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पंचायतों में महिला आरक्षण से ग्रामीण भारत में बदलाव का दौर

>> 25 अप्रैल, 2018

पंचायत राज दिवस (24 अप्रेल) पर विशेष लेख - 

स्थानीय इकाई के रूप में त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था प्रजातंत्र की सबसे लघु इकाई है । गांव स्तर पर ग्राम पंचायतें, ब्लाक स्तर पर जनपद पंचायतें तथा जिला स्तर पर जिला पंचायतंे कार्यरत है । प्राचीन काल से ही भारत के गांवों में पंचायतों का बहुत बड़ा महत्व रहा है, लोंगों का इस संस्था के प्रति पूर्ण विश्वास एवं समर्पण रहा है । गांव की कानून व्यवस्था एवं प्रबंधन पंचायतों के माध्यम से कुशलता पूर्वक संचालित होते आया हेै । लोग पंचायत से जुड़े लोगों को ‘‘पंच परमेश्वर’’ तथा उसके फैसले को ईश्वर की आज्ञा मान कर चलते आये हैं । वर्तमान में पंचायती-राज संस्थायें सरकार के नियमों के तहत गठित होती है । इसमें पात्रता, योग्यता या नेतृत्व क्षमता के बजाय सरकारी नियमों के तहत जन प्रतिनिधि चुने कर आते हैं । वर्ष 1993 से 73वें संविधान संशोधन के द्वारा इसके सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास शुरू हुआ, इसे त्रि-स्तरीय स्वरूप देकर अनेक विभागों को प्रत्यारोपित किया गया है । संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायती-राज संस्थाओं को 29 मामले सौंपें गये हैं । इसके पीछे शासन की मंशा चुने हुये प्रतिनिधियों के हाथ मे विभिन्न विभागों का काम सौंपकर सरकार के कार्यो का सही नियंत्रण करना है । सत्ता के विकेन्द्रीकरण की दिशा में वास्तव पर यह उल्लेखनीय कदम था । 

पंचायत राज व्यवस्था के संचालन व नियंत्रण का अधिकार चुने हुये जनप्रतिनिधियों के हाथ में होता है । 73वें संविधान संशोधन के पूर्व पंचायतों में पुरूषों की प्रधानता होती थी । महिलाओं को अपवाद स्वरूप ही जगह मिल पाती थी, लेकिन 73 वें संविधान संशोधन में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया । यह प्रावधान तीनों स्तरों के सभी पदों पर किया गया । छत्तीसगढ़ सरकार ने एक कदम आगे बढ़कर सन् 2008 में महिला आरक्षण 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया । इससे पंचायत-राज प्रणाली में महिलाओं की भागीदारी और अधिक बढ़ गई । पंचायत चुनाव के माध्यम से गांव-गांव में महिला नेतृत्व विकसीत होने लगा है, अगर हम यूं कहें कि पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं का पूरा दबदबा कायम हो गया है तो कोई अतिश्याक्ति नहीं होगी, क्योंकि कहने को तो आरक्षण मात्र 50 प्रतिशत है लेकिन निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों पर नजर डालें तो उनमें से निर्वाचित महिलाओं की संख्या 60 प्रतिशत से कम नहीं है, यानी अनारक्षित क्षेत्रों में भी महिलाएं पुरूषों को पीछे छोड़ रही है । छत्तीसगढ़ में कुल 10971 ग्राम पंचायतें, 146 जनपद पंचायतें तथा 27 जिला पंचायतें हैं । तीनों इकाईयों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 1 लाख 90 हजार है । इनमें आधे से अधिक पदों पर महिलाएं काबिज हैं ।
 
