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भारत में अंत्योदय सिद्धांत के चमत्कारी परिणाम

>> 24 सितंबर, 2017

25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर विशेष आलेख ------ - अशोक बजाज असाधारण प्रतिभा के धनी एवं महान आर्थिक चिंतक पं. दीनदयाल उपाध्याय ने पूंजीवाद, साम्यवाद और समाजवाद के मुकाबले एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से अंत्योदय के सिद्धांत को प्रतिपादित कर देश में समग्र विकास की दिशा तय की थी । उन्होने कहा कि यहां अमीरी व गरीबी के बीच की खाई दिनों दिन गहरी होती जा रही है । एक ओर जहां बहुसंख्यक लोग गरीबी, बेकारी और भुखमरी से जूझ रहे हैं तो दूसरी ओर समाज में ऐसे भी लोग हैं जिसके पास बेशुमार धन सम्पदा है। इस आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए ‘‘अंत्योदय’’ का रास्ता बताते हये पं. दीनदयाल जी ने कहा कि हमारे प्रयास और हमारी विकास की योजनाएं ऐसी हों कि समाज के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का विकास पहले हो । समाज के उपेक्षित व शोषित व्यक्ति को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर आर्थिक समानता स्थापित करने का काम अन्त्योदय के सिद्धांत से ही हो सकता है । व्यावहारिक जीवन में धनोपार्जन करना हर मनुष्य का कर्तव्य है क्योंकि उसे अपनी असीमित आवश्यकताओं को सीमित साधनों से पूरा करना है, लेकिन केवल धनोपार्जन करना मनुष्य का एक मात्र उद्देश्य नहीं है । इस परिप्रेक्ष्य में पं. दीनदयाल उपाध्याय ने कहा है ‘‘अर्थोपार्जन प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य होता है, परंतु अर्थ के प्रति आसक्ति दुर्गुण ही का जाना चाहिए, संपत्ति की लालसा लिए हृदय देश-धर्म-समाज और संस्कृति से उदासीन हो जाता है । इस दुर्गुण से ग्रस्त व्यक्ति विवेकहीन और असामाजिक होता है । इससे उस व्यक्ति को तो कष्ट उठाने ही पड़ते हैं, साथ ही साथ समाज भी प्रभावित होता है । ऐसा व्यक्ति अर्थ को साधन नहीं केवल साध्य समझने लगता है । चूंकि संपत्ति से प्राप्त विषय भोगों की कोई सीमा नहीं होती इसलिए ऐसे व्यक्ति के साथ साथ समाज के भी भ्रष्ट और अकर्मण्य होने की आशंका रहती है ।’’ देश में एक बड़ा तबका ऐसा भी है जिसकी कमाई सीमित है, अपनी दैनंदिनी की आवश्यकता की आपूर्ति उसके लिए कठिन और दुष्कर कार्य है । यह तबका आर्थिक रूप से काफी पिछड़ा हुआ है । इन्हें अपनी आजीविका के लिए दूसरों पर आश्रित रहना पड़ता है । इस तबके के लोग परस्पर सहयोग व समन्वय से अपनी आर्थिक गतिविधियों का संचालन करते हैं तथा अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं । अंगे्रजों के शासनकाल में इस वर्ग का काफी आर्थिक शोषण हुआ। इन्हें ना ही अपने श्रम का उचित मूल्य मिलता था और ना ही सम्मानजनक जीने का अवसर। अतः ये जमीदारों व साहूकारों के चंगुल में फंस कर गरीबी, बेकारी व भुखमरी के शिकार हो गये । उन्हें अपने जीवन यापन के लिए बंधुआ मजदूरी भी करनी पड़ी । अमीरी व गरीबी की खाई के साये में सन् 1947 में आजाद भारत का जन्म हुआ लेकिन दिशाहीनता के कारण यह समस्या नासूर बन गई। तब पं. दीनदयाल उपाध्याय ने असमानता की खाई को पाटने के लिए अंत्योदय के सिद्धांत का प्रतिपादन किया । उन्होने कहा कि ‘‘हमारी भावना और सिद्धांत है कि वह मैले कुचैले, अनपढ़ लोग हमारे नारायण हैं, हमें इनकी पूजा करनी है, यह हमारा सामाजिक व मानव धर्म है, जिस दिन हम इनको पक्के सुंदर, स्वच्छ घर बनाकर देंगें, जिस दिन इनके बच्चों और स्त्रियों को शिक्षा और जीवन दर्शन का ज्ञान देंगें, जिस दिन हम इनके हाथ और पांव की बिवाईयों को भरेंगें और जिस दिन इनको उद्योंगों और धर्मो की शिक्षा देकर इनकी आय को ऊंचा उठा देंगें, उस दिन हमारा मातृभाव व्यक्त होगा ।’’ पं. उपाध्याय ने अपने अंत्योदय सिद्धांत में कहा है कि आर्थिक असमानता की खाई को पाटने के लिए आवश्यक है कि हमें आर्थिक रूप से कमजोर लोंगों के उत्थान की चिन्ता करनी चाहिए क्योंकि अर्थ का अभाव और अर्थ का प्रभाव दोनों समाज के लिए घातक है । हमारी नीतियां, योजनाएं व आर्थिक कार्यक्रम कमजोर लोगों को उपर लाने की होनी चाहिए ताकि वे भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें और उन्हें भी समाज के अन्य वर्ग के साथ बराबरी में खड़े होने का अवसर मिल सके।