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रिश्ते निभाना

>> 24 दिसंबर, 2018


कोई टूटे तो उसे सजाना सीखो; कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो; 
रिश्ते तो मिलते हैं मुक़द्दर से बस; उन्हें ख़ूबसूरती से निभाना सीखो।


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रिश्ते और रास्ते

>> 23 दिसंबर, 2018


रिश्ते और रास्ते के बीच,
एक अजीब रिश्ता होता है !
कभी रिश्तों से रास्ते मिल जाते है,
और कभी रास्तों में रिश्ते बन जाते हैं !
इसीलिए चलते रहिये और रिश्ते निभाते रहिये
खुशियाँ तो चन्दन की तरह होती हैं,
दूसरे के माथे पे लगाओ तो अपनी 
उंगलियाँ भी महक जाती हैं !


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खुद पर विश्वास

>> 08 दिसंबर, 2018

ख़ुशी एक एहसास है,
जिसकी हर किसी को तलाश है l
ग़म एक अनुभव है,
जो हर किसी के पास है l
जिंदगी जीता वही है ,
जिसे खुद पर विश्वास है |


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प्रेरक वाक्य

>> 03 दिसंबर, 2018


जीवन में दो ही व्यक्ति असफल होते हैं, एक वे जो सोचते हैं पर करते नहीं, दूसरे जो करते हैं पर सोचते नहीं.
- आचार्य श्रीराम शर्मा



दुनिया का सबसे बड़ा नुकसान वो है कि किसी की आँखों में आंसू हमारी वजह से है और दुनिया की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि किसी की आँखों में आंसू हमारे लिए है.



बहुत दूर तक जाना पड़ता है सिर्फ यह जानने के लिए कि नजदीक कौन है ?


एक साथ आना शुरुआत है; एक साथ रहना प्रगति है; एक साथ काम करना सफलता है. - हेनरी फोर्ड



फर्क होता है खुदा और फ़क़ीर में,
फर्क होता है किस्मत और लकीर में;
अगर कुछ चाहो और न मिले तो समझ लेना,
कि कुछ और अच्छा लिखा है तक़दीर में ।


सांप हो सपोला इन को कितना भी दूध पिलाओं ये "जहर" ही उगलते है जो इनके फितरत में है ! यह तो आप पर निर्भर करता है कि कब इसके दांत तोड़ने है और कब इसका फन कुचलना है !

जिन्दगी से आप जो भी बेहतर से बेहतर ले सको ले लो क्योंकि जिदगी जब लेना शुरू करती है तो सांसें भी नहीं छोड़ती .


तारों में अकेला चाँद जगमगाता है,
मुश्किलों में अकेला इंसान डगमगाता है.
काटों से घबराना मत मेरे दोस्त,
क्योंकि काटों में अकेला गुलाब मुस्कुराता है.   

(छत्तीसगढ़ी )
जुआ खेल के कोई धनवान नई बन सकय,
शराब पी के कोई बलवान नई बन सकय .
पढ़व लिखव अऊ सत्संग करव, काबर कि 
बिना पढ़े कोई विद्वान नई बन सकय.
"नशा हे ख़राब : झन पीहू शराब " 


चेहरे की हँसी से गम को भुला दो. कम बोलो पर सब कुछ बता दो.
..ख़ुद ना रूठो पर सबको हँसा दो यही राज है जिन्दगी का जियो और जीना सिखा दो.!!


मिलने पर मित्र का आदर करो, पीठ पीछे प्रशंसा करो और आवश्यकता के समय उसकी मदद करो।

जब तक तुममें दूसरों को व्यवस्था देने या दूसरों के अवगुण ढूंढने, दूसरों के दोष ही देखने की आदत मौजूद है, तब तक तुम्हारे लिए ईश्वर का साक्षात्कार करना कठिन है - स्वामी रामतीर्थ
                                                                                  
                                                                               

जब तुम्हें सब कुछ अपने विपरीत जाता हुआ लगे तो यह ध्यान कर लेना कि जहाज हवा के विरुद्ध ही आकाश में उड़ना शुरू करता है।

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