इसने पोस्ट लिखी है .सर्च इंजिन  में कुछ भी सर्च करो ब्लाग पंडित सर्च हो जाते थे .कमेन्ट बटोरने में भी इसका कोई जवाब नहीं . एक-एक पोस्ट में सौ-सौ कमेन्ट कैसे प्राप्त करना है यह कला कोई इसी से सीखे . चिट्ठाजगत की सक्रियता क्रमांक में हमेशा टॉप टेन में रहने वाले इस शख्स को एक दिन फेसबुक का नशा चढ़ गया फिर क्या था वह फेसबुक का ही होकर रह गया . लेखनी बंद हो गई , कमेंट्स बंद हो गए और सर्च इंजिन भी फेल हो गया . बहुत सारे साथी भी छुट गए. फेसबुक तो आखिर फेसबुक है उसके कारण इतनी कुर्बानी तो देनी ही पड़ेगी .
ब्लाग पंडित श्री ललित शर्मा


     शायद भूलन कांदा के प्रभाव से अचानक आज उसने यूं टर्न  लिया और फेसबुक से नाता तोड़ कर पुनः ब्लोगिग की दुनिया में प्रवेश कर लिया . अभी भी ऐसे बहुत से ब्लागर है जो ब्लोगिंग से कट चुके है . एक समय मुझे भी लग रहा था कि ब्लोगिंग कहीं संग्रहालय की वस्तु तो नहीं बन जायेगी . वैसे मै भी अपनी सामाजिक ,राजनैतिक व्यस्तताओं के चलते पिछले तीन माह से ब्लोगिंग के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहा हूँ,सो फेसबुक से ही संतोष करना पड़ रहा है . लेकिन मैंने ब्लोगिंग के प्रति बेरुखी नहीं दिखाई . जब भी थोड़ा वक्त मिलता है लिख ही लेता हूँ . चुनाव प्रचार के लिए लंबे समय तक उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में रहना पड़ा . वहां सर्वर धीमी गति से चलता था ,ऊपर से कड़कड़ाती ठण्ड . वहां रजाई में दुबकने में ही भलाई थी .

बहरहाल आज जब ललित ने  फेसबुक से मुंह मोड़ा तो इस पोस्ट के लिए समय निकालना लाजिमी हो गया . आशा है कि अब नियमित रूप से ललित डाट काम में विभिन्न विषयों पर लेख पढ़ने को मिलेगा. 

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