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 3 वर्षीय कार्यकाल पर नजर डालें तो हमें ज्ञात होगा कि उन्होंने पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांत से प्रेरित होकर अनेक योजनाएं बनाई हैं । समाज के प्रत्येक व्यक्ति को लक्ष्य करके उन्होने ‘‘सबका साथ सबका विकास’’ को ध्येय वाक्य के रूप में स्वीकार किया तथा पं. दीनदयाल उपाध्याय की कल्पना को साकार करने तथा आम जनता की बेहतरी के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं बनाई हैं । सरकार की नीतियों एवं योजनाओं से देश में एक नया बदलाव आया है । केन्द्र सरकार अंत्योदय के सिद्धांत के चलते देश भर में आवासहीनों को आशियाना दिलाने के लिए ‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना’’ चला रही है । इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2018 तक हर व्यक्ति को आशियाना मुहैया कराना है । सरकार द्वारा ‘‘उज्जवला योजना’’ के माध्यम से हर गरीब परिवार को मुफ्त में रसोई गैस का सिलेन्डर प्रदान किया जा रहा है । कल तक रसोई गैस गरीब परिवारों के लिए केवल एक सपना था लेकिन वर्तमान सरकार ने इस सपने का साकार कर दिखाया है । इसी प्रकार ‘‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’’ ने ऐसा चमत्कारी परिणाम दिया कि देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के बैंकों में खाते खुल गये । इस योजना के पहले तक उनका बैंक की डयोढ़ी तक पहुंचना बड़ा दुष्कर कार्य था । प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना अति न्यून प्रीमियम वाली अनोखी योजना है, इस योजना में सरकार ने मात्र 12 रू. के वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रू. का बीमा करने का प्रावधान किया है । ये ही नहीं बल्कि सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना लागू कर न्यूनतम ब्याज दर पर बिना गारण्टी के ऋण प्रदान कर छोटे, लघु व कुटीर उद्योंगों के उन्नयन का काम किया है । इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना तथा स्किल इंडिया के अंतर्गत नवजवानों के कौशल विकास की योजना संचालित की जा रही है । स्टार्ट-अप एवं स्टैण्ड-अप योजना के अंतर्गत युवा बेरोजगारों को स्व-रोजगार स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है । इससे ना केवल स्वरोजगार स्थापित हो रहा है बल्कि नये रोजगार का भी सृजन हो रहा है । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विद्युत अधोसंरचना को मजबूत कर प्रत्येक आबादी क्षेत्र को रोशन करने के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना प्रारंभ की है । इसी प्रकार शिक्षा, स्वास्थ्य व आर्थिक विकास की असंख्य योजनाएं देश भर में चल रही है । इन योजनाओं के माध्यम से भारत के आम आदमी के जीवन-स्तर को सुधारने तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के तेजी से प्रयास हो रहे हैं । इन योजनाओं का निर्माण उन व्यक्तियों को लक्ष्य करके किया गया है जिन्हें पं. दीनदयाल उपाध्याय ने ‘‘समाज के अंतिम व्यक्ति’’ की संज्ञा देकर सबसे पहले उनके उदय (विकास) की बात रखते हुये अंत्योदय का सिद्धांत प्रतिपादित किया था । केन्द्र सरकार का लक्ष्य अन्त्योदय, प्रण अन्त्योदय व पथ अन्त्योदय का ध्येय लेकर आगे बढ़ रही है । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी वर्ष को गरीब कल्याण वर्ष के रूप में मनाने के निर्णय तथा इस संबंध में बनी कल्याणकारी योजनाओं से देश में बहुत बड़ा बदलाव दृष्टिगोचर हो रहा है । पं. दीनदयाल उपाध्याय ने दशकों पूर्व जब अन्त्योदय के सिद्धांत का प्रतिपादन किया था तब शायद अधिकांश लोंगों को यह समझ ना आया हो लेकिन सारा विश्व भारत में अन्त्योदय के सिद्धांत के चमत्कारी परिणाम को महसूस कर रहा है ।                                           - अशोक बजाज

