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"कश्मीर का सच" कितना सच और कितना झूठ

>> 28 जुलाई, 2013



                क राष्ट्रीय न्यूज चैनल द्वारा दिखाया जा रहा "कश्मीर का सच" पता नहीं यह कितना सच और कितना झूठ है ? उस पीढ़ी के लोग तो अब रहे नहीं जो इस तथाकथित "सच" की समीक्षा करते, पर इतिहास तो यही कहता है कि जम्मू-कश्मीर का भविष्य पंडित नेहरू, लार्ड माउंटबेटन और शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की दोस्ती की भेंट चढ़ गया. अगर सरदार पटेल को पूरी छूट मिली होती तो कश्मीर समस्या उसी समय समाप्त हो चुकी होती , लेकिन पंडित नेहरू का अब्दुल्ला प्रेम इसमें आड़े आ गया. इस न्यूज चैनल ने कश्मीर रियासत को भारत में विलय में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्री माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर जी की भूमिका का अपने रपट में कहीं उल्लेख ही नहीं किया जबकि उन्होंने ही कश्मीर के भारत में विलय में मुख्य भूमिका अदा की थी. उक्त रपट में केवल पंडित नेहरू को ही महिमा मंडित करने का प्रयास किया गया. रपट में यह जानकारी भी छुपाई गई कि जब भारतीय सेना ने कश्मीर के दो तिहाई हिस्से से पाकिस्तानी समर्थकों को खदेड़ दिया था तो पं. नेहरू ने सीज फायर की घोषणा कर भारतीय सेना को वापस लौटने का आदेश किसके इशारे पर दिया तथा  पं. नेहरू ने किसके इशारे पर कश्मीर में धारा 370 लगाई ? बहरहाल पूरे रपट में लार्ड माउंटबेटन को भारत का महान राष्ट्र भक्त घोषित करने के पीछे उनकी मंशा क्या है इसे गहराई से समझने की जरुरत है.
                               - ASHOK BAJAJ RAIPUR CHHATTISGARH

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इंदिरा बैंक के खातेदारों को कांग्रेस झांसा दे रही है- बजाज

>> 24 जुलाई, 2013

प्रेस विज्ञप्ति
रायगढ़ सहित कई मृतप्राय बैंकों को भाजपा सरकार ने पुनर्जीवित किया

    रायपुर/भारतीय जनता पार्टी सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष अशोक बजाज ने आज प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक के खातेदारों को बरगलाने वाले कांग्रेस के नेता उस वक्त कहां सोये थे जब जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक रायगढ़ के 87 हजार खातेदारों का 42 करोड़ रूपिया डूब रहा था,  जबकि उस समय प्रदेश में उनकी सत्ता थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने बैंक को बचाने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा दिये गए सुझावों की भी अनदेखी करते हुए गारण्टी देने से इंकार कर दिया था,  यदि सरकार गारण्टी दे देती तो बैंक का अस्तित्व समाप्त नहीं होता। उस समय कांग्रेस के नेताओं ने 87 हजार कृषक खातेदारों की कोई परवाह नहीं की। उन्होंने कहा कि बैंक के डूब जाने से बैंक में कार्यरत 300 अधिकारी/कर्मचारी भी बेरोजगार हो गये हैं।