पंचायत-राज व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से पंचायतों के कामकाज में पारदर्शित आई है क्योंकि महिलाएं गृहलक्ष्मी होने के कारण अन्य सामाजिक दायित्व को भी परिवार की तरह ही निभाती है । यही कारण है कि महिला आरक्षण से गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के कार्यक्रमों को प्राथमिकता मिल रही है । महिलाएं बच्चों के शिक्षा व स्वास्थ्य के प्रति पुरूषों के मुकाबले ज्यादा गंभीर होती हैं । गांव में शुद्ध पेयजल व्यवस्था, कानून व्यवस्था एवं महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर महिला जनप्रतिनिधियों की जागरूकता काबिल-ए-तारीफ है। पंचायत राज व्यवस्था में महिलाओं की प्रधानता होने से गांव में शांति व सद्भाव का वातावरण निर्मित होने लगा है । प्रसन्नता की बात तो यह है कि महिलाएं बाल विवाह, दहेज प्रथा, छुआछूत एवं मृत्युभोज जैसी सामाजिक बुराईयों एवं कुरीतियों को समाप्त करने में काफी मददगार सिद्ध हो रही हैं । मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना एवं स्कूलों में मध्यान्ह भोजन का संचालन भी महिलाओं द्वारा बेहतर तरीके से किया जा रहा है । प्रदेश में नशाखोरी जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त करने का बीड़ा भी महिला जनप्रतिनिधियों एवं स्व सहायता समूह की बहनों ने उठाया है । महिलाओं का नशाखोरी के खिलाफ चलाया जा रहा आंदोलन किसी सामाजिक क्रांति से कम नहीं है। उनकी जागरूकता से नशामुक्त समाज की स्थापना में मदद मिलेगी । 

अतः यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पंचायत-राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत देने से गांव, समाज, रीति-रिवाज एवं रहन सहन में काफी बदलाव आया है । यह बदलाव ग्रामीण भारत को नया स्वरूप प्रदान करेगा ।  

(अशोक बजाज)

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भारत रत्न बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर जयंती

>> 14 अप्रैल, 2018

भारत रत्न बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर जी को उनकी जयंती पर शत शत नमन . . .

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नए मेहमान का शुभागमन

>> 10 अप्रैल, 2018

 विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार। 
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ।।
जय श्री राम !
आज महालक्ष्मी के रूप में समृद्धि और सौगात के संकेत के साथ मेरे घर में नए मेहमान का शुभागमन हुआ. घर में खुशियों की बौछार हुई. बछिया बहुत सुन्दर एवं  प्यारी है. 
जय गौ माता !




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21 वी सदी की सर्वाधिक सशक्त पार्टी है भाजपा