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IND FACE TO FACE अशोक बजाज चेयरमैन, अपेक्स बैंक से खास बातचीत मोहित साह...

>> 16 सितंबर, 2017

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श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !

>> 25 अगस्त, 2017



आप सभी को श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !

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बेटियाँ तो घर घर की शान होती हैं

>> 07 अगस्त, 2017

रक्षाबंधन के साथ " बेटी बचाओं : बेटी पढ़ाओ " का सन्देश 

बेटियाँ तो घर घर की शान होती हैं, 
बेटियाँ हर ख़ुशी की खान होती हैं l
बेटियाँ 
नूर ए जहान 
होती हैं ll

जन्म से पहले इन्हें मत मारो,
ये बेटियाँ ईश्वर की वरदान होती हैं ll  


येन बद्धो बलिः राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।  तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चलः ॥ 


बधाई के साथ यह भी . . .


और भी ...................


लेकिन शर्त है कि इन्हें बचाएं .............





रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सभी बहनों एवं भाइयों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ !

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श्रम-दिवस

>> 30 अप्रैल, 2017

निरंतर सकारात्मक दिशा में शारीरिक एवं बौद्धिक श्रम करने वाले तथा अपने श्रम, तप व साधना से विश्व कल्याण करने वाले सभी श्रमवीरों को श्रम-दिवस की मेरी ओर से हार्दिक बधाई !



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आदि शंकराचार्य के अनमोल वचन

                                                                                                                                                     

अद्वैत वेदान्त के प्रणेता, संस्कृत के विद्वान, उपनिषद व्याख्याता और हिन्दू धर्म प्रचारक थे। हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार इनको भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। इन्होंने लगभग पूरे भारत की यात्रा की और इनके जीवन का अधिकांश भाग उत्तर भारत में बीता। चार पीठों (मठ) की स्थापना करना इनका मुख्य रूप से उल्लेखनीय कार्य रहा, जो आज भी मौजूद है। शंकराचार्य को भारत के ही नहीं अपितु सारे संसार के उच्चतम दार्शनिकों में महत्व का स्थान प्राप्त है। उन्होंने अनेक ग्रन्थ लिखे हैं, किन्तु उनका दर्शन विशेष रूप से उनके तीन भाष्यों में, जो उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और गीता पर हैं, मिलता है। गीता और ब्रह्मसूत्र पर अन्य आचार्यों के भी भाष्य हैं, परन्तु उपनिषदों पर समन्वयात्मक भाष्य जैसा शंकराचार्य का है, वैसा अन्य किसी का नहीं है।

आदि शंकराचार्य के अनमोल वचन

1. यह परम सत्य है की लोग आपको उसी समय तक याद करते है जब तक आपकी सांसें चलती हैं. इन सांसों के रुकते ही आपके क़रीबी रिश्तेदार, दोस्त और यहां तक की पत्नी भी दूर चली जाती है.

2.  जब मन में सत्य जानने की जिज्ञासा पैदा हो जाती है तब दुनिया की बाहरी चीज़े अर्थहीन लगती हैं.
सत्य की कोई भाषा नहीं है. भाषा तो सिर्फ मनुष्य द्वारा बनाई गई है लेकिन सत्य मनुष्य का निर्माण नहीं, आविष्कार है. सत्य को बनाना या प्रमाणित नहीं करना पड़ता.

3. तीर्थ करने के लिए किसी जगह जाने की जरूरत नहीं है. सबसे बड़ा और अच्छा तीर्थ आपका अपना मन है जिसे विशिष्ट रूप से शुद्ध किया गया हो.

4. हर व्यक्ति को यह ज्ञान होना चाहिए कि आत्मा एक राज़ा के समान होती है जो शरीर, इन्द्रियों, मन, बुद्धि से बिल्कुल अलग होती है. आत्मा इन सबका साक्षी स्वरुप है.

5. मोह से भरा हुआ इंसान एक सपने कि तरह हैं, यह तब तक ही सच लगता है जब तक वह अज्ञान की नींद में सो रहे होते है. जब उनकी नींद खुलती है तो इसकी कोई सत्ता नही रह जाती है.

           आदि शंकराचार्य की जयंती पर हार्दिक बधाई !
                                                                                                                                                           साभार गूगल 


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संविधान निर्माता, भारत रत्न डा. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उन्हें शत शत नमन . . .

>> 14 अप्रैल, 2017


संविधान निर्माता, भारत रत्न डा. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उन्हें शत शत नमन . . .



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बैसाखी पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ !

बैसाखी पर्व की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ !




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गणतंत्र दिवस 2017 के नज़ारे

>> 02 फ़रवरी, 2017

इस वर्ष गणतंत्र दिवस में सर्जिकल स्ट्राइक के कारण बड़ी रौनक थी, ध्वजारोहण के साथ साथ सलामी भी हुई. साईकल वितरण भी हुआ. स्कूल के बच्चों को डस्ट बीन बांटने का अवसर भी मिला और बड़ी उपलब्धि यह रही कि बजरंगदास स्कूल के नए भवन का शिलान्यास भी हुआ.  

गणतंत्र दिवस 2017 : चौपाल सिविल लाइंस रायपुर में ध्वजारोहण.


छग राज्य सहकारी बैंक मुख्यालय पंडरी रायपुर में ध्वजारोहण.  





 सरस्वती शिशु मंदिर अभनपुर में ध्वजारोहण













शासकीय कन्या उच्च. माध्यमिक शाला अभनपुर में ध्वजारोहण एवं गणतंत्र दिवस समारोह







शासकीय बजरंगदास उच्च. माध्यमिक शाला अभनपुर में ध्वजारोहण














अभनपुर के स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में ध्वजारोहण















 पू.मा.शा. गोतियारडीह में गणतंत्र दिवस समारोह.








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