    श्री बजाज ने कहा कि रायगढ़ सहकारी बैंक के डूबने के पहले रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के नेतृत्व में आयी टीम ने रायपुर को छोड़कर सभी जिला सहकारी बैंकांे की वित्तीय हालत पर चिंता प्रकट की थी। यदि सन् 2003 में प्रदेश में डॉ0 रमनसिंह की सरकार नहीं बनती तो रायगढ़ के साथ-साथ बिलासपुर, सरगुजा, दुर्ग, राजनांदगांव एवं बस्तर के जिला सहकारी बैंक भी डूब चुके होते। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने इस बैंकों की हालत सुधारने का काम किया है,  फलस्वरूप आज सभी जिला सहकारी बैंक फायदे में चल रहे हैं।
    श्री बजाज ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में केवल सहकारी बैंक ही नहीं, बल्कि प्राथमिक सहकारी समितियों, विपणन सहकारी समितियों एवं कृषि व ग्रामीण विकास बैंकों की माली हालत खराब हो चुकी थी, इसके अलावा अनेक नागरिक सहकारी बैंक भी डूबने के कगार पर थे। अधिकांश  सहकारी संस्थाओं एवं समितियों को आर्थिक पैकेज देकर भाजपा सरकार ने पटरी पर लाया है।
    श्री बजाज ने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद जिला सहकारी बैंक रायगढ़ को पुनर्स्थापित करने का लगातार प्रयास हो रहा है फलस्वरूप रिर्जव बैंक ने रायगढ़ के स्थान पर जशपुर में जिला सहकारी बैंक की स्थापना के लिए सहमति प्रदान कर दी है। शीघ्र ही पंजीयन के बाद यह बैंक अस्तित्व में आ जायेगा,  जिसमें जशपुर के अलावा रायगढ़ जिला भी शामिल होगा।
    श्री बजाज ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा सहकारी आंदोलन को कुचलने का तथा सहकारी संस्थाओं को डूबोने का ही काम किया है, जबकि भाजपा ने सत्ता में आते ही मृतप्राय सहकारी संस्थाओं को जीवनदान देकर सहकारी आंदोलन के प्रति प्रदेश की जनता का विश्वास बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकों की नैया डूबाने वाले वही नेता इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक के खातेदारों को झांसा दे रहे हैं कि यदि हमारी सरकार आयी तो हम आपका पैसा लौटा देंगे। श्री बजाज ने इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक के खातेदारों से अपील की है कि वे ऐसे नेताओं के झांसे में न आयें।

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खाद्यान्न सुरक्षा पहली प्राथमिकता

>> 19 जुलाई, 2013

    छत्तीसगढ़ स्टेट वेयरहाउसिंग कारर्पोशन की संभागीय बैठक सम्पन्न

                                                                         (समाचार)

अम्बिकापुर 18 जुलाई 2013

 छत्तीसगढ़ स्टेट वेयर हाउसिंग के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज ने आज जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित संभागीय बैठक में कहा कि राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता खाद्यान्न की सुरक्षा है। इस हेतु भण्डारण क्षमता बढ़ाने विशेष प्रयास किए जा रहे हैं और नए गोदामों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में लगभग 74 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदम बनाए गए हैं, वहीं लगभग 28 हजार 800 मीट्रिक टन क्षमता के नए गोदाम आमागी 6 माह में बनकर तैयार हो जाएगा। लगभग 28 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम तीन वर्ष पुराने हैं।

सरगुजा संभाग के सभी 20 शाखाओं के प्रबंधकों की समीक्षा बैठक में प्रत्येक केन्द्र की गतिविधियों की समीक्षा की गई। श्री बजाज ने सभी प्रबंधकों को चावल भण्डारण के निर्देश देते हुए बरसात में कीट मुक्त उपचार के पश्चात भण्डारण के निर्देश दिए हैं। श्री बजाज ने बताया कि चालू सत्र में धान खरीदी व कस्टम मिलिंग के बाद सभी जगहों पर चावल का भण्डारण हो रहा है। सरगुजा संभाग में वर्तमान में 73 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम है, जिसमें शत्-प्रतिशत भण्डारण कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर चावल के एक-एक दाने का भण्डारण वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है, जिसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से आम जनता को गुणवत्तापूर्ण चावल वितरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निगम का मुख्य उद्देश्य कृषकों, व्यापारियों, संस्थागत एवं अन्य जमाकर्ताओं के स्टॉक का वैज्ञानिक तरीके से भण्डारण करना है। निगम द्वारा सामान्य कृषकों को जमा किए गए स्कंध के भण्डारण शुल्क में 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को 30 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। साथ ही यदि कोई किसान अपना उत्पाद माल भण्डार गृहों में जमा कराने के लिए पहले से स्थान आरक्षित करना चाहते हैं, तो निगम द्वारा सुविधा प्रदान की जाएगी। 4 माह का अग्रिम भण्डारण शुल्क जमा करने पर 5 प्रतिशत की छूट दी जाती है। समीक्षा बैठक में सरगुजा, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर एवं बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के निगमों के शाखा प्रबंधक उपस्थित थे। DPR


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