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रेडियों के कार्यक्रमों में फूहड़ता और अश्लीलता नहीं होती

>> 24 अगस्त, 2013

रेडियो श्रोता दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी 

                             
                         त्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ रायपुर के तत्वाधान में 20 अगस्त 2013 को रेडियो श्रोता दिवस के अवसर पर "संचार क्रांति के युग में रेडियो की प्रासंगिकता में श्रोताओं की भूमिका" विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के वरिष्ठ रेडियो श्रोता एवं स्टेट वेयर हाऊसिंग के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज ने की. इस संगोष्ठी में वक्ता के रूप में देश के जाने माने पत्रकार व संचालक हिंदी ग्रन्थ एकादमी श्री रमेश नैयर, फिल्म निर्माता एवं निर्देशक श्री मनु नायक, उपसंचालक संस्कृति व पुरातत्व विभाग श्री राहुल सिंह तथा आकाशवाणी रायपुर के कार्यक्रम अधिशाषी श्री समीर शुक्ला ने उपस्थित श्रोताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित करते हुए रेडियो की महत्ता पर प्रकाश डाला. सभा स्थल पर श्री मनोहर डेंगवाणी द्वारा संग्रहित पुराने रेडियो की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी. 1947 के पूर्व के रेडियो सेटों को चालू हालत में देखकर सभी लोग हतप्रद हो गए.   
       
             
                          इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए श्री अशोक बजाज ने कहा कि संचार क्रांति के इस युग में रेडियो की महत्ता को बरकरार रखने में श्रोताओं की मुख्य भूमिका है. रेडियो श्रोताओं की सक्रियता की वजह से ही रेडियो के कार्यक्रमों की गुणवत्ता कायम है. उन्होंने आगे कहा कि अन्य संचार माध्यमों की तरह रेडियों के कार्यक्रमों में फूहड़ता और अश्लीलता नहीं होती.

                          कार्यक्रम में हज कमेटी के चेयरमैन डा. सलीम राज, आकाशवाणी के एनाउंसर श्री श्याम वर्मा, श्री दीपक हटवार, श्री सालोमन के अलावा श्री ललित शर्मा, सुरेन्द्र हंसपाल, श्री प्रकाश बजाज, श्री विनोद वंडलकर, श्री मोहन देवांगन, श्री रतन जैन, श्री सुरेश सरवैय्या एवं कमल लखानी के अलावा भारी संख्या में लोग उपस्थित थे.

                           स्मरण रहे कि प्रति वर्ष 20 अगस्त को रेडियो श्रोता दिवस के रूप में मनाने की परंपरा छत्तीसगढ़ के रेडियो श्रोताओं ने की है , अब भारत के अनेक हिस्से में रेडियो श्रोता दिवस मनाने का सिलसिला शुरू हो गया है.






by - ashok bajaj chhattisgarh radio listnenars sangh raipur

2 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय 25 अगस्त 2013 को 9:04 am  

रेडियो ने हमारे ज्ञान और मनोरंजन में बड़ी भूमिका निभाया है।

Rahul Singh 25 अगस्त 2013 को 10:01 am  

रोचक प्रस्‍तुति, आभार.

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