>> 06 अप्रैल, 2018

भाजपा के स्थापना दिवस (6 अप्रेल) पर विशेष आलेख 

6 अप्रेल 1980 को जब भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ तब शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी यह पार्टी विश्व की राजनीतिक धरा पर विशाल वट-वृक्ष की तरह स्थापित हो जायेगी. गैर-कांगेसी दलों के गठबंधन के रूप में 1977 में उपजी जनता पार्टी के बिखरने से देश में राजनैतिक संकट की स्थिति निर्मित हो गई थी. राजनीति से जनता का विश्वास भंग हो चुका था ऐसे समय में जनसंघ घटक ने जनता पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की. भाजपा के संस्थापक अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी जी ने मुबई में आयोजित पार्टी के प्रथम अधिवेशन में 1980 में कहा था “भारत के पश्चिमी घाट को महिमा मंडित करने वाले महानगर के किनारे खड़े होकर मैं यहां भविष्यवाणी करने का साहस करता हूॅ कि अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा." श्री वाजपेयी द्वारा साहस और दृढ़ निश्चय के साथ कहे गये इन शब्दो में पार्टी और देश को नये उजाले की ओर ले जाने का संकल्प प्रतिध्वनित हो रहा था. देश की वर्तमान राजनैतिक स्थिति को देखें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि श्री वाजपेयी की 38 वर्ष पूर्व की गई भविष्यवाणी पूरी तरह खरी उतरी है. 1980 से 2018 के सफ़र में 11 करोड़ से अधिक सदस्य बनाकर भारतीय जनता पार्टी आज विश्व की सर्वाधिक सदस्य वाली पार्टी बन चुकी है. केंद्र सहित भारत के अधिकांश प्रान्तों में भाजपा की सरकारें है. भाजपा की स्थापना के समय देश में कांग्रेस वर्सेस ऑल का दौर था जो अब पलट कर भाजपा वर्सेस ऑल हो चुका है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कुशल नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस का एक एक किला फतह कर समूचे भारत में विजय पताका फहराने की दिशा में अग्रसर है.
1980 से अब तक के सफर में भारतीय जनता पार्टी को अनेको बार धूप-छांव का सामना करना किया. इस अवधि में पार्टी ने अनेक झंझावातो का सामना किया तथा असंख्य समर्पित, निष्ठावान एवं जीवट कार्यकर्ताओ की बदौलत प्रतिकूलता को अनुकुलता में तब्दील किया. स्थापना के बाद हुए 1984 के आम चुनाव में भाजपा को मात्र 2 सीटे मिली थी. हालांकि यह तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानूभूति का नतीजा था. तब भाजपा के विरोधी भाजपा नेताओं पर फब्ती कसते हुए कहते थे “हम दो हमारे दो“ इन फब्तियो की परवाह न करते हुए भाजपा कार्यकर्ताओ ने अटल-अडवाणी के नेेतृत्व में अपनी संघर्ष यात्रा को अनवरत् जारी रखा. फलस्वरूप 1989 के आम चुनाव में लोकसभा में भाजपा सांसदों की संख्या दो से बढ़कर 85 हो गई. इसके बाद रामजन्म भूमि आंदोलन के चलते कांग्रेस सिमटती गई तथा भाजपा की ताकत में इजाफा होता गया. नतीजन 1991 में 120, 1996 में 161, 1998 में 182, 1999 में भी 182, 2004 में 138, तथा 2009 में भाजपा को लोकसभा में 116 सीटे हासिल हुई. परन्तु 2014 के आमचुनाव में भाजपा एक शक्तिशाली राजनैतिक पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई. इस चुनाव में पार्टी ने 275 सीटो का लक्ष्य रखा था, लेकिन परिणाम आया तो पता चला कि कांग्रेस एवं अनेक क्षेत्रीय पार्टियाॅं चारो खाने चित्त हो गई. भाजपा ने अकेले 31 प्रतिशत वोट पाकर 282 सीटो पर जीत हासिल की तथा सहयोगी दलो को मिलाकर राजग के सांसदो की संख्या 300 पार कर गई. अगर राज्यों की बात करें तो वर्तमान में 15 राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हिमांचल प्रदेश और त्रिपुरा में भाजपा के मुख्यमंत्री है जबकि जम्मू कश्मीर, नागालैंड, सिक्किम, बिहार एवं मेघालय में सहयोगी दलों के साथ सरकार में काबिज है. कांग्रेस तो केवल चार राज्यों मिजोरम, कर्नाटक, पंजाब एवं पांडिचेरी में ही सिमट कर रह गई है. कर्नाटक में अभी चुनाव चल रहें है जहां भाजपा ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है.
भारतीय जनता पार्टी ने यह मुकाम अपनी जन-कल्याणकारी नीतियों के बदौलत हासिल किया है. यह केवल एक राजनैतिक पार्टी नही बल्कि एक विचारधारा है जो भारतीय जनसंघ की नीतियों व सिद्धांतों पर बनी है तथा अंत्योदय के मार्ग पर चलकर देश की दशा व दिशा बदलने में लगी है. जिस पार्टी का ध्येय सबका साथ : सबका विकास हो उस पार्टी की विजय यात्रा को रोक पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकीन भी है. मोदी-शाह की जोड़ी ने जो राजनैतिक करतब दिखाया है उससे तो यही परिलक्षित होता है कि भारतीय जनता पार्टी 21 वी सदी की सर्वाधिक सशक्त पार्टी के रूप में उभरेगी तथा पूरे विश्व में भारत को सर्वोच्च स्थान पर स्थापित करेगी. 
लेखक - अशोक बजाज

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